Thursday, February 2, 2017

इंडियन पॉलिटिक्स

इंडिया में विभिन्न राजनैतिक वर्गों की स्थिति लगभग इस प्रकार है :
1          सवर्ण : ब्रह्मण ठाकुर बनिया और कायस्थ लगभग 15 प्रतिशत
   2 पिछड़ा वर्ग : लगभग 45 प्रतिशत
   3 दलित एवं आदिवासी : लगभग 25 प्रतिशत
   4 मुस्लिम एवं अन्य :  लगभग  15 प्रतिशत
राजनैतिक सत्ता पाने के लिए कम से कम दो वर्गों का मिलना ज़रूरी है I इंडिया का रोग मनुवाद है और यह रोग पूरे देश को जकड़े हुए है और अपराध, अन्याय और भ्रष्टाचार का शिकार बनाए हुए है I संघ इस को स्थापित किए हुए है और इसका हथकंडा है वर्ग 2 एवं 3 के बीच दुष्प्रचार कर के वर्ग 4 के विरुद्ध नफरत फैलाना और इस प्रकार वर्ग 1 जोकि मनुवादी है उसकी सत्ता बनाए रखना I
वर्ग 4 के कट्टरवादी नेता संभवत: संघ से पैसा पा कर ऐसे बयान देते हैं जिनसे वर्ग 2 एवं 3 को संघ के दुष्प्रचार पर विश्वास करना पड़ जाता है और वे वर्ग 1 की मनुवादी पार्टी भाजपा के वोटर बन जाते हैं I
वर्ग 2 के नेता निकम्मे हैं और अपने वर्ग के विरुद्ध संघ और वर्ग 1 के पिट्ठू हैं I
वर्ग 3 काफी कुछ जागृत है और संघ और वर्ग 1 के हथकंडों से मुक्त हैं I
देश के हित में यह था कि वर्ग 2 और 3 मिल जाते और वर्ग 4 भी उनके साथ हो जाता I इस बात की सम्भावना यथार्थ बन्ने जा रही थी और UP में 1984 के आस पास SP और BSP मिल कर सत्ता में आये थे I पहले मुलायम सिंह यादव 6 महीने के लिए मुख्य मंत्री बने और इस दौरान कांशीराम और मायावती ने वसूली की राजनीती खेली जो बहुत बड़ी गलती थी I इस वसूली और ब्लैकमैलिंग से मुलायम सिंह परेशान हो गए तो उन्हें वर्ग 1 के पुलिस अधिकारियों ने ‘साहब किस्सा ही ख़त्म करा दीजिये’ कह कर उन दोनों की हत्या कराने के लिए आदेश प्राप्त कर लिया – रेस्ट हाउस जहां दोनों कांशीराम और मायावती ठहरे हुए थे उस पर हमला तो किया पर उन दोनों को बचा भी लिया और इस तरह मनुवादी पिछड़ों और दलितों के गठबंधन को आज 31 वर्षों तक असंभव बना गए – देखिये आगे क्या होता है ? क्या कभी पिछड़े दलित और मुस्लिम मिल पायेंगे ?
मानवता का हित इसी में हैं कि तीनों मिल जाएँ और इंडिया से मनुवाद का समूल नाश कर दें I
मुलायम सिंह के पुत्र अखिलेश यादव और बड़े शत्रु निकले – मुसलामानों के विरुद्ध भी काम किये और मनुवादी चालाक पार्टी कांग्रेस से हाथ मिला लिया I
मनुवाद चारों वर्गों को डसे हुए है – वर्ग 1 के लिए अमृत और वर्ग 2 , 3 और 4 के लिए प्राणघातक विष !

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