धरती का यह प्रायद्वीप (पेनिन्सुला)
भारत या इंडिया (India) नाम है हमारे देश का और
इसका नाम हिन्द भी है वास्तव में इंडिया (India) और हिन्द एक ही नाम है सिर्फ
बोलने वालों की बोली का अंतर है और शायद यही नाम मौलिक है और दुनिया भर में परिचित
था जिसकी तलाश में कोलंबस अमेरिका पहुँच गया और इसीलिए वहां के रहने वाले भी रेड
इंडियन (red Indian) कहलाये I
मानव का विकास किसी अन्य भू-भाग पर हुआ था और
जनसँख्या बढ़ने पर और विभिन्न क़बीलों में बंटने और आपसी झगड़ों के बाद विभिन्न कबीले
विभिन्न स्थानों पर प्रवास कर गए और ऐसे ही इतिहास दोहरता रहा और लोग दूसरे
स्थानों पर प्रवास करते गए और उनमें से कुछ उत्तरी भारत के मैदानों में आ कर बस गए
और इन्हीं को ‘मूल निवासी’ कहा जा सकता है बाद में आने वालों से भेद करने के लिए I
भेद क्यों ?
वे सभी लोग जो आरम्भ में दूसरों के आने के पहले भले
ही अलग अलग समय और स्थान पर बिना दूसरों को मार कर या गुलाम बना कर बसे वे सभी ‘मूल
निवासी’ के दायरे में रखे जा सकते हैं और वे सभी ‘मूल निवासी ‘ हैं I
इन लोगों ने जिस सभ्यता का विकास किया उसके
अवशेष ही संभवतः सिन्धु घाटी की सभ्यता के नाम से जाने जाते हैं I इन लोगों ने
उन्नत नगर बनाए पर शायद तलवारें और अन्य अस्त्र-शस्त्र नहीं बनाए थे I
फिर एक ऐसा समय भी आया जब दूसरे आने वालों ने
युद्ध या चालाकी से मूल निवासियों को गुलाम बना लिया और फिर नीच या बहिष्कृत या
अस्पर्श्य बना दिया तो ऐसे लोग मूल निवासी नहीं कहे जा सकते – वे ‘प्रथम आने वाले’
थे I
फिर बहुत से मूल निवासी या तो दक्षिण चले गए या
पहाड़ों पर चले गए और उनके शत्रु भी धीरे धीरे इन स्थानों पर पहुँचते गए I
संभवतः कुछ मूल निवासी आरम्भ से ही अलग रहे
मुख्य सभ्यता से अलग रहे वे ‘आदिवासी’ हैं और कुछ मूल निवासी आगे अलग अलग समय में हिंसा
और अन्याय से विक्षिप्त हो कर मुख्य सभ्यता से अलग हो कर अपना अलग समाज बनाते गए
वे भी ‘आदिवासी’ हैं I
आने वाले शायद अपने स्वामिभक्त दास भी ले कर आये
थे जिनके माध्यम से इन्होने मूल निवासियों पर हमले कराये या बाद में मूल निवासियों
में से कुछ को अपना स्वामिभक्त दास बना लिया और इनको समय समय पर लूटने और बलात्कार
करने के अवसर और छूट देते रहे I
इस प्रकार भारत की जनसँख्या गठित हुयी I
इसके बाद आज से लगभग 1000 वर्ष पूर्व दूसरे आने
वाले हमलावरों और फिर शासन करने वालों ने यहाँ रहने वालों को ‘हिन्दू’ कहा I
इन्हें ‘दूसरे आने वाले’ कह सकते हैं I
फिर 300 वर्ष पूर्व व्यापार की अनुमति लेकर आने वालों ने सबको गुलाम बनाया और
सब को ब्लैक इंडियन (Black Indians) कहा I इन्हें ‘तीसरा आने वाला’ कह सकते हैं I
इन तीनों का वर्णन इसलिए है क्योंकि इनके आने का
प्रभाव आज भी है I दूसरे और तीसरे आने वाले वापस लौट गए केवल कुछ की संताने यहाँ
पर हैं I
आज का समाज जो कि पैत्रिक स्वामित्व (patriarchy)
पर आधारित है बच्चे को पिता से जोड़ता है किन्तु सत्य यह है कि बच्चे पर माता का ही
अधिक प्रभाव पड़ता है और इसलिए आज इस प्रायद्वीप के सभी लोग माता से गुण प्राप्त कर
यहीं के हैं I आने वाले समय में जीनोम (genome) स्टडी से प्रत्येक व्यक्ति और समूह
के बारे में ज्यादा सही मालूम पड़ सकेगा I
यहाँ ईरान से पारसी भी आये और अपनी पहचान के साथ
अल्पसंख्या में रह रहे हैं , यहूदी , अर्मेनिआ के लोग भी आये और ऐसे अनेक लोग आये
जो कुछ पीढ़ियों बाद घुल मिल गए I
अन्य हमलावर और शासक जातियां – हुण शाक्य आदि
आये जो फिर कमज़ोर पड़ने के बाद ‘पहले आये लोगों’ द्वारा बनाये गए ऊंच – नीच के
तराजू में तुलते गए I
भारत की वर्तमान जनसँख्या का स्वरुप इस प्रकार
है :
1 ब्रह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और कायस्थ I
2 पिछड़ी जातियां (Backward castes) I
3 दलित जिन्हें संविधान में आरक्षित जातियां कहा
गया I
4 आदिवासी जिन्हें संविधान
में आरक्षित जन-जातियां कहा गया I
उपरोक्त सभी को मनुवादी
‘हिन्दू’ कह कर अपना वर्जस्व बनाए रखना चाहते हैं I
निम्नलिखित वे परिवार हैं
जिन्होंने मनुवाद से मुक्त होने के लिए समता पर आधारित धर्म स्वीकार किये और ‘अल्प
संख्यक’ कहे जाते हैं जब कि वास्तव में अल्प संख्यक केवल मनुवादी ही हैं I
1 मुस्लिम
2 सिक्ख
3 ईसाई
4 बौद्ध
5 जैन
कुछ वर्ग ऐसे हैं जो मुख्य
देशवासियों से अलग पहचान बना कर रह रहे हैं और मनुवादियों की तरह यह भी अल्प
संख्यक हैं :
1 पारसी
2 यहूदी
3 खोजा एवं बोरा
जन्म पर आधारित
ऊंच-नीच
प्राचीन काल की अनेक पुस्तकें उपलब्ध हैं जिनमें
सब से अधिक परिचित पुस्तक ‘मनु स्मृति’ है इस पुस्तक में ऊंच – नीच का माप दंड
दिया है –
इसके अनुसार ब्राह्मण सबसे श्रेष्ठ हैं , फिर
क्षत्रिय हैं और फिर वैश्य हैं I इन तीनों लोगों या जातियों को ‘आर्य’ बताया गया
है I फिर कुछ लोग हैं जिनका काम आर्यों कि सेवा करना है इनको ‘शूद्र’ कहा गया है
और इनके प्रति बहुत नफरत व्यक्त कि गयी है और इनको नीच बताया गया है और कुछ लोग
इनसे भी अधिक नीच बताये गए हैं I
इतनी नफरत क्यों थी ? डर और नफरत एक ही सिक्के के दो पहलू हैं और जब
हम किसी का हक मारते हैं तो उससे डरते भी हैं और हमेशा डरे भी रहते हैं कि कहीं
कभी बदला न ले ले और फिर हमारा अत्याचार और बढ़ता जाता है और अगर वह व्यक्ति बहुत
सीधा और कमज़ोर है तो हम उसकी मृत्यु भी करा सकते हैं क्यूंकि डर , नफरत और अपराध
भाव इतना बढ़ जाता है कि हालात बिगड़ते ही जाते हैं I
मनु स्मृति एक पुस्तक है और हिटलर की लिखी
पुस्तक ‘माईन केम्प (Mein Kampf) भी है I
और जर्मनी में यहूदियों पर जो अत्याचार किये गए
उसका पूरा ब्यौरा भी मौजूद है I अमेरिका में गोरों ने नेटिव अमेरिकंस (Native
Americans) के साथ जो कुछ किया और ब्लैकस (Blacks) के साथ जो किया उसका भी पूरा
ब्यौरा मौजूद है I वैसे अब नस्लवादी चाहते हैं कि अपने घिनौने इतिहास को झुठला दें
– किये को अनकिया बना दें I
मुझे लगता है कि दुनिया के हर देश में कुछ
परिवार और परिवारों के समूह हैं जिन्हें कबीला या जाति कहा जाता है वे नफरत और
ज़ुल्म का शिकार हैं और छोटे और घटिया काम करने को मजबूर हैं चाहे यूरोप अमेरिका
मिडिल ईस्ट या रूस चीन जापान हर जगह ऐसा है पर छुपा हुआ है I
और कभी कभी ज़ुल्म अल्प समय के लिए होता है जैसे
कि उन लोगों पर जो एक मुल्क से पलायन कर के दूसरे मुल्क में बिना अनुमति घुसते हैं
जैसे कि यहाँ असम में हुआ या मयन्मार (बर्मा) में हो रहा है I
दुनिया के सारे लोग एक मानव प्रजाति के सदस्य
हैं पर मानव इतिहास एक तरह के लोगों द्वारा दूसरी तरह के लोगों से नफरत और उन पर
किये गए ज़ुल्म से भरा है I
मानव इतिहास कितने ही बेक़सूर स्त्री पुरुष और
बच्चों की आहों सिसकियों से भरा है जिनसे दुश्मनी कि कोई और वजह नहीं थी सिवाय
इसके कि समाज और इतिहास ने उन्हें एक पहचान दी एक मुखोटा लगा दिया वरना वे तो
बेक़सूर थे I
भारत में दूसरे आने वाले
लोग जो लगभग 1000 वर्ष पूर्व आये थे
यह जो लोग आये थे जो मध्य एशिया से आये थे तुर्क
और मुग़ल यह इस्लाम का मुखोटा लगा कर आये थे I इनके आने और बसने के पूर्व
एलेग्जेंडर और इनके शुरू के लोग सुबुक्त्गीन और महमूद गजनवी तो सिर्फ लूटने आये थे
और यहाँ की संपत्ति , हाथी घोड़े , कारीगर और स्त्री पुरुष को गुलाम बना कर ले गए
थे I
इन तुर्क , अफ़ग़ान और मुगल मुसलामानों ने यहाँ
साम्राज्य स्थापित किया और यहाँ के लोगों को अपने धर्म में सम्मिलित किया I इतिहास
में है कि यहाँ के मंदिर तोड़े और मस्जिदें बनाई और लोगों को तलवार के जोर से
मुस्लिम बनाया और बहुतों को क़त्ल किया और बहुत से स्त्री पुरुष को दासी दास बनाया I
इनके शासन काल तक संभवत: 20 प्रतिशत आबादी
मुस्लिम हो चुकी थी और इनमें धर्म परिवर्तन कर के सम्मिलित हो जाने वालों में अधिकांश
वही परिवार थे जो इनके आने के पूर्व ऊंच-नीच का शिकार थे I
इन मुसलामानों के आने के पूर्व भारत में मुख्य
रूप से तीन धर्म थे – ब्राह्मणों द्वारा प्रतिपादित वैदिक धर्म जिसे सनातन धर्म
कहते हैं और महात्मा बुद्ध द्वारा प्रतिपादित बौद्ध धर्म और महावीर जी द्वारा
प्रतिपादित जैन धर्म I
इन आने वालों मुसलामानों ने न तो अन्य धर्म
पहचाने , न ऊंच नीच से इन पर कोई फर्क पड़ा , न सती प्रथा और विधवाओं कि दुर्दशा से
इनकी आत्मा कचोटी और न देवदासी प्रथा से परेशां हुए और न नर बलि से कोई आत्मा विचलित हुयी I इन्होने सभी
को बस एक नाम दिया – हिन्दू और इस नाम के पीछे भेड़ों के झुण्ड में भेड़िये छुप गए
और आज तक छुपे हैं I
धीरे धीरे ब्रह्मण , क्षत्रिय और वैश्य इन के
सम्पर्क में आये और इन्होने उन्हें सम्मानित जन समझा और उनकी स्त्रियों के सम्पर्क
में आये I
अभी कुछ वर्ष पूर्व 1994 के आस पास SGPGI लखनऊ
के ब्लड सेंटर में ब्रह्मणों के ब्लड ग्रुपिंग कर के ‘मीठे चतुर्वेदी’ और ‘कडुवे
चतुर्वेदी’ का भेद करने का प्रयास किया जा रहा था उन लोगों ने यह सुन रखा था कि एक
तरह के लोगों का मुग़ल परिवारों से लैंगिक सम्बन्ध थे I
ऊंच नीच की भावना एक संक्रामक भावना होती है और
बहुत चालाकी और आसानी से हर नए आने वाले को दुर्दशा के शिकार व्यक्ति या परिवार के
विरुद्ध नफरत और दूरी पैदा करायी जा सकती है I नया आने वाला दुर्दशा के शिकार
व्यक्ति या परिवार से गहराई से बात समझने का कोई प्रयास नहीं करेगा I
और इसका
इतिहास में उदाहरण भी मौजूद है :
Thus Fa-hien , in AD 399-414,
writes ‘Throughout the Country’ we are told, ‘ no one kills any living thing,
or drinks wine, or eats onions or garlic...they do not keep pigs or fowls;
there are no dealings in cattle, no butchers’ shops or distilleries in their
market places.’ The Chandalas or outcasts, who do not observe the rules of
purity , were obliged to live apart, and were required when entering a town or
bazaar to strike a piece of wood as a warning of their approach, in order that
other folk might not be polluted by contact with them .’
फाहियन 399 – 414 में भारत आया था और उसने अपने
संस्मरण लिखे हैं इनमें वह लिखता है कि उसे बताया गया कि पूरे देश में कोई भी जीव
हत्या नहीं करता , मदिरा पान नहीं करता और लहसुन प्याज नहीं खाता , -- सुअर या
पक्षी नहीं पालता और चौपायों के साथ कुछ लेना देना नहीं और बाजारों में कोई कसाई
या शराब कि दुकान नहीं है I’
मतलब सब लोग सात्विक जीवन व्यतीत करते हैं I
‘ और जो चंडाल या जाति से बहिष्कृत लोग हैं जो
शुद्ध जीवन शैली नहीं अपनाते हैं वे अलग रहते हैं और जब नगर या बाज़ार में प्रवेश
कर रहे होते हैं तो उन्हें लकड़ी बजा कर बताना होता है जिससे अन्य लोग उनके आगमन से
सचेत हो जाएँ और उनके छू जाने से अपवित्र होने से अपने को बचा लें I’
यह बताया गया , यह लिखा गया और तब से हर पढ़ने
वाला भारत के लोगों के शुद्ध सात्विक जीवन को नमन करता है और हर वर्ष सैकड़ों
हजारों पर्यटक अध्यात्मिक आनंद प्राप्त करने इस पवित्र भूमि पर आते रहते हैं और
कुछ के बलात्कार और हत्या के समाचार अब मिलने लगे हैं जो पहले छुपे रहते थे I
कुछ पाठकों ने वाराणसी की पृष्ठ भूमि पर बनी ‘संघर्ष’
फिल्म तो देखी ही होगी I
फाहियन के 1500 वर्ष बाद यही पर जन्मे अवध के
आखिरी बादशाह वाजिद अली शाह के पुत्र प्रिंस बिर्जीस क़दर अंग्रेजों के विरुद्ध ग़दर
का नेतृत्व करते हुए फरमाते हैं :
Birjis Qadr who was raised to the throne of
Oudh by rebels on 5th July 1857, under the regency of his mother Hazrat Mahal,
published a proclamation:”.......Men of high class whether Muslim belonging to
Sayyid, Shaikh, Mughal or Pathan families or Brahmans, Kshatriyas, Vanish and
Kayastha among the Hindus were held in esteem and honor in accordance of their
position. No mean person for example sweeper, leather worker carder or Pasi
could claim equality with them.
......... (English) They have brought the
honor of the high classes on a level with that of the lower people- sweepers
and leather workers. In fact, the English show preference to the lower castes
over the higher classes. On the complaint of a sweeper or leather worker, they seize
the person of even a Nawab and a Raja and disgrace him. Wherever they go they
hang men of high classes, and kill their wives and children. Their soldiers
dishonor women. They dig up their houses, seize their property, and leave
nothing.” [History of Freedom Movement of India by Tara Chand]
अंग्रेजों ने कानून के सामने सब को बराबर कर
दिया था और शहजादे को इसी से शिकायत है I मुसलमान शहजादा यह मानता है कि दुनिया के
सारे इंसान आदम और हव्वा की औलाद नहीं हैं बल्कि कुछ जन्म से ऊंचे हैं और कुछ जन्म
से नीचे I
बात यह है कि ऊंच- नीच कि भावना संक्रमण की तरह
है तो 1000 वर्ष पूर्व जो बाहर से तुर्क और मुग़ल आये थे वे भी इससे ग्रसित हो गए
और जो स्थानीय लोग मुस्लिम हो गए वे तो ग्रसित थे ही और धर्म परिवर्तन के बाद जो इज्ज़त उन्हें मिली
वह उन्होंने अपने से नीचे स्तर के लोगों को नहीं दी I
ऐसा सुना जाता है कि पहले डा अम्बेडकर ने
मुस्लिम हो जाने को सोचा पर उन्हें उपयुक्त स्वागत नहीं मिला तो उन्होंने इरादा
बदल दिया I
फिर भी जो दलित मुस्लिम हो गए उन्हें भी मुस्लिम
समाज ने स्वीकार नहीं किया और उनके साथ वही ऊंच-नीच बरती जाति है I
कुछ वर्ष पूर्व लखनऊ में एक मुस्लिम शादी में एक
बावर्ची यही रोना रो रहा था कि कोई इज्ज़तदार मुस्लिम परिवार उसकी बेटी को बहू
बनाने के लिए तैयार नहीं है I
ऊंच-नीच कि पहचान शादी के रिश्ते से होती है
विशेष कर बेटी किसी परिवार में देने पर I
मुस्लिम काल में ही पुर्तगाली, डच और फ्रेंच लोगों
ने कुछ स्थानों पर समुन्द्र तट के निकट
गुजरात, गोवा ,सूरत, बंगाल और पोंडीचेरी पर क़ब्ज़ा किया व्यापार के लिए और धर्म
परिवर्तन के लिए और पुर्तगाली गुलाम (मानव तस्करी) में भी थे और इनका क़ब्ज़ा गोवा
में 1961 तक रहा I
पुर्तगालियों का आतंक भरा इतिहास :
They
built fortresses, maintained garrisons equipped with ammunition and materials
of war, seized and colonized territories, waged wars against non-Christians
offering them alternative of Christianity or sword, and committed barbarous and
inhuman atrocities like blowing persons from the mouth of guns, cutting off the
hands and ears of women in order to snatch their bracelets and earrings, and
slaughtering people wholesale without sparing women and children. They had
carried on their blood-stained commerce by violence and terror. They also
showed the way in recruiting and training Indian soldiers for their armies, and
in taking advantage of the rivalries of Asian princes to build up their empire.
Vain, ostentatious, pompous and corrupt, they were the first as well as worst
representatives of the West to venture to the East. [History of Freedom
Movement of India by Tara Chand ]
‘पश्चिम से सब से पहले पूरब
में आने वाले पुर्तगाली थे I
इन्होने भारतीय सिपाहियों को ले कर अपनी सेनायें गठित कीं और विभिन्न राज्यों की
आपसी दुश्मनी का लाभ उठा कर अपना साम्राज्य स्थापित किया I हिंसा और आतंक द्वारा अपना
खून से रंगा व्यापार चलाया I देसी लोगों को ईसाई धर्म या तलवार में से एक का
विकल्प दिया और अमानवीय बर्बर तरीके अपनाए जैसे कि तोप से उड़वा देना या आभूषण
छीनने के लिए औरतों के हाथ और कान काटना I’
मुस्लिम काल में ही व्यापार की अनुमति लेकर ईस्ट
इंडिया कंपनी आई और फिर मुस्लिम शासन का अंत हुआ और ब्रिटिश काल आरम्भ हुआ I
ब्रिटिश काल में ही भारत में चल रही बहुत सी
अमानवीय प्रथाओं को बंद किया गया I
No comments:
Post a Comment