इंडिया में मुसलामानों
की रक्षा कौन करेगा ? ......... 11
(देश के सच्चे हिन्दुओं
और मुसलमानों को समर्पित)
आम मुसलमानों को यह बात
समझना बहुत ज़रूरी है कि आम हिन्दू साम्प्रदायिक या कट्टर नहीं है – हिन्दू धर्म
कट्टर धर्म न हो कर केवल अध्यात्म है जिसमें बिना किसी परेशानी के ईश्वर को किसी
रूप में पूजा जा सकता है , किसी भी दर पर मत्था टेका जा सकता है – सब ईश्वर है और
वह ईश्वर एक है I
कट्टरपन तो मुसलमानों
में है जो उनके खलीफाओं और उलेमा ने उनके अंदर स्वार्थवश पैदा कराया है वरना इमाम
हुसैन ने तो यह कहा था कि अगर मैं सारे राज़ खोल दूं तो तुम लोग मुझे ‘मुशरिक’ कहने
लगोगे I आज दूसरों को काफ़िर और मुशरिक कहने का पागलपन बहुत बढ़ चुका है – रसूल के
बाद अली अ०स० का मर्तबा है और मुसलमान बस रसूल को छोड़ कर अली अ०स० और उनके वालिद
जिन्होंने रसूल को पाला था और दोनों का इस्लाम पर पूरा एहसान है – अबू तालिब अ०स०
और उनके बेटे अली अ०स० के बिना इस्लाम का वजूद ही नहीं है और दोनों को वल्दुल हराम
काफिर कहने से नहीं डरते – अली अ०स० को तो खारिजियों ने काफ़िर कह कर शहीद कर दिया
था और यही खारिजी अब वहाबी के रूप में दुबारा उभरे हैं I
बहरहाल , हिन्दुओं में
खराबी जातिगत उंच नीच है जो समाप्त होनी चाहिए – हिन्दुओं को इस्लाम की यह बात
स्वीकार करनी चाहिए सारे इंसान , सारे मुसलमान ,सारे हिन्दू – सवर्ण , शूद्र और
दलित सब एक माँ बाप की औलाद हैं I ऐसा कहा जाता है सब की माँ हव्वा इंडिया में
उतरी थीं और जब इन्होने अपने केश खोले तो स्वर्ग की खुशबू यहाँ की हवा में फैली और
जब पानी बरसा धरती में गयी तब यहाँ फूल , पत्तियाँ, जड़ी बूटियाँ , गर्म मसाले पैदा
हुए I
यह बराबरी और भाईचारा न
होने पाए इसके लिए कुछ धूर्त देश में
साम्प्रदायिकता फैलाने में 1920 से लगे हुए थे और अब कुछ वर्षों के लिए सफल हुए
हैं I
फैसला हिन्दुओं के हाथ
है – चाहें तो मिलजुल कर बराबरी और भाईचारा ले आयें I मुसलमान कहाँ गलत हैं और हिन्दू कहाँ गलत है यह
मैंने बताने की कोशिश की है I
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