ऐसा नहीं है कि दुनिया में
कहीं सच्चे मुसलमान बैठे हैं और वे यह सोचते हैं कि जो लोग अल्लाह को नहीं मानते
हैं – काफिर हैं या मुशरिक हैं उनको मार डालना ही जिहाद है और अल्लाह का रास्ता है
I
तो सच क्या है ?
एक 14 वर्षीय लड़का बम बाँध
कर गया अपने को उड़ा दिया और 70 बेक़सूर लोग एक दरगाह में मार डाले गए – लड़के को
ब्रेनवाश कर दिया गया था और वह यही समझता होगा कि यह लोग जो दरगाह पर सर झुकाने
आयें हैं उन्हें मार डालना और अपनी जान कुर्बान कर देना अल्लाह का पसंदीदा काम है
और वह शहीद हो कर मरेगा नहीं और सीधे जन्नत पहुंचेगे और वहाँ के सारे मज़े हूरें
उसे हासिल हो जायेंगी और उनसे बढ़ कर पैगम्बरों फरिश्तों की हमनशीनी I
उस नासमझ लड़के के दिमाग में
यह बातें डाल कर उसे रोबोट की तरह इस्तेमाल कर लिया गया I
पर जिन लोगों ने ऐसा किया
क्या वह भी इन सब बातों पर यकीन करते हैं ? दूसरों के बच्चों को तो ब्रेनवाश किया
जा सकता है पर क्या अपने बच्चों को भी कोई करेगा ? ओसामा भी नहीं चाहता था कि उसके
बच्चे इस रास्ते पर जाएँ I
तो फिर यह सब क्या है ?
क्यों आतंकवादी हमले कराने, ह्यूमन रोबोट तैयार करने बेक़सूरों को मारने पर इतना
पैसा क्यों खर्च किया जा रहा है ? क्या पुलिस फ़ौज हुकूमत की मदद के ऐसा किया जा
सकता है ?
परिवार मानव समाज की हकीकत
हैं और हर मुल्क में इन परिवारों के तीन वर्ग हैं :
1 उच्च वर्ग – गोरे चिट्टे
लम्बे लोग
2 मध्य वर्ग – सांवले औसत
3 निम्न वर्ग – काले कमज़ोर
इक्का दुक्का गोरे काले तो
हर परिवार हर वर्ग में हो सकते हैं पर किसी भी मुल्क में जिन परिवारों ने धन और
सत्ता पर क़ब्ज़ा कर लिया है वे जब बहू और दामाद लाते हैं तो गोरे लम्बे शानदार
चुनते हैं और इस तरह उच्च वर्ग एक दो पीढ़ी बाद गोरे चिट्टे लम्बे लोगों से पहचाना
जा सकता है यह और बात है इसी के साथ बुद्धि में कमी होती जाती है I
उच्च वर्ग को जब ऐसा लगता
है कि मध्य और निम्न वर्ग के लोग जनसँख्या में बढ़ रहे हैं और रोज़गार पर क़ब्ज़ा कर
रहे हैं तो यह लोग इन लोगों को मरवाने या देश से निकालने की योजना बनाते हैं I
बर्मा में जो रोहिंग्या
मारे जा रहे हैं उसका कारण यह नहीं है कि वे मुसलमान हैं कारण सिर्फ यह है कि उनकी
आबादी बढ़ रही है इसलिए उन्हें मारा जा रहा है I
2001 जनसँख्या रिपोर्ट के
बाद ही गुजरात में नस्लकशी का प्रयोग किया गया I
पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान
में ऐसे ही बहुत से निम्न वर्गीय लोग हैं जो मुसलमान हो गए या इसाई हो गए उन्हें
ही मारना मकसद है और उनके संहार से UN तक किसी को फर्क नहीं पड़ता कहीं भी UN
forces नहीं जाने वाली हैं I
ज़रुरत है सभी मानवतावादी
लोगों दबे कुचले लोगों को एक जुट हो कर न्याय व्यवस्था लागू करने की राष्ट्र युग
ख़त्म होने को है एक विश्व बनाने विश्व नागरिक बनने की ज़रुरत है I
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