(क) न इंडिया में
सत्य को पहचानें – सत्य यह
है कि हम सब इंसान हैं और इंडिया के वे सभी दबे कुचले लोग भी इंसान हैं और यह दबे
कुचले लोग जन संख्या में अधिक हैं और धीरे धीरे जाग रहे हैं, उठ खड़े हो रहे हैं और
यही सब सोच कर मनुवादी थर थर काँप रहे हैं रातों की नींद हराम है – नशा , सेक्स और
हिंसा उन्हें थोड़ा सुला पाती है I
लोगों को भ्रमित रखने के
लिए तरह तरह के नाटक करने पड़ते हैं ताकि दबे कुचलों का संघर्ष दिशा से विचलित किया
जा सके – गौ मांस , नोट बंदी सब ऐसे ही तमाशे थे जिन्हें सोशल मीडिया ने पूरा खोल
दिया कि कैसे गौ मांस का निर्यात करने वाले और जाली नोट और नए नोट रखने वाले भी
वही लोग थे जो इस को मुद्दा बनाए हुए थे I
अब एक नया ड्रामा हो रहा है
– दिल्ली का एक कॉलेज- रामजस कॉलेज , दो
मुस्लिम छात्र नेता- उमर खालिद और शहला – ABVP की गुंडागर्दी , फौजी की बेटी –
गुरमेहर कौर का गुंडों का विरोध, गुंडों द्वारा उसे बलात्कार की धमकी , केंद्र
सरकार और मशहूर भाजपा समर्थकों द्वारा फौजी की बेटी का विरोध I
क्या केंद्र सरकार को उस
लड़की को पहले सुरक्षा प्रदान नहीं करनी चाहिए और गुंडों को गिरफ्तार नहीं करना
चाहिए ? क्या न्याय पालिका , मानव अधिकार आयोग , महिला आयोग को हस्तक्षेप नहीं
करना चाहिए ? क्या राष्ट्रपति को केंद्र सरकार बर्खास्त नहीं करनी चाहिए ?
लेकिन सिर्फ शोर गुल है और
बेशर्मी और ढीठपन !
असली मुद्दा क्या है ? जो सब
से गरीब हैं जो अनपढ़ है जो गंदे दीखते हैं क्या उन्हें क्या आदिवासियों , दलितों
और महा दलितों को हम अपना भाई समझने को तैयार हैं ? क्या उन्हें उनका अधिकार देने
को तैयार हैं ?
यह है असली संघर्ष यह है
evolution की चुनौती I यह युद्ध हमें पहले अपने मन में जीतना है I
क्या उमर खालिद , शहला ,
कन्हैया , तीस्ता सीतलवाड़ , बरखा दत्त , रविश कुमार , मायावती , मुलायम सिंह ,
अखिलेश , डिंपल , लालू यादव , नीतेश अपने मन में इस युद्ध को जीत चुके हैं ? या बस
मनुवादियों और फस्सिस्तों के हाथ का खिलौना हैं और खुद मनुवादी और फ़ासिस्ट हैं ?
(ख) इंडिया के बाहर
और यही संघर्ष अमेरिका में
और दुनिया भर में चल रहा है
क्या Native Americans , Blacks , Mixed और
मुस्लिम देशों में नारी को उसकी स्वतंत्रता और उनके अधिकार देने को हम तैयार हैं ?
यह है असली संघर्ष यह है evolution की चुनौती I यह युद्ध हमें पहले अपने मन में
जीतना है I
जब हम अपने मन में इंसान
बन सकेंगे तो दुनिया भी – इंडिया और इंडिया के बाहर इंसानियत विजयी होगी और अगर हम
दोगलापन करते हैं तो इंसानियत शर्मसार रहेगी I