इंडिया में मुसलामानों
की रक्षा कौन करेगा ? ......... 13
(देश के सच्चे हिन्दुओं
और मुसलमानों को समर्पित)
आज के इंडिया के
मुसलमानों को यह समझ लेना चाहिए कि उनके पूर्वज किसी भी तरह देश के विभाजन के
ज़िम्मेदार नहीं हैं बल्कि हकीकत तो यह है कि मुहम्मद अली जिन्नाह हिन्दू मुस्लिम
भाईचारे के समर्थक थे और आखिर तक वह यह समझते रहे कि इंडिया एक कॉन्फ़ेडरेशन के रूप
में रहेगा जिसके आधीन मुस्लिम बाहुल्य पश्चिमी पाकिस्तान, हिन्दू बाहुल्य भारत और
मुस्लिम बाहुल्य पूर्वी पाकिस्तान रहेगा वरना क्या कारण था कि वे पाकिस्तान दो टुकड़ों के रूप में स्वीकार करते I मुख्य देश
के अधिकाँश मुसलमान देश छोड़ना नहीं चाहते थे इसलिए ज़मीन का बटवारा भी इसी
लिहाजा से किया गया था वरना आबादी का
पूर्ण बटवारा किया जाता और पाकिस्तान एक बड़ा भू-भाग ले कर बनाया जाता I
पाकिस्तान का बनना एक
बड़ी गलती थी और इसका सब से ज्यादा नुकसान मुसलमानों को हुआ I
जो रिफ्यूजी हिन्दू और
सिख इंडिया आये उन्हें यहाँ स्वीकार किया गया और पुनर्वासित किया गया I जो मुसलमान
पश्चिमी पाकिस्तान गए उन्हें वहाँ महाजिर कहा गया और उपेक्षित किया गया I
जो मुसलमान पूर्वी
पाकिस्तान गए उन्हें वहाँ स्वीकार ही नहीं किया गया और वे रिफ्यूजी कैम्पों में ही
रहते रहे और उन्हीं की संतानें पश्चिमी बंगाल , असाम और म्यन्मार गयीं जहां हिंसा
का शिकार होती रहती हैं मारी भगाई जाती हैं I
पश्चिमी पाकिस्तान ने
जो पूर्वी पाकिस्तान के साथ अन्याय और अत्याचार किया बांग्लादेश उसी का नतीजा है I
इन सब खराबियों की वजह
हिन्दू नहीं खुद मुसलमान हैं उनका धर्म (गलत व्याख्या के कारण) और उनके लीडर और
उलमा ज़िम्मेदार हैं और यही लोग कश्मीर समस्या के भी ज़िम्मेदार हैं – धर्म की गलत
व्याख्या , मुस्लिम लीडर और उलेमा I
लेकिन मुख्य देश के
हमारे पूर्वज सही थे और उन्होंने यहाँ हिन्दुओं के बीच रहने का सही फैसला किया और
सुख से रहे सिवाय दो समस्याओं के एक तो वे धूर्त जो 1920 से दुष्प्रचार करते करते
अब सफल हो गए हैं और सत्ता में आ गए हैं और दुसरे वे कट्टर वहाबी सुन्नी मुसलमान
जो फिर वे हरकतें कर रहे हैं और वह बयान दे रहे हैं जो संघ और भाजपा को नफरत
फैलाने में मददगार हैं I
बटवारा क्यों हुआ और उसका
लाभ किस हुआ ?
पहला तो यह ब्रिटिश
अमेरिकन पालिसी है कि जहां से हटना पड़े वहाँ ऐसा कुछ कर जाओ कि लोग पनपने न पायें –
जर्मनी , कोरिया , विएतनाम हरेक को टुकड़े करते गए I
दूसरे उन कट्टर हिन्दुओ
को लाभ मिला जिन्हें शिक्षित संपन्न मुस्लिम परिवारों का पलायन लाभकारी सिद्ध हुआ
I
मार्क्सवाद और मजदूर
संघर्ष बिखर गया वरना सोवियत सहायता से इंडिया भी लाल हो जाता I
दलित शक्ति कमज़ोर पड़
गयी और डॉ अम्ब्दकर कमज़ोर पड़ गए और उनकी शीध्र मृत्यु से दलित संगठन बिखर गया I
मुसलमानों के रुक जाने
से किस को लाभ पहुंचा ?
अगर मुसलमान न होते तो
15 प्रतिशत सवर्ण 45 प्रतिशत शूद्र और 40 प्रतिशत दलित और आदिवासी आपस में
शांतिपूर्ण ढंग से रह न पाते और या तो सवर्ण
को अपनी संपत्ति और सत्ता बचाने के लिए तानाशाही या सैन्य शासन का सहारा
लेना पड़ता या पुलिस और सेना स्वयं जातियों में बाँट जाती और देश अराजकता हिंसा का
शिकार रहता I मुसलमानों का यह देश पर एक और उपकार है कि उनकी वजह से सब कुछ मिला
कर कांग्रेस – सवर्ण वर्जस्व सत्तारूढ़ रहा जो ज़बानी मुस्लिम दलित भले की बात करता
रहा और फिर 67 वर्षों में यह भी गवारा नहीं हुआ और ‘सब का विकास’ और EVM fixing के
प्रपंच से संघ सत्तारूढ़ हुआ और इसका इतिहास एहसान फरामोशी और गद्दारी का इतिहास है
I
‘ वे बड़ी बड़ी चालें (मकर) चलते हैं लेकिन अल्लाह
खैरुल माकिरीन है’
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