बेगुनाहों पर ज़ुल्म
( इंडिया , पाकिस्तान
और बांग्लादेश के सच्चे हिन्दुओं और सच्चे मुसलमानों को समर्पित )
सच्चे हिन्दुओं और
सच्चे मुसलमानों के लिए लिखता हूँ – झूठे ‘वहाबी’ मुसलमानों और झूठे ‘संघी’
हिन्दुओं के लिए नहीं लिखता – बार बार अन्फ्रेंड करता हूँ पर फिर आ कर जुड़ जाते
हैं तो भाई सच्चे क्यों नहीं बन जाते – क्यों नहीं मान लेते इंसान सिर्फ इंसान है न कोई हिन्दू न कोई
मुसलमान है या यह क्यों नहीं मानते हर एक के ह्रदय में ईश्वर का वास है या दुनिया
क सारे इंसान एक माँ बाप की औलाद हैं ?
बेगुनाह मुसलमानों पर
हमले हो रहे हैं जब लिखा हिन्दू ऐसा न करें तो संघी भाई उन बातों का ज़िक्र करते
हैं जहां मुसलमानों ने ज़ुल्म ज्यादती की है ! मैंने तो हिन्दुओं पर इलज़ाम लगाया
नहीं मैंने तो यह कहा बेगुनाह मुसलमानों पर हमले न करो I मैं बेगुनाह की बात कर
रहा हूँ और आप गुनाहगारों की बात कर रहे हो ! 1400 वर्षों में आज तक इंडिया में या
कहीं भी मुसलमानों ने जो ज़ुल्म ज्यादती की है वह गलत है नहीं करना चाहिए था लेकिन
आज जो दुनिया भर में बेगुनाह मुसलमानों पर हमले हो रहे हैं वे भी गलत है – जो यह न
माने सारे इंसान उसके भाई हैं वह मुसलमान नहीं और जो यह न मानें कि हरेक के ह्रदय
में ईश्वर नहीं वह हिन्दू नहीं I
1400 वर्षों में झूठे
मुसलमानों ने बहुत ज़ुल्म किये हैं – अपने रसूल के ऊपर भी और उनके वंशजों के ऊपर भी
और दुनिया भर में – उन जंगलियों को इस्लाम का नाम ले कर लूटने क़त्ल करने औरतों पर
क़ब्ज़ा करने का बहाना मिल गया I
लेकिन सच्चे मुसलमान भी
हैं जो नेकी के रास्ते पर हैं और अधिकाँश शिया मुसलमान इसी रास्ते पर हैं I
कश्मीर में जो हिन्दुओं
पर ज़ुल्म हुए तो एक कश्मीरी पंडित राहुल के पंडिता की Our Moon has Blood Clots
पढ़ी जिससे वहाँ के सजीव वर्णन मिलता है I बांग्लादेश की लेखिका तसलीमा नसरीन का
उपन्यास ‘लज्जा’ है जिस में एक हिन्दू
डॉक्टर परिवार पर जो बांग्लादेश में ज़ुल्म हुए उसका वर्णन है – उनका यह उपन्यास
इंडिया , पाकिस्तान और बांग्लादेश के विश्वविद्यालयों में पढ़ाया जाना चाहिए – बात हिन्दू
मुसलमान की नहीं है बात है बहुसंख्यक तबका शिक्षित खुशहाल तबका किस तरह अल्पसंख्यक
तबके पर हो रहे ज़ुल्म पर खामोश रहता है और सहमत रहता है – पाकिस्तान बांग्लादेश और
कश्मीर में मुसलमान बहुसंख्यक हैं और इंडिया में हिन्दू बहुसंख्यक हैं सब जगह यही
कहानी है – अगर शिक्षित खुश्हाल हिन्दू इंडिया में हो रहे हमलों के खिलाफ आवाज़
उठायें तो यही बात और जगह भी हो सकती है – हर जगह केवल कुछ लोग सच्चाई अच्छाई ले
कर खड़े हैं और उनको खुद नफरत झेलनी पड़ रही है I
ज़रूरत है इंडिया ,
पकिस्तान , बांग्लादेश और कश्मीर में अधिक से अधिक लोग बेगुनाहों पर होने वाले हमलों के विरुद्ध एक
जुट हों और नारी पर होने वाले अत्याचारों के विरुद्ध एक जुट हों !
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