मुफ़्ती कासमी, तुम ने फायदा इस्लाम को पहुंचाया या भा०ज०प०
को ?
किसी फ़िरोज़ उर्फ़ खुर्शीद के ‘जय श्री राम’ या ‘वन्दे मातरम ‘
कहने से अल्लाह , रसूल और इस्लाम पर कोई फर्क नहीं पड़ता समझे ना समझ मुफ़्ती ! पर
तुम्हारे फतवे से ज़रूर इस्लाम दुश्मन मुसलमान दुश्मन को फायदा पहुंचेगा ! किस को
हक है फतवा देने का ? लानत हो तुम सभी
मुफ्तियों को ! अल्लाह गारत करे तुम्हे ! इंतज़ार करो हकीकी वारिसे रसूल के आने का
, हम भी मुन्तजिर हैं !
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