मुख्य समस्या रोज़ी रोटी की
है और स्वार्थी मध्य वर्ग की राजनीति इसके सिवा कुछ नहीं I अमेरिका में भी ट्रम्प
को सत्ता में इसलिए बिठाया कि गैर-अमेरिकयों ने जो नौकरियाँ पा ली हैं वे वापस
अमेरिकयों (वास्तव में गोरों- गोरे कचरों White trash ) को मिल जाएँ हालांकि गोरों
की मुख्य समस्या यह है कि न वे पढ़ते हैं और न कोई गंभीर कार्य कर सकते हैं इसलिए
उन्हें देश चलाने के लिए गैर-अमेरिकयों की ज़रुरत तो पड़ती ही रहेगी I
यही हाल इंडिया में है जहां 10 प्रतिशत
वर्ग 90 प्रतिशत सत्ता और संपत्ति पर क़ब्ज़ा किये हुए हैं – योग्यता है नहीं, पढ़
सकते नहीं एडमिशन मिल जाता है, पास करा दिए जाते हैं और नौकरी मिल जाती है और
वास्तविक गंभीर काम तो मुसलमान , पिछड़े और दलित कर रहे हैं और पदोन्नति इन्हें
मिलती जाती है I इन्हें ही आरक्षण बहुत खलता है और इसी को ख़त्म करने के लिए मोदी
को लाये हैं और पिछड़ों और दलितों की राजनैतिक पार्टियों की कमर तोड़ने के लिए ही नोटबंदी
की थी I
इस अन्याय को दूर करने के
लिए इनका और सभी का आरक्षण होना चाहिए और देश की आबादी को चार वर्गों में बांटा जा
सकता है जिनकी अनुमानित आबादी भी मैं लिख रहा हूँ :
1
सवर्ण : ब्रह्मण ठाकुर बनिया और कायस्थ लगभग 15
प्रतिशत
2 पिछड़ा वर्ग : लगभग 45 प्रतिशत
3 दलित एवं आदिवासी : लगभग 25 प्रतिशत
4 मुस्लिम एवं अन्य : लगभग
15 प्रतिशत
अब जिस वर्ग की जितनी प्रतिशत
आबादी हो उतना सरकारी और गैर-सरकारी पदों पर आरक्षण होना चाहिए और जब किसी वर्ग के
भीतर विभिन्न उप-वर्गों में विवाद हो तो उस वर्ग के भीतर उसकी आबादी के अनुसार
आरक्षण दे दिया जाए I
लेकिन यह सारी राजनीति
केवल उर्बन इंडिया पर केन्द्रित है जबकि ज़रूरत है कि रुरल इंडिया में विकास किया
जाए और गरीबी, बेरोज़गारी, अन्याय को समाप्त किया जाए I
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