पढ़े लिखे शियों से
ख़ुम्स और ज़कात के बारे में साफ़ साफ़ बातें
अभी व्हाट्सएप्प पर एक
विडियो देखा जिसमें एक शिया मौलवी यह बता रहे थे बिना ख़ुम्स निकाले आप की कोई
इबादत कुबूल नहीं होगी क्योंकि अगर आप नमाज़ पढ़ते हैं और ख़ुम्स नहीं निकाला था तो
आप का लिबास भी मुबाह नहीं है लिहाज़ा नमाज़ कुबूल नहीं होगी I
क्या ख़ुम्स मौलवियों की
ज़ाती आमदनी बढ़ाने के लिए है कि हर मौलवी कुछ खुशहाल शियों को पकड़ ले और उनसे ख़ुम्स
की बात कर के अपनी आमदनी बढ़ा ले ?
RSS में उनके सदस्य
दुनिया भर से हर वर्ष कुछ राशि नियमित रूप से देते हैं तो ऐसा ही एक संगठन बनाइये
और फिर उसकी आमदनी से कौम की भलाई की ज़िम्मेदारी निभाइए – हर एक को मालूम हो कि
उसके एरिया के फलां मौलवी ज़कात और ख़ुम्स लेंगे और रसीद देंगे
1 बेवाओं यतीमों की
भलाई
2 तालीम
3 रोज़गार
4 शादी में मदद
5 बीमारी में मदद
6 मय्यत में मदद
7 स्कूल कॉलेज खोलना
8 अस्पताल खोलना
9 कारखाने खोलना
10 मस्जिदों इमामबाड़ों
की मेंटेनेंस
और वक़्त आये तो सेना
तैयार करना
आप उलेमा यह सब करिए हम
दुनियादार लोग अपना कॉन्ट्रिब्यूशन देंगे !
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