अध्यात्म और संगठित धर्म
पिछले 5000 वर्षों में जहाँ एक ओर भारत में विचारकों ,
दार्शनिकों और संतों ने ब्रह्म के बारे में सोचा सत्कर्म और मोक्ष के बारे में
सोचा और बिना अपना नाम दिए शास्त्रों की रचना की और जन साधारण को भी अध्यात्मिक
ज्ञान दिया वहीँ इसी अवधि में मध्य पूर्व में तीन एकेश्वरवादी धर्म उभरे जिनके
संस्थापकों ने अपने को YHWH से बात होती है या वह आसमानी बाप का बेटा हैं या
अल्लाह का फ़रिश्ता उनके पास अल्लाह का कलाम लेकर आता है यह कहा और इस तरह अपने
लोगों को एक कानून दिया – आज आधी से ज्यादा दुनिया इनके मानने वाली है I
उनके कानून से एक समाज और सत्ता तो स्थापित हो गयी पर आम
इंसान ब्रह्म और सत्कर्म से अनभिज्ञ और
मानसिक रूप से परतंत्र हो गया – जो धर्माधिकारी सत्तारूण हुए उन्होंने जो उनसे अलग
मत के थे उन्हें कत्ल करना ही धर्म समझा I
आधुनिक युग में देश
तो प्रजातान्त्रिक और धर्म निरपेक्ष और आधुनिक बन गए पर इन धर्मों के मानने
वालों को इनके धर्म गुरु – पादरी और मौलवी – मानसिक रूप से परतंत्र बनाए हुए हैं
और जिस चीज़ को चाहें गुनाह और कुफ्र का फतवा दे देते हैं I
इस प्रकार उन तीनों धर्मों का इतिहास क़त्ल और गारतगरी और
मानसिक परतंत्रता का इतिहास है और पिछले कुछ दशक से आतंकवाद को अपना कर एक धर्म
मानवता के दुश्मन के रूप में उभर कर आया है I
अगर सभी लोग पूजा , व्रत और तीर्थ को अपने ढंग से करते हुए
अध्यात्मिक सोच विकसित करें और सत्कर्म, अहिंसा और मानवता को ही श्रेष्ठ धर्म मानें तो दुनिया में अमन
कायम हो सकता है I
Email
Manesiro@gmail.com
WhatsApp 9415084202
अगर उपरोक्त से सहमत हैं तो कृपया अपने सभी
कॉन्टेक्ट्स को ई मेल फॉरवर्ड करते रहें , WhatsApp group ‘आध्यात्मिक
सत्संग’ से जुडें और देश समाज के उत्थान में सहयोग करते रहें I मैंने अपने निवास
स्थान 178/152 बद्रीनाथ रोड गोलागंज लखनऊ
में हर शनिवार और रविवार को 11 बजे अध्यात्मिक सत्संग का आयोजन किया है
इस सत्संग को रजिस्टर्ड करा कर वर्ष में एक
बार या अधिक बार सारे सहयोगियों द्वारा सोची गयी बातों को संकलित कर प्रकाशित किया जाएगा और इस तरह पुराण और उपनिषद
की परंपरा जारी की जायेगी – भारतवासियों को राजनीति की नहीं अध्यात्म की ज़रूरत है
!
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