शिया और सुन्नियों का दुश्मन – मुनाफ़िक़
सब से बड़ा मुनाफ़िक़ यह कहता है रसूल में क्या ख़ास बात –
अल्लाह ने भेजा जिब्राइल लाये और किसी पर भी नाजिल होता ! लानत है सब से बड़े
मुनाफ़िक़ पर I
उसके बाद का मुनाफ़िक़ कहता है अहलेबैत का कोई दर्जा नहीं
हुसैन का कोई एहसान नहीं और वह बाग़ी थे या यह कहता है कर्बला तो बस अरब के दो
शहजादों की जंग थी – एक जीता एक हारा I
आम सुन्नी मुसलमान रसूल और आले रसूल के मर्तबे को
पहचानता है और मानता है कि अली फ़ातिमा हसन और हुसैन जन्नत के मालिक हैं I
काबिले तशक्कुर हैं वे सच्चे मोमिन जो शुजाअत , अक़ीदत
और कुर्बानियों के साथ उन अंधेरों में शमाए इमामत के गिर्द पीढ़ी दर पीढ़ी परवानों
की तरह इकट्ठे होते रहे I
आम मुसलमान के लिए ऐसा कर पाना मुमकिन नहीं था – आम
मुसाल्मानों के फ़िक़ह के चारों इमामों को भी हुकूमत के ज़ुल्म का शिकार होना पड़ा I
आम मुसलामानों को अपने दुश्मन मुनाफिकों को पहचानना
चाहिए – मक्का मदीने का इंतज़ाम दुनिया भर के मुसलामानों के हाथों में होना चाहिए –
रसूल , असहाब , उम्मुलमोमिनीन की क़ब्रों की तामीर होनी चाहिए – इस्लाम के दुश्मनों
को नेस्त नाबूद करना चाहिए – शिया सुन्नी रहें – मुनाफ़िक़ बाहर कर दिए जाएँ I
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