Friday, April 28, 2017

Shia Sunni unity against Munafiqs is need of hour

Shia Sunni unity against Munafiqs is need of hour
The enemy of Muslims and Islam are not Jews and Christians. Quran commands to fight against Munafiqs.
Who are these Munafiqs ? Nobody gets born from nowhere and these Munafiqs are progeny of enemies of Rasool- Abu Jahal and Abu Lahab and other uncles of Rasool. They had to embrace Islam but they continued enmity. In 18th century Mohammad bin Abdul Wahab and Ibne Saud two from them joined hands made pacts and fought to win rural Arab. They preached false Tauheed.and people got attracted to it. In 1925 British made them King of Arabia.
Since then they have turned graves of Prophet and first two Caliphs into cages, have erased graves of third Caliph, and of daughter and elder grandson of Prophet and of graves of Ummul Momineens and three other Imams. They have cut signs of Allah Safa and Marwa.

The affairs of Mecca and Medina must be managed by some  World Muslims body and the honour of Prophet, Sahabas, Ummul Momineen and Ahlebait and Imams must be restored. Mjunafiqs must be defeated and destroyed.

Munafiq – enemy of both Shias and Sunnis

Munafiq – enemy of both Shias and Sunnis
The hardest Munafiq denies merit of Prophet and says Allah sent, Jibrail brought, any Tom, Dick and Harry is as good as Mohammad. Laanat on hardest Munafiq.
The second category of Munafiq denies status of Ahlebait and sacrifice of Husain and says him rebel or says it was fight between two princes – one won other lost. Laanat on second category Munafiq.
A common Sunni Muslim loves Prophet and his progeny and acknowledges Ali, Fatima, Hasan and Husain rulers of Jannah.

Blessed are those true believers who with valour, devotion and sacrifice gathered like moths around Candles of Faith in that darkness generation to generation from 4th to 12th Imams. The common Muslims must feel gratitude for those Shias.

शिया और सुन्नियों का दुश्मन – मुनाफ़िक़

शिया और सुन्नियों का दुश्मन – मुनाफ़िक़
सब से बड़ा मुनाफ़िक़ यह कहता है रसूल में क्या ख़ास बात – अल्लाह ने भेजा जिब्राइल लाये और किसी पर भी नाजिल होता ! लानत है सब से बड़े मुनाफ़िक़ पर I
उसके बाद का मुनाफ़िक़ कहता है अहलेबैत का कोई दर्जा नहीं हुसैन का कोई एहसान नहीं और वह बाग़ी थे या यह कहता है कर्बला तो बस अरब के दो शहजादों की जंग थी – एक जीता एक हारा I
आम सुन्नी मुसलमान रसूल और आले रसूल के मर्तबे को पहचानता है और मानता है कि अली फ़ातिमा हसन और हुसैन जन्नत के मालिक हैं I
काबिले तशक्कुर हैं वे सच्चे मोमिन जो शुजाअत , अक़ीदत और कुर्बानियों के साथ उन अंधेरों में शमाए इमामत के गिर्द पीढ़ी दर पीढ़ी परवानों की तरह इकट्ठे होते रहे I
आम मुसलमान के लिए ऐसा कर पाना मुमकिन नहीं था – आम मुसाल्मानों के फ़िक़ह के चारों इमामों को भी हुकूमत के ज़ुल्म का शिकार होना पड़ा I

आम मुसलामानों को अपने दुश्मन मुनाफिकों को पहचानना चाहिए – मक्का मदीने का इंतज़ाम दुनिया भर के मुसलामानों के हाथों में होना चाहिए – रसूल , असहाब , उम्मुलमोमिनीन की क़ब्रों की तामीर होनी चाहिए – इस्लाम के दुश्मनों को नेस्त नाबूद करना चाहिए – शिया सुन्नी रहें – मुनाफ़िक़ बाहर कर दिए जाएँ I  

मुनाफ़िक़ साज़िशों के खिलाफ़ मुस्लिम इत्तिहाद – वक़्त की ज़रुरत !

मुनाफ़िक़ साज़िशों के खिलाफ़ मुस्लिम इत्तिहाद – वक़्त की ज़रुरत !
मुसलामानों और इस्लाम के दुश्मन यहूदी और इसाई नहीं हैं बल्कि मुनाफ़िक़ हैं – कुरान भी इन्हीं के खिलाफ लड़ने का हुक्म देता है I यही मुसलामानों को शिया सुन्नी में लड़ा रहे हैं और यही मुसलामानों और इस्लाम के दुश्मन की सही शिनाख्त न हो पाए इसलिए मुसलामानों को यहूदी इसाई से लड़ा रहे हैं I
यह मुनाफ़िक़ कौन हैं ? दुनिया में हर शख्स पहले की नस्लों से जुड़ा है कोई अपने आप नहीं पैदा हो गया है I
दुश्मने रसूल अबू जहल और अबू लहब और दूसरे चचाओं की यह औलादें हैं जिन्हें मजबूरन इस्लाम कबूल करना पड़ा और पीढ़ी दर पीढ़ी यह दुश्मनी छुपाये रहे I
18 वीं सदी में इनके वंशज मुहम्मद बिन अब्दुल वहाब और इब्ने सऊद ने मुआहिदा किया और तब से झूठी तौहीद का परचम उठा कर रसूल और उनके दीन को ख़त्म करने के लिए जंग की I ब्रिटिश ने इन्हें अरब का बादशाह बना दिया I रसूल और पहले दो खलीफाओं की क़ब्रों को पिंजरा बना दिया I तीसरे खलीफा, दुख्तरे रसूल , उम्मुल मोमिनीन , इमाम हसन और कई मुक़द्दस हस्तियों की क़ब्रों को झूठी तौहीद के नाम पर मिस्मार कर दिया और अल्लाह की निशानियों सफा और मरवा को तराश काट दिया I



Thursday, April 27, 2017

Why do common Muslims hate Shias so much ?

Why do common Muslims hate Shias so much ?
There is a Facebook group Sunni Shia Global Date. There I faced and found this hate. What is reason ?
1 Reason is not that Shias beg through their Imams and it is shirk according to common Muslims.
2 Reason is not that some Shias curse first three Caliphs and one Ummul Momineen.
The reason is very deep and lies buried in human psyche.
If present ruler erects three pillars symbolic of first three Caliphs and orders every Muslim will stone them as ritual of Hajj. The majority of common Muslims will comply and forget their claims of love of Sahaba.
But if same bastard dares any such things with those whom Shias revere then Shias will stop doing Haj and will at risk of lives will destroy that symbol that ruler and that government.
Fear and hate are two faces of same coin. The timid slaves of tyrant lord fear and hate the slave who dares to defy.

The history is full with sacrifices of Shias and cowardice of common Muslims.

शियों के खिलाफ आम मुसलामानों के मन में इतनी नफरत क्यों है ?

शियों के खिलाफ आम मुसलामानों के मन में इतनी नफरत क्यों है ?
एक facebook ग्रुप है शिया सुन्नी ग्लोबल डिबेट  उसमें मुझे इस नफरत का अंदाजा हुआ I
1 इस नफरत की वजह यह नहीं है कि शिया अपने इमामों के वसीले से दुआ मांगते हैं और आम मुसलामानों की नज़र में यह शिर्क है I
2 इसकी वजह यह भी नहीं है कि कुछ शिया कुछ सहाबा और एक उम्मुल मोमिनीन पर लानत भेजते हैं I
इसकी असली वजह बहुत गहरी और मानव मनोविज्ञान पर आधारित है I
आज अगर मक्का मदीने का शासक तीन खम्भे खड़े कराये जो तीन खलीफाओं का चिन्ह हों और यह आदेश करे कि मुसलमान हज में इन पर कंकरी मारेंगे तो आम सुन्नी बिना किसी हील हुज्जत के बादशाह का हुक्म मानना शुरू कर देंगे और सहाबा की मुहब्बत भूल जायेंगे I
वहीँ अगर कोई हरामजादा ऐसी जसारत उनकी शान में करना चाहे तो शिया हज जाना छोड़ देंगे जान की बाज़ी लगा कर उस निशानी को तबाह कर देंगे उस हुकूमत की तबाह कर देंगे I
बस यह फर्क है किसी ज़ालिम ज़मींदार के नौकर जसारत वाले किसी नौकर से डरते हैं और नफरत करते है I डर और नफरत एक सिक्के के दो पहलू हैं और आम मुसलमान इसी लिए शियों से डरते और नफरत करते हैं I पूरा इतिहास गवाह है शियों की कुर्बानियों का और आम मुसलामानों की बुजदिली का I

Wednesday, April 26, 2017

Who are these enemies of Muslims and Islam ?

Who are these enemies of Muslims and Islam ?
Neither descendants of Prophet hold the power nor those of first three Caliphs. After assassination of Caliph 4 the descendants of Abu Sufiyan became ruler of Muslim World and brought about bloodshed and destruction.  Then power was snatched by descendants of Abbas, an  uncle of Prophet.
But who are these people on pretext of Tauheed they have turned graves of Prophet and first two caliphs into cages. Who have erased graves at Jannatul Baqi?  Who said dome of Prophet mosque is idol and who said Kaba is idolatry and they will bring it down ? Who waned is shift remains of Prophet from his grave ?
These cannot be Jews and Christians.

They are descendants of Abu Jahal and Abu Lahab. Bury Shia Sunni differences. Come to Islam of Medina at time of Prophet then only their fake Tauheed get down to pieces and Satan exposed.

यह कौन हैं मुसलामानों और इस्लाम के दुश्मन ?

यह कौन हैं मुसलामानों और इस्लाम के दुश्मन ?
न नबी की नस्ल इक्तिदार में रही और न प्रथम तीन खलीफाओं की नस्ल इक्तिदार में रही I हज़रत अली की शहादत के बाद पहले अबु सूफियान की नस्ल इक्तिदार में आई जिन्होंने क़त्ल गारतगरी की और फिर रसूल के चाचा अब्बास की नस्ल इक्तिदार में आई और उसने क़त्ल और गारतगरी की I
पर पिछले 100 वर्षों से यह कौन लोग हैं जो तौहीद का झंडा उठाये मुसलामानों और इस्लाम को तबाह कर रहें हैं ? जिन्होंने रसूल और प्रथम दो खलीफाओं की क़ब्रों को पिंजरा बना दिया   और जिन्होंने जन्नतुल बकी को ढाह दिया और जिन्होंने मस्जिदे नबवी के गुम्बद को बुत बताया और जो काबे को बुतपरस्ती बता कर ढाने की बात कर रहे हैं और जो रसूल की मय्यत को उनकी कब्र से हटाना चाहते हैं ?
कोई यहूदी इसाई ऐसा नहीं कहेगा करेगा !

यह शायद अबू लहब और अबू जहल की नस्ल के लोग हैं I मुसलामानों शिया सुन्नी का भेद ख़त्म करो और वापस आओ उस इस्लाम पर जो रसूल के वक़्त मदीने में था और देखना यह अबू लहब और अबू जहल की औलाद बिलबिला जायेंगे और उनकी झूठी तौहीद बिखर जायेगी I

Tuesday, April 25, 2017

आइये उस इस्लाम पर जो मदीने में रसूल के वक़्त था !

आइये उस इस्लाम पर जो मदीने में रसूल के वक़्त था !
आज एक तरफ दुनिया मुसलामानों से और इस्लाम से नफरत को आमादा है और दूसरी तरफ मुसलमान फिरकों में बंटे हैं और हर फिरका दूसरों से नफरत कर रहा है I
आतंकवाद , फिदायीन हमले एक नया फितना हैं और तालिबान , अल क़ायदा , दायश और बोको हराम जैसे गुट आम इंसानी एहसासात को मजरूह कर रहे हैं – यह मुसलमान है या मुसलामानों और इस्लाम के दुश्मनों के ज़रिये उठाये गए हैं और फण्ड पाते हैं हम नहीं जानते I
अगर मुसलमान उस इस्लाम की तरफ पलट आयें जो मदीने में नबी के वक़्त था तो ऐसी इंसानियत दुश्मन हरकतों का कोई जवाज़ नहीं रहेगा I
इबादत रोज़ा ज़कात और हज सिर्फ यही दीन के सुतून थे I जंग होती थीं और मुसलामानों को अपने दिफ़ा और अपने हक में जंग लड़नी पड़ीं पर जिहाद दीन का सुतून नहीं था यह बाद में डाला गया- मुल्कों पर हमला करने और जीतने के लिए I तीन तलाक भी नहीं था , तलाक की इजाज़त थी पर मदीने में शायद ही आम तौर पर रायज था I औरतों पर सख्त पर्दा और बंदिश नहीं थी जैसी की बाद में लगाई गयी I    
तो पलट आइये उस इस्लाम की तरफ जो मदीने में रसूल के वक़्त था I
1       सारे मुसलामानों के बीच इत्तिहाद लाइए

2       तालीम , साइंस और टेक्नोलॉजी में कौम को आगे बढ़ाइये   

Come to Islam of Medina at time of Prophet !

Come to Islam of Medina at time of Prophet !
On the one hand whole World is turned against Muslims and Islam and on the other hand Muslims are divided into sects each hates others.
Terrorism and fidayeen attacks are new phenomenon and outfits like Taliban, al Qaeda, Dayash and Boko haram are active against modern sense and sensibilities – they are Muslims or raised and funded by enemies of Muslims and Islam we don’t know.
If Muslims agree to revive and return to Islam of Medina at time of Prophet all such inhumanities in name of Islam will find no sanction.
Prayers, fasting, alms and pilgrimage were four pillars of religion. There were wars forced upon and Muslims had to fight in self-defence or to recover their rights jihad was not pillar of religion. Same way triple talaq is later innovation. The talaq was permitted but perhaps rarely resorted in Madeenatul Nabi. There was no strict purdah or confinement of women as is practised in later periods.
So revive and return to Islam of Medina at time of Prophet.
1 Bring unity among all Muslims
2 Encourage community to excel in education, Science and technology


Friday, April 7, 2017

अपने करीब की अपने खानदान की सब से मामूली दिखने वाली लड़की से शादी कर लीजिये !

अपने करीब की अपने खानदान की सब से मामूली दिखने वाली लड़की से शादी कर लीजिये !
इसी में आप की कामयाबी और इसी में आप की ख़ुशी और खुशकिस्मती है ! शिया और लखनऊ के शिया अपने को दुनिया में सब से बहतर समझते हैं पर हकीकत यह है और पूरे इंडिया की यह हकीकत है कि लड़के ‘under educated’ और ‘under employed’ हैं और अपनी इस कमी को बड़े खानदान पैसे वाले पढ़े लिखे खानदान की पढ़ी लिखी खूबसूरत बेटी से शादी कर के पूरी करना चाहते हैं – बीवी के ज़रिये ‘मेराज’ चाहते हैं !
उधर आप इंतज़ार करते करते 30 से 40 और 40 से 50 हो जाते हैं -  अपनी उम्र छुपाते हैं , अपनी qualification ज्यादा बताते हैं अपनी हैसियत और आमदनी ज्यादा बताते हैं – कहीं झूठ और धोखे पर ज़िन्दगी की बुनियाद रखी जा सकती है और ख़ुशी हासिल की जा सकती है ? आप तालीम और इल्म से तो पीछे थे ही हक़ का दामन भी छूट गया और आप एक फ्रॉड बन कर रह गए I
उधर बड़े खानदान के वालदैन और बड़े और खुद लड़कियां यह बहतर समझते हैं कि आप जैसे ‘under educated’ और ‘under employed’ और फ्रॉड से शादी करने के बजाये बिन ब्याहे ज़िन्दगी गुज़ार दें I
इधर आप की जैसी एक लड़की आप की वजह से बिन ब्याही बैठी है I

अगर आप 30 साल के हो गए हैं तो फ़ौरन करीब की खानदान की भाइयों बहनों के ससुराल की किसी मामूली 25 साल की लड़की से शादी कर लीजिये और दुनिया में खुद आगे बढिए :
1 कानपूर या किसी और प्राइवेट यूनिवर्सिटी या IGNOU से BA और MA कीजिये
2 कंप्यूटर में BCA , MCA या A level B लेवल कीजिये
3 जिस subject को चुना है उसमें वास्तविक ज्ञान प्राप्त कीजिये
4 हर सब्जेक्ट की अपनी association होती है जैसे कि इन Indian Science Congress Association उसके मेम्बर बन जाइए और अपनी लाइन में आगे बढिए
5 PhD ज्वाइन कीजिये डिग्री कॉलेज में पार्ट टाइम जॉब करिये – इस तरह आप का स्टेटस ऊपर उठेगा और उठता जाएगा I
6 इन सब के साथ आप जो भी कारोबार करते रहे हैं - उसके साथ आप सुर्खरू होते जायेंगे - कोई दूकान या वर्कशॉप I कुछ सालों में आप की माली हालत दुरुस्त होती जायेगी I  
7 फिर अपना अपने जैसे हक़ परस्तों का ग्रुप बना कर इंटर कॉलेज या डिग्री कॉलेज या और कोई प्रोफेशनल या कैरियर इंस्टीट्यूट खोलिए – शहर कस्बे या देहात में I
आप की बीवी ज़िन्दगी भर आप का सहारा बनेगी और आप को मेराज अपनी जद्दोजहद से मिलेगी और आप एक सच्चे अच्छे कामयाब इंसान बनेंगे !            

और कौम हकीकत में बहतर कौम होती जायेगी !