Wednesday, August 9, 2017

दुनिया भर के पढ़े लिखे मुसलामानों और बाक़ी सभी पढ़े लिखे इंसानों !



दुनिया भर के पढ़े लिखे मुसलामानों और बाक़ी सभी पढ़े लिखे इंसानों ! आज कुरान पर फिर से खुले दिल से देखने की ज़रूरत है !
आज कोई भी इंसान इस बात को नहीं मान सकता कि ज़मीन फर्श है और आसमान छत ! अगर ईश्वर है तो क्या आज का ज्ञान उसका दिया हुआ नहीं है ? तो फिलहाल हम कुरान  में लिखी इस बात को कि अल्लाह ने ज़मीन को फर्श और आसमान को छत बनाया नहीं मान सकते ! हम आज जानते हैं है कि धरती पर जीवन विकसित हुआ है और सारे जीव जंतु वनस्पति और हम खुद इसी विकास का परिणाम हैं – इस बात को झुठलाया नहीं जा सकता ! तो हमें इन दोनों बातों को समझ कर ही आगे बढ़ना चाहिए और जो ऐसा नहीं कर पाते वही कट्टरवादी  आतंकवादी बनते हैं  - हमें कुरान या किसी भी धर्म ग्रन्थ की उन बातों को जो ज़माने से मेल नहीं खातीं ज्यो का त्यों फ्रीज़ कर देना है और अगर कभी नए ज़माने में वे बातें सही साबित होती हैं तब उन्हें डिफ्रीज़ करना है !
कुरान से ही जुड़ा हुआ एक किस्सा है बनू कुरय्ज़ा कबीले का जिसकी औरतों बच्चों को क़ैद कर के उनके ही सामने उनके लगभग 1000 मर्दों का सर काट कर पहले से ही खुदी क़ब्रों में दफन कर दिया गया – यह 1400 वर्ष पूर्व हुआ था और हम इसे किसी भी तरह अल्लाह या रसूल का आदेश आज नहीं स्वीकार कर सकते – यह
वाकिया एक प्रश्न चिन्ह है !
लेकिन आज भी हम इंसानों को ज़रूरत है आस्था की , हमें ज़रूरत है मृत्यु के बाद पुनर्जीवन पर विश्वास करने की और हमें ज़रूरत है अच्छों को अच्छा और बुरों को बुरा बदला मिलेगा इस पर विश्वास करने की और हमें ज़रूरत है उपासना की !
कुरान यह सब देता है – एक पूर्ण सिस्टम – नमाज़ , रोज़ा , ज़कात और हज और इसलिए मैं मुसलमान  बार बार बन जाता हूँ जब जब पहले लिखी बातें मुझे हटाना चाहती हैं !
हमें धर्म चाहिए – भले ही कोई इंसान अल्लाह का रसूल नहीं हो सकता और भले ही कोई किताब अल्लाह की किताब नहीं हो सकतीं और यह साड़ी बातें मानव इतिहास का एक ख्वाब मात्र थीं !
मुसलामानों के मौलवी कट्टर बातें गढ़ते और फैलाते रहते हैं – नयी  नयी बातें हमें सुनने को मिलती हैं – इनसे बचना होगा ! सीधी सच्ची नेक ज़िन्दगी को जीना होगा ! कट्टरवाद आतंकवाद को अस्वीकार करना होगा I
दुनिया में जो भी आतंकवादी घटनायें हुयी हैं उन्हें यहूदियों और ईसाइयों की साजिशें कह कर आँख बंद नहीं की जा सकतीं – मुसलामानों का इतिहास शुरू से ले कर आज तक ज़ुल्म का इतिहास है – इन्होने खुद रसूल के साथ , उनकी बेटी और उनके दामाद , उनके नवासों और उनकी नस्ल के साथ लगातार ज़ुल्म किया और मुसलामानों का बड़ा तबका जालिमों के साथ रहा और आले रसूल का दुश्मन रहा और आज आले रसूल के शियों का दुश्मन है – सऊदी अरब , पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान में जो हो रहा है वे किसी यहूदी , ईसाई या हिन्दू ग्रुप की साजिशें नहीं हैं बल्कि मुसलमान ही कर रहे हैं और उनके मौलवी इन बातों को सही ठहराते हैं I
और भी कई फरके हैं बहाई और अहमदी वगेरा जिन पर मुसलामानों ने ज़ुल्म किये हैं – यह सब रुकना चाहिए – इस्लाम बस एक दीन है और दीनों की तरह और पहले नेक इंसान बनों और अगर इंसान अल्लाह का सच्चा दीन है तो नेक बन कर दिखाओ ! फिर जिसको इस्लाम मानना होगा तो मानेगा I

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