नफरत की राह चलने वालों ने जातिगत और साम्प्रदायिक
नफरतों से बढ़ कर अब दो भारत बना दिए
एक भारत है गोरे भारतवासियों का - NRIs , अम्बानी अदानी मल्लया और सभी काले धन वालों
का
दूसरा भारत है कालों का ग़रीब किसान मज़दूर बेरोज़गार
और सभी आम भारतियों का जिन्हें वह घोटालेबाज़ कहता है।
शुरू में यह उम्मीद की गयी थी की NRIs अपना धन देश के विकास पर लगाए गे पर फिर एक
नया दर्शन एक नयी कहानी बनी चींटों की जो
शक्कर चाहते है reservation चाहते है यह सब निकम्मे हैं और दुसरे हैं टिड्डे जो अपनी मेहनत से आगे बढे
विदेश गए देश का नाम किया अब वह अपना धन देश
के इन निकम्मो पर क्यों लगाए।
तो यही संघ का और उसका नया धर्म बना NRIs से प्रेम और यहाँ के
कालों से नफरत।
जबकि यहाँ रह कर हम ने देश और परिवार की सेवा
की देश को 21 वी शताब्दी में ले आये। एपीजे अब्दुल कलाम NRI नहीं थे। अम्बानी अडानी
के कर्ज़े माफ़ हो रहे हैं बैक डोर से काला
धन नए नोट में बदला जा रहा है और परेशान जनता
पर वह हँस रहा है NRIs हँस रहे हैं तालिया बजा रहे हैं। शादी की बात कर रहा है बिमारी आपरेशन
मौत की बात छुपा गया। सुनिये नफरत के
धर्म गुरु को
https://www.facebook.com/permalink.php?story_fbid=167918833672528&id=100013632367920&comment_id=168558100275268&reply_comment_id=168674350263643¬if_t=feed_comment_reply¬if_id=1479124779425761
No comments:
Post a Comment