ब्रिटिश सरकार द्वारा अमानवीय प्रथाओं का अंत
ऑक्सफ़ोर्ड
हिस्ट्री ऑफ़ इंडिया के कुछ अंश प्रस्तुत हैं:
The
inhuman practices so far prevalent were stopped by British.
“1. In
1803, Lord Wellesley suppressed the sacrifice of children in worship on Saugor
Island at mouth of Hughli. Aryans criticized this suppression of child
sacrifice as an unjustified interference with Hindu customs.
बच्चों की बलि दी जाती थी I 1803 में गंगा सागर में हुगली नदी के दहाने पर
होने वाली बच्चों की बलि को लार्ड वेलेस्ली ने बंद किया जिसे आर्यों ने हिन्दू
प्रथाओं में अकारण हस्तक्षेप बताया I
किसी सात्विक अध्यात्मिक
देशवासी ने न इसकी आलोचना की और न बंद करने का प्रयास किया और जब 1803 में लार्ड
वेलेस्ली ने इसे बंद किया तो आर्य संभ्रांत लोगों
ने इसे हिंदू प्रथाओं में हस्तक्षेप बताया I यहाँ यह भी ज्ञात रहे कि मनु स्मृति में कहीं हिन्दू
शब्द नहीं है I मुसलमानों ने सबको हिन्दू कहा इसलिए यह हिन्दू बन गए I किसके
बच्चों की बलि दी जाति थी ? गंगा सागर में
ही मकर संक्राति को वृद्ध स्त्री पुरुष कूद जाया करते थे जिन्हें घड़ियाल खा लेते
थे और मान्यतानुसार वे स्वर्ग पहुँच जाते थे I
2.
Wellesley was also aware of the evil of suttee or the practice of widows
accompanying the bodies of their husbands to be burnt on the same funeral pyre
with them. But fear of Hindu opinion restrained him. For the next twenty-five
years the custom was under review but each governor-general postponed action.
Lord Minto tried to mitigate the evil by making rules designed to prevent
coercion, but this was interpreted as a kind of government sanction and number
of recorded cases in Bengal rose. The main areas were in the Punjab and
Rajputana among Sikhs and Rajputs, and in Madura and Ganfes valley among
Brahmans. In the Punjab and among the Rajputs it was an aristocratic custom,
but among the Brahmans it was more widespread.
In the
decade 1817-26 the recorded number of cases in Bengal varied between 500 and
850 a year. The victims were rarely volunteers and the circumstances were
usually sordid and evil. In 1829 Bentick acted where others had called for
reports and suppressed suttee by regulation XVII of 1829. Suttee, unlike child
sacrifice, had ancient though not undisputed warrant in the Shastras and it was
feared that its suppression might outrage the feelings of orthodox Hindus. But
the opposition led by Raja Radhakant Deb went no further than to organize a
petition of protest and carry an appeal to the Privy Council which was
dismissed in 1833. The Bombay and Madras governments followed Bentick’s
lead and steady pressure secured its gradual abolition in the Indian states.
The last case of a suttee on the death of a ruler occurred at Udaipur in 1861.
सती
प्रथा पर हाथ डालने की ब्रिटिश सरकार भी जल्दी हिम्मत न जुटा पाई और 1829 में
लार्ड बैंटिक ने इसे बंद कराया और इस बंद का विरोध राजा राधाकांत देब ने प्रिवी
कौंसिल में पेटीशन दायर कर किया I
शूद्रों
और दलितों पर होने वाले अन्याय को धर्म समझने वाली मनुवादी स्त्रियों को भी सती
प्रथा और विधवा होने पर अन्याय और अत्याचार सहना पड़ा और अब यह अन्याय और अत्याचार
बहू बन कर सहना पड़ता है I
3. There
quickly followed the suppression of thagi in central and upper India. This was
armed robbery and murder carried out in the name of religion. The thugs used a
regular ritual in their murders and believed themselves to be serving the
goddess Kali by so doing. The practice had long ago existed but had grown to be
a menace to society with the collapse of authority in central India at turn of
century Bentick took their
suppression in hand in 1830, the work being carried through by Sir William Sleeman
with the help of men like Meadows Taylor. No petition attempted to stay this
work for its practical advantage was too obvious.
लार्ड बैंटिक ने 1830 मे ठगी को समाप्त किया I
4.
Another measure of this class was the abolition of slavery which became an
anachronism in India after the abolition in the rest of British Empire in 1833.
Slavery in India was no chain gangs as in the West Indies and no middle
passage. But its practice was widespread and deep rooted and its evil very
real. It was abolished by Lord Ellen borough’s government in 1843(Act V) by
refusing to recognize slavery as a legal status.
1843 मे दास-प्रथा समाप्त
की I
5. The
principle of equality of the subject before the law is one which lies at the
root of whole body of English Law. It was equally absent from the body of Hindu
custom with its special privileges for Brahmans and disabilities for the
exterior castes and depressed classes.
कानून के
सामने सब को बराबर कर दिया I
6. Widows
were legally permitted to re-marry and convert from Hinduism to inherit family
property.
विधवाओं को दुबारा विवाह का क़ानूनी अधिकार
दिया और धर्म परिवर्तन के बाद भी परिवार समपत्ति मे अधिकार दिया I
7. The
effort to prevent the spread of plague disturbed orthodox sentiment and led to
rioting. It was at this time that B.G.Tilak became prominent.”
और जब पलेग रोकने
के उपाय किये गये तो दंगे हुए और बाल गंगाधर तिलक विरोध मे उतरे और फिर बाद मे उन्होंने
देशभक्ति का चोगा पहन लिया I
(From Oxford History of India)
मेरे विचार से यही सब कारण थे जिनकी वजह से
अँगरेज़ सरकार के खिलाफ ग़दर छेड़ा गया और यह अफवाह फैलाई गयी कि जो नए कारतूस हैं
उनमे गाय और सुअर की चर्बी है और मुंह से चबा कर खोलने मे हिन्दू और मुसलमान दोनों
का धर्म नष्ट होता है इस तरह पब्लिक जीवन मे धर्म आया और हिन्दू और मुसलमान बने
जिसका लाभ 1857 से आज 2016 तक लिया जा रहा है I सभी लोग सच और झूठ जानने के बाद भी
चुप रहे और चिंगारी को शोला बनते देखते रहे I
षड्यंत्रकारियों ने मुसलमानों को आगे रखा , मुग़ल बादशाह ,
नवाब शहजादे सब आगे आये और
अपनी हुकूमत वापस आने के सपने देखने लगे I
ग़दर कुचल दिया गया और मुसलमानों की कमर तोड़ दी
गयी I
Many of the
leading Muslims were hanged or exiled- Nawabs of Jhajjar, Ballabhgarh, Faruknagar, Farukabad.
24 shahzadas were hanged in
Delhi on 18 November 1857 alone. Muslim quarters were everywhere the target. Muslim
property was widely confiscated. [Modern Indian History V.D. Mahajan S. Chand
& Company Ltd New Delhi ]
People were so terrorised that
they dare not to venture out of their houses to bury their dead. Dead bodies
remained in the house with the living for days and sometimes buried in the
house itself. At Benaras rebel suspect even disorderly boys were executed by
infuriated officers and unofficial British residents who volunteered to serve
as hangmen. John Nicholson wrote to Edwards. “ Let us propose a bill for
flaying alive, impalement or burning...the idea of simple hanging is
maddening.” [Partition the real story Mushtaq Naqvi Renaissance Delhi]
ग़दर से अँगरेज़ इतने गज़बनाक
हो गए थे कि जिस पर ज़रा भी शक होता था सड़क किनारे सूली पर लटका देते थे और यह इतना
अधिक थकाने वाला भी था कि लोगों को जिंदा जलाने की या बल्लम बरछी से मारने लटकाने
कि अनुमति चाह रहे थे I और इस काम में
साधारण अँगरेज़ भी अधिकारियों का सहयोग कर रहे थे I यह सब
देखने के लिए जो देसी लड़के आ जाते थे जो जिससे अँगरेज़ चिढ़ जाते थे उन लड़कों को भी
सूली चढ़ा देते थे I
मनुवाद का अगला अवतार : ब्रिटिश हितैषी –
मुस्लिम विरोधी
अंग्रेजों द्वारा बच्चों की
बलि निषेध , सती प्रथा निषेध , प्लेग रोकथाम इन सब का विरोध करने वाले अब अगले
अवतार में मॉडर्न हो गए और ब्रिटिश हितैषी और मुस्लिम विरोधी हो गए I
1925 मे राष्ट्रीय स्वयमसेवक संघ का गठन हुआ तब
से वह हिन्दू राष्ट्र का लक्ष्य बना कर मुसलमानों और ईसाईयों को छोड़ के शेष सभी
लोगों को ले कर एक अनुशासित राष्ट्र बनाना चाहता है और हिटलर और इस्राएल दोनों का
प्रशंसक है I यह अन्तर्विरोध दर्शाता है कि सत्य कुछ और है और अंदर छुपा कुछ और है
I
RSS और उससे जुड़े लोगों का असली मंतव्य :
RSS की मैगजीन
Organizer के सम्पादकीय मे 30 नवम्बर 1949 मे स्वतंत्र भारत के संविधान के प्रति
आपत्ति करते हुए कहा गया कि इसमें प्राचीन भारत के अनुपम संविधान जिसका विधान मनु
स्मृति में है और पूरा विश्व जिसका प्रशंसक है और जिससे स्वत: अनुपालन और एकरूपता
आती है उसका कोई ज़िक्र ही नहीं है I
"But in our constitution, there is no mention of that unique
constitutional development in ancient Bharat... To this day his laws as
enunciated in the Manusmriti excite the admiration of the world and
elicit spontaneous obedience and conformity. But to our constitutional pundits
that means nothing"
The Rashtriya Swayamsevak Sangh did not stop its unrelenting attacks on
this issue, and criticised B. R. Ambedkar's public pronouncements that the new
Indian Constitution would give equality to all castes.
अवकाश प्राप्त हाई कोर्ट जज शंकर सुब्बा
अय्यर ,जिन्होंने ब्रिटिश काल मे आधुनिक शिक्षा और कानून की डिग्री प्राप्त की थी
उन्होंने 6 फरवरी 1950 को आर्गेनाइजर मे लेख लिखा “ मनु हमारे दिलों पर राज करता
है”
"Even though Dr. Ambedkar is reported to have recently stated in Bombay that the days of Manu have ended it is
nevertheless a fact that the daily lives of Hindus are even at present day
affected by the principles and injunctions contained in the Manusmrithi and other Smrithis. Even an unorthodox Hindu feels himself
bound at least in some matters by the rules contained in the Smrithis and he feels powerless to give up
altogether his adherence to them"
भारत मे जो ऊंच-नीच
बनाये रखते हैं उनको ‘मनुवादी’ कहना उपयुक्त होगा और जो भारत से ऊंच-नीच उखाड़
फेंकना चाहते हैं और यहाँ स्वतंत्रता , समता और बंधुत्व स्थापित करना चाहते हैं
उन्हें इन मनुवादियों को पहचानना होगा I मनु
स्मृति किसने लिखी यह प्रश्न नहीं है इस नाम की पुस्तक में जो ऊंच-नीच . अन्याय और
अत्याचार है उससे सहमत लोगों को इस नाम के कारण ‘मनुवादी’ नाम देना उपयुक्त है
Iऔर जो इसके विरुद्ध मानवता के रास्ते पर हैं उन्हें ‘मानवतावादी’ कहना उपयुक्त
होगा I
आरएसएस का
राष्ट्रवाद और हिन्दुत्त्व सिर्फ मुखोटा है I देश को हिन्दू मुस्लिम मे बाँट कर राजनैतिक रूप से सोये
हुए शूद्र और दलित युवाओं को वह अपने चंगुल मे रखता है और उनके द्वारा मुसलमानों
और इसाइयों पर हमले कराना ही इसकी रणनीति है – 1947 से आज तक का उसका यही इतिहास
है I
1857 से 1947 का इतिहास चहरा बदलने का इतिहास है
– मनुवादियों का आधुनिक इतिहास पुराने मुखोटे उतार कर नए मुखोटे लगाने का इतिहास
है I जब
अंग्रेजो ने सब के लिए लाजिमी तालीम शुरू की तो मनुवादियों के पैरों तले धरती खिसक
गयी कि अगर शूद्र और दलित पढ़ लिख गए तो क्या होगा ?
विद्यासागर कहे जाने वाले ईश्वर चन्द्र ने
अंग्रेजों से विनती की कि शिक्षा को भद्र्लोगों तक ही सीमित रखा जाए I
और भविष्य मे राष्ट्र पिता का अवतार लेने वाले
मोहनदास करमचंद गाँधी ने लिखा :
M.K. Gandhi in his Hind Swaraj or Indian Home
Rule writes in 1909, “The ordinary meaning of education is
knowledge of letters. To teach boys reading, writing and arithmetic is called
primary education. A peasant earns his bread honestly. He has ordinary
knowledge of the world. But he cannot write his own name. What do you propose
to do by giving him knowledge of letters? Will you add an inch to his
happiness? It is not necessary to make this education compulsory. Our ancient
school system is enough..... We consider your modern school to be useless.”
यह थे गाँधी के मौलिक विचार – क्या किसान
को आधुनिक खेती करने , बीमा कराने , बैंक
में पैसा जमा कराने, लोन लेने , परिवार नियोजन करने , बच्चों को पढ़ाने, वोट डालने,
समाचार पात्र पढ़ने आदि के लिए useless modern school की ज़रुरत नहीं थी और आगे बढ़ती
दुनिया – मोबाइल , TV , ट्रेक्टर चलाना , खरीदना आदि I तो यह थी दूरदर्शिता बापू की ? क्यों गाँधी ने विरोध किया ? गाँधी ने जातिगत ऊंच-नीच
को बचाने के लिए शिक्षा का विरोध किया I
जो लोग भारत मे
स्वतंत्रता, समता और बंधुत्व लाना चाहते हैं उन्हें कल और आज के , ढके और खुले सभी
मनुवादियों और उनके मंसूबों को समझना और पहचानना होगा I
मुस्लिम कट्टरवाद या मदारी
की डुगडुगी पर नाचते बन्दर
दुनिया के हर धर्म के तीन अंग हैं :
1 पूजा वंदना
2 व्रत
3 तीर्थ
इनके अलग अलग ढंग हैं और हर एक स्वतंत्र है बिना
दूसरों पर अपना ढंग थोपे अपने ढंग से पूजा वंदना व्रत और तीर्थ करने के लिया बिना
दूसरों को कष्ट में डाले I
मानवता ही सच्चा धर्म है और मैं बार बार कुरान
पढ़ने समझने के बाद जिस को सच्चा इस्लाम समझता हूँ वह यह है और आज के युग में इसी
इस्लाम की आवश्यकता है :
1 दुनिया के सारे इंसान एक
माँ बाप कि संतान हैं : यह वैज्ञानिक सत्य है कि हम सब मनुष्य एक प्रजाति होमो सेपियन्स(Homo
sapiens) के सदस्य हैं और कुरान का यह बयान कि सारे इंसान एक माँ बाप की औलाद हैं
इसी सत्य को बहुत सरल भाषा में अपनेपन की भावना जगाते हुए व्यक्त करता है और हमारी
दिलोदिमाग को ताजगी बख्शता है I
ऐसे
सच्चे इस्लाम पर चलने वाले मुसलमान भारत में शूद्र आदिवासी और दलित को बराबरी
दिलाने और अन्याय ख़त्म करने के लिए उनका साथ देंगे I ऐसे सच्चे मुसलमान अपने लिए कोई चीज़ जैसे कि
आरक्षण की मांग नहीं करेंगे बल्कि 90 प्रतिशत आरक्षण शूद्र , आदिवासी और दलित को
दिलाने की बात करेंगे I ऐसे मुसलमान यू०एस०
और यूरोप में ब्लैकस
(एफ्रो-अमेरिकंस) को न्याय दिलाने की बात करेंगे I ऐसे मुसलमान यू०एस० में नेटिव अमेरिकंस (इंडियन
अमेरिकंस) को उनका हक दिलाने की बात करेंगे I
कितने इंसान बेगुनाह या मामूली बात पर जेलों,पागल
खानों और प्रोटेक्शन होम्स में सड़ रहे हैं उन्हें आजाद करने की बात करेंगे I कितने
इंसान गुलामी और बंधुआ मजदूरी कर रहे हैं उन्हें आजाद करने की बात करेंगे I कितने बच्चे, औरतें यौन शोषण और देह व्यापार व पोर्नोग्राफी
के लिए मजबूर हैं उन्हें आजाद करने की बात करेंगे I
ऐसे मुसलमान इस्लाम के नाम पर किसी अमानवीय
कार्य और हिंसा और आतंकवाद को स्वीकार नहीं करेंगे और न ही आज के युग में
मध्यकालीन कानून को आज के बदले हालात में स्वीकार करेंगे I
2 सारी कायनात अल्लाह की है
धरती पर जीवन है और सारे जीव वनस्पति एक दूसरे
पर और वातावरण पर आधारित हैं तो हम इंसानों को कोई हक नहीं है कि जो ज़रूरी है उससे
अधिक जीवों और वनस्पति से कुछ लें या उन्हें नष्ट करें और हमें हक नहीं है कि
वातावरण को दूषित प्रदूषित करें I कुरान
का यह बयान कि सारी कायनात अल्लाह की है इसी सत्य को बहुत सरल भाषा में अपने मक़ाम
को सही पहचनवाने की भावना जगाते हुए व्यक्त करता है और हमारी दिलोदिमाग को मृदुलता
बख्शता है I
ऐसे सच्चे इस्लाम को मानने वाले यह समझते है कि
इंसानों को प्राकृतिक सम्पदा को लूटने का कोई हक नहीं है I इंसानों को प्रदूषण
करने का कोई हक नहीं है I और इंसानों को महा-मारक शस्त्र (weapons of mass
destruction) बनाने व इस्तेमाल करने का कोई हक नहीं है और न प्रकृति के खिलाफ कोई
प्रयोग करने का कोई हक है I
जब दुनिया इस सच्चे इस्लाम पर आएगी तो न अन्याय
होगा न प्राकृतिक संपदाओं की लूट होगी और न प्रदूषण होगा न नुक्लेअर खतरा होगा I
जिस दुनिया में सब लोग एक माँ बाप कि संतान हैं
वहां हर बच्चा अपनी रूचि और योग्यता कि लाइन में आगे बढ़ने के सारे अवसर पायेगा और
हर लड़का लड़की आपसी पसंद से शादी के लिए स्वतंत्र रहेंगे I
मुस्लिम देशों का इस्लाम :
काएदे की बात तो यह थी कि मुसलमान एक आपसी
मुहब्बत और आपसी भलाई की हुकूमत और समाज बनाते पर ऐसा नहीं हुआ जिनके हाथ में
इक्तिदार जहां भी आया वहाँ उसने जो उसके अपने अकायद थे और जो उसका अपना नमाज़, रोज़े
और हज का ढंग था उसी को ईमान और इस्लाम बना दिया और जो थोड़ा अलग सोचते या करते थे
उन्हें काफ़िर, मुशरिक और मुरतिद बता कर सज़ा देना और क़त्ल करना शुरू किया I नतीजे
में तरह तरह के अकायद और तरीके निकलते गए और आपसी ज़ुल्म ज्यादती बढ़ती गयी और अब
तालिबान, दायश और बोको हराम हैं जिनसे इस्लाम को नुकसान पहुँच रहा है I
दुनिया भर में आतंकवादी घटनाएं हो रही है दुनिया
इस्लाम और मुसलामानों के पैग़म्बर और कुरान को ही बुरा समझने लगी है I
किस को फायदा पहुँच रहा है ?
अमेरिका और यूरोप की मल्टीनेशनल कंपनियां
अफ्रीका और लैटिन अमेरिका में लगातार प्राकृतिक संपदाओं को लूट रहे हैं और सिर्फ लूट
ही नहीं रहे हैं उन देशों के मर्दों, औरतों और बच्चों को बन्दूक की नोक से उत्खनन
करवा रहे हैं जो विष प्रभाव उन मिनरल से हो वह भी उन्हीं लोगों को हो I लूटने वाली कंपनियों की हुकूमतें भी उन्हीं
कंपनियों के हितों की रक्षा करती हैं और लुटने वाले देशों की हुकूमतें तानाशाहों
के हाथ हैं जिन्हें उनकी रिश्वत मिल जाती है या सत्ता बचाए रखने में अमेरिका उनकी
मदद करती है और अगर कोई विरोध करे तो या तो वह मरवा दिया जाए या अमेरिकी सेना वहां
पहुँच जाए और सत्ता परिवर्तन करा कर अपने पिठ्ठुओं को बिठा दे I
यह सारी लूट अगर यू०एन० को मालूम भी है तो वह
चुप है या अमेरिका यूरोप के आगे कमज़ोर है और बाक़ी बड़ी दुनिया इन बातों से अनजान
मुस्लिम आतंकवादी घटनाओं को ही मानवता के लिए सब से बड़ा खतरा समझती है I
सर्कस में एक शो के बाद दूसरे शो की तयारी के
लिए जोकर आ कर जनता को अपनी तरफ ध्यान आकर्षित कर के हंसी मजाक में लगा लेते हैं
और तैय्यारी पूरी होते ही हट जाते हैं और दूसरा शो आरम्भ हो जाता है I यह मुस्लिम
आतंकवादी दुनिया में लूट के सर्कस के जोकर मात्र हैं – बन्दर हैं जो मदारी के
इशारों पर नाच रहे हैं – बस पैसों का खेल है और इस्लाम और कुरान और पैग़म्बर बदनाम
हो रहे हैं I जागो मुसलामानों जागो , सच्चे इस्लाम को पहचानों – सारे इंसान एक माँ
बाप की औलाद हैं और सारी कायनात अल्लाह की है I
भारत में मुसलामानों की
गलतियां
कोई समझाए कि जिस मुल्क में रह रहे हो ‘काबिले
नफरत ‘ बन कर मत रहो बल्कि ‘काबिले मुहब्बत’ और ‘काबिले इज्ज़त’ बन कर रहो I इतना
शोर इतना हंगामा ढेरों लाउडस्पीकर एक साथ
अज़ान देते हुए , जुलूस जो दूसरों का रास्ता बंद कर दें , मजलिसे और जुमे कि नमाज़
सड़कों तक ?
किस इस्लामिक मुल्क में इतनी अराजकता मुमकिन है
? सिर्फ एक अज़ान, सड़क पर सारे इन्सान खामोश न कोई बहस न झगडा I सुन्नी हुकूमत तो शिया छुप कर रहते हैं , शिया
हुकूमत तो सुन्नी छुप कर रहते हैं I
यहाँ भी एक खामोश ज़िन्दगी जियो दूसरों का ख्याल
रखो I
भारत एक सेक्युलर मुल्क है हरेक को आज़ादी है
सिर्फ तुमको ही
नहीं और तुम्हारे लिए तो दो पाकिस्तान बनाये ही गए थे – न
पश्चिमी पाकिस्तान ने यहाँ से जाने वालों को बराबरी का हक दिया और पूर्वी
पाकिस्तान ने तो शहरियत भी नहीं दी बिहारी मुसलमान रिफ्यूजी कैम्पस में रहते रहे
और असम और बर्मा गए जहाँ मारे जाते हैं – जो मुसलमान भाई थे पूर्वी पाकिस्तानी
उन्होंने उन्हें कबूल नहीं किया इसलिए I
बिना कुछ किये भी तुम ‘काबिले नफरत’ माने जाते
ही क्यों कि
1 इतिहास बताता है कि मुसलमान हमलावरों और
बादशाहों ने ज़ुल्म किये – भले ही कुछ झूठ भी हो पर ज़ुल्म तो हुआ – जहाँगीर ने गुरु
गोविन्द सिंह को मरवाया , औरंगजेब ने गुरु तेग बहादुर को क़त्ल करवाया I
2 देश विभाजन (Partition) और उसके बाद से होने
वाले दंगों में तुम पर बहुत ज़ुल्म हुआ पर मुसलमान गुंडों ने भी क़त्ल , बलात्कार और
लूटमार ज़रूर कि होगी तो दूसरों को यह याद है जो तुम पर हुआ वह किसी को याद नहीं I
3 आज तालिबान, दायश (ISIS) और बोको हराम आदि जो
कर रहे हैं वह भी तुम्हारे ही दामन पर दाग़ बन रहे हैं I
फिर एक बहुत चालक साजिशी दुश्मन – हिटलर और
गोब्बेल्स कि नाजायज़ संतान – मनुवादी संगठन और राजनैतिक पार्टियाँ तुम्हारे खिलाफ
1925 से सतत निरंतर प्रोपगंडा और साजिशें कर रहे हैं I
उनका असली लक्ष्य तो पिछड़ों और दलितों को अपने
से नीचा रखना है और उन्हें सत्ता से रोकना है I
कांग्रेस (Congress) और जनसंघ/ भाजपा (Jan Sangh / BJP) दोनों ही मनुवादी संगठन हैं – एक गले लगता है
ताकि दूसरा पीठ में खंजर उतार दे, पर तुम्हारी समझ में अब तक न आया I
आज़ादी के बाद पिछड़ों और दलितों को सत्ता से दूर
रखने के लिए ही तुम्हें भारत में रहने दिया गया और फिर इन 67 वर्षों में मनुवादी
हर जगह शीर्ष पर पहुँच गए अब पुलिस और आर्मी भी उनकी है , जुडीशीअरी और मीडिया भी
उनका है, बिज़नस और इंडस्ट्री और बैंक्स भी उनके हैं I
असली इस्लाम पर आओ – दुनिया के सारे इंसान एक
माँ बाप कि औलाद हैं I पिछड़ों , आदिवासियों , दलितों से बराबरी और भाईचारा करो और
उन्हें सत्ता में लाओ I
पिछड़ों , दलितों और आदिवासियों की सत्ता का अर्थ
और लक्ष्य :
1 सामाजिक न्याय की स्थापना I
2 अत्याचार अन्याय अपराध और भ्रष्टाचार पर रोक
और दोषियों को सजा
आज न्यायपालिका कि क्या हालत है ? एक को फांसी
इसलिए दी कि जन अंतरात्मा संतुष्ट हो जाये और हजारों के कातिल को पूरी छूट और एक
विधवा न्याय के लिए तड़प रही है और सुप्रीम कोर्ट कह रहा है कि सिनेमा हॉल में जन
गन मन के लिए खड़े रहना होगा I
अगर अपने को बचाना है अगर न्याय चाहिए तो पिछड़ों
आदिवासियों और दलितों को सत्ता में ला कर खुद भी सत्ता के भागीदार बनो और देश से
अत्याचार , अन्याय अपराध और भ्रष्टाचार को समाप्त करो और आज़ादी से लेकर आज तक जो अत्याचारी
हैं उन्हें सजा दिलाओ I
दुनिया
1400 वर्षों से दाढ़ी और परदे का झूठा इस्लाम है जो मुसलमानों ने खुद गढ़ा है
– कुरान में न दाढ़ी का हुक्म है , न खतने का और न यह कि बिना नामहरम मर्द
रिश्तेदार के कोई औरत घर के बाहर क़दम न निकले पर हर इस्लामिक मुल्क में यही इस्लाम
चल रहा है जो मजहब नहीं फासिज्म है – एक सत्तारूढ़ परिवारों का वर्ग (ruling elite)
जो दौलत और एश की ज़िन्दगी जी रही है ग़ैर मुस्लिम मुल्कों लोगों के साथ मिलजुल कर
रह रहा है और दूसरे आम लोग जिन्हें दाढ़ी पर्दा मस्जिदों में 5 वक्त कि नमाज़ में
ढकेल दिया गया है और जिनके दिमाग और अहसासात को मफ्लूज कर दिया गया है I
इस्लाम
के इस गलत संस्करण को मानने वाले जब 1000 वर्ष पूर्व भारत आये तो न उन्हें ऊंच नीच
दिखी न सती प्रथा न देवदासी प्रथा और न
बच्चों की बलि और जब अंग्रेजों ने इनका तख्ता पलटा तब उन्होंने कानून के आगे सब को
बराबर किया और सारी अमानवीय प्रथाओं पर रोक लगायी I ऐसे ही मुसलमान ब्लैकस गुलामों
कि तस्करी करते रहे ऐसे ही मुसलमान समुन्द्र के गर्म मसालों के समुंदरी व्यापार के
जहाज़ों की लूट (sea piracy) करते थे जिसे ब्रिटेन ने रोका I
यह मुसलमान दुनिया भर में ताक़त और हिंसा और यू०एस०
और यूरोप में बने हथियारों और जहाजों से पूरी दुनिया जीतना चाहते हैं I ऐसे लोग इसके इलावा किया करेंगे जो अल कायदा ,
तालिबान और दायेश कर रहे हैं – बेगुनाहों को मारना– यह बेगुनाहों को मारेंगे और
इनके बेगुनाहों को दूसरे मारेंगे और एक दिन दुनिया इनसे पाक होजाएगी या ज़िल्लत कि
मार खा कर ख़ामोशी से छुप के रहेंगे I
मुसलमान भी मौलवियों कि इताअत करके कट्टरवाद
की तरफ बढ़ गए और वाकई काबिले नफरत बंटे गए
– दाढ़ी पर्दा झुण्ड बना कर मस्जिदों
में आना जाना और मस्जिदों में लाउडस्पीकर
लगा कर अज़ान देना शुरू किया - इतने
लाउडस्पीकर और इतनी अजाने तो मुस्लिम मुल्क में भी नहीं होती जुमे कि नमाज़ में रास्ता तक ब्लाक करना शुरू किया I फिर यह
बात कि 4 शादियाँ करते हैं और तीन बार तलाक बोलने से तलाक हो जाता है यह सब काफी
है किसी भी कौम को काबिले नफरत बनाने के लिए इसी बीच आर्यों ने शूद्र और दलित को
अपने नीचे रखने के लिए उन्हें कट्टर हिन्दू बनाना शुरू किया – गाय हमारी माता है
और मुसलमान इसे काट कर खाते हैं मंदिरों में शंख और घंटियाँ शुरू हुयी अज़ान के टाइम पर I मूर्तियों के जुलूस निकलने शुरू हुए I
और मुसलमान अपने जोश में गाय भीं काटते रहे शंख
घंटियों और मूर्तियों के जुलूस पर झगड़े करते रहे और इस सबका फायदा मनुवादियों को होता
गया I
इसी बीच मनुवादियों ने मुसलमानों की शुद्धि की
बात कही मुसलमान डर गए पहचान न ख़त्म हो
जाए दीन न ख़त्म हो जाए I
जैसा मनुवादी चाह रहे थे और जो अँगरेज़ भी चाहते
थे मुस्लिम लीग ने पाकिस्तान की मांग कर दी I
भारत का असली जाति संघर्ष तो पीछे हो गया और
मनुवादियों के हित में हिन्दू मुस्लिम झगड़ा
सच्चाई बन गया और आज तक बना हुआ है I
पाकिस्तान बन गया मुसलमान घट कर 8 प्रतिशत रह गए वह भी मनुवादी पार्टी कांग्रेस
के रहमो करम पर उसी के वोट बैंक बन कर कांग्रेस के 67 वर्ष के शासन में मनुवादियों
का क़ब्ज़ा शासन प्रशासन मिलिट्री बिज़नस, उद्योग, मीडिया, बैंक, जुडीशीअरी हर जगह हो
गया I
देश विभाजन (Partition) में हजारों बेगुनाह लोग
मारे गए – क़त्ल, बलात्कार, संपत्ति और घर लूटना, नष्ट करना और वह भी पूरी क्रूरता
से – बच्चों को उठा कर सर के बल दीवार पर पटक देना, आग में फ़ेंक देना , लोगों को
जिंदा जला देना , औरतों का बलात्कार उनके स्तन काट देना उनके गुप्तांग में छड़
घुसेड़ देना, हाथ डाल कर भ्रूण निकल कर उसे
पटक के मार देना I
यह सब करवाया नेताओं ने और न कोई पकड़ा गया न किसी को सजा हुयी बल्कि
बहुत से ऐसे मंत्री बन गए I साधू, महात्मा,
पीर, फकीर बन गए और धर्म और अध्यात्म के नाम से यौन शोषण करते रहे I
इसके बाद आज तक हर साल दंगे होते रहे और वही सब
होता रहा जो उस समय हुआ था I
इन्क्वायरी कमीशन बैठते रहे कुछ ने रिपोर्ट दी
भी पर कांग्रेस ने और अदालतों ने कभी किसी साजिशी
को सजा नहीं दी I मुंबई के दंगों में मुसलमानों के क़त्ल और बलात्कार के
मास्टरमाइंड बाल ठाकरे को मरने पर स्टेट
फ्यूनरल तक दिया I
गुजरात में हजारों मुसलमानों के क़त्ल और
बलात्कार के मास्टरमाइंड को ढील दी और वह प्रधान मंत्री बन गया I
मुसलमान पढ़े लिखे मुसलमान अपनी अक्ल बंद कर के
मौलवियों की इताअत करते हैं और पूरी कौम बर्बादी की कगार पर पहुँच गयी है I
मुसलमानों को चाहिए मौलवियों को छोड़ कर सीधा
सादा ख़ामोशी से नमाज़ रोज़ा हज करें और
दुनिया में आगे बढ़ें और जो शूद्र और दलित हैं उन्हें अपना समझ सकें और वे शूद्र और
दलित को बताएं उनका असली दुश्मन कौन है I