मुनाफ़िक़ साज़िशों के खिलाफ़ मुस्लिम इत्तिहाद – वक़्त की
ज़रुरत !
मुसलामानों और इस्लाम के दुश्मन यहूदी और इसाई नहीं हैं
बल्कि मुनाफ़िक़ हैं – कुरान भी इन्हीं के खिलाफ लड़ने का हुक्म देता है I यही
मुसलामानों को शिया सुन्नी में लड़ा रहे हैं और यही मुसलामानों और इस्लाम के दुश्मन
की सही शिनाख्त न हो पाए इसलिए मुसलामानों को यहूदी इसाई से लड़ा रहे हैं I
यह मुनाफ़िक़ कौन हैं ? दुनिया में हर शख्स पहले की नस्लों
से जुड़ा है कोई अपने आप नहीं पैदा हो गया है I
दुश्मने रसूल अबू जहल और अबू लहब और दूसरे चचाओं की यह
औलादें हैं जिन्हें मजबूरन इस्लाम कबूल करना पड़ा और पीढ़ी दर पीढ़ी यह दुश्मनी
छुपाये रहे I
18 वीं सदी में इनके वंशज मुहम्मद बिन अब्दुल वहाब और
इब्ने सऊद ने मुआहिदा किया और तब से झूठी तौहीद का परचम उठा कर रसूल और उनके दीन
को ख़त्म करने के लिए जंग की I ब्रिटिश ने इन्हें अरब का बादशाह बना दिया I रसूल और
पहले दो खलीफाओं की क़ब्रों को पिंजरा बना दिया I तीसरे खलीफा, दुख्तरे रसूल ,
उम्मुल मोमिनीन , इमाम हसन और कई मुक़द्दस हस्तियों की क़ब्रों को झूठी तौहीद के नाम
पर मिस्मार कर दिया और अल्लाह की निशानियों सफा और मरवा को तराश काट दिया I
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