तीन बुरी ताक़तें : आज की दुनिया की तीन
मानवता विरोधी शक्तियां हैं 1 इस्लामी आतंकवाद और इस्लमिज़म – धर्म पर आधारित 2 गोरों का आर्थिक
साम्राज्यवाद –
टेक्नोलॉजी पर आधारित 3 मनुवादी फासिज्म –जाति पर आधारित फासिज्म क्या है ? फासिज्म एक अजीब
शब्द है जिसका डिक्शनरी में अर्थ है :
Any
ideology, movement, programme, tendency etc., that may be characterized as
right-wing, chauvinist, authoritative etc. Chauvinism : aggressive or fanatical
patriotism ; smug irrational belief in the superiority of one’s own race, party
etc. Right wing : the conservative section of assembly,., party etc.
Conservative : favouring the preservation of established customs, values etc
and opposing innovation. यह बात पहले ही स्पष्ट हो जाए कि सारी बुरी ताक़तें फॉसिज़्म
का ही एक रूप होती हैं । मानव जाति में एक तबक़ा हिंसा या चालाकी cunningness द्वारा समाज में या
देश में दो तबके बनाता है - एक ruling
elite और दूसरा masses
। ruling
elite तबक़ा masses
पर दमन चक्र चलाता है उन्हें उनके अधिकारों से वंचित करता है और दुनिया की
दौलत अपने क़ब्ज़े में करता है और इस में सफल होने के लिए चाहे सभ्यता की बात करे या
धर्म या राष्ट्र की उसका मक़सद masses का दमन ही होता है। एलेग्जेंडर भी दुनिया जीतने
निकला था और उसने यूनानी सभ्यता का झंडा बुलंद किया था। caeser ने रोमन सभ्यता का
झंडा बुलंद किया था। यही रास्ता यहूदियों ईसाईयों और मुसलमानो ने भी चुना और यही
हिटलर ने आर्य जाति के वर्जस्व का सिद्धांत बनाया और फिर रूस और चीन ने
मार्क्सिज़्म कम्युनिज्म लेकर अपने देश और अन्य देशों में दमन चक्र चलाया। उग्र और हिंसक
मनुष्य सत्ता दौलत और औरत चाहते हैं और इसके लिए एक बड़े तबके को कुचलना चाहते हैं
और इसके लिए सभ्यता धर्म, जाति का झंडा बुलंद करते हैं।
1 इस्लामी आतंकवाद और इस्लमिज़म इस्लाम सभी धर्मों
की तरह नेकी करना , बुराई से बचना और इबादत है। इस्लाम का सबसे बड़ा पैग़ाम है कि
सारे इंसान एक माँ -बाप की औलाद हैं। हर इंसान अपने ढंग से इबादत कर सकता है। लेकिन मुसलमानो
दाढ़ी और परदे को इस्लाम बना दिया और ताक़तवर तबक़ा जिस तरह वज़ू नमाज़, रोज़ा हज करता है बस
वही सही है बाकी सब ग़लत और वाजिबे क़त्ल हैं यह दीं बना दिया। औरतें परदे में रहें
बिना नामहरम मर्द को साथ लिए घर के बाहर निकल नहीं सकतीं और मर्द मस्जिदों में
नमाज़ बाजमाअत पढ़ें। क़ुरान में न तो कहीं दाढ़ी रखने को कहा गया है और न कहीं खतना
कराने को और न कहीं यह है कि औरत बिना नामहरम मर्द के घर के बाहर न निकले। तो यह
बातें दीन कैसे बन गयीं और जो नेकी करने यतीमो बेवाओं साथ नेकी करने को कहा गया वह
दीन क्यों न बना ? सच यह है कि क़ुरान या किसी भी धर्म पुस्तक में बहुत सी
बातें होती हैं पर उस धर्म को मानने वाले कुछ बातों को चुन लेते हैं और कुछ बातें
अपनी तरफ से जोड़ कर पीढ़ी दर पीढ़ी फैलाते रहते हैं और उनका बनाया धर्म ही रह जाता
है और बाक़ी दुनिया भी इनके इस चुने धर्म को मूल धर्म मान लेती है। पैग़म्बरे इस्लाम
की आँख बंद होते ही जो खलीफा बने उनका मक़सद था इस्लाम के नाम से दुनिया फ़तेह करना
इसलिए उन्होंने जिहाद को सबसे बड़ा दीन का अंग बना दिया जो न औरतों न बूढों न
बीमारों और न अपाहिजों के लिए मुमकिन है। मुल्क जीतते रहे दौलत कनीज़ें ग़ुलाम आते
रहे और ruling
elite में बँटते रहे और masses को दाढ़ी पर्दा और मर्दों को नमाज़ जमात में लगा दिया
गया।
दुनिया का हर मर्द चाहता है कि उसे दूसरी औरतें मिलती रहें और उसकी औरतें उसके
कब्जे में बनी रहें पर और लोगों ने तो हकीकत से समझौता कर लिया और monogamy को अपना लिया लेकिन
अरब के मर्द ऐसा न कर सके उन्होंने चार शादियों को जायज़ माना जोकि उस समय केवल जंग
की वजह से पैदा हुयी विधवा समस्या के निराकरण हेतु अनुमति थी और औरत को बदकारी
करने पर पत्थर मार कर मार देना सही समझा जबकि कुरान में कोड़े मारने कि सजा तो है
पर मार डालने कि सजा नहीं है। ज्यादा बीवियां रखने के लिए इक्तिदार और दौलत चाहिए
औरत कि मर्ज़ी को ख़त्म कर दिया दाढ़ी रख कर सारे मर्द एक जैसे हो गए और जो दिमाग
वाले हैं या जज्बात वाले हैं तो साइंस फलसफा आर्ट म्यूजिक सबको हराम कर दिया और जो
मर्द चैलेंज बने तो कुफ्र इर्तिदाद का इल्ज़ाम लगा कर उसका सर कलम कर दिया जाए। इस तरह इस्लामी
दुनिया में सिर्फ इक्तिदार और दौलत की अहमियत है और यही वजह इनके ज़वाल कि है जिस
पर यह थे पर १९३५ से तेल निकल आने से हालात बदल गए और तब इस दौलत से मुस्लिम
मुल्कों ने कट्टर इस्लाम को फैलाना शुरू किया जिससे पूरी दुनिया और मुस्लिम
मुमालिक खुद दहशतगर्दी की चपेट में आ गए। आज ज़रुरत है कि यह सब कट्टरपन छोड़ कर हर
एक को उसके हिसाब से नमाज़ रोज़ा करने कि छूट दी जाए दाढ़ी परदे से निकल कर नेकी को
और सारी दुनिया में ज़ुल्म के खिलाफ खड़ा हुआ जाए और जो भी मजलूम हैं दलित Blacks Native
Americans उनके लिए खड़ा हुआ जाए। औरतों को उनकी आज़ादी दी जाए और इस्लाम का असली पैगाम
दुनिया के सारे इंसान एक माँ –बाप कि औलाद हैं इसे फैलाया जाए। मान लीजिये islamists ताक़त के जोर से पूरी
दुनिया को मुस्लिम बना देते हैं तो रूस चीन जापान अमेरिका यूरोप के जो लोग दौलतमंद
हैं उन्हें दाढ़ी बढ़ा कर पांच वक़्त नमाज़ पढ़ने में क्या दिक्क़त होगी ? क्या अल्लाह यही
चाहता है ?
दौलत,
ताक़त तकब्बुर दुनिया के सारे ruling elite दाढ़ी रख कर पांच बार
नमाज़ पढ़े और एक बार हज करें और पूरी दुनिया एक साथ हज करे ? और जो ग़रीब और मजबूर
हैं जो ज़ुल्म का शिकार हैं ? क्या बनी उमय्या और बनी अब्बासिया के वक़्त की मुस्लिम दुनिया ऐसी
न थी ?
या यजीद के वक़्त कि दुनिया ऐसी न थी ? क्या जिहाद का मतलब बेगुनाहों को मार डालना है ? मुसलमानों ने दो
इस्लाम बना रखे हैं वैसे मुस्लिम हिस्ट्री में एक वक़्त ऐसा भी था जब इस्माइली
शियों के एक फिरके qarmatian ने पूरे मुस्लिम खिलाफत को उलट पलट दिया था मक्का
में हजारों लोगों को क़त्ल किया और हजरे असवद भी उखाड़ कर ले गए थे। ऐसे खून खराबे
कई बार हो चुके हैं और अब तालिबान बोको हराम और दायेश यह सब कर रहे हैं। मुसलमानों
ने कुरान से सही इस्लाम नहीं चुना इसका यह नतीजा है । एक इस्लाम सऊदी अरबिया और
दूसरे मुल्कों का है जो दाढ़ी परदे का इस्लाम जिसमे जो माँगना है अल्लाह से मांगो
इसका क्लाइमेक्स मुसलमानों का खलीफा बनाने में है जैसाकि बगदादी ने दावा किया है।
दूसरा इस्लाम ईरान का है यह भी दाढ़ी और परदे का इस्लाम है पर यहाँ क्लाइमेक्स किसी
अयतोल्लाह का नायब इमाम बन जाने में है। दोनों का मकसद एक है कि मुस्लमान अपनी आँखें और
दिमाग बंद कर के सिर्फ इताअत करें। मुस्लिम दुनिया human trafficking में भी शामिल है , नारकोटिक्स ट्रेड
में भी है और ब्रिटिश कंट्रोल के पहले समुन्द्र के ट्रेड पर piracy भी करते थे। इसलिए
यह समझना कि नमाज़ रोज़ा हज करने वाले बड़े बड़े संगीन जुर्म नहीं करते नासमझी और
लाइल्मी है।
ऐसी दुनिया में साइंस टेक्नोलॉजी ख़त्म हो जायेगी भुखमरी फैलेगी बीमारियाँ
फैलेंगी सारी औरतें घरों में क़ैद और सारे मर्द दाढ़ी बढ़ा कर मस्जिदों में और यह
दुनिया वह नहीं है जो कुरान चाहता है कुरान तो कहता है देखो और गौर करो। सही दुनिया वही है
जिसमें औरत मर्द सब आजाद हों साइंस टेक्नोलॉजी आर्ट म्यूजिक सब हो। सही इस्लाम क्या है ? इस्लाम सभी धर्मों
की तरह नेकी करना , बुराई से बचना और इबादत है। इस्लाम का सबसे बड़ा पैग़ाम है कि
सारे इंसान एक माँ -बाप की औलाद हैं। हर इंसान अपने ढंग से इबादत कर सकता है। जिस तरह से islamists सोचते हैं कि ताक़त
से दुनिया को मुस्लिम बनाया जा सकता है वैसे ही कुछ लोग christians और jews में भी हैं जो islam के पैग़म्बर को झूठा
समझते हैं और पूरी दुनिया को अपने मज़हब पर लाना चाहते हैं। islamists आज की दुनिया में
समस्या बने हुए हैं कल ऐसे ही इसाई या यहूदी या कोई और धर्म या आइडियोलॉजी लेकर
दूसरे लोग खतरा बन सकते हैं।
2 गोरों का आर्थिक साम्राज्यवाद गोरों के
साम्राज्यवाद में किसी धर्म कि ज़रुरत नहीं है। साइंस और टेक्नोलॉजी के विकास के
बाद
इन्हें दुनिया भर से raw materials चाहिए है और markets चाहिए हैं जहाँ यह
अपनी products
और services
बेच सकें इनको सिर्फ मुनाफा चाहिए वैसे मुनाफा कमाने के लिए human
trafficking और नारकोटिक्स ट्रेड में भी है और human organs ट्रेड भी हैं। दुनिया भर से
चौबीसों घंटे रोजाना लगातार नेचुरल products animal products minerals oil gas
की लूट चल रही है। इस लूट को जारी रखने के लिए मिडिल ईस्ट एशिया, अफ्रीका और लैटिन
अमेरिका में बादशाही या तानाशाही बिठा रखी है और लोगों के प्रजातान्त्रिक
आकांक्षाओं को कुचला जा रहा है और साथ ही यह अमेरिका और यूरोप के गोरे दुनिया भर
में प्रजातंत्र और मानव अधिकारों का झंडा बुलंद किये हैं। पूरी दुनिया प्रदूषण
का शिकार हो रही है और इनका बस चले तो साफ हवा और साफ़ पानी भी बेचना शुरू कर दें। इनकी बनायीं यह
दुनिया इस मंजिल पर पहुँच सकती है कि जब ruling elite में किसी को भी कोई organ चाहिए हो तो masses में से किसी से ले
लें खरीद कर या ज़बरदस्ती दुनिया में बढ़ते प्रदूषण जो इनकी देन है यह स्वयं दो काम कर
सकते हैं या तो धरती के एक भाग को अपने लिए सुरक्षित और प्रदूषण मुक्त कर लें और
जो कुछ प्रदूषण हो उसे धरती के शेष भाग जहाँ आम आदमी बसे वहां निष्कासित करने की
व्यवस्था बना लें या जैसे ही संभव हो पूरी धरती को अपना ग़ुलाम बनाए रखते हुए किसी
दूसरे ग्रह या उपग्रह पर अपनी बस्ती बसा लें इसलिए दुनिया के सभी
लोगों को साइंस और टेक्नोलॉजी में आगे बढ़ना आवश्यक है और जागरूक रहना आवश्यक है यहाँ यह भी समझने कि
बात है कि आज की दुनिया में गोरे समस्या बने हुए हैं और कल रूस, चीन , जापान या कोई और
शक्ति उभर कर बाकी दुनिया के लिए समस्या बन सकती है।
3 मनुवादी फासिज्म भारतीय पेनिनसुला धरती का एक अनोखा भूभाग है जिसमे
पिछले 5000
वर्षो से फ़ासिस्ट अल्पसंख्यक समुदाय और बहुसंख्यक बहुजन समाज के बीच संघर्ष चल
रहा है और धर्म की आड़ लेकर भोले भाले बहुजन समाज को ग़ुलाम और तिरस्कृत बना दिया
गया। फ़ासिस्ट संविधान मनु स्मृति और इस जैसी अन्य पुस्तकों में है और इसको खुले
छुपे मानने वाले लोगों को मायावती जी ने सही नाम मनुवादी दिया है और बहुजन समाज के
हितों की रक्षा हेतु डा भीम राव आंबेडकर जी ने स्वतंत्र भारत के संविधान की रचना
की थी।
बहुसंख्यक समाज को पूरी तरह ग़ुलाम बनाने के बाद इनमे दो प्रमुख तबके किये गए - एक शूद्र जिन्हें छोटे छोटे कार्य दिए गए और इन्हें
आर्य नगरी में निवास अनुमन्य था और दूसरा तबका जो वास्तव में यहाँ का मूल निवासी रहा होगा उसे
आर्य नगरी में रात में आना अनुमन्य नहीं था और यह दिन में नगर द्वार पर कुण्डी
खटखटा कर अनुमति मिलने पर प्रवेश कर सकते थे। सूअर पालन , चमड़े का काम और धोबी
का काम यह लोग करते थे। ब्राह्मणों द्वारा प्रतिपादित धर्म को वैदिक धर्म कहा जाता
है जिसमे पशु बलि , हवन यज्ञ होते थे संभवत मध्य एशिया से आने वाले यह लोग
अग्नि पूजक थे भगवा रंग संभवत अग्नि को प्रदर्शित करता है। नर बलि भी वैदिक धर्म
में होती थी शिशु बलि को अंग्रेज़ो ने ख़त्म कराया था सती प्रथा भी इनके धर्म में थी
और स्त्रियों का यौन शोषण अप्राकृतिक यौन और उनकी बलि और अंगों का काटना भी इनका
धर्म था। सती प्रथा के पीछे केवल विधवाओं को संपत्ति से अलग करना नहीं था जो क़ानून
द्वारा किया जा सकता था। युवा विधवा जिससे विवाह या यौन सम्बन्ध कर पाने का इनको
साहस नहीं था कि कहीं खुद ही न मर जायें और कहीं वह अन्य जाति में न चली जाए इसलिए
सती प्रथा चालू की गयी। संभवत अनेक शूद्र जातियां मूल निवासी पुरुषों और आर्य
विधवाओं की संतान हैं और अन्य शूद्र जातियां शूद्र पुरुषों और आर्य विधवाओं की संतान है और उसके
बाद सती प्रथा चालू की गयी। मंदिर यौन शोषण के गढ़ थे और नारी चीत्कार सुन कर कोई
शूद्र आक्रमण न कर दे इसी लिए कोई मंदिर के आस पास आने न ही पाए इसलिए कानो में
सीसा डालने और जीभ और गला काटने के क़ानून बनाये गए। ऐसे अँधेरे में बौद्ध धर्म और
जैन धर्म जीवन ज्योति के रूप में उभरे और मनुवादियों की हिंसा का शिकार हुए। बौद्ध
धर्म कई शताब्दियों तक गौरव स्थापित करने के बाद भारत से निष्कासित हो कर एशिया के
अन्य देशों में पहुंचा। यहाँ बौद्ध विहार नष्ट कर दिए गए बुद्ध प्रतिमाओं में सर
हटा कर शिव का सर लगा दिया गया और शिव मंदिर बन गए। दक्षिण भारत में 8000 जैनियों को सूली
लटका दिया गया और जैन धर्म ख़त्म हो कर बचे खुचे जैन वैदिक धर्म की एक शाखा बन गए। ऐसे में अपने मज़हबी
जूनून और लूट मार की ग़र्ज़ से मुसलमानों ने हिन्द पर हमले किये। शूद्रों की धन
संपत्ति मंदिरों में सोने की मूर्तियों और ज़ेवरों के रूप में दूर दूर तक चर्चित थी
और इन्हीं सब के लिए सुबुक्तगीन और महमूद ग़ज़नवी ने हमले किये। एलेग्जेंडर भी पहले
आ चूका था।
मुसलमानों ने सब को हिन्दू कहा , न वैदिक धर्म, बौद्ध धर्म जैन धर्म
का फ़र्क़ समझा न शूद्र और अछूत का दर्द समझा। पहले तो ब्राह्मण डरे फिर धीरे धीरे
कुछ ब्राह्मण नारी देह का प्रयोग कर के उन जुनूनियों को समझाया वेद भी आसमानी
किताब हैं और बौद्ध नास्तिक होते हैं और उनके जूनून को बौद्धों की और मोड़ दिया और
मुसलमान भी उंच नीच मानने लगे। ना सती प्रथा बाल विवाह न विधवा विवाह पर प्रतिबन्ध
न शिशु बलि किसी से उन पर कोई फ़र्क़ नहीं पड़ा। फिर एक वक़्त आया
मनुवादियों ने ग़द्दारी कर के अंग्रेजों को सत्ता दिला दी। अँगरेज़ भी शुरू में
तो समझ नहीं पाए फिर उन्होंने क्राउन लॉ के सामने सब को बराबर कर दिया। सती , बाल विवाह, शिशु बलि समाप्त कर
दी और विधवा विवाह अनुमन्य कर दिया। तब इनके खिलाफ मनुवादियों ने झूटी अफवाह फैला कर
ग़दर छेड़ दिया। मुसलमान समझे उनकी हुकूमत वापस आ जायेगी और बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया।
मनुवादी राजा अंग्रेजों के साथ हो गए और ग़दर कुचल दिया गया। मुग़ल शहज़ादों को
नवाबज़ादों को सूली पर चढ़ा दिया गया। मनुवादियों का एक तबक़ा अंग्रेजों का हितैषी हो गया।
में सर सय्यद अहमद खान ने भी इतने बड़े नुकसान के बाद यही सोचा कि मुसलमान अमन से
रहे और तालीम में आगे बढ़ें। अंग्रेजों ने यूनिवर्सल एजुकेशन शुरू की। ईश्वर
चंद्र जिन्हें विद्यासागर कहा जाता है अंग्रेजों से अनुरोध किया की शिक्षा सिर्फ
भद्र लोगों तक सीमित रखे और राष्ट्र पिता बनने वाले मोहनदास करमचंद गाँधी ने कहा
एक किसान स्कूली शिक्षा ले कर क्या करेगा। कट्टर मनुवादियों ने 1925 में आर एस एस की
स्थापना कर के मुसलमानों के खिलाफ प्रोपेगंडा शुरू किया। मनुवादी जातियां तीन हैं - ब्राह्मण क्षत्रिय और वैश्य। मुस्लिम काल में ही एक
जाति कायस्थ बनी जिसे मुग़लों ने
शिक्षित करा कर अपने कोर्ट में रखा बाद में यह अंग्रेजों से भी सरपरस्ती पाते रहे
और आज़ादी के बाद मनुवादियों से मिल गए और इस तरह यह चार जातियां सवर्ण हिन्दू
कहलाएं। शूद्र बैकवर्ड हो गए और दलित व आदिवासियों को शिड्यूल्ड कास्ट और
शिड्यूल्ड ट्राइब कहा जाता है। जब आज़ादी के दिन क़रीब आये तो मनुवादियों के सामने
कई खतरे थे : मुसलमान सत्ता में न आ जाएँ , डा आंबेडकर से खतरा
था कहीं दलित मुसलमान या क्रिस्चियन न हो जाएँ दलित शूद्र मिल न जाएँ और कहीं
मार्क्सवाद न क़ब्ज़ा कर ले। देश विभाजन, डरे यहाँ रुके
मुसलामानों के वोट बैंक , रिजर्वेशन और डा आंबेडकर की शीघ्र मृत्यु से सारे
खतरे टल गए और कांग्रेस शासन काल में मनुवादी हर शाख की सबसे ऊपरी टहनियों पर बैठ
गए चाहे शासन ,
प्रशासन,
सेना ,
पुलिस,
व्यापार,
बैंक ,
मीडिया,
पोलिटिकल पार्टियां कांग्रेस , जन संघ कम्युनिस्ट सभी में , संगठित अपराध सब
इनके क़ब्ज़े में है - एक भाई यहां तो दूसरा भाई वहाँ, एक बेटा यहाँ तो एक
दामाद वहाँ। पब्लिक मनी स्कैम्स के ज़रिये इनकी जेबों में आ रहा है। बैंकों से
लोन्स ले कर लोन माफ़ हो जाता है। कोई अपराध हो कोई करप्शन हो या तो पकडे नहीं
जाएंगे या सजा नहीं होगी। जेलों में बैकवर्ड्स दलित और मुसलमान बंद हैं। यह मनुवादी आने वाले
समय में गोरों से मिल कर विश्वव्यापी मनुवादी फासिज्म स्थापित कर सकते हैं जिसमे
अरब और ईरान के गोरे मुसलमान भी सम्मिलित हो सकते हैं । इस प्रकार हम देखते
हैं कि फासिज्म के तीन रूप हैं : 1 प्राचीन काल का मनुवादी फासिज्म 2 मध्यकालीन मुस्लिम फासिज्म 3 आधुनिक आर्थिक
टेक्नोलॉजी आधारित फासिज्म ज़रुरत है दलित Blacks Native Americans और सभी दबे कुचले
लोगों के लिए एक जुट हुआ जाए।
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