Tuesday, November 24, 2015

इस्लाम और आतंकवाद


मुसलमान यह मानते हैं की इस्लाम अल्लाह का दीन है और क़ुरान अल्लाह की किताब है और इसमें कुछ स्थानों पर यह लिखा है कि काफ़िरों से लड़ो कि पूरी ज़मीन पर अल्लाह का दीन हो जाए I  समय समय पर मुसलमानों में से कुछ लोग इस का अर्थ एक कट्टर इस्लाम - मर्दों के लिए दाढ़ी और औरतों के लिए पर्दा ले कर मुस्लिम देशों में खड़े होते रहे हैं -मर्द मस्जिद में पांच बार नमाज़ जमात से पढ़ें  आज की दुनिया में जो तफ़रीह की चीज़ें हैं जैसे फिल्म. टेलीविज़न वह सब हराम है औरतें बिना किसी महरम या शौहर के  साथ के बग़ैर घर से बाहर न निकलें I
 एक सही अक़ायद हैं - तौहीद , नबूवत, असहाब की फ़ज़ीलत , इसके इलावा जो सूफी , शिया , अहमदी मानते हैं वह कुफ्र और शिर्क है जिसे मानने वाला क़ाबिले क़त्ल है और इन सब बिद्दतों को जड़ से ख़त्म होना चाहिए I
यूरोप की नक़ल भी बिद्दत है I  कुत्ता नजिस है पाला नहीं जा सकता I
इसके साथ काफी मुसलमान मर्द और औरतें हैं जो खुली ज़िन्दगी पसंद करते हैं और जब कभी कट्टरपन हल्का पड़ता है तो वह सब चीज़ें अपनाते हैं जिन्हें कट्टरवादी हराम कहते हैं I  मुल्ला मौलवी कट्टर इस्लाम को लगातार फैलाते रहते हैं I जब कभी क़ुरान या पैग़म्बर को लेकर कोई अपमानजनक बात लिखी जाती है , कार्टून छपता है या टी वी सीरियल बनता है तो दुनिया भर के मुसलमान आहत महसूस करते हैं और कुछ लोग कुछ जगह हिंसक विरोध करते हैं I
इधर कुछ वर्षों से बिना कारण दुनिया भर में मुसलमानों द्वारा आतंकवादी हमले , फिदायी हमले जिनमें हमलावर भी हलाक हो जाते हैं किये गए हैं I
शायद कुछ आधुनिक शिक्षित और सम्भवता यूरोप अमेरिका में बसे मुसलमान यह समझते हैं कि जिहाद और आतंकवाद के ज़रिये पूरे विश्व को इस्लाम के अधीन किया जा सकता है और शायद अल्लाह इस नेक काम में उनकी मदद करेगा और उनकी कामयाबी 100 % यक़ीनी है I
 जब 1400 वर्ष पूर्व  अल्लाह ने यह नहीं किया, जब 10th सदी तक मुसलमान सब से एडवांस्ड थे तब नहीं हुआ तो अब दूसरों के बनाये secondhand हथियारों से दुनिया कैसे जीत लेंगे I  अभी तो रूस चीन और जापान का तो सामना हुआ ही नहीं I
ताज्जुब की बात है कि वह लोग जो खुली ज़िन्दगी की तलाश में कभी यूरोप और अमेरिका गए थे उनकी संताने कट्टरवाद और आतंकवाद को अपना रही हैं I
  क्यों मुसलमान पूरी दुनिया जीत कर आधुनिक सभ्यता ख़त्म कर के वह दुनिया वापस लाना चाहता है जो पहले ही हार चुकी है - उमय्या खिलाफत, अब्बासी खिलाफत और ओटोमन साम्राज्य ?
इसके दो मनोवैज्ञानिक कारण समझ में आते हैं - एक तो आज की औरत I मुसलमान शादियां कर के घर में बीवियां बंद रखना चाहता है और जिस पर शक आये उसे संगसार, गर्दन कटवा दे या सूली चढ़ा दे - यह सब मुस्लिम देशों में होता रहता है औरतों को एक तरफ़ा मृत्यु दंड I हॉलीवुड अभिनेत्रियों और मॉडलों की खुली ज़िन्दगी, नंगी तस्वीरें और वीडियो उसे लुभाती तो  पर उस पर हराम हैं तो यह सब दुनिया भर में किसी को भी मयस्सर न हों यह वह चाहता है  I
दूसरा कारण है ईवोलूशन , एस्ट्रोफिजिक्स, न्यूक्लिअर फिजिक्स , जेनेटिक्स, बायोटेक्नोलॉजी, और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस  तरह की रिसर्च और उपलब्धियां जो दीन की इमारत हिला देती हैं उन्हें दुनिया भर से हमेशा के लिए ख़त्म कर दे I
यह सारा कट्टरवाद और आतंकवाद अनपढ़ मुसलमान नहीं करते हैं - मौलवी कट्टर आस्था और व्यवहार का ब्लूप्रिंट रखते हैं और पढ़े लिखे मुसलमान आधुनिक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर के आधुनिक सभ्यता ख़त्म कर के उस ब्लूप्रिंट को यथार्थ रूप देना चाहते हैं I
अगर दुनिया में कोई भी ग्रुप खड़ा हो जो आतंकवाद और आकर्मण कर के अपना वर्जस्व चाहे तो यदि पूरी दुनिया उसके विरुद्ध एक जुट हो कर उसका समूल नाश कर दे तो ग़लत नहीं होगा या उस ग्रुप को दुनिया भर से निकाल कर एक सीमित क्षेत्र में कर के सभ्य समाज से स्क्रीन्ड ऑफ कर दे तो ग़लत नहीं होगा I इसलिए पढ़े लिखे मुस्लमान कट्टरवादियों को इस अंजाम को नज़र में रखना चाहिए I
मुसलामानों के आतंकवाद की प्रतिक्रिया में दुसरे लोग मुसलमानों के धर्म संस्थापक और धर्म ग्रन्थ को बुरा कह कर बस खुश हो लेते हैं जो कोई सकारात्मक हल नहीं है I
ऐतिहासिक और राजनैतिक सत्य क्या है ?
1400  वर्ष पूर्व अरब की परिस्थितियों में धर्म संस्थापक ने अपने लोगों को एक पहचान एक विधि विधान दिया और एक राष्ट्र बना दिया धर्म के केवल चार अंग थे नमाज़, रोज़ा, हज और ज़कात I बाद में खलीफा द्वितीय  ने जिहाद को जोड़ दिया I शियोँ के पहले इमाम और मुसलमानों के चौथे खलीफा ने क़ुरान के बहुत से निर्देशों के अनुपयुक्त हो जाने की बात कही ( नहजुल बलाग़ा ख़ुत्बा 1 ) और उन्होंने किसी देश पर कोई हमला  अगर यह आदेश लागू होता तो वह अवश्य इसका पालन करते I
मुस्लिम अरब ने ग्रीस और रोम के संकलित ज्ञान को आत्म सात कर के विश्व को मेडिसिन, अल्केमी, ऑप्टिक्स, एस्ट्रोनॉमी  और अलजेब्रा दिया एस्ट्रोनॉमी में आज भी 60 % तारों के नाम अरबी में हैं  भारत ने १  से ९  तक ली संख्या दी जिन्हें इंडिसेस  कहा जाता है अरब ने इसमें जीरो मिलाया आर्किटेक्चर और कैलीग्राफी में मुसलमानों का अद्भुत योग दान है I
उमय्या और अब्बासी खलीफाओं के दौर में कई लोग कट्टर इस्लाम को ले कर खड़े हुए लेकिन किसी खलीफा ने उसको नहीं माना I  अरब पिछड़ गया और सत्ता ओटोमन साम्राज्य के पास चली गयी जो टर्की में केंद्रित था I
 1745  में अब्दुल वहाब ने कट्टर इस्लाम का ब्लूप्रिंट अरब में प्रचारित किया  लोगों ने उसे स्वीकार नहीं किया वह अपने गाँव से निकल दिया गया फिर उसे अब्दुल वहाब को दिरिया  के  मुखिया इबने सऊद ने  शरण दी और फिर दोनों ने मिल कर आसपास के इलाक़ों को जीत लिया I उनका राज्य दो बार समाप्त किया गया  उस समय अरब पर मिश्र का शासन था और उसके ऊपर ओटोमन साम्राज्य था I इसी बीच द्वितीय विश्व युद्ध में ओटोमन साम्राज्य बिखर गया  अरब ब्रिटेन के अधीन हो गया  उस समय मक्का मदीना का इंतेज़ाम शरीफ हुसैन  बिन अली के हाथ था और नजद में सऊद  वंशज का क़ब्ज़ा था I   ब्रिटेन ने बल्फोर डिक्लेरेशन दिया जिस के अनुसार पलेस्तीन  में यहूदियों को बसा  कर उनका देश इस्राएल  बनाना था   इस कारण शरीफ ने ब्रिटेन से सन्धि  करने को मन कर दिया लेकिन सऊद  वंशज ने संधि कर ली और हिजाज़ ( मक्का मदीना ) पर क़ब्ज़ा कर लिया I ब्रिटेन ने 1927  में सऊद  को नजद  और हिजाज़  का बादशाह स्वीकार कर लिया I इस तरह सऊदी अरब की स्थापना हुयी और फिर मिडिल ईस्ट में आयल युग शुरू हुआ  तब से सऊदी हुकूमत अपने पुरखों के मित्र और गुरु अब्दुल वहाब के कट्टर इस्लाम  दुनिया भर में फैला रहा है I अफ़ग़ानिस्तान में रूस ने कम्युनिस्ट शासन स्थापित करा दिया था उसे अमेरिका ने ख़त्म करने के लिए पाकिस्तान की सहायता से तालिबान खड़े किये  जिनका उद्देश्य कट्टर इस्लाम लाना था I
  अमेरिका और यूरोप के सामने दो मोर्चे हैं 1  मिलिट्री और नुक्लिएर पावर के रूप में रूस, चीन और ईरान  और 2 ट्रेड  पॉवर  के  रूप  में चीन और जापान   इसके लिए अमेरिका और यूरोप  गठबंधन ग़लत से ग़लत फैसले  करता रहता है I
 सम्भवता ईरान से निबटने  के लिए इसने दाइश ( आई  एस  ) को खड़ा किया था और सपोर्ट  भी कर रहा है I
ग़ैर मुस्लिम को मुस्लिम आतंकवाद के लिए उनके  धर्म  संस्थापक  और धर्म ग्रन्थ को दोष  उपयुक्त नहीं है और न ही कार्टून  माध्यम से अपमानित करना चाहिए

मुसलमानलों को वर्तमान युग में  जी कर साइंस  आर्ट्स ,लिटरेचर  स्पोर्ट्स में आना चाहिए  औरतों को पूरी आज़ादी देनी चाहिए  'तुम्हारा दीन  तुम्हारे  लिए  मेरा दीन  मेरे  लिए ' पर  रहना चाहिए   आज की पॉलिटिक्स को समझना चाहिए I

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