Tuesday, August 22, 2017

REALITY को कैसे समझें ?



REALITY को कैसे समझें ?
जगत के सत्य को समझने के लिए कंप्यूटर का मॉडल उपयोगी है – कंप्यूटर के उपयोग में तीन यूनिट्स होती हैं :
1 यूजर
2 हार्डवेयर
3 ऑपरेटिंग सिस्टम

बस इन्हीं की तरह हमारा अस्तित्व है :
1 यूजर की तरह हमारी चेतना
2 हार्डवेयर की तरह हमारा शरीर
हम  जो कुछ करते हैं बोलते हैं हम नहीं जानते हमारे शरीर की कौन सी नर्व के ज़रिये किन मांसपेशियों को प्रयोग में लाना है यह सब कोई चीज़ है ऑपरेटिंग सिस्टम की तरह जो हमारे इरादों को क्रियान्वित करती है उसी के माध्यम से हम ( हमारी चेतना ) देखती सुनती है याद रखती है और इसी के माध्यम से हम चलते फिरते बोलते खाते हैं – इसको ENCON कहा जा सकता है – मस्तिष्क की एनर्जी और हमारी चेतना के बीच काम करने वाली यूनिट I
अब हम अनंत जगत में इन तीन यूनिट्स को समझें :
1 सर्वव्यापी चेतना जिसे ब्रह्म कहा जाता है और जिसका अंग होते हुए भी हमारी चेतना एक स्वतंत्र इकाई है
2 सम्पूर्ण भौतिक जगत या सृष्टि जिसका अंग होते हुए भी हमारा शरीर एक स्वतंत्र इकाई है
3 सर्व व्यापी प्रकृति जिसका एक अंग होते हुए भी उपरोक्त हमारा ENCON एक स्वतंत्र इकाई है
और यह तीनों इकाईयां  सिर्फ हम में ही नहीं हर जीव में मौजूद हैं
हम आगे यह भी कह सकते हैं कि यही तीनों इकाईयां पेड़ पौधों में भी हैं
और आगे हम यह भी कह सकते हैं कि यही तीनों इकाईयां वायु जल पृथ्वी सूर्य चन्द्र आदि अब में मौजूद हैं !
भारत में सैकड़ों हज़ारों वर्षों से सैकड़ों हज़ारों वर्षों  विचारकों दार्शनिकों संतों ने अपना नाम दिए बिना सब कुछ लिपिबद्ध किया और जन साधारण को उपदेशित किया जिससे हर भारतवासी का अद्यात्मिक स्तर अग्रणी है और भारत विश्व गुरु है I
अध्यात्म में तीन चीजें हैं :
1 आत्मा
2 कर्म
3 मोक्ष
आज के युग में भले ही हम आत्मा और मोक्ष को नकार दें पर कर्म को नकारा नहीं जा सकता – आज भी ज़रुरत है खुद भी और लोगों को बताने की कि सत्कर्म करो दुष्कर्म न करो I
आज ज़रुरत है कि हम फिर अध्यात्मिक विषयों पर सोचें विचार विमर्श करें और बिना नाम के लिपिबद्ध करें !
इसी लिए मैंने WhatsApp पर ग्रुप बनाया है ‘अध्यात्मिक सत्संग’ और अपने निवास स्थान 178/152 बद्रीनाथ रोड  गोलागंज लखनऊ में हर शनिवार और रविवार को 11 बजे अध्यात्मिक सत्संग का आयोजन किया है
इस सत्संग को रजिस्टर्ड करा कर वर्ष में एक बार या अधिक बार सारे सहयोगियों द्वारा सोची गयी बातों को संकलित कर  प्रकाशित किया जाएगा और इस तरह पुराण और उपनिषद की परंपरा जारी की जायेगी – भारतवासियों को राजनीति की नहीं अध्यात्म की ज़रूरत है !          

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