Tuesday, December 6, 2016

इस्लाम – एक झूठा और एक सच्चा


दुनिया  1400 वर्षों से दाढ़ी और परदे का झूठा इस्लाम है जो मुसलमानों ने खुद गढ़ा है – कुरान में न दाढ़ी का हुक्म है , न खतने का और न यह कि बिना नामहरम मर्द रिश्तेदार के कोई औरत घर के बाहर क़दम न निकले पर हर इस्लामिक मुल्क में यही इस्लाम चल रहा है जो मजहब नहीं फासिज्म है – एक ruling elite जो दौलत और एश की ज़िन्दगी जी रही है ग़ैर मुस्लिम मुल्कों लोगों के साथ मिलजुल कर रह रही है और दूसरे masses जिन्हें दाढ़ी पर्दा मस्जिदों में 5 वक्त कि नमाज़ में ढकेल दिया गया है और जिनके दिमाग और अहसासात को मफ्लूज कर दिया गया है I
  इस इस्लाम के मानने वाले जब 1000 वर्ष पूर्व भारत आये तो न उन्हें ऊंच नीच दिखी  न सती प्रथा न देवदासी प्रथा और न बच्चों की बलि और जब अंग्रेजों ने इनका तख्ता पलटा तब उन्होंने कानून के आगे सब को बराबर किया और सारी अमानवीय प्रथाओं पर रोक लगायी I ऐसे ही मुसलमान Blacks गुलामों कि तस्करी करते रहे ऐसे ही मुसलमान समुन्द्र के spice trade    ships की piracy करते थे जिसे ब्रिटेन ने रोका I
यह मुसलमान दुनिया भर में ताक़त और हिंसा और US और यूरोप में बने हथियारों और जहाजों से पूरी दुनिया जीतना चाहते हैं I  ऐसे लोग इसके इलावा किया करेंगे जो अल कायदा , तालिबान और दायेश कर रहे हैं – बेगुनाहों को मारना और इनके साथ भी वही होगा जो Palestine और Mayanmar में हो रहा है – यह बेगुनाहों को मारेंगे और इनके बेगुनाहों को दूसरे मारेंगे और एक दिन दुनिया इनसे पाक होजाएगी या ज़िल्लत कि मर खा कर ख़ामोशी से छुप के रहेंगे I

दूसरा इस्लाम – सच्चा इस्लाम जो कुरान में है जिसको मुसलमान नहीं मानते
1 दुनिया के सारे इंसान एक माँ बाप कि संतान हैं : ऐसे सच्चे मुसलमान भारत में शूद्र आदिवासी और दलित को बराबरी दिलाने और अन्याय ख़त्म करने के लिए उनका साथ देंगेI  ऐसे सच्चे मुसलमान अपने लिए कोई चीज़ जैसे कि आरक्षण की मांग नहीं करेंगे बल्कि 90 प्रतिशत आरक्षण शूद्र आदिवासी और दलित को दिलाने की बात करेंगे I   ऐसे मुसलमान US और यूरोप में Blacks को न्याय दिलाने की बात करेंगे I  ऐसे मुसलमान US में Native Americans को उनका हक दिलाने की बात करेंगे I कितने इंसान बेगुनाह या मामूली बात पर जेलों पागल खानों प्रोटेक्शन homes में सड़ रहे हैं उन्हें आजाद करने की बात करेंगे I कितने इंसान गुलामी और बंधुआ मजदूरी कर रहे हैं उन्हें आजाद करने की बात करेंगे  कितने बच्चे औरतें यौन शोषण और देह व्यापर पोर्नोग्राफी के लिए मजबूर हैं उन्हें आजाद करने की बात करेंगे I    
2 सारी कायनात अल्लाह की है
इस सच्चे इस्लाम को मानने वाले यह समझते है कि इंसानों को प्राकृतिक सम्पदा को लूटने का कोई हक नहीं है I इंसानों को प्रदूषण करने का कोई हक नहीं है I और इंसानों को weapons of mass destruction बनाने इस्तेमाल करने का कोई हक नहीं है न प्रकृति के खिलाफ कोई प्रयोग करने का कोई हक है I

जब दुनिया इस सच्चे इस्लाम पर आएगी तो न अन्याय होगा न oil minerals कि लूट होगी और न प्रदूषण होगा न नुक्लेअर खतरा होगा I
जिस दुनिया में सब लोग एक माँ बाप कि संतान हैं वहां हर बच्चा अपनी रूचि और योग्यता कि लाइन में आगे बढ़ने के सारे अवसर पायेगा और हर लड़का लड़की आपसी पसंद से शादी के लिए स्वतंत्र रहेंगे I

आइये ऐसा देश ऐसी दुनिया बनाएं I 

Sunday, December 4, 2016

आइये एक नए भारत का निर्माण करें

सभी भाई जो मानवतावाद मानते हैं आइये मिल कर एक नए भारत का निर्माण करें
1000 वर्ष पूर्व आने वालों ने यहाँ रहने वालों  को हिन्दू कहा तो आज भी हम मान लेते हैं कि हम सब हिन्दू हैं संविधान ने देश का नाम भारत और India लिखा है इसलिए हम भारतीय Indian हैं
जो तुर्क  मुग़ल अँगरेज़ आये थे वह लौट गए और उनकी संतान यहीं कि स्त्रियों से पैदा हुयीं और अगर पहली पीढ़ी में वे अपनी स्त्रियाँ लेकर आये भी तो अगली पीढ़ी के संतान यहीं कि स्त्रियों से हुईं   तो हम सब भारत कि नारियों की संतान हैं हम सब भारत कि माताओं कि संतान हैं हम सब भारत माता कि संतान हैं
अगर तुर्क, मुग़ल और अँगरेज़ न आये होते तो क्या स्थिति होती ? वही 10 प्रतिशत सत्ता और संपत्ति के मालिक होते और करीब 55 प्रतिशत नगरों में गुलामी कर रहे होते और 35 प्रतिशत नगरों से बाहर अनार्य होते
या समय के साथ कभी क्रांति होती और वह 10 प्रतिशत सत्ताच्युत कर दिए जाते मार दिए जाते या देश छोड़ कर चले जाते
तुर्क मुग़ल और अंग्रेजों के प्रभाव में धर्म परिवर्तन करने से समस्या समाप्त नहीं हो गयी बल्कि छुप गयी और आज भी 10 प्रतिशत सत्ता संपत्ति के मालिक हैं और बाक़ी 55 प्रतिशत और 35 प्रतिशत उसी हाल में हैं धर्म का मुखोटा चाहे जो भी हो
हमें न धर्म से लड़ना है और न जाति से उन जातियों या परिवारों से भी नहीं दुश्मनी करनी है जो 5000 वर्षों से आज तक मनुवाद का झंडा उठाये हुए हैं  क्यूंकि धर्म और जाति छाया हैं और हमे छाया से नहीं लड़ना है
हमे पूरे भारत में स्वतंत्रता  समता और बंधुत्व लाना है और इसलिए सभी धर्म और जाति के मानवतावादी लोगों से एक जुट होने की अपील है
भारत नगरों में है और ग्रामों में है
नगरों में जो भी उद्योग व्यापर और सेवा कम्पनियाँ हैं वह जिनकी हैं वह अपने उद्योग व्यापर सेवा कंपनियों के बड़ी या छोटी के चीफ एग्जीक्यूटिव , मेनेजर  डायरेक्टर या ट्रस्टी हैं पर स्वामित्व सरकार ( जनता ) का है  जब इन्हें ज़रुरत पड़ती है सरकार ( जनता ) इन्हें कर्जा देती है , कर्जा माफ़ करती है ज़ाहिर है मालिक सरकार ( जनता ) है  यह अपना मुनाफा लेते रहे हैं टैक्स देते रहें प्रदूषण या कोई जन विरोधी कार्य करने पर दंड के भागी होंगे  उद्योग व्यापर और सेवा कम्पनियाँ बड़ी या छोटी  देश की वास्तव में बड़ी सेवा कर रहीं है चीजें बना कर और सेवाएं प्रदान कर के और साथ ही अनेक भाई बहनों को रोज़गार प्रदान कर रही हैं
इसी प्रकार गाँव में सारे खेत और उद्योग बड़े या छोटे जिनके हैं वे इनके ट्रस्टी हैं और स्वामित्व सरकार ( जनता ) का है सरकार इन्हें आर्थिक सहायता देगी , बीज देगी खाद देगी सिंचाई के साधन देगी ट्रेक्टर देगी इसी प्रकार उद्योग पशुपालन और कुटीर उद्योग के लिए सहायता देगी
किसानो से क़र्ज़ वसूली नहीं होगी जिस तरह उद्योगपतियों के क़र्ज़ माफ़ वैसे ही किसानों के क़र्ज़ माफ़  जिस तरह उद्योग व्यापर और सेवा कम्पनियाँ देश की सेवा  कर रही हैं उसी प्रकार और उससे बड़ी सेवा किसान कर रहे हैं
जिन राजनीतिज्ञों  अधिकारियों के पास बिना उद्योग व्यापर सेवा कृषि के बिना अपार संपत्ति है वह सरकार ( जनता ) ले लेगी क्यूंकि यह सरकार ( जनता ) का है और इसी प्रकार मंदिरों में जो अपार संपत्ति है वह सरकार ( जनता ) की है और उसमें से कुछ सरकार ( जनता )ले लेगी और इस धन से गाँव के परिवारों का कल्याण किया जायेगा उन्हें स्वतंत्रता समता और बंधुत्व प्रदान किया जाएगा उनकी ग़रीबी और अपमान को समाप्त किया जायेगा
हर गाँव में ग्रामवासी एक स्त्री को अपना कल्याण मंत्री चुनेंगे और यह स्त्री गाँव के हर परिवार के लिए जिस चीज़ कि आवश्यकता है – कृषि या उद्योग के लिए इसका आकलन करेगी
जिस तरह मैनेजमेंट का डिप्लोमा होता है वैसे ही हाईस्कूल के बाद ग्रामीण क्षेत्र के लड़के लड़कियों को 4 वर्ष का डेवलपमेंट में डिप्लोमा कराया जाएगा
अपनी पुस्तक Mission Indian में मैंने इसका वर्णन किया है :
The boys and girls who have passed high school through State sponsored common examination may be selected on merit basis to pursue 4 years development professional graduates. Such institutes must be opened in rural and tribal area and perhaps four or five may be enough in each State. The candidates will study agriculture, sociology, veterinary medicine, medicine and community health and family planning, banking and insurance, engineering, Indian Constitution, Human Rights, and such other subjects that will make them able to develop their native Mega-village. They will be tutored with spirit of Indianness and with Human Rights values that every child should have opportunities to rise in his or her field of interest and aptitude and the right to marry person of his or her choice with mutual consent. Such development graduates will bring out all round development in their Mega village from opening of cottage industries, banking, insurance, opening of schools and health centres, alternative energy sources, safe water supply, construction of toilets and so on.
      इन लड़के लड़कियों को ब्लाक में नियुक्त किया जायेगा Assistant Village Development Officer के रूप में हर एक को 5 गाँव एलाट किये जायेंगे इस प्रकार सप्ताह में एक बार एक गाँव में जा कर वहां की कल्याण मंत्री की सहायता करेंगे और डेटाबेस तयार करेंगे और ऑनलाइन हर परिवार के लिए किये गए उपाय दर्ज करेंगे  एक ब्लाक में अगर 100 गाँव हैं तो ऐसे 20 लड़के लड़कियां हर ब्लाक में नियुक्त किये जायेंगे और फिर समय के साथ यह ब्लाक के Village Development Officer और फिर जिले के District Village Development Officer बनेंगे गाँव के कल्याण मंत्री से लेकर ऊपर तक direct fund ट्रान्सफर राज्य सरकार करेगी
हर गाँव में बिजली सड़क पानी पहुंचेगा और सभी को सचेत कर दिया जायेगा कि किसी ग्रामवासी के साथ ऊंच नीच और अपमान करने पर कठोर सजा और गाँव से निष्कासन कर दिया जाएगा
सुरक्षा सम्मान पुलिस भी गठित कि जाएगी  स्वेच्छा से कि गयी शादी का विरोध करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्यवाही की जाएगी और ऐसा भारत जहाँ हर स्त्री पुरुष समान हैं यथार्थ किया जाएगा 

Thursday, November 24, 2016

हमारा मिशन अधुरा नहीं रह जाना चाहिए

बात सिर्फ यह नहीं है कि अभी नोटबंदी हुयी है फिर इमरजेंसी लगेगी फिर आरक्षण ख़त्म हो जायेगा फिर मुसलमानों के खिलाफ कुछ किया जाएगा
 भले ही  फ़ासिस्ट अपनी चालों में नाकामयाब हो जाएँ लेकिन असली मिशन अधूरा नहीं रह जाना चाहिए
सारे इंसान हमारे भाई है – दूर दराज़ गाँव के हर मर्द औरत बच्चे तक यह बात पहुंचनी चाहिए कि हम सब बराबर हैं किसी के अधिकारों का हनन नहीं होना चाहिए सब को इन्साफ मिलना चाहिए  सब को आगे बढ़ने का मौक़ा मिलना चाहिए ग़रीबी दूर होनी चाहिए सब को रोज़गार के मौके मिलने चाहिए ।
आर्य  सवर्ण बन गए हैं । शूद्र पिछड़ी जाति कहलाते हैं जिनमें यादव कुर्मी जाट आते हैं और जिन्हें अछूत या चंडाल कहा गया था वह दलित कहलाते हैं इनमें धोबी चमार पासी आते हैं । दलितों को तो काफी कुछ बहुजन समाज पार्टी ने जागृत कर दिया है पर कुछ दलित अब भी मनुवादियों के चंगुल में हैं । यादवों को समाजवादी पार्टी ने जागृत कर दिया है । बाकी पिछड़ी  जातियां मनुवादियों के चंगुल में हैं शिव सेना , बजरंग दल में यही हैं और इन्हीं को मनुवादी इस्तेमाल करते हैं मुसलमानों और ईसाईयों पर हमला करने के लिए । इनको यह पाठ पढाया जाता है कि सिर्फ वह राष्ट्र भक्त हैं और मुसलमान और सेक्युलरिस्ट कांग्रेस समाजवादी  आम आदमी पार्टी यह सब देश द्रोही हैं ।
अब यह समस्या है कि पिछड़ी जातियों कि आँख कैसे खुले और कैसे वह जाने कि उनके दुश्मन सदियों से यही मनुवादी हैं और मुसलमान इसाई सेक्युलरिस्ट सब सच्चे देश भक्त हैं ।   


तीन बुरी ताक़तें

तीन बुरी ताक़तें : आज की दुनिया की तीन मानवता विरोधी शक्तियां हैं 1 इस्लामी आतंकवाद और इस्लमिज़म धर्म पर आधारित 2 गोरों का आर्थिक साम्राज्यवाद टेक्नोलॉजी पर आधारित 3 मनुवादी फासिज्म जाति पर आधारित फासिज्म क्या है ? फासिज्म एक अजीब शब्द है जिसका डिक्शनरी में अर्थ है : Any ideology, movement, programme, tendency etc., that may be characterized as right-wing, chauvinist, authoritative etc. Chauvinism : aggressive or fanatical patriotism ; smug irrational belief in the superiority of one’s own race, party etc. Right wing : the conservative section of assembly,., party etc. Conservative : favouring the preservation of established customs, values etc and opposing innovation. यह बात पहले ही स्पष्ट हो जाए कि सारी बुरी ताक़तें फॉसिज़्म का ही एक रूप होती हैं । मानव जाति में एक तबक़ा हिंसा या चालाकी cunningness द्वारा समाज में या देश में दो तबके बनाता है - एक ruling elite और दूसरा masses ruling elite तबक़ा masses पर दमन चक्र चलाता है उन्हें उनके अधिकारों से वंचित करता है और दुनिया की दौलत अपने क़ब्ज़े में करता है और इस में सफल होने के लिए चाहे सभ्यता की बात करे या धर्म या राष्ट्र की उसका मक़सद masses का दमन ही होता है। एलेग्जेंडर भी दुनिया जीतने निकला था और उसने यूनानी सभ्यता का झंडा बुलंद किया था। caeser ने रोमन सभ्यता का झंडा बुलंद किया था। यही रास्ता यहूदियों ईसाईयों और मुसलमानो ने भी चुना और यही हिटलर ने आर्य जाति के वर्जस्व का सिद्धांत बनाया और फिर रूस और चीन ने मार्क्सिज़्म कम्युनिज्म लेकर अपने देश और अन्य देशों में दमन चक्र चलाया। उग्र और हिंसक मनुष्य सत्ता दौलत और औरत चाहते हैं और इसके लिए एक बड़े तबके को कुचलना चाहते हैं और इसके लिए सभ्यता धर्म, जाति का झंडा बुलंद करते हैं।
1 इस्लामी आतंकवाद और इस्लमिज़म इस्लाम सभी धर्मों की तरह नेकी करना , बुराई से बचना और इबादत है। इस्लाम का सबसे बड़ा पैग़ाम है कि सारे इंसान एक माँ -बाप की औलाद हैं। हर इंसान अपने ढंग से इबादत कर सकता है। लेकिन मुसलमानो दाढ़ी और परदे को इस्लाम बना दिया और ताक़तवर तबक़ा जिस तरह वज़ू नमाज़, रोज़ा हज करता है बस वही सही है बाकी सब ग़लत और वाजिबे क़त्ल हैं यह दीं बना दिया। औरतें परदे में रहें बिना नामहरम मर्द को साथ लिए घर के बाहर निकल नहीं सकतीं और मर्द मस्जिदों में नमाज़ बाजमाअत पढ़ें। क़ुरान में न तो कहीं दाढ़ी रखने को कहा गया है और न कहीं खतना कराने को और न कहीं यह है कि औरत बिना नामहरम मर्द के घर के बाहर न निकले। तो यह बातें दीन कैसे बन गयीं और जो नेकी करने यतीमो बेवाओं साथ नेकी करने को कहा गया वह दीन क्यों न बना ? सच यह है कि क़ुरान या किसी भी धर्म पुस्तक में बहुत सी बातें होती हैं पर उस धर्म को मानने वाले कुछ बातों को चुन लेते हैं और कुछ बातें अपनी तरफ से जोड़ कर पीढ़ी दर पीढ़ी फैलाते रहते हैं और उनका बनाया धर्म ही रह जाता है और बाक़ी दुनिया भी इनके इस चुने धर्म को मूल धर्म मान लेती है। पैग़म्बरे इस्लाम की आँख बंद होते ही जो खलीफा बने उनका मक़सद था इस्लाम के नाम से दुनिया फ़तेह करना इसलिए उन्होंने जिहाद को सबसे बड़ा दीन का अंग बना दिया जो न औरतों न बूढों न बीमारों और न अपाहिजों के लिए मुमकिन है। मुल्क जीतते रहे दौलत कनीज़ें ग़ुलाम आते रहे और ruling elite में बँटते रहे और masses को दाढ़ी पर्दा और मर्दों को नमाज़ जमात में लगा दिया गया। दुनिया का हर मर्द चाहता है कि उसे दूसरी औरतें मिलती रहें और उसकी औरतें उसके कब्जे में बनी रहें पर और लोगों ने तो हकीकत से समझौता कर लिया और monogamy को अपना लिया लेकिन अरब के मर्द ऐसा न कर सके उन्होंने चार शादियों को जायज़ माना जोकि उस समय केवल जंग की वजह से पैदा हुयी विधवा समस्या के निराकरण हेतु अनुमति थी और औरत को बदकारी करने पर पत्थर मार कर मार देना सही समझा जबकि कुरान में कोड़े मारने कि सजा तो है पर मार डालने कि सजा नहीं है। ज्यादा बीवियां रखने के लिए इक्तिदार और दौलत चाहिए औरत कि मर्ज़ी को ख़त्म कर दिया दाढ़ी रख कर सारे मर्द एक जैसे हो गए और जो दिमाग वाले हैं या जज्बात वाले हैं तो साइंस फलसफा आर्ट म्यूजिक सबको हराम कर दिया और जो मर्द चैलेंज बने तो कुफ्र इर्तिदाद का इल्ज़ाम लगा कर उसका सर कलम कर दिया जाए। इस तरह इस्लामी दुनिया में सिर्फ इक्तिदार और दौलत की अहमियत है और यही वजह इनके ज़वाल कि है जिस पर यह थे पर १९३५ से तेल निकल आने से हालात बदल गए और तब इस दौलत से मुस्लिम मुल्कों ने कट्टर इस्लाम को फैलाना शुरू किया जिससे पूरी दुनिया और मुस्लिम मुमालिक खुद दहशतगर्दी की चपेट में आ गए। आज ज़रुरत है कि यह सब कट्टरपन छोड़ कर हर एक को उसके हिसाब से नमाज़ रोज़ा करने कि छूट दी जाए दाढ़ी परदे से निकल कर नेकी को और सारी दुनिया में ज़ुल्म के खिलाफ खड़ा हुआ जाए और जो भी मजलूम हैं दलित Blacks Native Americans उनके लिए खड़ा हुआ जाए। औरतों को उनकी आज़ादी दी जाए और इस्लाम का असली पैगाम दुनिया के सारे इंसान एक माँ बाप कि औलाद हैं इसे फैलाया जाए। मान लीजिये islamists ताक़त के जोर से पूरी दुनिया को मुस्लिम बना देते हैं तो रूस चीन जापान अमेरिका यूरोप के जो लोग दौलतमंद हैं उन्हें दाढ़ी बढ़ा कर पांच वक़्त नमाज़ पढ़ने में क्या दिक्क़त होगी ? क्या अल्लाह यही चाहता है ? दौलत, ताक़त तकब्बुर दुनिया के सारे ruling elite दाढ़ी रख कर पांच बार नमाज़ पढ़े और एक बार हज करें और पूरी दुनिया एक साथ हज करे ? और जो ग़रीब और मजबूर हैं जो ज़ुल्म का शिकार हैं ? क्या बनी उमय्या और बनी अब्बासिया के वक़्त की मुस्लिम दुनिया ऐसी न थी ? या यजीद के वक़्त कि दुनिया ऐसी न थी ? क्या जिहाद का मतलब बेगुनाहों को मार डालना है ? मुसलमानों ने दो इस्लाम बना रखे हैं वैसे मुस्लिम हिस्ट्री में एक वक़्त ऐसा भी था जब इस्माइली शियों के एक फिरके qarmatian ने पूरे मुस्लिम खिलाफत को उलट पलट दिया था मक्का में हजारों लोगों को क़त्ल किया और हजरे असवद भी उखाड़ कर ले गए थे। ऐसे खून खराबे कई बार हो चुके हैं और अब तालिबान बोको हराम और दायेश यह सब कर रहे हैं। मुसलमानों ने कुरान से सही इस्लाम नहीं चुना इसका यह नतीजा है । एक इस्लाम सऊदी अरबिया और दूसरे मुल्कों का है जो दाढ़ी परदे का इस्लाम जिसमे जो माँगना है अल्लाह से मांगो इसका क्लाइमेक्स मुसलमानों का खलीफा बनाने में है जैसाकि बगदादी ने दावा किया है। दूसरा इस्लाम ईरान का है यह भी दाढ़ी और परदे का इस्लाम है पर यहाँ क्लाइमेक्स किसी अयतोल्लाह का नायब इमाम बन जाने में है। दोनों का मकसद एक है कि मुस्लमान अपनी आँखें और दिमाग बंद कर के सिर्फ इताअत करें। मुस्लिम दुनिया human trafficking में भी शामिल है , नारकोटिक्स ट्रेड में भी है और ब्रिटिश कंट्रोल के पहले समुन्द्र के ट्रेड पर piracy भी करते थे। इसलिए यह समझना कि नमाज़ रोज़ा हज करने वाले बड़े बड़े संगीन जुर्म नहीं करते नासमझी और लाइल्मी है। ऐसी दुनिया में साइंस टेक्नोलॉजी ख़त्म हो जायेगी भुखमरी फैलेगी बीमारियाँ फैलेंगी सारी औरतें घरों में क़ैद और सारे मर्द दाढ़ी बढ़ा कर मस्जिदों में और यह दुनिया वह नहीं है जो कुरान चाहता है कुरान तो कहता है देखो और गौर करो। सही दुनिया वही है जिसमें औरत मर्द सब आजाद हों साइंस टेक्नोलॉजी आर्ट म्यूजिक सब हो। सही इस्लाम क्या है ? इस्लाम सभी धर्मों की तरह नेकी करना , बुराई से बचना और इबादत है। इस्लाम का सबसे बड़ा पैग़ाम है कि सारे इंसान एक माँ -बाप की औलाद हैं। हर इंसान अपने ढंग से इबादत कर सकता है। जिस तरह से islamists सोचते हैं कि ताक़त से दुनिया को मुस्लिम बनाया जा सकता है वैसे ही कुछ लोग christians और jews में भी हैं जो islam के पैग़म्बर को झूठा समझते हैं और पूरी दुनिया को अपने मज़हब पर लाना चाहते हैं। islamists आज की दुनिया में समस्या बने हुए हैं कल ऐसे ही इसाई या यहूदी या कोई और धर्म या आइडियोलॉजी लेकर दूसरे लोग खतरा बन सकते हैं।
2 गोरों का आर्थिक साम्राज्यवाद गोरों के साम्राज्यवाद में किसी धर्म कि ज़रुरत नहीं है। साइंस और टेक्नोलॉजी के विकास के बाद इन्हें दुनिया भर से raw materials चाहिए है और markets चाहिए हैं जहाँ यह अपनी products और services बेच सकें इनको सिर्फ मुनाफा चाहिए वैसे मुनाफा कमाने के लिए human trafficking और नारकोटिक्स ट्रेड में भी है और human organs ट्रेड भी हैं। दुनिया भर से चौबीसों घंटे रोजाना लगातार नेचुरल products animal products minerals oil gas की लूट चल रही है। इस लूट को जारी रखने के लिए मिडिल ईस्ट एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका में बादशाही या तानाशाही बिठा रखी है और लोगों के प्रजातान्त्रिक आकांक्षाओं को कुचला जा रहा है और साथ ही यह अमेरिका और यूरोप के गोरे दुनिया भर में प्रजातंत्र और मानव अधिकारों का झंडा बुलंद किये हैं। पूरी दुनिया प्रदूषण का शिकार हो रही है और इनका बस चले तो साफ हवा और साफ़ पानी भी बेचना शुरू कर दें। इनकी बनायीं यह दुनिया इस मंजिल पर पहुँच सकती है कि जब ruling elite में किसी को भी कोई organ चाहिए हो तो masses में से किसी से ले लें खरीद कर या ज़बरदस्ती दुनिया में बढ़ते प्रदूषण जो इनकी देन है यह स्वयं दो काम कर सकते हैं या तो धरती के एक भाग को अपने लिए सुरक्षित और प्रदूषण मुक्त कर लें और जो कुछ प्रदूषण हो उसे धरती के शेष भाग जहाँ आम आदमी बसे वहां निष्कासित करने की व्यवस्था बना लें या जैसे ही संभव हो पूरी धरती को अपना ग़ुलाम बनाए रखते हुए किसी दूसरे ग्रह या उपग्रह पर अपनी बस्ती बसा लें इसलिए दुनिया के सभी लोगों को साइंस और टेक्नोलॉजी में आगे बढ़ना आवश्यक है और जागरूक रहना आवश्यक है यहाँ यह भी समझने कि बात है कि आज की दुनिया में गोरे समस्या बने हुए हैं और कल रूस, चीन , जापान या कोई और शक्ति उभर कर बाकी दुनिया के लिए समस्या बन सकती है।

3 मनुवादी फासिज्म भारतीय पेनिनसुला धरती का एक अनोखा भूभाग है जिसमे पिछले 5000 वर्षो से फ़ासिस्ट अल्पसंख्यक समुदाय और बहुसंख्यक बहुजन समाज के बीच संघर्ष चल रहा है और धर्म की आड़ लेकर भोले भाले बहुजन समाज को ग़ुलाम और तिरस्कृत बना दिया गया। फ़ासिस्ट संविधान मनु स्मृति और इस जैसी अन्य पुस्तकों में है और इसको खुले छुपे मानने वाले लोगों को मायावती जी ने सही नाम मनुवादी दिया है और बहुजन समाज के हितों की रक्षा हेतु डा भीम राव आंबेडकर जी ने स्वतंत्र भारत के संविधान की रचना की थी। बहुसंख्यक समाज को पूरी तरह ग़ुलाम बनाने के बाद इनमे दो प्रमुख तबके किये गए - एक शूद्र जिन्हें छोटे छोटे कार्य दिए गए और इन्हें आर्य नगरी में निवास अनुमन्य था और दूसरा तबका जो वास्तव में यहाँ का मूल निवासी रहा होगा उसे आर्य नगरी में रात में आना अनुमन्य नहीं था और यह दिन में नगर द्वार पर कुण्डी खटखटा कर अनुमति मिलने पर प्रवेश कर सकते थे। सूअर पालन , चमड़े का काम और धोबी का काम यह लोग करते थे। ब्राह्मणों द्वारा प्रतिपादित धर्म को वैदिक धर्म कहा जाता है जिसमे पशु बलि , हवन यज्ञ होते थे संभवत मध्य एशिया से आने वाले यह लोग अग्नि पूजक थे भगवा रंग संभवत अग्नि को प्रदर्शित करता है। नर बलि भी वैदिक धर्म में होती थी शिशु बलि को अंग्रेज़ो ने ख़त्म कराया था सती प्रथा भी इनके धर्म में थी और स्त्रियों का यौन शोषण अप्राकृतिक यौन और उनकी बलि और अंगों का काटना भी इनका धर्म था। सती प्रथा के पीछे केवल विधवाओं को संपत्ति से अलग करना नहीं था जो क़ानून द्वारा किया जा सकता था। युवा विधवा जिससे विवाह या यौन सम्बन्ध कर पाने का इनको साहस नहीं था कि कहीं खुद ही न मर जायें और कहीं वह अन्य जाति में न चली जाए इसलिए सती प्रथा चालू की गयी। संभवत अनेक शूद्र जातियां मूल निवासी पुरुषों और आर्य विधवाओं की संतान हैं और अन्य शूद्र जातियां शूद्र पुरुषों और आर्य विधवाओं की संतान है और उसके बाद सती प्रथा चालू की गयी। मंदिर यौन शोषण के गढ़ थे और नारी चीत्कार सुन कर कोई शूद्र आक्रमण न कर दे इसी लिए कोई मंदिर के आस पास आने न ही पाए इसलिए कानो में सीसा डालने और जीभ और गला काटने के क़ानून बनाये गए। ऐसे अँधेरे में बौद्ध धर्म और जैन धर्म जीवन ज्योति के रूप में उभरे और मनुवादियों की हिंसा का शिकार हुए। बौद्ध धर्म कई शताब्दियों तक गौरव स्थापित करने के बाद भारत से निष्कासित हो कर एशिया के अन्य देशों में पहुंचा। यहाँ बौद्ध विहार नष्ट कर दिए गए बुद्ध प्रतिमाओं में सर हटा कर शिव का सर लगा दिया गया और शिव मंदिर बन गए। दक्षिण भारत में 8000 जैनियों को सूली लटका दिया गया और जैन धर्म ख़त्म हो कर बचे खुचे जैन वैदिक धर्म की एक शाखा बन गए। ऐसे में अपने मज़हबी जूनून और लूट मार की ग़र्ज़ से मुसलमानों ने हिन्द पर हमले किये। शूद्रों की धन संपत्ति मंदिरों में सोने की मूर्तियों और ज़ेवरों के रूप में दूर दूर तक चर्चित थी और इन्हीं सब के लिए सुबुक्तगीन और महमूद ग़ज़नवी ने हमले किये। एलेग्जेंडर भी पहले आ चूका था। मुसलमानों ने सब को हिन्दू कहा , न वैदिक धर्म, बौद्ध धर्म जैन धर्म का फ़र्क़ समझा न शूद्र और अछूत का दर्द समझा। पहले तो ब्राह्मण डरे फिर धीरे धीरे कुछ ब्राह्मण नारी देह का प्रयोग कर के उन जुनूनियों को समझाया वेद भी आसमानी किताब हैं और बौद्ध नास्तिक होते हैं और उनके जूनून को बौद्धों की और मोड़ दिया और मुसलमान भी उंच नीच मानने लगे। ना सती प्रथा बाल विवाह न विधवा विवाह पर प्रतिबन्ध न शिशु बलि किसी से उन पर कोई फ़र्क़ नहीं पड़ा। फिर एक वक़्त आया मनुवादियों ने ग़द्दारी कर के अंग्रेजों को सत्ता दिला दी। अँगरेज़ भी शुरू में तो समझ नहीं पाए फिर उन्होंने क्राउन लॉ के सामने सब को बराबर कर दिया। सती , बाल विवाह, शिशु बलि समाप्त कर दी और विधवा विवाह अनुमन्य कर दिया। तब इनके खिलाफ मनुवादियों ने झूटी अफवाह फैला कर ग़दर छेड़ दिया। मुसलमान समझे उनकी हुकूमत वापस आ जायेगी और बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया। मनुवादी राजा अंग्रेजों के साथ हो गए और ग़दर कुचल दिया गया। मुग़ल शहज़ादों को नवाबज़ादों को सूली पर चढ़ा दिया गया। मनुवादियों का एक तबक़ा अंग्रेजों का हितैषी हो गया। में सर सय्यद अहमद खान ने भी इतने बड़े नुकसान के बाद यही सोचा कि मुसलमान अमन से रहे और तालीम में आगे बढ़ें। अंग्रेजों ने यूनिवर्सल एजुकेशन शुरू की। ईश्वर चंद्र जिन्हें विद्यासागर कहा जाता है अंग्रेजों से अनुरोध किया की शिक्षा सिर्फ भद्र लोगों तक सीमित रखे और राष्ट्र पिता बनने वाले मोहनदास करमचंद गाँधी ने कहा एक किसान स्कूली शिक्षा ले कर क्या करेगा। कट्टर मनुवादियों ने 1925 में आर एस एस की स्थापना कर के मुसलमानों के खिलाफ प्रोपेगंडा शुरू किया। मनुवादी जातियां तीन हैं - ब्राह्मण क्षत्रिय और वैश्य। मुस्लिम काल में ही एक जाति कायस्थ बनी जिसे मुग़लों ने शिक्षित करा कर अपने कोर्ट में रखा बाद में यह अंग्रेजों से भी सरपरस्ती पाते रहे और आज़ादी के बाद मनुवादियों से मिल गए और इस तरह यह चार जातियां सवर्ण हिन्दू कहलाएं। शूद्र बैकवर्ड हो गए और दलित व आदिवासियों को शिड्यूल्ड कास्ट और शिड्यूल्ड ट्राइब कहा जाता है। जब आज़ादी के दिन क़रीब आये तो मनुवादियों के सामने कई खतरे थे : मुसलमान सत्ता में न आ जाएँ , डा आंबेडकर से खतरा था कहीं दलित मुसलमान या क्रिस्चियन न हो जाएँ दलित शूद्र मिल न जाएँ और कहीं मार्क्सवाद न क़ब्ज़ा कर ले। देश विभाजन, डरे यहाँ रुके मुसलामानों के वोट बैंक , रिजर्वेशन और डा आंबेडकर की शीघ्र मृत्यु से सारे खतरे टल गए और कांग्रेस शासन काल में मनुवादी हर शाख की सबसे ऊपरी टहनियों पर बैठ गए चाहे शासन , प्रशासन, सेना , पुलिस, व्यापार, बैंक , मीडिया, पोलिटिकल पार्टियां कांग्रेस , जन संघ कम्युनिस्ट सभी में , संगठित अपराध सब इनके क़ब्ज़े में है - एक भाई यहां तो दूसरा भाई वहाँ, एक बेटा यहाँ तो एक दामाद वहाँ। पब्लिक मनी स्कैम्स के ज़रिये इनकी जेबों में आ रहा है। बैंकों से लोन्स ले कर लोन माफ़ हो जाता है। कोई अपराध हो कोई करप्शन हो या तो पकडे नहीं जाएंगे या सजा नहीं होगी। जेलों में बैकवर्ड्स दलित और मुसलमान बंद हैं। यह मनुवादी आने वाले समय में गोरों से मिल कर विश्वव्यापी मनुवादी फासिज्म स्थापित कर सकते हैं जिसमे अरब और ईरान के गोरे मुसलमान भी सम्मिलित हो सकते हैं । इस प्रकार हम देखते हैं कि फासिज्म के तीन रूप हैं : 1 प्राचीन काल का मनुवादी फासिज्म 2 मध्यकालीन मुस्लिम फासिज्म 3 आधुनिक आर्थिक टेक्नोलॉजी आधारित फासिज्म ज़रुरत है दलित Blacks Native Americans और सभी दबे कुचले लोगों के लिए एक जुट हुआ जाए।

Monday, November 14, 2016

2 भारत और नफरत का धर्म गुरु



नफरत की राह चलने वालों ने जातिगत और साम्प्रदायिक नफरतों से बढ़ कर अब दो भारत बना दिए
एक भारत है गोरे भारतवासियों  का - NRIs , अम्बानी अदानी मल्लया और सभी काले धन वालों का
दूसरा भारत है कालों का ग़रीब किसान मज़दूर बेरोज़गार और सभी आम भारतियों का जिन्हें वह घोटालेबाज़ कहता है।
शुरू में यह उम्मीद की गयी थी की  NRIs अपना धन देश के विकास पर लगाए गे पर फिर एक नया दर्शन एक नयी कहानी बनी   चींटों की जो शक्कर चाहते है reservation चाहते है   यह सब निकम्मे हैं   और दुसरे हैं टिड्डे जो अपनी मेहनत से आगे बढे विदेश गए देश का नाम किया  अब वह अपना धन देश के इन निकम्मो पर क्यों लगाए।
तो यही संघ का और उसका नया धर्म बना    NRIs  से प्रेम  और यहाँ के कालों से नफरत। 
जबकि यहाँ रह कर हम ने देश और परिवार की सेवा की देश को 21 वी  शताब्दी में ले आये।  एपीजे अब्दुल कलाम  NRI  नहीं थे।  अम्बानी अडानी के कर्ज़े माफ़ हो रहे हैं   बैक डोर से काला धन नए नोट में बदला जा रहा है   और परेशान जनता पर वह हँस  रहा है NRIs हँस रहे हैं तालिया बजा रहे हैं।  शादी की बात कर रहा है  बिमारी आपरेशन  मौत की बात छुपा गया।  सुनिये नफरत के धर्म गुरु को

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Two INDIA and Apostle of HATE

Two INDIA and Apostle of HATE
They need to hate some group – earlier it was CASTE but backwards and some Dalits are his Bhakts. Then Muslims but Muslims don’t pose any financial threat.
So they made two India – one natives and other NRIs or Diaspora. Earlier he hoped that NRIs will invest their money to develop India. But a new philosophy a new story of ants and grasshoppers changed whole outlook. Ants do nothing just want sugar- they want reservations, they want government aid. But grasshoppers are hard working brilliant people who went to foreign lands and made their place and now you expect they invest their hard money on these wretched? They left their family, their parents, their country and why they now do anything for these wretched?
He did globe-trotting met NRIs everywhere. He met Whites, Arabs, Iranians, Russians and Jap and everywhere he was welcomed and embraced.
Then his HATE found its new object- native Indians. They all are black and have black money. They deserve to suffer and they must be made to suffer. He demonetized on 8th November at 8 PM but maybe he planned to demonetize  on 8th August at 8 PM- 8-8-16 but things were not ready yet.
Now he is mocking native Indians in gathering of NRIs and they are clapping.
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Tuesday, November 1, 2016

Let us reconcile on Terrorism and Counterterrorism



After real or fake encounter of 8 SIMI activists, social media is deluged with two sorts of emotional response- one is horror at killing of eight human beings non-judicially against values of modern society and on any conspiracy hatched by BJP government and on other hand there is vehement condemnation of those who are shedding crocodile tears over killing of terrorists and what one said: Salaam to MP police if encounter id real and double Salaam if it is fake.

There are important points to be understood and agreed upon to be saved from verbal vitriolism :
1 Terrorism is a grave crime against humanity and all terrorists must be brought to justice.
2 No innocent person must be falsely implicated.

Terrorism by Muslims is specially abhorring for two reasons :
1 The country was partitioned for Muslims and so they have no reason to become violent and they must move to Pakistan.
2 Pakistan is engaged in fanning terrorism.

Modi was made PM by 33% votes to control and crush Muslim terrorism.
Now if some real Muslim terrorist is arrested then he may be released by Court in India because of lack of evidences and if Court gives death sentence a section of people get shocked and then mercy appeal to Supreme Court and President and if they get mercy again it is injustice to families suffered and if their mercy appeal is rejected and they are hanged again a section of people get shocked and many educated people are against death penalty.
So those who have pledged to crush Muslim terrorism and brought to power for that have following options ;

1 Kill the terrorists on the spot as was done in Ishrat Jahan case
2 Get them killed by fellow inmates in the jail
3 Get them killed if they get released
4 Plot their escape and then kill them
Further keep a watch on Court and if Court is going to release them then take last action.
The terrorists are enemy of humanity and human values of secularism, democracy and Human Rights and so they don’t deserve any benefit from these values.
But counter-terrorists must pledge that no innocent Muslim will be falsely implicated and killed as is true in case of Ishrat Jahan and many Muslim youth and government must ensure their release and may put conditions and limitations on their release.
Then these terrorists are just pawn in hands of greater enemies of humanity:
1 The ideology and ideologues must be defeated
2 The training camps must be destroyed
3 The funding and supply of arms and ammunitions must be disrupted
4 The politicians, clergy, scholars and wealthy people behind terrorism must be booked.
The alternative to death penalty must be sought and one I thought is that an area in forest must be cordoned for hardened criminals and they be left there to fend themselves there they themselves grow their food and procure their water away from human society.