अली खामिनीई का कश्मीर पर बयान : हक और हकीकत से कोसों दूर
जिहाद या जंग उस दुश्मन से किया जाता है जो हमला करे या लड़ने को तयार और आमादा
हो – किसी आबादी पर मुस्लाह लोग गोलियों की बौछार कर दें या बम फेंक दें तो
यह ज़मीन पर फसाद बरपा करना है जिसे कुरान मन करता है यह जिहाद नहीं I
फिर अपने बम बाँध कर इस नियत से उड़ा देना कि आस पास की लोग भी ख़त्म हो जायेंगे
इसकी इस्लाम कैसे इजाज़त दे सकता है ?
आजादी के नाम पर मुल्क के एक हिस्से को अलग कर लेना इस्लाम कैसे हो सकता है ?
क्या ईरान के किसी हिस्से को आप अलग होने देंगे ?
हकीकत दो हैं :
1 पूर्वी पाकिस्तान के साथ पश्चिमी पाकिस्तान ने भेद भाव किया वहाँ अजादी का
संघर्ष हुआ पाकिस्तानी फ़ौज ने उन मुसलामानों और दुसरे लोग पर बहुत ज़ुल्म किया और
इंडिया की मदद से बांग्लादेश वजूद में आया I
उसी के बाद से पकिस्तान ने कश्मीर में अलगाववादी गुटों की मदद करना शुरू की
I
2 इंडिया में कट्टर हिन्दू ग्रुप ने बाबरी मस्जिद गिरा कर और फिर मुंबई और
गुजरात फसाद के बाद मुसलामानों को रंज पहुंचाया और उसके बाद कश्मीर में हालात खराब
हुए और अब जब केंद्र पर भी कट्टरवादी हुकूमत आ गयी तो हालात और खराब हुए I
दुनिया में कहीं भी अगर आतंकवाद पनपेगा और जब एक आबादी दूसरी आबादी पर ज़ुल्म
करेगी जैसा कि कश्मीर में कश्मीरी हिन्दुओं को घर छोड़ना पड़ा तो वहाँ सेना तैनात की
जायेगी – जब सेना पर हमले होंगे तो पलट कर और ज्यादती होगी और फिर सेना ने पेलेट
गन इस्तेमाल की और कश्मीरी मुस्लिम अब पत्थर फेंक रहे हैं I
ज़रुरत है वहाँ हालात ठीक करने की वहाँ अमन कायम करने की – हुकूमत और सेना भी
अपने को ज्यादती से रोकें और अवाम भी हिंसा का मार्ग छोडें I इसमें दुनिया भर के
मुसलमान भला क्या कर सकते है ? क्या मतलब है उनके ज़रिये मदद करने का ?
हक क्या है ? सच्चा मुसलमान वह है जो दुनिया भर के सारे इंसानों को एक माँ बाप
की औलाद समझे I किसी को काफ़िर या मुशरिक न कहे बल्कि अपने इखलाक से लोगों को हक की
तरफ बुलाये I
जहां जहां मुसलमान मुसीबत में हैं तो इसे अल्लाह का अज़ाब समझें और अल्लाह से
इस्तेग्फार करें कि उनके गुनाहों गलतियों को माफ़ करे और राहे हक पर चलाये I
इस्लाम रसूल और उनके क़राबतदारों से मुहब्बत के बिना ईमान नहीं निफाक है और वे
सब मुसलमान इसी निफाक में गिरफ्तार हैं और इसी लिए ऐसी हरकतें कर रहे हैं जिससे
दुनिया इनसे नफरत करे और उन पर ज़ुल्म करे I
दुनिया में अमन और भाईचारा तभी होगा जब मुसलमान निफाक छोड़ कर मव्द्दते रसूल और
आले रसूल पर आयेंगे I
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