मेरे साथ आप का 1400 वर्ष पूर्व मदीने का सफ़र पूरा हुआ – 17
सफ़र पूरा हुआ – इंशाल्लाह अब वापस आज के ज़माने में लौट कर देखेंगे – आज की
दुनिया और आज का इस्लाम
रसूल ने कैसी उम्माह बनाना चाहा था ?
सब से पहली खूबी जो रसूल और कुरान चाहते थे वह थी अल्लाह का डर या तक्वा या
परहेज़गारी – अल्लाह के डर से बंदा अपने को पाक साफ़ और नेक रखेगा अपने इखलाक
दुरुस्त रखेगा और इसी डर से तीन चीजें और जुड़ी थीं एक रोज़े आखिरत या हश्र का खौफ
या क़यामत आने का खौफ , कब्र के अज़ाब का खौफ , आग के अज़ाब का खौफ और इन से बचने के
साथ अल्लाह की खुशनूदी रज़ामंदी और जन्नत की आरज़ू और तलब I मर्द औरत नमाज़ पढ़ेंगे,
अल्लाह को याद करेंगे, गुनाहों का इस्तिग्फार करेंगे और अल्लाह की नेमतों का शुक्र
अदा करेंगे I नेकी करेंगे और अल्लाह की
राह में खर्च करेंगे I रोज़ा रखेंगे और हज करेंगे I अपनी नजरें नीची रखेंगे I
मआशरा चोरी, रिश्वत, ज़िना , फहश बातों से पाक रहेगा I
गरीबों, मोहताजों, बेवाओं और यतीमों
की देखभाल होती रहेगी I
क़ुरान मवद्दतुल क़ुर्बा का हुक्म देता है और रसूल ने मदीने में सब को अली,
फातिमा, हसन और हुसैन की मंज़िलत से रूशनास कराया भी था I
यह था मदीने का इस्लाम और आज भी ज़रुरत है कि सभी सच्चे मुसलमान इसी इस्लाम की
तरफ पलट आयें I
रसूल की राह में दिक्क़तें:
लोगों ने उन्हें पागल कहा या इस पर जादू कर दिया गया है या यह कि शैतान इस पर उतारते हैं या यह कहा इसने खुद
से गढ़ लिया है पर इस्लाम को नुकसान काफिरों, मुशरिकों, यहूदियों और ईसाइयों से
नहीं हुआ इस्लाम को नुकसान हुआ उन बड़े बड़ों से जिन्होंने ने हर तरह की दिक्क़तें
खड़ी कीं – जंग में माले गनीमत के बटवारे पर इलज़ाम लगाया, ज़कात के बटवारे पर इलज़ाम
लगाया और शायद रसूल पर खयानत का भी इल्जाम लगाया I
फिर जब रसूल ने अपने मुंह बोले बेटे की बीवी से शादी
की तो उस पर इन लोगों ने और रसूल की कुछ बीवियों ने हंगामा खड़ा किया I इसके बाद
रसूल की एक बीवी पर ज़िना की तोहमत लगाई और खूब फैलाई I बाक़ी रसूल की ज़िन्दगी के
बाद मवाद्दते क़ुर्बा के बजाये उनकी बेटी न दामाद और नवासों के साथ जो कुछ कर के
अजरे रिसालत दिया उसका तो ज़िक्र ही वहाबियों के दौर में गुनाह है I
क्या बना दिया खलीफाओं और उलेमाओं ने ?
वे सारे बड़े बड़े लोग जो कल तक रसूल पर शक करते थे और उनके दुश्मन थे उनकी आँख
बंद होते ही ‘ला इलाहा इल अल्लाह , मोहम्मदं रसूल अल्लाह’ का मंत्र ले कर दुनिया
फ़तेह करने निकल पड़े और आने वाले 1400 वर्षों में जिस किसी ने कुरान और रसूल पर
किसी तरह का शक किया या मज़ाक उड़ाया तो उसकी सज़ा मौत हो गयी I
अब अगर कोई नावेल लिखे या कार्टून बनाए तो उन्हीं मदीने के मुनाफिकों के मानने
वाले अपने बम बाँध कर बीसों बेगुनाहों की जान ले लेंगे I
दूसरे मुल्कों को जीतने के इलावा ‘ला इलाहा इल अल्लाह
मुहम्मदं रसूल अल्लाह’ कह कर एक इस्लामी हुकूमत कायम की गयी जिसमें रसूल की सच्ची
उम्मत किनारे होती गयी और दो तबके हो गए एक दौलत और इक्तिदार के मालिक हुक्मरां
तबका और उनसे जुड़े लोग और उनके खानदान और दूसरे आम मुसलमान जिन्हें दाढ़ी और परदे
का इस्लाम दिया गया और वक़्त के साथ एक कट्टर शरीअत बनायी गयी और लागू की गयी और
दुनिया इसी को इस्लाम समझती है I सच्चा इस्लाम वही है जो मैंने इस चैप्टर में ऊपर
लिखा है और कोई भी कुरान के 28 सूरे जो मदीना में उतरे थे उन्हें क्रम से पढ़ कर
जान सकता है – लोग रोज़े आखिरत से डरें और नेक बनें I अगर मदीने में यहूदी और ईसाई
न होते तो कोई बहस तकरार न होती या अगर मिडिल ईस्ट के लोग मशरिक के लोग – हिन्द,
चीन और जापान के लोगों की तरह होते तो बस उनके लिए इतना इस्लाम काफी था- लोग रोज़े
आखिरत से डरें और नेक बनें I
ज़रूरत है हर गाँव , मोहल्ले , कॉलोनी में लोग एक
अच्छा समाज बनायें और सीधा सादा धर्म मानें I
और जो उस वक़्त चोरी थी आज वह रिश्वत, कमीशन, मिलावट
और तस्करी है , प्राकृतिक संपदाओं की लूट है और प्रदूषण है और जो कल ज़िन था आज वह
औरतों बच्चों का यौन शोषण तस्करी और नशीले पदार्थों की तस्करी है – आज ज़रूरत है
समाज की गंदगी दूर करने की और इसके लिए मॉडर्न पढ़े लिखे हर मुल्क और कौम के लोगों
को आगे आना होगा और सही इस्लाम ले कर आगे बढ़ना होगा – रोज़े आखिरत से डरो और नेक
बनो I
कायनात और साइंस
आज विज्ञान और टेक्नोलॉजी सत्य की तलाश छोड़ कर दौलत और इक्तिदार वालों की रखैल
बन चुके हैं और यह तक कह देते हैं कि सत्य या Truth कुछ है ही नहीं I आज की साइंस के हिसाब से यह कायनात करोड़ो अरबों
गैलेक्सीयों का समूह है और हर गैलेक्सी दूसरी गैलेक्सीयों से बहुत तेज रफ़्तार –
प्रकाश के वेग के लगभग वेग से दूर दूर हटती जा रही है I
इस तरह कभी यह सब पदार्थ की एक छोटी सी गेंद Singularity के रूप में थी और फिर
एक ‘बिग बैंग’ से कायनात का आरम्भ हुआ और उसी के साथ समय Time और स्थान Space का
उद्भव हुआ तो हम कह सकते हैं कायनात के दो रूप या दो अवस्थाएं Phases हैं : एक singularity और दूसरा Expanding
जितना समय बीता है T उसमें प्रकाश वेग c से गुणा कर दें तो कायनात का आयतन 4/3
pi (cT)3 से आकलित किया जा
सकता है I
लेकिन यह भी संभव है कि किसी शरारती बच्चे के गुब्बारे की तरह यह कायनात बार
बार फूल पिचक रही हो और दो चक्र के बीच में कुछ अंतराल भी होता हो – इस तरह समय
Time इस कायनात से परे हुआ !
अब भौतिकता का गुलाम मस्तिष्क कह सकता है ‘ वाह हम केवल अपनी कायनात को जानते
हैं हम कैसे कह सकते हैं कि इस के अतिरिक्त कभी कायनात फूली पिचकी ? कह सकते हैं
जैसे कि गुब्बारे में बार बार फूलने पिचकने से निशान पड़ जाते हैं वैसे ही – मान
लीजिये एक बार पिचकने पर 10 black hole बन जाते हों तो black hole गिन कर हम जान
सकते हैं कि कितनी बार कायनात फूली पिचकी – समय Time कायनात से परे है !
अब हमारी singularity हो सकता है चक्कर लगा रही हो, दांय बांय हो रही हो ऊपर
नीचे हो रही हो या एक तरफ गिर रही हो – तो स्थान Space भी कायनात से परे है !
अब कोई ज़रूरी है कि एक ही Singularity हो ? हो सकता है असंख्य Singularities
हों – अलग अलग phase में – कुछ अभी तक कभी expand नहीं हुईं और कुछ अनेक बार
expand हो कर idle हो गयीं ! अब हमारा भौतिकता का गुलाम कहेगा ‘वाह हम दूसरी
Singularity के बारे में कभी जान ही नहीं सकते –
जान सकते हैं अगर दो expanding
कायनात कभी एक दूसरे में मिल जाएँ और क्या पता कभी ऐसा हुआ हो निर्जीव पदार्थ की
कायनात और सजीव बायो कायनात एक दूसरे से मिली हों या कभी चेतना ने अतिक्रमण किया
हो ?
विज्ञान भौतिक जगत से भी आँख बंद कर बैठ गया है !
कायनात , कुदरत और चेतना
हम क्या हैं ? हम एक जीवित भौतिक शरीर हैं जिसमें चेतना कार्यरत है – हम चलते
फिरते हैं उठते बैठते हैं खाते पीते हैं बात चीत करते हैं म यह नहीं जानते कि कौन सी नसें कौन सी
मांसपेशीय और कौन सा मस्तिष्क का भाग यह सब कर देता है I इसका मतलब हमारी चेतना और
हमारे जीवित भौतिक शरीर के बीच में कंप्यूटर के ऑपरेटिंग सिस्टम की तरह की कोई चीज़
है I हमारा मस्तिष्क विद्युत् तरंगो को पैदा करता और
संचालित करता है और यह
ऑपरेटिंग सिस्टम हमारी चेतना और विद्युत् तरंगों और मस्तिष्क की कोशिकाओं के बीच
काम करता है – इसको मैंने इनकोन Encon का नाम दिया है I अब जब हम अनंत के
स्तर पर कल्पना करें तो हमारी चेतना के
समतुल्य मूल चेतना है जिसे मजहब ईश्वर कहता है , हमारे Encon के समतुल्य प्रकृति
या क़ुदरत है और हमारे भौतिक शरीर के समतुल्य यह पूरी कायनात है I
अब भौतिकता का गुलाम मस्तिष्क कह सकता है ‘ वह चेतना मस्तिष्क या मस्तिष्क की
कोशिका से स्वतंत्र अस्तित्व नहीं रख सकती ‘I तो मस्तिष्क या मस्तिष्क की कोशिका
है क्या ? रासायनिक अणुओं की श्रृंखला है जो लगातार ऊर्जा उत्पादन और उसका उपयोग
कर के सरंचना बनाती है और बिखेरती है – हमारी चेतना इस पर ऊपर से ऑपरेट करती है –
जैसे कि हमारी स्मृति एक चेतना है और हमारी डायरी, फोटो और अन्य चीजें हमारी
स्मृति को पुन: जगा देती हैं और हम उनमें परिवर्तन कमी ज्यादती भी करते रहते हैं
वैसे ही हमारी चेतना हमारी मस्तिष्क की कोशिकाओं के रासायनिक अणुओं की श्रृंखलाओं
और विद्युत् सर्किट को स्वतंत्र रूप से पढ़ती और संशोधित करती रहती है I और इस कायनात के अलग अलग भाग हो सकता है इसी
प्रकार चेतना द्वारा उपयोग किये जाते हों I
भ्रूण में नर्वस सिस्टम की एक स्टेज पर उसके अनुरूप एक स्वतंत्र चेतना का
उपयुक्त भाग जुड़ जाता है और फिर जीवन भर अपने अनुभवों से एक व्यक्तिगत चेतना बन
जाता है जो मृत्यु के बाद स्वतंत्र अस्तित्व में हो सकता है रहता हो !
ज़ुल्म और लूट
सत्य क्या है उससे ज्यादा ज़रूरी है धरती पर ज़ुल्म और लूट का अंत और इस ज़ुल्म
और लूट के पीछे चाहे आस्तिक हों या नास्तिक केवल वे लोग हैं जिन्हें रोज़े आखिरत का
खौफ नहीं है तो अगर वे मुसलमान अपने को कहें पर मुसलमान वह हैं नहीं – अल्लाह से
डरने वाला इंसान किसी बेगुनाह इंसान तो क्या जानवर और छोटे से छोटे जीव को भी नहीं
मारेगा I
आज ऐसे ही पुलिस वालों और जजों की वजह से कितने निर्दोष लोग या कितने लोग
मामूली गलती पर मुद्दत से जेलों में बंद हैं और कितने सूली पर लटका दिए जाते हैं
कितने एनकाउंटर कर दिए जाते हैं I कितनी लड़कियां और औरतें सुरक्षा घरों में बंद
हैं और कितने ही लोग पागल खानों में बंद हैं I
कितने अल्प संख्यक कमज़ोर लोग अपने मुल्कों में या जहां भाग कर गए थे वहाँ
ज़ुल्म का शिकार हो रहे हैं I
हिन्द में एक बहुत बड़ी आबादी को पीढ़ी दर पीढ़ी नीच और दास बना दिया गया है
I अमेरिका में वहाँ के मूल निवासियों को
उनकी ज़मीन से बेदखल कर दिया गया I ब्लैकस को गुलाम बना दिया गया और आज भी वे
अमेरिका में ज़ुल्म का शिकार हो रहे हैं I जर्मनी में यहूदियों को ज़ुल्म का शिकार
बना दिया गया I मानव इतिहास ज़ुल्म से भरा हुआ है अब यह सब ख़त्म होना चाहिए I
लगातार एक लूट चल रही है – प्राकृतिक संपदाओं की और लोगों से जबरन मजदूरी कराई
जाती है I औरतों बच्चों का यौन शोषण और तस्करी चल रही है I
इन सारे ज़ुल्म के पीछे दुनिया के सब से शिक्षित सभ्य धनी और सत्तारुढ़ लोग
ज़िम्मेदार हैं I
सारे इंसान आपस में भाई हैं – हर बच्चा अपनी योग्यता और रूचि के क्षेत्र में
आगे बढ़ सके और हर युवा युवती अपनी मर्ज़ी से अपना जीवन साथी चुन सकें I दुनिया से
दासता, गरीबी और यौन शोषण समाप्त हो I पूरी दुनिया में मानव अधिकार सुरक्षित हों I
और जानवरों को भी प्रकृति में अपना जीवन जीने का हक हो – जीवों और पेड़ों का शोषण
बंद हो और वातावरण का प्रदूष्ण समाप्त हो – यह है आज का इस्लाम I
सच्चे शिया बनिए – न कट्टर वहाबी और न उलेमा
परस्त
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