Friday, July 7, 2017

मेरे साथ 1400 वर्ष पूर्व मदीने का सफ़र कीजिये और सच्चे इस्लाम और मोमिनों को पहचानिए – 10

मेरे साथ 1400 वर्ष पूर्व मदीने का सफ़र कीजिये और सच्चे इस्लाम और मोमिनों को पहचानिए 10

अन निसा .......
101 जब तुम रूए ज़मीन पर सफ़र करो और तुमको इस अम्र का ख़ौफ़ हो कि कुफ़्फ़ार तुम्हें परेशान कर सकते हैं तो उसमें तुम्हारे वास्ते कुछ मुज़ाएक़ा नहीं कि नमाज़ में कुछ कम कर दिया करो बेशक कुफ़्फ़ार तो तुम्हारे ख़ुल्लम ख़ुल्ला दुश्मन हैं”                                                                             जब रसूल भी मौजूद हों :
“102 और जब तुम मुसलमानों में मौजूद हो और तुम उनको नमाज़ पढ़ाने लगो तो एक को लड़ाई के वास्ते छोड़ दो उनमें से एक जमाअत तुम्हारे साथ नमाज़ पढ़े और अपने हथियार अपने साथ लिए रहे फिर जब सजदे कर  ले तो तुम्हारे पीछे पुश्त पनाह बनें और दूसरी जमाअत जो जब तक नमाज़ नहीं पढ़ने पायी है और  तुम्हारे साथ नमाज़ पढ़े और अपनी हिफ़ाज़त की चीजे़ और अपने हथियार लिए रहे कुफ़्फ़ार तो ये चाहते ही हैं कि अपने हथियारों और अपने साज़ व सामान से ज़रा भी ग़फ़लत करो तो एक बारगी सबके सब तुम पर टूट पड़ें हाँ अलबत्ता उसमें कुछ मुज़ाएक़ा नहीं कि  तुमको बारिश के सबब से कुछ तकलीफ़ पहुचे या तुम बीमार हो तो अपने हथियार उतार के रख दो और अपनी हिफ़ाज़त करते रहो और अल्लाह ने तो काफि़रों के लिए जि़ल्लत का अज़ाब तैयार कर रखा है
103 फिर जब तुम नमाज़ अदा कर चुको तो उठते बैठते लेटते (ग़रज़ हर हाल में) अल्लाह को याद करो फिर जब तुम मुतमईन हो जाओ तो मअमूल के मुताबिक़ नमाज़ पढ़ा करो क्योंकि नमाज़ तो इमानदारों पर वक़्त मुय्यन करके फ़र्ज़ की गयी है
104 और  दुशमनों के पीछा करने में सुस्ती न करो अगर लड़ाई में तुमको तकलीफ़ पहुँचती है तो जैसी तुमको तकलीफ़ पहुँचती है उनको भी वैसी ही अज़ीयत होती है और तुम अल्लाह से वह वह उम्मीदें रखते हो जो उनको नसीब नहीं और अल्लाह तो सबसे वाकि़फ़  हिकमत वाला है
105 हमने तुमपर किताब हक के साथ  नाजि़ल की है कि अल्लाह ने तुम्हारी हिदायत की है उसी तरह लोगों के दरमियान फ़ैसला करो और ख़्यानत करने वालों के तरफ़दार न बनो”                                                                      उम्माह में जो बड़े बड़े शामिल थे जैसा होता है हुकूमत को अपने ताल्लुकात में ले कर अपने हक में फैसले और एहकाम करा लेते हैं और यह लोग हक़ीक़तन मुनाफ़िक़ हैं उन्हीं के जोर को कम करने के लिए इस आयत में ताकीद है I  
“106 और अल्लाह से मग़फि़रत की दुआ माँगों बेशक अल्लाह बड़ा बख़्शने वाला मेहरबान है
107 और तुम  की तरफ़ होकर न लड़ो जो अपने ही से दग़ाबाज़ी करते हैं बेशक अल्लाह ऐसे शख़्स को दोस्त नहीं रखता जो दग़ाबाज़ गुनाहगार हो”                                यह मुनाफ़िक़ रसूल और मुसलामानों की ताक़त को अपने दुनियावी फायदे के लिए इस्तेमाल करना चाह रहे थे I
“108 लोगों से तो अपनी शरारत छुपाते हैं और अल्लाह से नहीं छुपा सकते हालांकि वह तो उस वक़्त भी उनके साथ साथ है जब वह लोग रातों को बैठकर उन बातों के मशवरे करते हैं जिनसे अल्लाह राज़ी नहीं और अल्लाह तो उनकी सब करतूतों को घेरे हुए है
109 भला दुनिया की जि़न्दगी में तो तुम उनकी तरफ़ होकर लड़ने खड़े हो गए  फिर क़यामत के दिन उनका तरफ़दार बनकर अल्लाह से कौन लड़ेगा या कौन उनका वकील होगा ?”                                                                  लेकिन अगर यह मुनाफ़िक़ अपनी शरारत छोड़ दें :
“110 और जो कोई बुरा काम करे या अपने नफ़्स पर ज़ुल्म करे उसके बाद अल्लाह से अपनी मग़फि़रत की दुआ माँगे तो अल्लाह को बड़ा बख़्शने वाला मेहरबान पाएगा
111 और जो कोई गुनाह करता है तो उससे कुछ अपना ही नुक़सान करता है और अल्लाह तो वाकि़फ़ बड़ी तदबीर वाला है
112 और जो कोई ख़ता या गुनाह करे फिर उसे किसी बेक़सूर के सर थोपे तो उसने एक बोहतान और सरीही गुनाह को अपने ऊपर लाद लिया “                              मुनाफ़िक़ का एक गिरोह रसूल को बरगलाने में कामयाब हो ही गया था :
“113 और  अगर तुमपर अल्लाह का फ़ज़ल और उसकी मेहरबानी न होती तो उन में से एक गिरोह तुमको गुमराह करने का रास्ता बना चुके थे  हालाँकि वह लोग बस अपने आप को गुमराह कर रहे हैं और यह लोग तुम्हें कुछ भी ज़रर नहीं पहुँचा सकते और अल्लाह ही ने तो तुमपर अपनी किताब और हिकमत नाजि़ल की और जो बातें तुम नहीं जानते थे तुम्हें सिखा दी और तुम पर तो अल्लाह का बड़ा फ़ज़ल है
114 उनके राज़ की बातों में अक्सर में भलाई नहीं मगर  जो किसी को सदक़ा देने या अच्छे काम करने या लोगों के दरमियान मेल मिलाप कराने का हुक्म दे  और जो अल्लाह की ख़ुशनूदी की ख़्वाहिश में ऐसे काम करेगा तो हम अनक़रीब ही उसे बड़ा अच्छा बदला अता फरमाएंगे
115 और जो रास्त के ज़ाहिर होने के बाद रसूल से सरकशी करे और किसी और राह पर चले तो जिधर वह फिर गया है हम भी उधर ही फेर देंगे और  उसे जहन्नुम में झोंक देंगे और वह तो बहुत ही बुरा ठिकाना है
116 अल्लाह बेशक उसको तो नहीं बख़्शता कि उसका कोई और शरीक बनाया जाए हाँ उसके सिवा जो गुनाह हो जिसको चाहे बख़्श दे और जिसने किसी को अल्लाह का शरीक बनाया तो वह बस भटक के बहुत दूर जा पड़ा
117 ये अल्लाह को छोड़कर बस औरतों ही की परसतिश करते हैं  ये लोग सरकश शैतान की परसतिश करते हैं
118 जिसपर अल्लाह ने लानत की है और जिसने कहा था कि मैं तेरे बन्दों में से कुछ को ज़रूर लूँगा
119 और फिर उन्हें ज़रूर गुमराह करूंगा और उन्हें बड़ी बड़ी उम्मीदें भी ज़रूर दिलाऊॅगा और यक़ीनन उन्हें सिखा दूंगा फिर वो जानवरों के कान चीरें  और उन्हें हुक्म दूंगा  अल्लाह की बनाई हुयी सूरत को ज़रूर बदल डालें I  और  जिसने अल्लाह को छोड़कर शैतान को अपना सरपरस्त बनाया तो उसने खुल्लम खुल्ला सख़्त घाटा उठाया
120 शैतान उनसे अच्छे अच्छे वायदे भी करता है उम्मीदें भी दिलाता है और शैतान उनसे जो कुछ वायदे भी करता है वह बस निरा धोखा है
121 यही तो वह लोग हैं जिनका ठिकाना बस जहन्नुम है और वहाँ से भागने की जगह भी न पाएंगे “                                                                      वह जो ईमान लाये और अच्छे अच्छे काम करते हैं :
“122 और जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और अच्छे अच्छे काम किए उन्हें हम अनक़रीब ही उन बाग़ों में जा पहुँचाएगें जिनके नीचे नहरें जारी होंगी और ये लोग उसमें हमेशा आबादुल आबाद तक रहेंगे अल्लाह का पक्का वायदा है और अल्लाह से ज़्यादा बात में पक्का कौन होगा                                                    बुरा जो भी करे सज़ा पायेगा
“123 न तुम लोगों की आरज़ू से न एहले किताब की तमन्ना से कुछ हासिल हो सकता है बल्कि जो बुरा काम करेगा उसे उसका बदला दिया जाएगा और फिर अल्लाह के सिवा किसी को न तो अपना सरपरस्त पाएगा और न मददगार
124 और जो शख़्स अच्छे अच्छे काम करेगा) मर्द हो या औरत और ईमान वाला   हो तो ऐसे लोग बेहिश्त में  जा पहुचेंगे और उनपर तिल भर भी ज़ुल्म न किया जाएगा                                                                       दीन में कौन सब से अच्छा ?
 “125 और उस से दीन में बेहतर कौन होगा जिसने अल्लाह के सामने अपना सरे तसलीम झुका दिया और नेको कार भी है और इबराहीम के तरीके पर चलता है जो बातिल से कतरा कर चलते थे और अल्लाह ने इब्राहिम को तो अपना ख़लिस दोस्त बना लिया
126 और जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है अल्लाह ही का है और अल्लाह ही सब चीज़ को घेरे हुए है
127 ये लोग तुमसे औरतों के बारे में फ़तवा तलब करते हैं तुम उनसे कह दो कि अल्लाह तुम्हें फतवा देता है और जो हुक्म कु़रान में तुम्हें सुनाया जा चुका है वह हक़ीक़तन उन यतीम लड़कियों के वास्ते था जिन्हें तुम उनका मुअय्यन किया हुआ हक़ नहीं देते और चाहते हो और उनसे निकाह करना चाहते हो I  और उन कमज़ोर नातवाँ  बच्चों के बारे में हुक्म फ़रमाता है और ये है कि तुम यतीमों के हुक़ूक़ के बारे में इन्साफ पर क़ायम रहो और  जो कुछ तुम नेकी करोगे तो अल्लाह ज़रूर वाकि़फ़कार है “                                                           बार बार ताकीद के बाद भी ऐसे लोग हैं जो घुमा फिर कर फायदा चाहते हैं जिम्मेदारियां निभाना नहीं चाहते”                                                       शौहर बीवी के रिश्ते और नफस की खराबियां  
“128 और अगर कोई औरत अपने शौहर की ज़्यादती व बेतवज्जोही से  ख़ौफ़ रखती हो तो मियाँ बीवी के बाहम किसी तरह मिलाप कर लेने में दोनों  कुछ गुनाह नहीं है और सुलह तो बेहतर है और नफस तो बुख़्ल और लालच                      (कान्चूपन) की तरफ मायल होता है और अगर तुम नेकी करो और परहेजदारी करो तो अल्लाह तुम्हारे हर काम से ख़बरदार है
129 और अगरचे तुम बहुतेरा चाहो तुममें इतनी सकत तो हरगिज़ नहीं है कि अपनी कई बीवियों में इन्साफ़ कर सको ऐसा भी तो न करो कि  हमातन माएल  हो जाओ कि लटकी हुयी छोड़ दो और अगर बाहम मेल कर लो और बचे रहो तो अल्लाह यक़ीनन बड़ा बख़्शने वाला मेहरबान है
130 और अगर दोनों एक जुदा हो जाएं तो अल्लाह अपने वसी ख़ज़ाने से  दोनों को  बेनियाज़ कर देगा और अल्लाह तो बड़ी गुन्जाइश और तदबीर वाला है और 131 जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है (ग़रज सब कुछ) अल्लाह ही का है और जिन लोगों को तुमसे पहले किताबे अल्लाह अता की गयी है उनको और तुमको भी उसकी हमने वसीयत की थी कि अल्लाह से डरते रहो तो जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है  अल्लाह ही का है  और अल्लाह तो सबसे बेपरवा और  मौसूफ़ हर हम्द वाला है
132 जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है  ख़ास अल्लाह ही का है और अल्लाह तो कारसाज़ी के लिये काफ़ी है
133 ऐ लोगों अगर अल्लाह चाहे तो तुमको हटा दे  दूसरों को ले आये  और अल्लाह तो इसपर क़ादिर व तवाना है
134 और जो बदला दुनिया ही में चाहता है तो अल्लाह के पास दुनिया व आखि़रत दोनों का अज्र मौजूद है और अल्लाह तो हर शख़्स की सुनता और सबको देखता है                                                                                 गवाही दो और सच्ची
“135 ऐ ईमानवालों मज़बूती के साथ इन्साफ़ पर क़ायम रहो और अल्लाह के लिए  गवाही दो अगरचे  ख़ुद तुम्हारे या तुम्हारे माँ बाप या क़राबतदारों के लिए खिलाफ़  न हो ख़्वाह मालदार हो या मोहताज  अल्लाह तो  उनपर ज़्यादा मेहरबान है तो तुम ख़्वाहिशे नफ़सियानी की पैरवी न करो और अगर घुमा फिरा के गवाही दोगे या बिल्कुल इन्कार करोगे तो अल्लाह  उससे ख़ूब वाकि़फ़ है”                                   ईमान किन पर ?
“136 ऐ ईमानवालों अल्लाह और उसके रसूल  पर और उसकी किताब पर जो उसने अपने रसूल पर नाजि़ल की है और उस किताब पर जो उसने पहले नाजि़ल की ईमान लाओ और जो अल्लाह और उसके फ़रिश्तों और उसकी किताबों और उसके रसूलों और रोज़े आखि़रत का मुन्किर हुआ तो वह राहे रास्त से भटक के दूर जा पड़ा
137 बेशक जो लोग ईमान लाए उसके बाद फि़र काफि़र हो गए फिर ईमान लाए और फिर उसके बाद काफि़र हो गये और कुफ़्र में बढ़ते चले गए तो अल्लाह उनकी मग़फि़रत करेगा और न उन्हें राहे रास्त की हिदायत ही करेगा
138  मुनाफि़क़ों को ख़ुशख़बरी दे दो कि उनके लिए ज़रूर दर्दनाक अज़ाब है
139 जो लोग मोमिनों को छोड़कर काफि़रों को अपना सरपरस्त बनाते हैं क्या उनके पास इज़्ज़त की तलाश करते हैं इज़्ज़त सारी बस अल्लाह ही के लिए ख़ास है
140 अल्लाह तुम पर अपनी किताब कु़रान में ये हुक्म नाजि़ल कर चुका है कि जब तुम सुन लो कि अल्लाह की आयतों से ईन्कार किया जाता है और उससे मसख़रापन किया जाता है तो तुम उन  के साथ मत बैठो यहाँ तक कि वह किसी दूसरी बात में ग़ौर करने लगें वरना तुम भी उस वक़्त उनके बराबर हो जाओगे उसमें तो शक ही नहीं कि अल्लाह तमाम मुनाफि़क़ों और काफि़रों को  जहन्नुम में जमा ही करेगा
141  जो तुम्हारे मुन्तजि़र है तो अगर अल्लाह की तरफ़ से तुम्हें फ़तेह हुयी तो कहने लगे कि क्या हम तुम्हारे साथ न थे और अगर  हिस्सा काफि़रों को मिला तो  कहते हैं क्या हम तुमपर ग़ालिब न आ गए थे  और तुमको मोमिनीन  से हमने बचाया नहीं था I क़यामत के दिन तो अल्लाह तुम्हारे दरमियान फै़सला करेगा और अल्लाह ने काफि़रों को मोमिनीन पर ऊँचा रहने की हरगिज़ कोई राह नहीं क़रार दी है
142 बेशक मुनाफि़क़ीन  अल्लाह को फरेब देते हैं हालाँकि अल्लाह ख़ुद उन्हें धोखा देता है और ये लोग जब नमाज़ पढ़ने खड़े होते हैं तो  अलकसाए हुए खड़े होते हैं और सिर्फ लोगों को दिखाते हैं और दिल से तो अल्लाह को कुछ यू ही सा याद करते हैं
143 बीच अधड़ में पड़े झूल रहे हैं न इधर न उधर जिसे अल्लाह गुमराही में छोड़ दे उसकी तुम हरगिज़ सबील नहीं कर सकते
144 ऐ ईमान वालों मोमिनीन को छोड़कर काफि़रों को सरपरस्त न बनाओ क्या ये तुम चाहते हो कि अल्लाह का सरीही इल्ज़ाम अपने सर क़ायम कर लो
145 इसमें तो शक ही नहीं कि मुनाफि़क जहन्नुम के सबसे नीचे तबके़ में होंगे और तुम वहाँ किसी को उनका हिमायती भी न पाओगे”                                 मगफिरत का रास्ता :
“146 मगर जिन लोगों ने तौबा कर ली और अपनी हालत दुरूस्त कर ली और अल्लाह से लगे लिपटे रहे और अपने दीन को महज़ अल्लाह के वास्ते निरा खरा कर लिया तो ये लोग मोमिनीन के साथ  होंगे और मोमिनीन को अल्लाह अनक़रीब ही बड़ा बदला अता फ़रमाएगा
147 अल्लाह तुम पर अज़ाब करके क्या करेगा अगर तुमने अल्लाह का शुक्र किया और उसपर ईमान लाए बल्कि अल्लाह तो क़दरदा और वाकि़फ़कार है
148 अल्लाह खुले आम बुरा कहने को पसन्द नहीं करता मगर उसके जिस पर ज़ुल्म हुआ हो और अल्लाह तो सुनता है जानता है
149 अगर दिखा कर नेकी करते हो या छुपा कर या किसी की बुराई से दरगुज़र करते हो तो तो अल्लाह भी बड़ा दरगुज़र करने वाला क़ादिर है
150 बेशक जो लोग अल्लाह और उसके रसूलों से इन्कार करते हैं और अल्लाह और उसके रसूलों में तफ़रक़ा डालना चाहते हैं और कहते हैं कि हम बाज़ पर ईमान लाए हैं और बाज़ का इन्कार करते हैं और चाहते हैं कि इस के दरमियान एक दूसरी राह निकलें
151 यही लोग हक़ीक़तन काफि़र हैं और हमने काफि़रों के वास्ते ज़िल्लत देने वाला अज़ाब तैयार कर रखा है
152 और जो लोग अल्लाह और उसके रसूलों पर ईमान लाए और उनमें से किसी में तफ़रक़ा नहीं करते तो ऐसे ही लोगों को अल्लाह बहुत जल्द उनका अज्र अता फ़रमाएगा और अल्लाह तो बड़ा बख़्शने वाला मेहरबान है
153 अहले किताब जो तुमसे दरख़्वास्त करते हैं कि तुम उनपर एक किताब आसमान से उतरवा दो  ये लोग मूसा से तो इससे कहीं बढ़  के दरख़्वास्त कर चुके हैं चुनान्चे कहने लगे कि हमें अल्लाह को खुल्लम खुल्ला दिखा दो तब उनकी शरारत की वजह से बिजली ने ले डाला फिर उन लोगों के पास वाज़े और रौशन  आ चुकी थी उसके बाद भी उन लोगों ने बछड़े को बना लिया फिर हमने उससे भी दरगुज़र किया और मूसा को हमने सरीही ग़लबा अता किया
154 और हमने उनके अहद व पैमान की वजह से उन पर तूर को लटका दिया और हमने उनसे कहा कि दरवाज़े में सजदा करते हुए दाखि़ल हो और हमने  कहा कि तुम हफ़्ते के दिन  तजावुज़ न करना और हमने उनसे बहुत मज़बूत एहदो पैमान ले लिया
155 फिर उनके अपने एहद तोड़ डालने और एहकामे अल्लाह से इन्कार करने और नाहक़ अम्बिया को क़त्ल करने और ये कहने की वजह से कि हमारे दिलों पर गि़लाफ़ चढे़ हुए हैं बल्कि अल्लाह ने उनके कुफ़्र की वजह से उनके दिलों पर मोहर कर दी है तो चन्द आदमियों के सिवा ये लोग ईमान नहीं लाते
156 और उनके काफि़र होने और मरियम पर बहुत बड़ा बोहतान बाँधने कि वजह से
157 और उनके यह कहने की वजह से कि हमने मरियम के बेटे ईसा अल्लाह के रसूल को क़त्ल कर डाला हालाँकि न तो उन लोगों ने उसे क़त्ल ही किया न सूली ही मुशाबेह कर दिया गया और जो लोग इस बारे में इख़्तेलाफ़ करते हैं यक़ीनन वह लोग धोखे में हैं उनको उस की ख़बर ही नहीं मगर फ़क़्त अटकल के पीछे हैं और ईसा को उन लोगों ने यक़ीनन क़त्ल नहीं किया
158 बल्कि अल्लाह ने उन्हें अपनी तरफ़ उठा लिया और अल्लाह तो बड़ा ज़बरदस्त तदबीर वाला है
159 और अहले किताब में से कोई ऐसा न होगा जो उनपर मौत के क़ब्ल ईमान न लाए और वह उन पर गवाह होंगे
160 ग़रज़ यहूदयों की शरारतों और गुनाह की वजह से हमने उनपर वह साफ़ सुथरी चीजें जो उनके लिए हलाल थीं हराम कर दी और उनके अल्लाह की राह से बहुत से लोगों को रोकने कि वजह से भी                                                          161 और बावजूद मुमानिअत सूद खा लेने और नाहक़ ज़बरदस्ती लोगों के माल खाने की वजह से उनमें से जिन लोगों ने कुफ़्र इख़्तेयार किया उनके वास्ते हमने दर्दनाक अज़ाब तैयार कर रखा है
162 लेकिन जो लोग इल्म में बड़े मज़बूत पाए पर फ़ायज़ हैं वह और ईमान वाले तो जो तुमपर नाजि़ल हुयी है और से नमाज़ पढ़ते हैं और ज़कात अदा करते हैं और अल्लाह और रोज़े आख़ेरत का यक़ीन रखते हैं ऐसे ही लोगों को हम अनक़रीब बहुत बड़ा अज्र अता फ़रमाएंगे
163 हमने तुम्हारे पास तो इसी तरह वहीभेजी जिस तरह नूह और उसके बाद वाले पैग़म्बरों पर भेजी थी और जिस तरह इबराहीम और इस्माइल और इसहाक़ और याक़ूब और औलादे याक़ूब व ईसा व अय्यूब व युनुस व हारून व सुलेमान के पास वहीभेजी थी और हमने दाऊद को ज़ुबूर अता की                                          164 जिनका हाल हमने तुमसे पहले ही बयान कर दिया और बहुत से ऐसे रसूल जिनका हाल तुमसे बयान नहीं किया और अल्लाह ने मूसा से बातें भी कीं
165 और हमने ख़ुशख़बरी देने वाले और अज़ाब से डराने वाले रसूल  ताकि रसूलों  के आने के बाद लोगों की अल्लाह पर कोई हुज्जत बाक़ी न रह जाए और अल्लाह तो बड़ा ज़बरदस्त हकीम है
166 अल्लाह गवाही देता है जो उसने  तुम पर नाजि़ल किया है हक से  नाजि़ल किया है  उसकी गवाही फ़रिश्ते देते हैं और  अल्लाह गवाही के लिए काफ़ी है
167 जिन लोगों ने कुफ़्र इख़्तेयार किया और अल्लाह की राह से रोका वह राहे रास्त से भटक के बहुत दूर जा पडे़
168 बेशक जिन लोगों ने कुफ़्र इख़्तेयार किया और ज़ुल्म करते रहे न तो अल्लाह उनको बख़्शेगा ही और न ही उन्हें रास्ता दिखाएगा  
169 सिवाय  जहन्नुम के रास्ते के  जिसमें ये लोग हमेशा  रहेंगे और ये तो अल्लाह के वास्ते बहुत ही आसान बात है
170 ऐ लोगों तुम्हारे पास तुम्हारे रब की तरफ़ से रसूल हक़ के साथ आ चुके हैं ईमान लाओ  तुम्हारे हक़ में बेहतर है और अगर इन्कार करोगे तो  जो कुछ ज़मीन और आसमानों में है सब अल्लाह ही का है और अल्लाह बड़ा वाकि़फ़कार हकीम है
171 ऐ एहले किताब अपने दीन में हद से तजावुज़ न करो और अल्लाह की शान में सच के सिवा न कहो मरियम के बेटे ईसा अल्लाह के एक रसूल और उसका  कलमा थे जिसे अल्लाह ने मरियम के पास भेजा और अल्लाह की तरफ़ से एक रूह  थे बस अल्लाह और उसके रसूलों पर ईमान लाओ और तसलीस से बाज़ रहो अल्लाह तो बस यक्ता माबूद है पाक व पाकीज़ा है कि उसका कोई लड़का हो जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है सब तो उसी का है और अल्लाह तो कारसाज़ी में काफ़ी है
172 न तो मसीह ही अल्लाह का बन्दा होने से तुनक सकते हैं और न मुक़र्रर फ़रिश्ते और  जो उसकी  बन्दगी  से तुनकेगा और शेख़ी करेगा तो अनक़रीब ही अल्लाह उन सबको अपनी तरफ़ जमा करेगा”                                                       कौन फायेदे में रहेंगे ?                                                173 बस जिन लोगों ने ईमान कु़बूल किया है और अच्छे  काम किए हैं उनका उन्हें सवाब पूरा पूरा भर देगा बल्कि अपने फ़ज़ल  से कुछ और ज़्यादा ही देगा और लोग उसका बन्दा होने से इन्कार करते थे और शेख़ी करते थे उन्हें तो दर्दनाक अज़ाब में मुब्तिला करेगाऔर लुत्फ़ ये है कि वह लोग अल्लाह के सिवा न अपना सरपरस्त ही पायेगें और न मददगार
174 ऐ लोगों यकीनन तुम्हारे रब की तरफ़ से  दलील आ चुकी और हम तुम्हारे पास स्पष्ट नूर भेज चुके हैं
175 बस जो लोग अल्लाह पर ईमान लाए और उसी से लगे लिपटे रहे तो अल्लाह भी उन्हें अनक़रीब ही अपनी रहमत व फ़ज़ल में दाखिल करेगा  और उन्हे अपनी  तरफ का सीधा रास्ता दिखा देगा
176  तुमसे लोग फ़तवा तलब करते हैं तुम कह दो अल्लाह तो ख़ुद तुम्हे फ़तवा देता है कि अगर कोई ऐसा मर जाए उसके सिर्फ एक बहन हो तो उसका तरके से आधा होगा और अगर वह लावलद हो तो वह उसका वारिस होगा और अगर दो बहनें  हों तो उनको तरके से दो तिहाई मिलेगा और अगर किसी के वारिस भाई बहन दोनों  हों तो मर्द को औरत के हिस्से का दुगना मिलेगा तुम लोगों के भटकने के ख़्याल से अल्लाह अपने एहकाम वाजे करके बयान फ़रमाता है और अल्लाह तो हर चीज़ से वाकि़फ़ है                                                       (93) 99  सूरए अज़ ज़िलज़ाल                                                               1 जब ज़मीन ज़लज़ले से हिला दी जायेगी                                                                   2 ज़मीन अपनेअपने ऊपर का बोझ उतार फैंकेगी                                                             3 इंसान कहेगा इसे क्या हुआ                                                                                     4 उस दिन वह खबर देगी                                                                                           5 अपने रब के हुक्म से                                                                                             6 उस दिन इंसान झुंडों में निकल आयेंगे अपने आमाल दिखाने                                         7 जिसने एक ज़र्रा भर भी नेकी की होगी उसे देख लेगा                                                         8 जिसने ज़र्रा भर भी बुराई की होगी उसे देख लेगा  
(94) 57 सूरए अल हदीद
1 जो जो चीज़ सारे आसमान व ज़मीन मे है सब अल्लाह की तसबीह करती है और वही ग़ालिब हिकमत वाला है
2 सारे आसमान व ज़मीन की बादशाही उसी की है वही जिलाता है वही मारता है और वही हर चीज़ पर कादिर है
3 वही सबसे पहले और सबसे आखि़र है और सब पर ज़ाहिर और  पोशीदा है और वही सब चीज़ों को जानता
4 वह वही तो है जिसने सारे आसमान व ज़मीन को छहः दिन में पैदा किए फिर अर्श पर आमादा हुआ जो चीज़ ज़मीन में दाखिल होती है और जो उससे निकलती है और जो चीज़ आसमान से नाजि़ल होती है और जो उसकी तरफ़ चढ़ती है  उसको मालूम है और तुम जहाँ कहीं रहो वह तुम्हारे साथ है और जो कुछ भी तुम करते हो अल्लाह उसे देख रहा है
5 सारे आसमान व ज़मीन की बादशाही ख़ास उसी की है और अल्लाह ही की तरफ़ कुल उमूर की रूजू होती है
6 वही रात को दिन में दाखिल करता है और दिन को रात में दाखि़ल करता है  और दिलों के भेदों तक से ख़ूब वाकि़फ़ है
7 अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान लाओ और जिस में उसने तुमको अपना खलीफा बनाया है उसमें से से कुछ  ख़र्च करो तो तुम में से जो लोग ईमान लाए और ख़र्च करते रहें उनके लिए बड़ा अज्र है
8 और तुम्हें क्या हो गया है कि अल्लाह पर ईमान नहीं लाते हो हालाँकि रसूल तुम्हें बुला रहें हैं कि अपने रब पर ईमान लाओ और अल्लाह तुम से इसका इक़रार ले चुका अगर तुम मोमिन हो
9 वही तो है जो अपने बन्दे पर वाज़ेए व रौशन आयतें नाजि़ल करता है ताकि तुम लोगों को तारीकियों से निकाल कर रौशनी में ले जाए और बेशक अल्लाह तुम पर बड़ा मेहरबान और निहायत रहम वाला है
10 और तुमको क्या हो गया कि अल्लाह की राह में ख़र्च नहीं करते हालाँकि सारे आसमान व ज़मीन का मालिक व वारिस अल्लाह ही है तुममें से जिस ने पहले  ख़र्च किया और जेहाद किया  वह बराबर नहीं उनका दर्जा उन लोगों से कहीं बढ़ कर है जिन्होंने बाद में ख़र्च किया और जेहाद किया और अल्लाह ने नेकी और सवाब का वायदा तो सबसे किया है और जो कुछ तुम करते हो अल्लाह उससे ख़ूब वाकि़फ़ है
11 कौन ऐसा है जो अल्लाह को ख़ालिस नियत से क़र्जे हसना दे तो अल्लाह उसके लिए दूना कर दे और उसके लिए बहुत मुअज़्जि़ज़ सिला तो है ही
12 जिस दिन तुम मोमिन मर्द और मोमिन औरतों को देखोगे कि उन का नूर उनके आगे आगे और दाहिने तरफ़ चल रहा होगा तो उनसे कहा तुमको बशारत हो कि आज तुम्हारे लिए बाग़ (जन्नत)  है जिनके नीचे नहरें जारी हैं जिनमें हमेशा रहोगे यही तो बड़ी कामयाबी है
13 उस दिन मुनाफि़क मर्द और मुनाफि़क औरतें ईमान लाने वालों  से कहेंगे एक नज़र हमारी तरफ़ भी करो कि हम भी तुम्हारे नूर से कुछ रौशनी हासिल करें तो  कहा जाएगा कि तुम अपने पीछे लौट जाओ और किसी और नूर की तला करो फिर उनके बीच में एक दीवार खड़ी कर दी जाएगी जिसमें एक दरवाज़ा होगा  उसके अन्दर की जानिब तो रहमत है और बाहर की तरफ़ अज़ाब तो मुनाफि़क़ीन मोमिनीन से पुकार कर कहेंगे
14 क्या हम कभी तुम्हारे साथ न थे तो मोमिनीन कहेंगे थे तो ज़रूर मगर तुम ने तो ख़ुद अपने आपको बला में डाला और  मुन्तजि़र हैं और  शक किया किए और तुम्हें  तमन्नाओं ने धोखे में रखा यहाँ तक कि अल्लाह का हुक्म आ पहुँचा और एक बड़े दग़ाबाज़ ने अल्लाह के बारे में तुमको फ़रेब दिया
15 तो आज न तो तुमसे कोई मुआवज़ा लिया जाएगा और न काफि़रों से तुम सबका ठिकाना आग  है वही तुम्हारी मौला  है और  बुरी जगह है
16 क्या ईमान लाने वालों  के लिए अभी तक इसका वक़्त नहीं आया कि अल्लाह की याद और क़ुरआन के लिए जो नाजि़ल हुआ है उनके दिल नरम हों और वह उन लोगों के से न हो जाएँ जिनको उन से पहले किताब दी गयी थी तो  एक ज़माना दराज़ गुज़र गया तो उनके दिल सख़्त हो गए और इनमें से बहुतेरे बदकार हैं
17  जान रखो कि अल्लाह ही ज़मीन को उसके मरने के बाद जि़न्दा  करता है हमने तुमसे अपनी निशानियाँ खोल खोल कर बयान कर दी हैं ताकि तुम समझो
18  बेशक ख़ैरात देने वाले मर्द और ख़ैरात देने वाली औरतें और  अल्लाह की नीयत से ख़ालिस क़र्ज़ देते हैं उनको दोगुना  दिया जाएगा और उनका बहुत मुअजि़ज़ सिला तो है ही
19 और जो लोग अल्लाह और उसके रसूलों पर ईमान लाए यही लोग अपने रब के नज़दीक सिद्दीक़ों और शहीदों के दरजे में होंगे उनके लिए उन्ही  का अज्र और उन्हीं का नूर होगा और जिन लोगों ने कुफ़्र किया और हमारी आयतों को झुठलाया वही लोग जहन्नुमी हैं
20 जान रखो कि दुनियावी जि़न्दगी महज़ खेल और तमाशा और ज़ाहिरी ज़ीनत  और आपस में एक दूसरे पर फ़ख्ऱ करना और माल और औलाद की एक दूसरे से ज़्यादा ख़्वाहिश है  बारिश की सी मिसाल है जिस  से किसानों की खेती  उनको ख़ुश कर देती थी फिर सूख जाती है तो तू उसको देखता है कि ज़र्द हो जाती है फिर चूर चूर हो जाती है और आखि़रत में सख़्त अज़ाब है और  अल्लाह की तरफ़ से बख़शिश और ख़ुशनूदी और दुनयावी जि़न्दगी तो बस फ़रेब का साज़ो सामान है
21 तुम अपने रब के बख़शिश की और बाग़ (जन्नत)  की तरफ़ लपक के आगे बढ़ जाओ जिसका अज्र आसमान और ज़मीन के अज्र के बराबर है जो उन लोगों के लिए तैयार की गयी है जो अल्लाह पर और उसके रसूलों पर ईमान लाए हैं ये अल्लाह का फज़ल है जिसे चाहे अता करे और अल्लाह का फज़ल तो बहुत बड़ा है
22 जितनी मुसीबतें रूए ज़मीन पर और ख़ुद तुम लोगों पर नाजि़ल होती हैं  क़ब्ल इसके कि हम उन्हें पैदा करें किताब  में  हैं बेशक ये अल्लाह पर आसान है
23 ताकि जब कोई चीज़ तुमसे जाती रहे तो तुम उसका रंज न किया करो और जब कोई चीज़ अल्लाह तुमको दे तो उस पर न इतराया करो और अल्लाह किसी इतराने वाले शेख़ीबाज़ को दोस्त नहीं रखता
24 जो ख़ुद भी बुख़्ल करते हैं और दूसरे लोगों को भी बुख़्ल करना सिखाते हैं और जो रूगरदानी करे तो अल्लाह भी बेपरवा सज़ावारे हम्दोसना है
25 हमने यक़ीनन अपने पैग़म्बरों को वाज़े व रौशन मोजिज़े देकर भेजा और उनके साथ किताब और तराज़ू नाजि़ल किया ताकि लोग इन्साफ़ पर क़ायम रहे और हम ही ने लोहे को नाजि़ल किया जिसके ज़रिए से सख़्त लड़ाई और लोगों के बहुत से नफ़े हैं और ताकि अल्लाह देख ले कि बेदेखे भाले अल्लाह और उसके रसूलों की कौन मदद करता है बेशक अल्लाह बहुत ज़बरदस्त ग़ालिब है
26 और बेशक हम ही ने नूह और इबराहीम को  भेजा और उनही दोनों की औलाद में नबूवत और किताब मुक़र्रर की तो उनमें के बाज़ हिदायत याफ़्ता हैं और उन के बहुतेरे बदकार हैं
27 फिर उनके पीछे ही उनके क़दम ब क़दम अपने और पैग़म्बर भेजे और उनके पीछे मरियम के बेटे ईसा को भेजा और उनको इन्जील अता की और जिन लोगों ने उनकी पैरवी की उनके दिलों में शफ़क़्क़त और मेहरबानी डाल दी और रहबानियत उन लोगों ने ख़ुद एक नयी बात निकाली थी हमने उनको उसका हुक़्म नहीं दिया था मगर अल्लाह की ख़ुशनूदी हासिल करने की ग़रज़ से  तो उसको भी जैसा बनाना चाहिए था न बना सके तो जो लोग उनमें से इमान लाए उनको हमने उनका अज्र दिया उनमें के बहुतेरे तो बदकार ही हैं
28 ऐ ईमान लाने वालों  अल्लाह से डरो और उसके रसूल पर ईमान लाओ तो अल्लाह तुमको अपनी रहमत के दो हिस्से अज्र अता फ़रमाएगा और तुमको ऐसा नूर इनायत फ़रमाएगा जिस में तुम चलोगे और तुमको बख्श भी देगा और अल्लाह तो बड़ा बख्शने  वाला मेहरबान है
29 ताकि एहले किताब ये न समझें कि अल्लाह के फज़ल  पर कुछ भी क़ुदरत नहीं रखते और ये तो यक़ीनी बात है कि फज़ल अल्लाह ही के कब्ज़े में है वह जिसको चाहे अता फरमाए और अल्लाह तो बड़े फज़ल  का मालिक है        

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