Saturday, August 26, 2017

राष्ट्रीय अध्यात्मिक सत्संग- आज की ज़रूरत



जगत के सत्य को समझने के लिए कंप्यूटर का मॉडल उपयोगी है – कंप्यूटर के उपयोग में तीन यूनिट्स होती हैं :
1 यूजर
2 हार्डवेयर
3 ऑपरेटिंग सिस्टम  I बस इन्हीं की तरह हमारा अस्तित्व है :
1 यूजर की तरह हमारी चेतना
2 हार्डवेयर की तरह हमारा शरीर
हम  जो कुछ करते हैं बोलते हैं हम नहीं जानते हमारे शरीर की कौन सी नर्व के ज़रिये किन मांसपेशियों को प्रयोग में लाना है यह सब कोई चीज़ है ऑपरेटिंग सिस्टम की तरह जो हमारे इरादों को क्रियान्वित करती है उसी के माध्यम से हम ( हमारी चेतना ) देखती सुनती है याद रखती है और इसी के माध्यम से हम चलते फिरते बोलते खाते हैं – इसको ENCON कहा जा सकता है – मस्तिष्क की एनर्जी और हमारी चेतना के बीच काम करने वाली यूनिट I
अब हम अनंत जगत में इन तीन यूनिट्स को समझें :
1 सर्वव्यापी चेतना जिसे ब्रह्म कहा जाता है और जिसका अंग होते हुए भी हमारी चेतना एक स्वतंत्र इकाई है
2 सम्पूर्ण भौतिक जगत या सृष्टि जिसका अंग होते हुए भी हमारा शरीर एक स्वतंत्र इकाई है
3 सर्व व्यापी प्रकृति जिसका एक अंग होते हुए भी उपरोक्त हमारा ENCON एक स्वतंत्र इकाई है
और यह तीनों इकाईयां  सिर्फ हम में ही नहीं हर जीव में मौजूद हैं
हम आगे यह भी कह सकते हैं कि यही तीनों इकाईयां पेड़ पौधों में भी हैं
और आगे हम यह भी कह सकते हैं कि यही तीनों इकाईयां वायु जल पृथ्वी सूर्य चन्द्र आदि अब में मौजूद हैं !
भारत में सैकड़ों हज़ारों वर्षों से सैकड़ों हज़ारों वर्षों  विचारकों दार्शनिकों संतों ने अपना नाम दिए बिना सब कुछ लिपिबद्ध किया और जन साधारण को उपदेशित किया जिससे हर भारतवासी का अद्यात्मिक स्तर अग्रणी है और भारत विश्व गुरु है I
अध्यात्म में तीन चीजें हैं :
1 आत्मा
2 कर्म
3 मोक्ष
आज के युग में भले ही हम आत्मा और मोक्ष को नकार दें पर कर्म को नकारा नहीं जा सकता – आज भी ज़रुरत है खुद भी और लोगों को बताने की कि सत्कर्म करो दुष्कर्म न करो I
आज ज़रुरत है कि हम फिर अध्यात्मिक विषयों पर सोचें विचार विमर्श करें और बिना नाम के लिपिबद्ध करें !
पिछले हज़ारों वर्षों में जहाँ एक ओर भारत में विचारकों , दार्शनिकों और संतों ने ब्रह्म के बारे में सोचा सत्कर्म और मोक्ष के बारे में सोचा और बिना अपना नाम दिए शास्त्रों की रचना की और जन साधारण को भी अध्यात्मिक ज्ञान दिया वहीँ इसी अवधि में मध्य पूर्व में तीन एकेश्वरवादी धर्म उभरे जिनके संस्थापकों ने अपने को YHWH से बात होती है या वह आसमानी बाप का बेटा हैं या अल्लाह का फ़रिश्ता उनके पास अल्लाह का कलाम लेकर आता है यह कहा और इस तरह अपने लोगों को एक कानून दिया – आज आधी से ज्यादा दुनिया इनके मानने वाली है I
उनके कानून से एक समाज और सत्ता तो स्थापित हो गयी पर आम इंसान ब्रह्म और सत्कर्म से अनभिज्ञ  और मानसिक रूप से परतंत्र हो गया – जो धर्माधिकारी सत्तारूण हुए उन्होंने जो उनसे अलग मत के थे उन्हें कत्ल करना ही धर्म समझा I
आधुनिक युग में देश  तो प्रजातान्त्रिक और धर्म निरपेक्ष और आधुनिक बन गए पर इन धर्मों के मानने वालों को इनके धर्म गुरु – पादरी और मौलवी – मानसिक रूप से परतंत्र बनाए हुए हैं और जिस चीज़ को चाहें गुनाह और कुफ्र का फतवा दे देते हैं I
इस प्रकार उन तीनों धर्मों का इतिहास क़त्ल और गारतगरी और मानसिक परतंत्रता का इतिहास है और पिछले कुछ दशक से आतंकवाद को अपना कर एक धर्म मानवता के दुश्मन के रूप में उभर कर आया है I
अगर सभी लोग पूजा , व्रत और तीर्थ को अपने ढंग से करते हुए अध्यात्मिक सोच विकसित करें और सत्कर्म, अहिंसा और मानवता  को ही श्रेष्ठ धर्म मानें तो दुनिया में अमन कायम हो सकता है I 
मुस्लिम कट्टरवाद और आतंकवाद जो मध्य पूर्व से उभरा वह मानवता के विरुद्ध एक अपराध तो है उसकी आड़ में एक ज्यादा गंभीर अपराध तेज़ी से पनप रहा है I जैसे कि सर्कस में होता है जब किसी शो की तय्यारी चल रही होती है – खम्भे लगाये जा रहे होते हैं दरियां बिछायी जा रही होती हैं उस वक़्त दर्शकों का ध्यान अपनी ओर लगाने के लिए रिंग में जोकर भेज दिए जाते हैं और तय्यारी मुकम्मल होते ही जोकर हट जाते हैं और अगला शो आरम्भ हो जाता है I बस यही काम समय समय पर होने वाले आतंकवादी हमले करते हैं !
दुनिया में चौबीसों घंटे लूट चल रही है – पश्चिम में अमेरिका और यूरोप के देश अफ्रीका और लैटिन अमेरिका से मिनरल लूट रहे हैं – बंदूक की नोक तले स्थानीय लोगों औरतों बच्चों से मिनरल निकलवाये जाते हैं  और मल्टीनेशनल कंपनियां लूट ले जाती हैं I दूसरी ओर पूरब में – चीन और जापान में थल और जल के जीवों से उनके अंगों से औषधियाँ बनायो जाती हैं – करोड़ों अरबों का व्यापार है – लगातार जीवों को पकड़ा जा रहा है उनकी चीजें लूटी जा रही हैं – कहीं पर भालू के पेट में नलकी डाल कर लगातार पित्त निकाला जाता है यह सब शायद भालू के लिए इतना कष्टकारी है कि जब एक भालू के बच्चे पर ऑपरेशन किया जा रहा था तो उसकी माँ झपट कर आई पिंजरा तोड़ा और अपने बच्चे को मार डाला – जो तकलीफ वह सह रही थी उससे उसने अपने बच्चे को बचा लिया !
इतना निर्दयी हो गया है मुनाफे की हवस में इंसान I
आम लोगों को सादगी के बजाये उपभोग का पाठ पढ़ाया जा रहा है – रात दिन चीज़ों  के विज्ञापन हैं – सारी ख़ुशी , जवानी , खूबसूरती स्वास्थ्य सब बस कुछ खरीद कर पाया जा सकता है यही वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों को सिखाया जा रहा है I
मुनाफे की लूट में बढ़ता उपभोग और इसके साथ बढ़ता उत्पादन – जल थल वायु सभी प्रदूषित हो रहा है I
केवल अध्यात्म और सादा ज़िन्दगी अपना कर मानव जाति को बचाया जा सकता है I
आज की दुनिया की दो खराबियां हैं :
1 कट्टरवाद और आतंकवाद जो मुस्लिम देशों से उठा
2 प्रकृति की लूट , मुनाफे की हवस , उपभोगवाद जिसके कारण प्रदूष्ण हो रहा है जो पश्चिम में अमेरिका और यूरोप और पूरब में चीन और जापान कर रहे हैं I
इन दोनों की रोकथाम केवल अध्यात्म और सादा ज़िन्दगी से है जो सन्देश भारत से उठा था – हमें इसी सन्देश को ले कर खड़े रहना चाहिए I

अगर उपरोक्त विचारों को ले कर एक ‘राष्ट्रीय अध्यात्मिक अध्यात्मिक सत्संग’ जैसा कार्य किया जाए तो शायद देश में अमन स्थापित हो और विघटन समाप्त हो                                   मंसूर  

WhatsApp  9415084202

Friday, August 25, 2017

आज की दुनिया की दो खराबियां

आज की दुनिया की दो खराबियां हैं :
1 कट्टरवाद और आतंकवाद जो मुस्लिम देशों से उठा
2 प्रकृति की लूट , मुनाफे की हवस , उपभोगवाद जिसके कारण प्रदूष्ण हो रहा है जो पश्चिम में अमेरिका और यूरोप और पूरब में चीन और जापान कर रहे हैं I
इन दोनों की रोकथाम केवल अध्यात्म और सादा ज़िन्दगी से है जो सन्देश भारत से उठा था – हमें इसी सन्देश को ले कर खड़े रहना चाहिए I

WhatsApp  9415084202
अगर उपरोक्त से सहमत हैं तो कृपया अपने सभी कॉन्टेक्ट्स को ई मेल  फॉरवर्ड करते रहें , WhatsApp group ‘आध्यात्मिक सत्संग’ से जुडें और देश समाज के उत्थान में सहयोग करते रहें I मैंने अपने निवास स्थान 178/152 बद्रीनाथ रोड  गोलागंज लखनऊ में हर शनिवार और रविवार को 11 बजे अध्यात्मिक सत्संग का आयोजन किया है
इस सत्संग को रजिस्टर्ड करा कर वर्ष में एक बार या अधिक बार सारे सहयोगियों द्वारा सोची गयी बातों को संकलित कर  प्रकाशित किया जाएगा और इस तरह पुराण और उपनिषद की परंपरा जारी की जायेगी – भारतवासियों को राजनीति की नहीं अध्यात्म की ज़रूरत है !  

Thursday, August 24, 2017

लूट , मुनाफे की हवस , उपभोगवाद और प्रदूष्ण



लूट , मुनाफे की हवस , उपभोगवाद और प्रदूष्ण
मुस्लिम कट्टरवाद और आतंकवाद जो मध्य पूर्व से उभरा वह मानवता के विरुद्ध एक अपराध तो है उसकी आड़ में एक ज्यादा गंभीर अपराध तेज़ी से पनप रहा है I जैसे कि सर्कस में होता है जब किसी शो की तय्यारी चल रही होती है – खम्भे लगाये जा रहे होते हैं दरियां बिछायी जा रही होती हैं उस वक़्त दर्शकों का ध्यान अपनी ओर लगाने के लिए रिंग में जोकर भेज दिए जाते हैं और तय्यारी मुकम्मल होते ही जोकर हट जाते हैं और अगला शो आरम्भ हो जाता है I बस यही काम समय समय पर होने वाले आतंकवादी हमले करते हैं !
दुनिया में चौबीसों घंटे लूट चल रही है – पश्चिम में अमेरिका और यूरोप के देश अफ्रीका और लैटिन अमेरिका से मिनरल लूट रहे हैं – बंदूक की नोक तले स्थानीय लोगों औरतों बच्चों से मिनरल निकलवाये जाते हैं  और मल्टीनेशनल कंपनियां लूट ले जाती हैं I दूसरी ओर पूरब में – चीन और जापान में थल और जल के जीवों से उनके अंगों से औषधियाँ बनायो जाती हैं – करोड़ों अरबों का व्यापार है – लगातार जीवों को पकड़ा जा रहा है उनकी चीजें लूटी जा रही हैं – कहीं पर भालू के पेट में नलकी डाल कर लगातार पित्त निकाला जाता है यह सब शायद भालू के लिए इतना कष्टकारी है कि जब एक भालू के बच्चे पर ऑपरेशन किया जा रहा था तो उसकी माँ झपट कर आई पिंजरा तोड़ा और अपने बच्चे को मार डाला – जो तकलीफ वह सह रही थी उससे उसने अपने बच्चे को बचा लिया !
इतना निर्दयी हो गया है मुनाफे की हवस में इंसान I
आम लोगों को सादगी के बजाये उपभोग का पाठ पढ़ाया जा रहा है – रात दिन चीज़ों  के विज्ञापन हैं – सारी ख़ुशी , जवानी , खूबसूरती स्वास्थ्य सब बस कुछ खरीद कर पाया जा सकता है यही वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों को सिखाया जा रहा है I
मुनाफे की लूट में बढ़ता उपभोग और इसके साथ बढ़ता उत्पादन – जल थल वायु सभी प्रदूषित हो रहा है I
केवल अध्यात्म और सादा ज़िन्दगी अपना कर मानव जाति को बचाया जा सकता है I
WhatsApp  9415084202
अगर उपरोक्त से सहमत हैं तो कृपया अपने सभी कॉन्टेक्ट्स को ई मेल  फॉरवर्ड करते रहें , WhatsApp group ‘आध्यात्मिक सत्संग’ से जुडें और देश समाज के उत्थान में सहयोग करते रहें I मैंने अपने निवास स्थान 178/152 बद्रीनाथ रोड  गोलागंज लखनऊ में हर शनिवार और रविवार को 11 बजे अध्यात्मिक सत्संग का आयोजन किया है
इस सत्संग को रजिस्टर्ड करा कर वर्ष में एक बार या अधिक बार सारे सहयोगियों द्वारा सोची गयी बातों को संकलित कर  प्रकाशित किया जाएगा और इस तरह पुराण और उपनिषद की परंपरा जारी की जायेगी – भारतवासियों को राजनीति की नहीं अध्यात्म की ज़रूरत है !         

Wednesday, August 23, 2017

अध्यात्म और संगठित धर्म



अध्यात्म और संगठित धर्म
पिछले 5000 वर्षों में जहाँ एक ओर भारत में विचारकों , दार्शनिकों और संतों ने ब्रह्म के बारे में सोचा सत्कर्म और मोक्ष के बारे में सोचा और बिना अपना नाम दिए शास्त्रों की रचना की और जन साधारण को भी अध्यात्मिक ज्ञान दिया वहीँ इसी अवधि में मध्य पूर्व में तीन एकेश्वरवादी धर्म उभरे जिनके संस्थापकों ने अपने को YHWH से बात होती है या वह आसमानी बाप का बेटा हैं या अल्लाह का फ़रिश्ता उनके पास अल्लाह का कलाम लेकर आता है यह कहा और इस तरह अपने लोगों को एक कानून दिया – आज आधी से ज्यादा दुनिया इनके मानने वाली है I
उनके कानून से एक समाज और सत्ता तो स्थापित हो गयी पर आम इंसान ब्रह्म और सत्कर्म से अनभिज्ञ  और मानसिक रूप से परतंत्र हो गया – जो धर्माधिकारी सत्तारूण हुए उन्होंने जो उनसे अलग मत के थे उन्हें कत्ल करना ही धर्म समझा I
आधुनिक युग में देश  तो प्रजातान्त्रिक और धर्म निरपेक्ष और आधुनिक बन गए पर इन धर्मों के मानने वालों को इनके धर्म गुरु – पादरी और मौलवी – मानसिक रूप से परतंत्र बनाए हुए हैं और जिस चीज़ को चाहें गुनाह और कुफ्र का फतवा दे देते हैं I
इस प्रकार उन तीनों धर्मों का इतिहास क़त्ल और गारतगरी और मानसिक परतंत्रता का इतिहास है और पिछले कुछ दशक से आतंकवाद को अपना कर एक धर्म मानवता के दुश्मन के रूप में उभर कर आया है I
अगर सभी लोग पूजा , व्रत और तीर्थ को अपने ढंग से करते हुए अध्यात्मिक सोच विकसित करें और सत्कर्म, अहिंसा और मानवता  को ही श्रेष्ठ धर्म मानें तो दुनिया में अमन कायम हो सकता है I  
WhatsApp  9415084202
अगर उपरोक्त से सहमत हैं तो कृपया अपने सभी कॉन्टेक्ट्स को ई मेल  फॉरवर्ड करते रहें , WhatsApp group ‘आध्यात्मिक सत्संग’ से जुडें और देश समाज के उत्थान में सहयोग करते रहें I मैंने अपने निवास स्थान 178/152 बद्रीनाथ रोड  गोलागंज लखनऊ में हर शनिवार और रविवार को 11 बजे अध्यात्मिक सत्संग का आयोजन किया है
इस सत्संग को रजिस्टर्ड करा कर वर्ष में एक बार या अधिक बार सारे सहयोगियों द्वारा सोची गयी बातों को संकलित कर  प्रकाशित किया जाएगा और इस तरह पुराण और उपनिषद की परंपरा जारी की जायेगी – भारतवासियों को राजनीति की नहीं अध्यात्म की ज़रूरत है !