Thursday, August 24, 2017

लूट , मुनाफे की हवस , उपभोगवाद और प्रदूष्ण



लूट , मुनाफे की हवस , उपभोगवाद और प्रदूष्ण
मुस्लिम कट्टरवाद और आतंकवाद जो मध्य पूर्व से उभरा वह मानवता के विरुद्ध एक अपराध तो है उसकी आड़ में एक ज्यादा गंभीर अपराध तेज़ी से पनप रहा है I जैसे कि सर्कस में होता है जब किसी शो की तय्यारी चल रही होती है – खम्भे लगाये जा रहे होते हैं दरियां बिछायी जा रही होती हैं उस वक़्त दर्शकों का ध्यान अपनी ओर लगाने के लिए रिंग में जोकर भेज दिए जाते हैं और तय्यारी मुकम्मल होते ही जोकर हट जाते हैं और अगला शो आरम्भ हो जाता है I बस यही काम समय समय पर होने वाले आतंकवादी हमले करते हैं !
दुनिया में चौबीसों घंटे लूट चल रही है – पश्चिम में अमेरिका और यूरोप के देश अफ्रीका और लैटिन अमेरिका से मिनरल लूट रहे हैं – बंदूक की नोक तले स्थानीय लोगों औरतों बच्चों से मिनरल निकलवाये जाते हैं  और मल्टीनेशनल कंपनियां लूट ले जाती हैं I दूसरी ओर पूरब में – चीन और जापान में थल और जल के जीवों से उनके अंगों से औषधियाँ बनायो जाती हैं – करोड़ों अरबों का व्यापार है – लगातार जीवों को पकड़ा जा रहा है उनकी चीजें लूटी जा रही हैं – कहीं पर भालू के पेट में नलकी डाल कर लगातार पित्त निकाला जाता है यह सब शायद भालू के लिए इतना कष्टकारी है कि जब एक भालू के बच्चे पर ऑपरेशन किया जा रहा था तो उसकी माँ झपट कर आई पिंजरा तोड़ा और अपने बच्चे को मार डाला – जो तकलीफ वह सह रही थी उससे उसने अपने बच्चे को बचा लिया !
इतना निर्दयी हो गया है मुनाफे की हवस में इंसान I
आम लोगों को सादगी के बजाये उपभोग का पाठ पढ़ाया जा रहा है – रात दिन चीज़ों  के विज्ञापन हैं – सारी ख़ुशी , जवानी , खूबसूरती स्वास्थ्य सब बस कुछ खरीद कर पाया जा सकता है यही वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों को सिखाया जा रहा है I
मुनाफे की लूट में बढ़ता उपभोग और इसके साथ बढ़ता उत्पादन – जल थल वायु सभी प्रदूषित हो रहा है I
केवल अध्यात्म और सादा ज़िन्दगी अपना कर मानव जाति को बचाया जा सकता है I
WhatsApp  9415084202
अगर उपरोक्त से सहमत हैं तो कृपया अपने सभी कॉन्टेक्ट्स को ई मेल  फॉरवर्ड करते रहें , WhatsApp group ‘आध्यात्मिक सत्संग’ से जुडें और देश समाज के उत्थान में सहयोग करते रहें I मैंने अपने निवास स्थान 178/152 बद्रीनाथ रोड  गोलागंज लखनऊ में हर शनिवार और रविवार को 11 बजे अध्यात्मिक सत्संग का आयोजन किया है
इस सत्संग को रजिस्टर्ड करा कर वर्ष में एक बार या अधिक बार सारे सहयोगियों द्वारा सोची गयी बातों को संकलित कर  प्रकाशित किया जाएगा और इस तरह पुराण और उपनिषद की परंपरा जारी की जायेगी – भारतवासियों को राजनीति की नहीं अध्यात्म की ज़रूरत है !         

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