इंडिया में विपक्ष का
नैतिक क्षय
प्रजातंत्र कहने को तो आम
लोगों के लिए आम लोगों द्वारा चुनी गयी आम लोगों की सरकार होती है पर वास्तव में
पूंजीपती उद्योगपति परिवार उन लोगों को जो चुन कर आते हैं अपने वश में कर लेती है
और सरकार पूंजीपतियों उद्योगपतियों के हितों की पूर्ति में लग जाती है I
आज की बात नहीं है पहले
से ही किसानों और आदिवासियों की ज़मीन उद्योगपतियों और MNCs को दी जाती रही हैं I
आज ही नहीं पहले भी
सरकार की आय का बड़ा हिस्सा पूंजीपतियों को ऋण और सहायता के रूप में दिया जाता रहा
है I
आज ही नहीं पहले भी
जनता का पैसा जो बैंकों में , इन्शुरन्स में और प्रोविडेंट फण्ड में जमा होता है
वह पूंजीपतियों उद्योगपतियों को दिया जाता रहा है I
पर आज यह सब बहुत तेज़ी
और बहुत बेशर्मी से किया जा रहा है – नोटबंदी कर के जनता का पैसा बैंकों में जमा
करा लिया गया जी एस टी द्वारा अधिक पैसा वसूला जा रहा है I जनता को साम्प्रदायिकता
की आग में झोंक दिया गया है और सरकार हिन्दुओं की रक्षक का ढोंग रचने में सफल है
मुसलमानों को असुरक्षा की भावना में डाल दिया गया है I
और विपक्ष क्या कर रहा
है ? राहुल सोनिया मुलायम लालू मायावती सब पहले ही सत्ता का उपभोग कर के अपना और
अपने परिवार को करोड़ों अरबों का लाभ पहुंचा चुके हैं पुख्ता सबूत मौजूद हैं अगर बोलेंगे
तो जेल जाना पड़ेगा और संपत्ति भी ज़ब्त हो जायेगी I
नए लोगों को आने की ज़रूरत
है जो क़सम खाएं न हराम का खायेंगे और न ब्लैकमेल होंगे और इन पुराने बेईमानों को
हट जाना चाहिए और पार्टी की बागडोर अपने परिवार से अलग किसी ईमानदार व्यक्ति को
सौंप देनी चाहिए – इसी में देश का भला है ! कम से कम इतनी दश भक्ति तो दिखायं कि
अपनी पार्टी की बागडोर अपने परिवार से अलग किसी ईमानदार व्यक्ति को सौंप दें !