मेरे साथ 1400 वर्ष पूर्व
मदीने का सफ़र कीजिये और सच्चे इस्लाम और मोमिनों को पहचानिए – 15
(112) 5 सूरए अल माएदह
1 ऐ ईमान लाने वालों इक़रारों को पूरा करो तुम्हारे वास्ते चैपाए जानवर हलाल कर दिये गये उन के सिवा जो तुमको पढ़ कर सुनाए जाएगे मगर जब तुम हालते एहराम में हो तो शिकार को हलाल न समझना बेशक अल्लाह जो चाहता है हुक्म देता है
2 ऐ ईमान लाने वालों बेहुरमती न करो न अल्लाह की निशानियों की, न हुरमत वाले महीने की और न क़ुरबानी की और न पट्टे वाले जानवरों की और न ख़ानाए काबा की तवाफ़ का क़स्द करने वालों की I और जब तुम एहराम खोल दो तो शिकार कर सकते हो पर किसी क़बीले की यह अदावत कि तुम्हें उन लोगों ने ख़ानाए काबा से रोका था इस जुर्म में न फॅसवा दे कि तुम उनपर ज़्यादती करने लगो और I नेकी और परहेज़गारी में एक दूसरे की मदद किया करो और गुनाह और ज़्यादती में बाहम किसी की मदद न करो और अल्लाह से डरते रहो अल्लाह तो यक़ीनन बड़ा सख़्त अज़ाब वाला है 3 मरा हुआ जानवर और ख़ून और सुअर का गोश्त और जिस पर अल्लाह के सिवा किसी दूसरे का नाम लिया जाए और गर्दन मरोड़ा हुआ और चोट खाकर मरा हुआ और जो गिरकर मर जाए और जो सींग से मार डाला गया हो और जिसको दरिन्दे ने फाड़ खाया हो मगर जिसे तुमने मरने के क़ब्ल जि़बाह कर लो और बुतों के थान पर चढ़ाया जाए और जिसे तुम तीरों से बाहम हिस्सा बाटो तुम पर हराम की गयी हैं ये गुनाह की बात है I कुफ़्फ़ार तुम्हारे दीन से मायूस हो गए तो तुम उनसे तो डरो ही नहीं बल्कि सिर्फ मुझी से डरो आज मैंने तुम्हारे दीन को कामिल कर दिया और तुमपर अपनी नेअमत पूरी कर दी और तुम्हारे दीने इस्लाम को पसन्द किया बस जो भूख़ में मजबूर हो जाए और गुनाह की तरफ़ माएल न हो तो अल्लाह बेशक बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
4 तुमसे लोग पूछतें हैं कि क्या उनके लिए हलाल है तुम कह दो कि तुम्हारे लिए पाकीज़ा चीजें हलाल की गयीं और शिकारी जानवर जो तुमने शिकार के लिए सधा रखें है और जो अल्लाह ने तुम्हें बताये हैं उनमें के कुछ तुमने उन जानवरों को भी सिखाया हो तो ये शिकारी जानवर जिस शिकार को तुम्हारे लिए पकड़ रखें उसको खाओ और अल्लाह का नाम ले लिया करो और अल्लाह से डरते रहो इसमें तो शक ही नहीं कि अल्लाह बहुत जल्द हिसाब लेने वाला है
5 आज तमाम पाकीज़ा चीजें तुम्हारे लिए हलाल कर दी गयी हैं और एहले किताब की ख़ुश्क चीजे़ं गेहूँ तुम्हारे लिए हलाल हैं और तुम्हारी ख़ुश्क चीजें गेहॅू उनके लिए हलाल हैं और आज़ाद पाक दामन औरतें और उन लोगों में की आज़ाद पाक दामन औरतें जिनको तुमसे पहले किताब दी जा चुकी है जब तुम उनको उनके मेहर दे दो पाक दामिनी का इरादा करो न तो खुल्लम खुल्ला जि़नाकारी का और न चोरी छिपे से आशनाई का और जिस ने ईमान से इन्कार किया तो उसका सब किया अकारत हो गया और आख़ेरत में भी वही घाटे में रहेगा
6 ऐ इमानदारों जब तुम नमाज़ के लिये आमादा हो तो अपने मुँह और कोहनियों तक हाथ धो लिया करो और अपने सरों का और टखनों तक पॉवों अगर तुम पाक न हो तो अपने को पाक कर लो और अगर तुम बीमार हो या सफ़र में हो या तुममें से किसी को पैख़ाना निकल आए या औरतों से हमबिस्तरी की हो और तुमको पानी न मिल सके तो पाक ख़ाक से अपने मुँह और अपने हाथों को पोंछ लो अल्लाह तो ये चाहता ही नहीं कि तुम पर किसी तरह की परेशानी हो बल्कि वो ये चाहता है कि पाक व पाकीज़ा कर दे और तुमपर अपनी नेअमते पूरी कर दे और तुम शुक्र अदा करो
7 और जो एहसानात अल्लाह ने तुमपर किए हैं उनको और उस एहद को याद करो जिसका तुमसे पक्का इक़रार ले चुका है जब तुमने कहा था कि हमने सुना और दिल से मान लिया और अल्लाह से डरते रहो क्योंकि इसमें ज़रा भी शक नहीं कि अल्लाह दिलों के राज़ से भी बाख़बर है “ बार बार सच्ची गवाही की ताकीद : 8 ऐ ईमान लाने वालों अल्लाह के लिए इन्साफ़ के साथ गवाही देने के लिए तैयार रहो और तुम्हें किसी क़बीले की अदावत इस जुर्म में न फॅसवा दे कि तुम नाइन्साफी करने लगो तुम इन्साफ़ करो यही परहेज़गारी से बहुत क़रीब है और अल्लाह से डरो क्योंकि जो कुछ तुम करते हो अल्लाह उसे ज़रूर जानता है
9 और जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और अच्छे अच्छे काम किए अल्लाह ने वायदा किया है कि उनके लिए मग़फे़रत और बड़ा सवाब है
10 और जिन लोगों ने कुफ्ऱ इख़्तेयार किया और हमारी आयतों को झुठलाया वह जहन्नुमी हैं
11 ऐ इमान वालों अल्लाह ने जो एहसानात तुमपर किए हैं उनको याद करो और ख़ूसूसन जब एक क़बीले ने तुम पर दस्त दराज़ी का इरादा किया था तो अल्लाह ने उनके हाथों को तुम तक पहँचने से रोक दिया और अल्लाह से डरते रहो और मोमिनीन को अल्लाह ही पर भरोसा रखना चाहिए
12 और इसमें भी शक नहीं कि अल्लाह ने बनी इसराईल से एहद व पैमान ले लिया था और हम ने इनमें के बारह सरदार उनपर मुक़र्रर किए और अल्लाह ने बनी इसराईल से फ़रमाया था कि मैं तो यक़ीनन तुम्हारे साथ हॅू अगर तुम भी पाबन्दी से नमाज़ पढ़ते और ज़कात देते रहो और हमारे पैग़म्बरों पर ईमान लाओ और उनकी मदद करते रहो और अल्लाह को क़र्जे हसना देते रहो तो मैं भी तुम्हारे गुनाह तुमसे ज़रूर दूर करूंगा और तुमको बेहिश्त के उन बाग़ों में जा पहँच जाऊंगा जिनके नीचे नहरें जारी हैं फिर तुममें से जो इसके बाद भी इन्कार करे तो यक़ीनन वह राहे रास्त से भटक गया
13 हमने उनकी एहद शिकनी की वजह से उनपर लानत की और उनके दिलों को हमने सख़्त बना दिया कि कलमात को उनके असली मायनों से बदल कर दूसरे मायनो में इस्तेमाल करते हैं और जिन जिन बातों की उन्हें नसीहत की गयी थी उनमें से एक बड़ा हिस्सा भुला बैठे और अब तो उनमें से चन्द आदमियों के सिवा एक न एक की ख़्यानत पर बराबर मुत्तेला होते रहते हो तो तुम उन को माफ़ कर दो और दरगुज़र करो अल्लाह एहसान करने वालों को ज़रूर दोस्त रखता है
14 और जो लोग कहते हैं कि हम नसरानी हैं उनसे हमने इमान का एहद लिया था मगर जिन जिन बातों की उन्हें नसीहत की गयी थी उनमें से एक बड़ा हिस्सा भुला बैठे तो हमने भी क़यामत तक उनमें बाहम अदावत व दुशमनी की बुनियाद डाल दी और अल्लाह उन्हें बहुत जल्द बता देगा कि वह क्या क्या करते थे
15 ऐ एहले किताब तुम्हारे पास हमारा रसूल आ चुका जो किताबे अल्लाह की उन बातों में से जिन्हें तुम छुपाया करते थे बहुतेरी तो साफ़ साफ़ बयान कर देगा और बहुतेरी से दरगुज़र करेगा तुम्हरे पास तो अल्लाह की तरफ़ से एक नूर और साफ़ साफ़ बयान करने वाली किताब आ चुकी है
16 जो लोग अल्लाह की ख़ुशनूदी के पाबन्द हैं उनको तो उसके ज़रिए से राहे निजात की हिदायत करता है और अपने हुक्म से तारीकी से निकालकर रौशनी में लाता है और राहे रास्त पर पहँचा देता है
17 जो लोग उसके क़ायल हैं कि मरियम के बेटे मसीह बस अल्लाह हैं वह ज़रूर काफि़र हो गए उनसे पूछो तो कि भला अगर अल्लाह मरियम के बेटे मसीह और उनकी माँ को और जितने लोग ज़मीन में हैं सबको मार डालना चाहे तो कौन ऐसा है जिसका अल्लाह से भी ज़ोर चले और सारे आसमान और ज़मीन में और जो कुछ भी उनके दरम्यिान में है सब अल्लाह ही की सल्तनत है जो चाहता है पैदा करता है और अल्लाह तो हर चीज़ पर क़ादिर है
18 और नसरानी और यहूदी तो कहते हैं कि हम ही अल्लाह के बेटे और उसके चहेते हैं उनसे तुम कह दो तो फिर तुम्हें तुम्हारे गुनाहों की सज़ा क्यों देता है बल्कि तुम भी उसकी मख़लूक़ात से एक बशर हो अल्लाह जिसे चाहेगा बख्श देगा और जिसको चाहेगा सज़ा देगा आसमान और ज़मीन और जो कुछ उन दोनों के दरम्यिान में है सब अल्लाह ही का मुल्क है और सबको उसी की तरफ़ लौट कर जाना है “ बेशक आसान नहीं था उन लोगों के बीच अच्छों को खुशखबरी देना और बुरों को डराना :
19 ऐ एहले किताब हमारा रसूल तुम्हारे पास आया रसूलों की आमद में एक वक्फे का बाद, जो एहकामे अल्लाह को साफ़ साफ़ बयान करता है ताकि तुम कहीं ये न कह बैठो कि हमारे पास तो न कोई ख़ुशख़बरी देने वाला आया न डराने वाला अब तो यक़ीनन तुम्हारे पास ख़ुशख़बरी देने वाला और डराने वाला आ गया और अल्लाह हर चीज़ पर क़ादिर है
20 ऐ रसूल उनको वह वक़्त याद जब मूसा ने अपनी क़ौम से कहा था कि ऐ मेरी क़ौम जो नेअमते अल्लाह ने तुमको दी है उसको याद करो इसलिए कि उसने तुम्हीं लोगों से बहुतेरे रसूल बनाए और तुम ही लोगों को बादशाह बनाया और तुम्हें वह नेअमतें दी हैं जो आलम में किसी को न दीं
21 ऐ मेरी क़ौम की उस मुक़द्दस ज़मीन में दाखिल हो जाओ जो अल्लाह ने तुम्हारी तक़दीर में लिख दी है और दुशमन के मुक़ाबले पीठ न फेरो इसमें तो तुम ख़ुद उलटा घाटा उठाओगे
22 वह लोग कहने लगे कि ऐ मूसा इस मुल्क में तो बड़े ज़बरदस्त लोग रहते हैं और जब तक वह लोग इसमें से निकल न जाए हम तो उसमें कभी पॉव भी न रखेंगे हाँ अगर वह लोग ख़ुद इसमें से निकल जाए तो अलबत्ता हम ज़रूर जाएगे
23 दो आदमी जो अल्लाह का ख़ौफ़ रखते थे और जिनपर अल्लाह ने ख़ास अपना फ़ज़ल किया था बोले फाटक से दाखिल हो अगर दाखिल हो गए तो तुम्हारी जीत हो गयी और अगर ईमान वाले हो तो अल्लाह ही पर भरोसा रखो
24 वह कहने लगे जब तक वह लोग इसमें हैं हम तो उसमें हरगिज़ पॉव न रखेंगे हाँ तुम जाओ और तुम्हारा अल्लाह जाए ओर दोनों लड़ो हम तो यहीं जमे बैठे हैं
25 तब मूसा ने अर्ज़ की मेरे मालिक तू ख़ूब वाकि़फ़ है कि अपनी ज़ाते ख़ास और अपने भाई के सिवा किसी पर मेरा क़ाबू नहीं बस अब हमारे और उन नाफ़रमान लोगों के दरमियान जुदाई डाल दे हमारा उनका साथ नहीं हो सकता 26 उनको चालीस बरस तक हराम रहेगी यह लोग ज़मीन पर सरगरदा रहेंगे तो फिर तुम इन बदचलन बन्दों पर अफ़सोस न करना
27 इन लोगों से आदम के दो बेटों की खबर दो जब उन दोनों ने अल्लाह की दरगाह में नियाज़ें चढ़ाई तो एक की क़ुबूल हुयी और दूसरे की न क़ुबूल हुयी तो उसने कहा मैं तो तुझे मार डालूंगा उसने कहा अल्लाह तो सिर्फ परहेज़गारों की नज़र कु़बूल करता है
28 अगर तुम मुझे क़त्ल करने के लिए मेरी तरफ़ अपना हाथ बढ़ाओगे मैं तुम्हारे क़त्ल करने के लिए अपना हाथ नहीं बढ़ाऊंगा मैं उस अल्लाह से जो सारे जहाँन का पालने वाला है डरता हॅू
29 मैं ये चाहता हॅू कि मेरे गुनाह और तेरे गुनाह दोनों तेरे सर हो जाए तो तू जहन्नुमी बन जाए और ज़ालिमों की तो यही सज़ा है
30 उसके नफ़्स ने अपने भाई के क़त्ल पर उसे इजाज़त दी उसने उसे क़त्ल किया इस तरह घाटा उठाने वालों में से हो गया
31 अल्लाह ने एक कौवे को भेजा कि वह ज़मीन को कुरेदने लगा ताकि उसे दिखा दे कि उसे अपने भाई की शर्म कैसे छुपाये वह कहने लगा हाए अफ़सोस क्या मैं उस से भी आजिज़ हॅू कि उस कौवे की बराबरी कर सकॅू कि अपने भाई की शर्म छुपा देता वह बहुत पछताया
32 इसी सबब से तो हमने बनी इसराईल पर वाजिब कर दिया था कि जो किसी को क़त्ल करे ,न जान के बदले में और न मुल्क में फ़साद फैलाने की सज़ा में, तो गोया उसने सब लोगों को एक साथ क़त्ल कर डाला और जिसने एक को बचा लिया तो गोया उसने सब लोगों को बचा लिया और उन के पास हमारे रसूल रौशन निशानियाँ लेकर आ चुके हैं फिर उसके बाद भी उसमें से बहुतेरे ज़मीन पर ज़्यादतिया करते रहे
33 जो लोग अल्लाह और उसके रसूल से लड़ते हैं और फ़साद फैलाने की ग़रज़ से मुल्को दौड़ते फिरते हैं उनकी सज़ा बस यही है कि या तो मार डाले जाए या उन्हें सूली दे दी जाए या उनके हाथ पॉव हेर फेर कर एक तरफ़ का हाथ दूसरी तरफ़ का पॉव काट डाले जाए या उन्हें सरज़मीन से शहर बदर कर दिया जाए यह रूसवाई तो उनकी दुनिया में हुयी और फिर आख़ेरत में तो उनके लिए बहुत बड़ा अज़ाब ही है
34 सिवाय उन लोगों के जिन्हों इससे पहले कि तुम इनपर क़ाबू पाओ तौबा कर ली अल्लाह बेशक बड़ा बख़्शने वाला मेहरबान है
35 ऐ ईमान लाने वालों अल्लाह से डरते रहो और उसके तक़र्रब के ज़रिये की जुस्तजू में रहो और उसकी राह में जेहाद करो ताकि तुम कामयाब हो जाओ
36 इसमें शक नहीं कि जिन लोगों ने कुफ़्र इख़्तेयार किया अगर उनके पास ज़मीन में जो कुछ है सब और उतना और भी उसके साथ हो कि रोज़े क़यामत के अज़ाब का मुआवेज़ा दे दे तब भी कु़बूल न किया जाएगा और उनके लिए दर्दनाक अज़ाब है
37 वह लोग तो चाहेंगे कि किसी तरह जहन्नुम की आग से निकल भागे मगर वहाँ से तो वह निकल ही नहीं सकते और उनके लिए तो दाएमी अज़ाब है
38 चोर मर्द और चोर औरत उनका हाथ काट डालो ये अल्लाह की तरफ़ से यह मिसाली सजा है और अल्लाह बड़ा ज़बरदस्त हिकमत वाला है
39 जो अपने गुनाह के बाद तौबा कर ले और अपने चाल चलन दुरूस्त कर लें तो बेशक अल्लाह भी तौबा कु़बूल कर लेता है क्योंकि अल्लाह तो बड़ा बख़्शने वाला मेहरबान है
40 क्या तुम नहीं जानते कि सारे आसमान व ज़मीन में अल्लाह की हुकूमत है जिसे चाहे अज़ाब करे और जिसे चाहे माफ़ कर दे और अल्लाह तो हर चीज़ पर क़ादिर है ?
41 ऐ रसूल तुम उनका ग़म न खाओ जो लोग कुफ़्र की तरफ़ लपक के चले जाते हैं- कुछ अपने मुँह से कहते हैं कि हम ईमान लाए लेकिन उनके दिल में ईमान नहीं है और यहूदी जो झूठ पर कान लगाते हैं और दूसरों की सुनते हैं जो तुम तक नहीं आये ये लोग अल्फ़ाज़ को उनके मक़ाम से बदल कर कहते हैं कि अगर यह कहें तो मानो यह न कहें तो होशियार रहो - जिसको अल्लाह ख़राब करना चाहता है तो उसके वास्ते अल्लाह से तुम्हारा कुछ ज़ोर नहीं चल सकता यह लोग तो वही हैं जिनके दिलों को अल्लाह ने पाक करने का इरादा ही नहीं किया उनके लिए तो दुनिया में भी रूसवाई है और आख़ेरत में भी बड़ा अज़ाब होगा
42 झूठी बातों को बड़े शौक़ से सुनने वाले हैं और हराम खाते हैं अगर ये लोग तुम्हारे पास आए तो ख़्वाह उनके दरम्यिान फै़सला कर दो या उनसे किनाराकशी करो और अगर तुम किनाराकश रहोगे तो ये लोग तुम्हारा हरगिज़ कुछ बिगाड़ नहीं सकते और अगर उनमें फै़सला करो तो इन्साफ़ से फै़सला करो क्योंकि अल्लाह इन्साफ़ करने वालों को दोस्त रखता है
43 और जब ख़ुद उनके पास तौरेत है और उसमें अल्लाह का हुक्म है तो फिर तुम्हारे पास फैसला कराने को क्यों आते हैं और इसके बाद फिर फिर जाते हैं ओर सच तो यह है कि यह लोग ईमान वाले नहीं हैं 44 बेशक हम ने तौरेत नाजि़ल की जिसमें हिदायत और नूर है उसी के मुताबिक़ अंबिया जो फ़रमाबरदार थे यहूदियों को हुक्म देते रहे और रब्बानी और अह्बार जो किताबे अल्लाह के मुहाफि़ज़ थे और वह उसके गवाह भी थे तुम लोगों से न डरो मुझ ही से डरो और मेरी आयतों के बदले में थोड़ी कीमत न लो और जो अल्लाह ने भेजा है के मुताबिक़ हुक्म न दे तो ऐसे ही लोग काफि़र हैं
45 और हम ने उनके लिए यह हुक्म फर्ज़ कर दिया था कि जान के बदले जान और आँख के बदले आँख और नाक के बदले नाक और कान के बदले कान और दाँत के बदले दाँत और जख़्म के बदले बराबर का बदला है फिर जो ख़ता माफ़ कर दे तो ये उसके गुनाहों का कफ़्फ़ारा हो जाएगा और जो अल्लाह ने भेजा है के मुवाफि़क़ हुक्म न दे तो ऐसे ही लोग ज़ालिम हैं
46 और हम ने इसी के क़दम ब क़दम मरियम के बेटे ईसा को भेजा और वह इस किताब तौरैत की भी तस्दीक़ करते थे जो उनके सामने मौजूद थी और हमने उनको इन्जील अता की जिसमें हिदायत थी और नूर और वह इस किताब तौरेत की जो वक़्ते नुज़ूले इन्जील मौजूद थी तसदीक़ करने वाली और मुत्तक़ीन के लिए हिदायत व नसीहत थी 47 इन्जील मानने वालों को जो कुछ अल्लाह ने नाजि़ल किया है उसके मुताबिक़ हुक्म करना चाहिए और जो अल्लाह ने भेजा है से हुक्म न दे तो ऐसे ही लोग फासिक हैं
48 और हमने तुम पर भी हक़ के साथ किताब नाजि़ल की जो उसके पहले जो किताब से था उसकी तसदीक़ करती है और उसकी निगेहबान है जो कुछ तुम पर अल्लाह ने नाजि़ल किया है उसी के मुताबिक़ तुम भी हुक्म दो और उन लोगों की ख़्वाहिशे की पैरवी न करो I हमने तुम में हर एक के वास्ते एक एक शरीयत और ख़ास तरीक़े पर मुक़र्रर कर दिया और अगर अल्लाह चाहता तो तुम सब के सब को एक ही उम्मत बना देता मगर अल्लाह का मतलब यह था कि जो कुछ तुम्हें दिया है उसमें तुम्हारा इम्तेहान करे बस तुम नेकी में लपक कर आगे बढ़ जाओ और तुम सब को अल्लाह ही की तरफ़ लौट कर जाना है तब जिन बातों में तुम इख़्तेलाफ़ करते वह तुम्हें बता देगा
49 जो एहकाम अल्लाह नाजि़ल किए हैं तुम उसके मुताबिक़ फै़सला करो और उनकी ख़्वाहिशों की पैरवी न करो तुम उनसे बचे रहो कि किसी हुक्म से जो अल्लाह ने तुम पर नाजि़ल किया है तुमको ये लोग भटका दें फिर अगर ये लोग तुम्हारे हुक्म से मुँह मोड़ें तो समझ लो कि अल्लाह ही की मरज़ी है कि उनके बाज़ गुनाहों की वजह से उन्हें मुसीबत में फॅसा दे और इसमें तो शक ही नहीं कि बहुतेरे लोग फासिक हैं
50 क्या ये लोग जाहिलीयत के हुक्म चाह रहे हैं हालाँकि यक़ीन करने वाले लोगों के वास्ते हुक्मे अल्लाह से बेहतर कौन होगा
51 ऐ ईमान लाने वालों यहूदियों और नसरानियों को अपना दोस्त न बनाओ ये लोग बाहम एक दूसरे के दोस्त हैं और तुममें से जिसने उनको अपना दोस्त बनाया बस फिर वह भी उन्हीं लोगों में से हो गया बेशक अल्लाह ज़ालिम लोगों को राहे रास्त पर नहीं लाता
52 जिन लोगों के दिलों में बीमारी है तुम उन्हें देखोगे कि उनमें दौड़ दौड़ के मिले जाते हैं और तुमसे उसकी वजह यह बयान करते हैं कि हम तो इससे डरते हैं कि कहीं ऐसा न हो ज़माने की गर्दिश में मुब्तिला हो जाए तो अनक़रीब ही अल्लाह फ़तेह या कोई और बात अपनी तरफ़ से ज़ाहिर कर देगा तब यह लोग इस बदगुमानी पर जो अपने जी में छुपाते थे शर्माएंगे
53 और मोमिनीन कहेंगे क्या ये वही लोग हैं जो सख़्त से सख़्त क़समें खाकर कहते थे कि हम ज़रूर तुम्हारे साथ हैं उनका सारा किया धरा खुल जाएगा और सख़्त घाटे में होंगे 54 ऐ ईमान लाने वालों तुममें से जो कोई अपने दीन से फिर जाएगा तो अनक़रीब ही अल्लाह ऐसे लोगों को ज़ाहिर कर देगा जिन्हें अल्लाह दोस्त रखता होगा और वह उसको दोस्त रखते होंगे ईमान लाने वालों के साथ दबे दबे और मुन्किर काफि़रों के साथ सख़्त अल्लाह की राह में जेहाद करेंगे और किसी मलामत करने वाले की मलामत की कुछ परवाह न करेंगे ये अल्लाह का फ़ज़ल है वह जिसे चाहता हे देता है और अल्लाह तो बड़ी गुन्जाइश वाला वाकि़फ़कार है
55 तुम्हारे वली बस यही हैं अल्लाह और उसका रसूल और वह मोमिनीन जो पाबन्दी से नमाज़ अदा करते हैं और झुकते हैं
56 और जो अल्लाह और रसूल और ईमान लाने वालों को अपना वली बनाए तो इसमें तो शक नहीं कि अल्लाह ही का लशकर ग़ालिब रहता है
57 ऐ ईमान लाने वालों जिन लोगों को तुम से पहले किताबे दी जा चुकी है उनमें से जिन लोगों ने तुम्हारे दीन को हॅसी खेल बना रखा है उनको और कुफ़्फ़ार को अपना वली न बनाओ और अगर तुम सच्चे ईमानदार हो तो अल्लाह ही से डरते रहो
58 और जब तुम नमाज़ के वास्ते बुलाते हो ये लोग नमाज़ को हॅसी खेल बनाते हैं ये इस वजह से कि कुछ नहीं समझते हक़ीक़त
59 कहो ‘ऐ एहले किताब , क्या तुम हम से इसलिए इन्तेकाम ले रहे हो कि हम अल्लाह पर और जो हमारे पास भेजी गयी है और जो हमसे पहले भेजी गयी ईमान लाए हैं और ये कि तुममें के अक्सर फ़ासिक़ हैं ?
60 कह दो कि मैं तुम्हें अल्लाह के नज़दीक सज़ा में इससे कहीं बदतर ऐब बता दॅू जिसपर अल्लाह ने लानत की हो और उस पर ग़ज़ब ढाया हो और उनमें से किसी को बन्दर और सूअर बना दिया हो और तागूत की परस्तिश की हो बस ये लोग दरजे में कहीं बदतर और राहे रास्त से भटक के सबसे ज़्यादा दूर जा पहँचे हैं
61 जब ये लोग तुम्हारे पास आ जाते हैं तो कहते हैं कि हम तो ईमान लाए हैं हालाँकि वह कुफ़्र ही को साथ लेकर आए और फिर निकले भी तो साथ लिए हुए और जो वह छुपाए हुए थे अल्लाह उसे ख़ूब जानता है
62 तुम उनमें से बहुतेरों को देखोगे कि गुनाह और दुश्मनी और हराम खाने की तरफ़ दौड़ पड़ते हैं जो काम ये लोग करते थे वह यक़ीनन बहुत बुरा है
63 उनको रब्बानी और अह्बार गुनाह बोलने और हराम खाने से क्यों नहीं रोकते जो ये लोग करते हैं यक़ीनन बहुत ही बुरा है
64 यहूदी कहते हैं कि अल्लाह का हाथ बॅधा हुआ है उन्हीं के हाथ बंधे हैं और फिटकार है उसके दोनों हाथ कुशादा हैं जिस तरह चाहता है ख़र्च करता है और जो तुम्हारे पास जो भेजा गया है उस से बहुतेरों को कुफ़्र व सरकशी को और बढ़ गयी है हम ने उन में आपस में रोज़े क़यामत तक अदावत और कीने की बुनियाद डाल दी जब ये लोग लड़ाई की आग भड़काते हैं तो अल्लाह उसको बुझा देता है और रूए ज़मीन में फ़साद फैलाने के लिए दौड़ते फिरते हैं और अल्लाह फ़सादियों को दोस्त नहीं रखता
65 और अगर एहले किताब ईमान लाते और डरते तो हम ज़रूर उनके गुनाहों से दरगुज़र करते और उनको नेअमत व आराम के बाग़ों में दाखिल कर देते
66 और अगर यह लोग तौरैत और इन्जील और जो उनके पास उनके रब की तरफ़ से नाजि़ल किये गए थे पर अमल करते तो ज़रूर ऊपर से भी और पॉवों के नीचे से भी रिज्क आता और खाते उनमें से कुछ लोग तो एतदाल पर हैं उनमें से बहुतेरे जो कुछ करते हैं बुरा ही करते हैं
67 ऐ रसूल जो हुक्म तुम्हारे रब की तरफ़ से तुम पर नाजि़ल किया गया है पहँचा दो और अगर तुमने ऐसा न किया तो तुमने उसका कोई पैग़ाम ही नहीं पहँचाया और अल्लाह तुमको लोगों के शर से महफ़ूज़ रखेगा अल्लाह हरगिज़ काफि़रों की क़ौम को मंजि़ले मक़सूद तक नहीं पहँचाता
68 कह दो कि ऐ एहले किताब जब तक तुम तौरेत और इन्जील और जो तुम्हारे रब की तरफ़ से तुम पर नाजि़ल हुए हैं कायम न करोगे उस वक़्त तक तुम किसी पर नहीं हो और जो तुम्हारे पास तुम्हारे रब की तरफ़ से भेजी गयी है उनमें से बहुतेरों की सरकशी व कुफ़्र को और बढ़ गयी है तुम काफि़रों के गिरोह पर अफ़सोस न करना
69 ईमान वाले और यहूदी और सबाई और नसरानी जो अल्लाह और रोज़े क़यामत पर ईमान लाएगा और अच्छे काम करेगा उन पर अलबत्ता न तो कोई ख़ौफ़ होगा न वह लोग आज़ुर्दा ख़ातिर होंगे
70 हमने बनी इसराईल से एहद व पैमान ले लिया था और उनके पास बहुत रसूल भी भेजे थे जब उनके पास कोई रसूल उनकी मर्ज़ी के खि़लाफ़ हुक्म लेकर आया तो इन लोगों ने एक फरीक को झुठला दिया और एक फरीक को क़त्ल कर डाला
71 और समझ लिया कि कोई ख़राबी न होगी वह लोग अंधे और बहरे बन गए अल्लाह ने उनकी तौबा क़ुबूल कर ली फिर उनमें से बहुतेरे अंधे और बहरे बन गए और जो कुछ ये लोग कर रहे हैं अल्लाह देख रहा है
72 काफि़र हैं जो लोग कहते हैं कि मरियम के बेटे ईसा मसीह अल्लाह हैं लाँकि मसीह ने ख़ुद यॅू कह दिया था कि ऐ बनी इसराईल सिर्फ उसी अल्लाह की इबादत करो जो हमारा और तुम्हारा पालने वाला है क्योंकि जिसने अल्लाह का शरीक बनाया उस पर अल्लाह ने बेहिश्त को हराम कर दिया है और उसका ठिकाना जहन्नुम है और ज़ालिमों का कोई मददगार नहीं
73 काफि़र हैं जो लोग कहते हैं कि अल्लाह तीन में का है - अल्लाहए यक्ता के सिवा कोई माबूद नहीं और ये लोग जो कुछ बका करते हैं अगर उससे बाज़ न आए तो जो लोग उसमें से काफि़र हैं उन पर ज़रूर दर्दनाक अज़ाब नाजि़ल होगा
74 ये लोग अल्लाह की बारगाह में तौबा क्यों नहीं करते और माफ़ी क्यों नहीं मागते हालाँकि अल्लाह तो बड़ा बख़्शने वाला मेहरबान है
75 क्या थे मरियम के बेटे मसीह सिवाय एक रसूल के और उनके क़ब्ल बहुतेरे रसूल गुज़र चुके हैं और उनकी माँ भी सिद्दीका थीं ये दोनों खाना खाते –देखो हम अपने एहकाम इनसे कैसा साफ़ साफ़ बयान करते हैं फिर देखो तो कि ये लोग कहाँ भटके जा रहे हैं
76 क्या तुम अल्लाह को छोड़कर किसी की इबादत करते हो जिसको न तो नुक़सान ही इख़्तेयार है और न नफ़े का और अल्लाह तो सुनता जानता है
77 कह दो कि ऐ एहले किताब तुम अपने दीन के मामले में बिना हक के ज़्यादती न करो और न उन लोगों की नफ़सियानी ख़्वाहिशों पर चलो जो पहले ख़ुद ही गुमराह हो चुके और बहुतेरों को गुमराह कर छोड़ा और राहे रास्त से भटक गए
78 बनी इसराईल में से जो लोग काफि़र थे उन पर दाऊद और मरियम के बेटे ईसा की ज़बानी लानत की गयी ये इस वजह से कि उन लोगों ने नाफ़रमानी की और हद से बढ़ जाते थे
79 और किसी बुरे काम से जिसको उन लोगों ने किया एक दूसरे को मना नहीं करते थे जो काम ये लोग करते थे क्या ही बुरा था
80 तुम उन में से बहुतेरों को देखोगे कि कुफ़्फ़ार से दोस्ती रखते हैं जो सामान पहले से उन लोगों ने ख़ुद अपने वास्ते भेजा है किस क़दर बुरा है) कि अल्लाह उन पर गज़बनाक हुआ और हमेशा अज़ाब ही में रहेंगे 81 और अगर ये लोग अल्लाह और रसूल पर और जो कुछ उस पर नाजि़ल किया गया है इमान रखते हैं तो हरगिज़ दोस्त न बनाते मगर उनमें के बहुतेरे तो फासिक हैं
82 ईमान लाने वालों का दुशमन सबसे बढ़के यहूदियों और मुशरिकों को पाओगे और ईमान लाने वालों का दोस्ती में सबसे बढ़के क़रीब उन लोगों को पाओगे जो अपने को नसारा कहते हैं क्योंकि इन में से बहुत से आबिद और जाहिद हैं और इस सबब से कि ये लोग तकब्बुर नहीं करते 83 जब यह लोग सुनते हैं जो हमारे रसूल पर नाजि़ल किया गया है तुम देखते हो कि तो उनकी आँखों से आँसू जारी हो जातें है क्योंकि उन्होंने हक़ को पहचान लिया है अर्ज़ करते हैं कि ऐ मेरे पालने वाले हम तो ईमान ला चुके तो गवाहों में हमें भी लिख ले
84 और क्यों न हम अल्लाह और जो हक़ बात हमारे पास आ चुकी है उस पर तो ईमान लाएँ और अल्लाह से उम्मीद रखें कि वह अपने नेक बन्दों के साथ हमें भी दाखिल कर दे 85 तो अल्लाह ने उन्होंने जो कहा उन्हें वह बाग़ात अता फरमाए जिनके नीचे नहरें जारी हैं वह उसमें हमेशा रहेंगे और नेकी करने वालों का यही ऐवज़ है
86 और जिन लोगों ने कुफ्र एख़्तेयार किया और हमारी आयतों को झुठलाया यही लोग जहन्नुमी हैं
87 ऐ ईमान वालों जो पाक चीज़े अल्लाह ने तुम्हारे वास्ते हलाल कर दी हैं उनको अपने ऊपर हराम न करो और हद से न बढ़ो क्यों कि अल्लाह हद से बढ़ जाने वालों को हरगिज़ दोस्त नहीं रखता
88 और जो हलाल साफ सुथरी चीज़ें अल्लाह ने तुम्हें दी हैं उनको खाओ और जिस अल्लाह पर तुम ईमान लाए हो उससे डरते रहो
89 अल्लाह तुम्हारे बेकार क़समों पर गिरफ्तार न करेगा मगर बाक़सद पक्की क़सम खाने और उसके खि़लाफ करने पर तो ज़रुर तुम्हें पकड़ेगा उसका कफ्फारा जैसा तुम ख़ुद अपने एहलोअयाल को खिलाते हो उसी कि़स्म का औसत दर्जे का दस मोहताजों को खाना खिलाना या उनको कपड़े पहनाना या एक गु़लाम आज़ाद करना है फिर जिससे यह सब न हो सके तो मैं तीन दिन के रोज़े ये तुम्हारी क़समों का कफ्फारा है जब तुम क़सम खाओ I और अपनी क़समों का ख़्याल रखो अल्लाह अपने एहकाम को तुम्हारे वास्ते यूँ साफ़ साफ़ बयान करता है ताकि तुम शुक्र करो
90 ऐ ईमान लाने वालों शराब, जुआ और बुत और पाँसे तो बस नापाक शैतानी काम हैं तो तुम लोग इससे बचे रहो ताकि तुम फलाह पाओ
91 शैतान की तो बस यही तमन्ना है कि शराब और जुए की बदौलत तुममें बाहम अदावत व दुश्मनी डलवा दे और अल्लाह की याद और नमाज़ से बाज़ रखे तो क्या तुम उससे बाज़ आने वाले हो
92 और अल्लाह का हुक्म मानों और रसूल का हुक्म मानों और खबरदार रहो अगर तुमने मुँह फेरा तो समझ रखो कि हमारे रसूल पर बस साफ़ साफ़ पैग़ाम पहुँचा देना फर्ज़ है
93 जिन लोगों ने ईमान कुबूल किया और अच्छे काम किए हैं उन पर जो कुछ खा चुके उसमें कुछ गुनाह नहीं जब उन्होंने परहेज़गारी की और ईमान ले आए और अच्छे काम किए फिर परहेज़गारी की और नेकियाँ कीं और अल्लाह नेकी करने वालों को दोस्त रखता है
94 ऐ ईमान लाने वालों कुछ शिकार से जिन तक तुम्हारे हाथ और नैज़ें पहुँच सकते हैं अल्लाह ज़रुर इम्तेहान करेगा ताकि अल्लाह देख ले कि उससे बे देखे भाले कौन डरता है फिर उसके बाद भी जो ज़्यादती करेगा तो उसके लिए दर्दनाक अज़ाब है
95 ऐ ईमान लाने वालों जब तुम हालते एहराम में हो तो शिकार न मारो और तुममें से जो कोई जान बूझ कर शिकार मारेगा तो जिस को मारा है चैपायों में से उसका मसल तुममें से जो दो मुन्सिफ आदमी तजवीज़ कर दें उसका बदला होगा काबा तक पहुँचा कर कुर्बानी की जाए या कफ्फारा मोहताजों को खाना खिलाना या उसके बराबर रोज़े रखना ताकि अपने किए की सज़ा का मज़ा चखो जो हो चुका उससे तो अल्लाह ने दरग़ुज़र की और जो फिर ऐसी हरकत करेगा तो अल्लाह उसकी सज़ा देगा और अल्लाह ज़बरदस्त बदला लेने वाला है
96 तुम्हारे और सय्याहों के वास्ते दरियाई शिकार और उसका खाना जायज़ कर दिया है मगर खुश्की का शिकार जब तक तुम हालते एहराम में रहो तुम पर हराम है और उस अल्लाह से डरते रहो जिसकी तरफ इकट्ठे किये जाओगे
97 अल्लाह ने काबा जो मोहतरम घर है और हुरमत दार महीनों को और कुरबानी को और उस जानवर को जिसके गले में पट्टे डाल दिए गए हों लोगों के अमन क़ायम रखने का सबब क़रार दिया यह इसलिए कि तुम जान लो कि अल्लाह जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है जानता है और ये भी अल्लाह हर चीज़ से वाकि़फ है
98 जान लो कि यक़ीनन अल्लाह बड़ा अज़ाब वाला है और ये कि बड़ा बख़्षने वाला मेहरबान है
99 रसूल पर पैग़ाम पहुँचा देने के सिवा कुछ नहीं और जो कुछ तुम ज़ाहिर बा ज़ाहिर करते हो और जो कुछ तुम छुपा कर करते हो अल्लाह सब जानता है
100 कह दो कि नापाक और पाक बराबर नहीं हो सकता अगरचे नापाक की कसरत तुम्हें भला क्यों न मालूम हो तो समझ वालों अल्लाह से डरते रहो ताकि तुम कामयाब रहो
101 ऐ ईमान वालों ऐसी चीज़ों के बारे में न पूछा करो कि अगर तुमको मालूम हो जाए तो तुम्हें बुरी मालूम हो और अगर उनके बारे में कु़रान नाजि़ल होने के वक़्त पूछ बैठोगे तो तुम पर ज़ाहिर कर दी जाएगी अल्लाह ने उनसे दरगुज़र की और अल्लाह बड़ा बख़्शने वाला बुर्दबार है
102 तुमसे पहले भी लोगों ने इस किस्म की बातें पूछी थीं फिर उसके मुन्किर हो गए
103 अल्लाह ने न तो कोई बहीरा (कान फटी ऊँटनी) मुक़र्रर किया है न सायवा (साँढ़) न वसीला (जुडवा बच्चे) न हाम (बुढ़ा साँढ़़) मुक़र्रर किया है मगर कुफ़्फ़ार अल्लाह पर ख़्वाह मा ख़्वाह झूठ बोहतान बाँधते हैं और उनमें के अक्सर नहीं समझते
104 और जब उनसे कहा जाता है कि जो अल्लाह ने नाजि़ल फरमाया है उसकी तरफ और रसूल की आओ कहते हैं कि हमने जिस में अपने बाप दादा को पाया वही हमारे लिए काफी है क्या अगरचे उनके बाप दादा न कुछ जानते ही हों न हिदायत ही पायी हो
105 ऐ ईमान वालों तुम अपनी ख़बर लो जब तुम राहे रास्त पर हो तो कोई गुमराह हुआ करे तुम्हें नुक़सान नहीं पहुँचा सकता तुम सबके सबको अल्लाह ही की तरफ लौट कर जाना है तब जो कुछ करते थे तुम्हें बता देगा
106 ऐ ईमान वालों जब तुममें से किसी पर मौत खड़ी हो तो वसीयत के वक़्त तुम में से दो आदिलों की गवाही होनी ज़रुरी है और जब तुम इत्तेफाक़न कहीं का सफर करो और तुमको मौत की मुसीबत का सामना हो तो दो गवाह ग़ैर सही अगर तुम्हें शक हो तो उन दोनों को नमाज़ के बाद रोक लो फिर वह दोनों अल्लाह की क़सम खाएँ कि हम इस के ऐवज़ कुछ दाम नहीं लेंगे अगरचे हम जिसकी गवाही देते हैं हमारा अज़ीज़ ही क्यों न हो और हम अल्लाह लगती गवाही न छुपाएँगे अगर ऐसा करें तो हम बेशक गुनाहगार हैं
107 अगर इस पर मालूम हो जाए कि वह दोनों गुनाह के मुस्तहक़ हो गए तो दूसरे दो आदमी उन लोगों में से जिनका हक़ दबाया गया है और ज़्यादा क़राबतदार हैं उनकी जगह खड़े हो जाएँ फिर दो नए गवाह अल्लाह की क़सम खाएँ कि पहले दो गवाहों की निस्बत हमारी गवाही ज़्यादा सच्ची है और हमने नहीं छुपाया और अगर ऐसा किया हो तो उस वक़्त बेशक हम ज़ालिम हैं 108 ये ज़्यादा क़रीन क़यास है कि इस तरह ठीक ठीक गवाही दें या अन्देशा हो कि कहीं हमारी क़समें दूसरे फरीक़ की क़समों के बाद रद न कर दी जाएँ अल्लाह से डरो और सुन लो और अल्लाह बदचलन लोगों को मंजि़ले मक़सूद तक नहीं पहुँचाता
109 जिस दिन अल्लाह अपने रसूलों को जमा करके पूछेगा कि क्या जवाब दिया गया तो अर्ज़ करेगें कि हम तो कुछ नहीं जानते तू तो खुद बड़ा ग़ैब वा है
110 जब अल्लाह फरमाएगा कि ये मरियम के बेटे ईसा हमने जो एहसानात तुम पर और तुम्हारी माँ पर किये उन्हे याद करो जब हमने रूहुलक़ुदूस से तुम्हारी ताईद की कि तुम झूले में और अधेड़ होकर करने लगे और जब हमने तुम्हें लिखना और अक़ल व दानाई की बातें और तौराह व इंजील सिखायी और जब तुम मेरे हुक्म से मिट्टी से चिडि़या की मूरत बनाते फिर उस पर कुछ दम कर देते तो वह मेरे हुक्म से चिडि़या बन जाती थी और मेरे हुक्म से पैदायशी अॅधे और कोढ़ी को अच्छा कर देते थे और जब तुम मेरे हुक्म से मुर्दों को जि़न्दा खड़ा करते थे और जिस वक़्त तुम बनी इसराईल के पास मौजिज़े लेकर आए और उस वक़्त मैने उनको तुम से रोका तो उनमें से बाज़ कुफ़्फ़ार कहने लगे ये तो बस खुला हुआ जादू है
111 और जब मैने हवारियों से इलहाम किया कि मुझ पर और मेरे रसूल पर ईमान लाओ तो अर्ज़ करने लगे हम ईमान लाए और तू गवाह रहना कि हम मुस्लिम हैं
112 जब हवारियों ने ईसा से अर्ज़ की कि ऐ मरियम के बेटे ईसा क्या आप का अल्लाह उस पर क़ादिर है कि हम पर आसमान से एक ख़्वान नाजि़ल फरमाए ईसा ने कहा अगर तुम सच्चे ईमानदार हो तो अल्लाह से डरो
113 वह अर्ज़ करने लगे हम तो फक़त ये चाहते है कि इसमें से कुछ खाएँ और हमारे दिल को इत्मेनान हो जाए और यक़ीन कर लें कि आपने हमसे सच फरमाया था और हम लोग इस पर गवाह रहें
114 मरियम के बेटे ईसा ने अर्ज़ की अल्लाह वन्दा ऐ हमारे पालने वाले हम पर आसमान से एक ख्वान नाजि़ल फरमा कि वह दिन हम लोगों के लिए हमारे अगलों के लिए और हमारे पिछलों के लिए ईद का करार पाए तेरी तरफ से एक बड़ी निशानी हो और तू हमें रोज़ी दे और तू सब रोज़ी देने वालो से बेहतर है
115 अल्लाह ने फरमाया मै ख्वान तो तुम पर ज़रुर नाजि़ल करुगाँ फिर तुममें से जो भी उसके बाद काफि़र हुआ तो मै उसको यक़ीन ऐसे सख़्त अज़ाब की सज़ा दूँगा कि सारे आलम में किसी एक पर भी वैसा अज़ाब न करुगाँ
116 जब ईसा से अल्लाह फरमाएग कि ऐ मरियम के बेटे ईसा क्या तुमने लोगों से ये कह दिया था कि अल्लाह को छोड़कर मुझ को और मेरी माँ को अल्लाह बना लो ईसा अर्ज़ करेगें पाक है तू मेरी तो ये मजाल न थी कि मै ऐसी बात मुँह से निकालूँ जिसका मुझे कोई हक़ न हो अगर मैने कहा होगा तो तुझको ज़रुर मालूम ही होगा क्योंकि तू मेरे दिल की जानता है हाँ अलबत्ता मै तेरे जी की बात नहीं जानता इसमें तो शक ही नहीं कि तू ही ग़ैब की बातें ख़ूब जानता है
117 तूने मुझे जो कुछ हुक्म दिया उसके सिवा तो मैने उनसे कुछ भी नहीं कहा यही कि अल्लाह ही की इबादत करो जो मेरा और तुम्हारा सबका पालने वाला है और जब तक मैं उनमें रहा उन की देखभाल करता रहा फिर जब तूने मुझे उठा लिया तो तू ही उनका निगेहबान था और तू तो ख़ुद हर चीज़ का गवाह है
118 तू अगर उन पर अज़ाब करेगा तो ये तेरे बन्दे हैं और अगर उन्हें बख़्श देगा बेशक तू ज़बरदस्त हिकमत वाला है 119 अल्लाह फरमाएगा कि ये वह दिन है कि सच्चे बन्दों को उनकी सच्चाई काम आएगी उनके लिए वह बाग़ात है जिनके नीचे नहरे जारी हैं वह उसमें अबादुल आबाद तक रहेंगे अल्लाह उनसे राज़ी और वह अल्लाह से खुश यही बहुत बड़ी कामयाबी है
120 सारे आसमान व ज़मीन और जो कुछ उनमें है सब अल्लाह ही की सल्तनत है और वह हर चीज़ पर क़ादिर है
1 ऐ ईमान लाने वालों इक़रारों को पूरा करो तुम्हारे वास्ते चैपाए जानवर हलाल कर दिये गये उन के सिवा जो तुमको पढ़ कर सुनाए जाएगे मगर जब तुम हालते एहराम में हो तो शिकार को हलाल न समझना बेशक अल्लाह जो चाहता है हुक्म देता है
2 ऐ ईमान लाने वालों बेहुरमती न करो न अल्लाह की निशानियों की, न हुरमत वाले महीने की और न क़ुरबानी की और न पट्टे वाले जानवरों की और न ख़ानाए काबा की तवाफ़ का क़स्द करने वालों की I और जब तुम एहराम खोल दो तो शिकार कर सकते हो पर किसी क़बीले की यह अदावत कि तुम्हें उन लोगों ने ख़ानाए काबा से रोका था इस जुर्म में न फॅसवा दे कि तुम उनपर ज़्यादती करने लगो और I नेकी और परहेज़गारी में एक दूसरे की मदद किया करो और गुनाह और ज़्यादती में बाहम किसी की मदद न करो और अल्लाह से डरते रहो अल्लाह तो यक़ीनन बड़ा सख़्त अज़ाब वाला है 3 मरा हुआ जानवर और ख़ून और सुअर का गोश्त और जिस पर अल्लाह के सिवा किसी दूसरे का नाम लिया जाए और गर्दन मरोड़ा हुआ और चोट खाकर मरा हुआ और जो गिरकर मर जाए और जो सींग से मार डाला गया हो और जिसको दरिन्दे ने फाड़ खाया हो मगर जिसे तुमने मरने के क़ब्ल जि़बाह कर लो और बुतों के थान पर चढ़ाया जाए और जिसे तुम तीरों से बाहम हिस्सा बाटो तुम पर हराम की गयी हैं ये गुनाह की बात है I कुफ़्फ़ार तुम्हारे दीन से मायूस हो गए तो तुम उनसे तो डरो ही नहीं बल्कि सिर्फ मुझी से डरो आज मैंने तुम्हारे दीन को कामिल कर दिया और तुमपर अपनी नेअमत पूरी कर दी और तुम्हारे दीने इस्लाम को पसन्द किया बस जो भूख़ में मजबूर हो जाए और गुनाह की तरफ़ माएल न हो तो अल्लाह बेशक बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
4 तुमसे लोग पूछतें हैं कि क्या उनके लिए हलाल है तुम कह दो कि तुम्हारे लिए पाकीज़ा चीजें हलाल की गयीं और शिकारी जानवर जो तुमने शिकार के लिए सधा रखें है और जो अल्लाह ने तुम्हें बताये हैं उनमें के कुछ तुमने उन जानवरों को भी सिखाया हो तो ये शिकारी जानवर जिस शिकार को तुम्हारे लिए पकड़ रखें उसको खाओ और अल्लाह का नाम ले लिया करो और अल्लाह से डरते रहो इसमें तो शक ही नहीं कि अल्लाह बहुत जल्द हिसाब लेने वाला है
5 आज तमाम पाकीज़ा चीजें तुम्हारे लिए हलाल कर दी गयी हैं और एहले किताब की ख़ुश्क चीजे़ं गेहूँ तुम्हारे लिए हलाल हैं और तुम्हारी ख़ुश्क चीजें गेहॅू उनके लिए हलाल हैं और आज़ाद पाक दामन औरतें और उन लोगों में की आज़ाद पाक दामन औरतें जिनको तुमसे पहले किताब दी जा चुकी है जब तुम उनको उनके मेहर दे दो पाक दामिनी का इरादा करो न तो खुल्लम खुल्ला जि़नाकारी का और न चोरी छिपे से आशनाई का और जिस ने ईमान से इन्कार किया तो उसका सब किया अकारत हो गया और आख़ेरत में भी वही घाटे में रहेगा
6 ऐ इमानदारों जब तुम नमाज़ के लिये आमादा हो तो अपने मुँह और कोहनियों तक हाथ धो लिया करो और अपने सरों का और टखनों तक पॉवों अगर तुम पाक न हो तो अपने को पाक कर लो और अगर तुम बीमार हो या सफ़र में हो या तुममें से किसी को पैख़ाना निकल आए या औरतों से हमबिस्तरी की हो और तुमको पानी न मिल सके तो पाक ख़ाक से अपने मुँह और अपने हाथों को पोंछ लो अल्लाह तो ये चाहता ही नहीं कि तुम पर किसी तरह की परेशानी हो बल्कि वो ये चाहता है कि पाक व पाकीज़ा कर दे और तुमपर अपनी नेअमते पूरी कर दे और तुम शुक्र अदा करो
7 और जो एहसानात अल्लाह ने तुमपर किए हैं उनको और उस एहद को याद करो जिसका तुमसे पक्का इक़रार ले चुका है जब तुमने कहा था कि हमने सुना और दिल से मान लिया और अल्लाह से डरते रहो क्योंकि इसमें ज़रा भी शक नहीं कि अल्लाह दिलों के राज़ से भी बाख़बर है “ बार बार सच्ची गवाही की ताकीद : 8 ऐ ईमान लाने वालों अल्लाह के लिए इन्साफ़ के साथ गवाही देने के लिए तैयार रहो और तुम्हें किसी क़बीले की अदावत इस जुर्म में न फॅसवा दे कि तुम नाइन्साफी करने लगो तुम इन्साफ़ करो यही परहेज़गारी से बहुत क़रीब है और अल्लाह से डरो क्योंकि जो कुछ तुम करते हो अल्लाह उसे ज़रूर जानता है
9 और जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और अच्छे अच्छे काम किए अल्लाह ने वायदा किया है कि उनके लिए मग़फे़रत और बड़ा सवाब है
10 और जिन लोगों ने कुफ्ऱ इख़्तेयार किया और हमारी आयतों को झुठलाया वह जहन्नुमी हैं
11 ऐ इमान वालों अल्लाह ने जो एहसानात तुमपर किए हैं उनको याद करो और ख़ूसूसन जब एक क़बीले ने तुम पर दस्त दराज़ी का इरादा किया था तो अल्लाह ने उनके हाथों को तुम तक पहँचने से रोक दिया और अल्लाह से डरते रहो और मोमिनीन को अल्लाह ही पर भरोसा रखना चाहिए
12 और इसमें भी शक नहीं कि अल्लाह ने बनी इसराईल से एहद व पैमान ले लिया था और हम ने इनमें के बारह सरदार उनपर मुक़र्रर किए और अल्लाह ने बनी इसराईल से फ़रमाया था कि मैं तो यक़ीनन तुम्हारे साथ हॅू अगर तुम भी पाबन्दी से नमाज़ पढ़ते और ज़कात देते रहो और हमारे पैग़म्बरों पर ईमान लाओ और उनकी मदद करते रहो और अल्लाह को क़र्जे हसना देते रहो तो मैं भी तुम्हारे गुनाह तुमसे ज़रूर दूर करूंगा और तुमको बेहिश्त के उन बाग़ों में जा पहँच जाऊंगा जिनके नीचे नहरें जारी हैं फिर तुममें से जो इसके बाद भी इन्कार करे तो यक़ीनन वह राहे रास्त से भटक गया
13 हमने उनकी एहद शिकनी की वजह से उनपर लानत की और उनके दिलों को हमने सख़्त बना दिया कि कलमात को उनके असली मायनों से बदल कर दूसरे मायनो में इस्तेमाल करते हैं और जिन जिन बातों की उन्हें नसीहत की गयी थी उनमें से एक बड़ा हिस्सा भुला बैठे और अब तो उनमें से चन्द आदमियों के सिवा एक न एक की ख़्यानत पर बराबर मुत्तेला होते रहते हो तो तुम उन को माफ़ कर दो और दरगुज़र करो अल्लाह एहसान करने वालों को ज़रूर दोस्त रखता है
14 और जो लोग कहते हैं कि हम नसरानी हैं उनसे हमने इमान का एहद लिया था मगर जिन जिन बातों की उन्हें नसीहत की गयी थी उनमें से एक बड़ा हिस्सा भुला बैठे तो हमने भी क़यामत तक उनमें बाहम अदावत व दुशमनी की बुनियाद डाल दी और अल्लाह उन्हें बहुत जल्द बता देगा कि वह क्या क्या करते थे
15 ऐ एहले किताब तुम्हारे पास हमारा रसूल आ चुका जो किताबे अल्लाह की उन बातों में से जिन्हें तुम छुपाया करते थे बहुतेरी तो साफ़ साफ़ बयान कर देगा और बहुतेरी से दरगुज़र करेगा तुम्हरे पास तो अल्लाह की तरफ़ से एक नूर और साफ़ साफ़ बयान करने वाली किताब आ चुकी है
16 जो लोग अल्लाह की ख़ुशनूदी के पाबन्द हैं उनको तो उसके ज़रिए से राहे निजात की हिदायत करता है और अपने हुक्म से तारीकी से निकालकर रौशनी में लाता है और राहे रास्त पर पहँचा देता है
17 जो लोग उसके क़ायल हैं कि मरियम के बेटे मसीह बस अल्लाह हैं वह ज़रूर काफि़र हो गए उनसे पूछो तो कि भला अगर अल्लाह मरियम के बेटे मसीह और उनकी माँ को और जितने लोग ज़मीन में हैं सबको मार डालना चाहे तो कौन ऐसा है जिसका अल्लाह से भी ज़ोर चले और सारे आसमान और ज़मीन में और जो कुछ भी उनके दरम्यिान में है सब अल्लाह ही की सल्तनत है जो चाहता है पैदा करता है और अल्लाह तो हर चीज़ पर क़ादिर है
18 और नसरानी और यहूदी तो कहते हैं कि हम ही अल्लाह के बेटे और उसके चहेते हैं उनसे तुम कह दो तो फिर तुम्हें तुम्हारे गुनाहों की सज़ा क्यों देता है बल्कि तुम भी उसकी मख़लूक़ात से एक बशर हो अल्लाह जिसे चाहेगा बख्श देगा और जिसको चाहेगा सज़ा देगा आसमान और ज़मीन और जो कुछ उन दोनों के दरम्यिान में है सब अल्लाह ही का मुल्क है और सबको उसी की तरफ़ लौट कर जाना है “ बेशक आसान नहीं था उन लोगों के बीच अच्छों को खुशखबरी देना और बुरों को डराना :
19 ऐ एहले किताब हमारा रसूल तुम्हारे पास आया रसूलों की आमद में एक वक्फे का बाद, जो एहकामे अल्लाह को साफ़ साफ़ बयान करता है ताकि तुम कहीं ये न कह बैठो कि हमारे पास तो न कोई ख़ुशख़बरी देने वाला आया न डराने वाला अब तो यक़ीनन तुम्हारे पास ख़ुशख़बरी देने वाला और डराने वाला आ गया और अल्लाह हर चीज़ पर क़ादिर है
20 ऐ रसूल उनको वह वक़्त याद जब मूसा ने अपनी क़ौम से कहा था कि ऐ मेरी क़ौम जो नेअमते अल्लाह ने तुमको दी है उसको याद करो इसलिए कि उसने तुम्हीं लोगों से बहुतेरे रसूल बनाए और तुम ही लोगों को बादशाह बनाया और तुम्हें वह नेअमतें दी हैं जो आलम में किसी को न दीं
21 ऐ मेरी क़ौम की उस मुक़द्दस ज़मीन में दाखिल हो जाओ जो अल्लाह ने तुम्हारी तक़दीर में लिख दी है और दुशमन के मुक़ाबले पीठ न फेरो इसमें तो तुम ख़ुद उलटा घाटा उठाओगे
22 वह लोग कहने लगे कि ऐ मूसा इस मुल्क में तो बड़े ज़बरदस्त लोग रहते हैं और जब तक वह लोग इसमें से निकल न जाए हम तो उसमें कभी पॉव भी न रखेंगे हाँ अगर वह लोग ख़ुद इसमें से निकल जाए तो अलबत्ता हम ज़रूर जाएगे
23 दो आदमी जो अल्लाह का ख़ौफ़ रखते थे और जिनपर अल्लाह ने ख़ास अपना फ़ज़ल किया था बोले फाटक से दाखिल हो अगर दाखिल हो गए तो तुम्हारी जीत हो गयी और अगर ईमान वाले हो तो अल्लाह ही पर भरोसा रखो
24 वह कहने लगे जब तक वह लोग इसमें हैं हम तो उसमें हरगिज़ पॉव न रखेंगे हाँ तुम जाओ और तुम्हारा अल्लाह जाए ओर दोनों लड़ो हम तो यहीं जमे बैठे हैं
25 तब मूसा ने अर्ज़ की मेरे मालिक तू ख़ूब वाकि़फ़ है कि अपनी ज़ाते ख़ास और अपने भाई के सिवा किसी पर मेरा क़ाबू नहीं बस अब हमारे और उन नाफ़रमान लोगों के दरमियान जुदाई डाल दे हमारा उनका साथ नहीं हो सकता 26 उनको चालीस बरस तक हराम रहेगी यह लोग ज़मीन पर सरगरदा रहेंगे तो फिर तुम इन बदचलन बन्दों पर अफ़सोस न करना
27 इन लोगों से आदम के दो बेटों की खबर दो जब उन दोनों ने अल्लाह की दरगाह में नियाज़ें चढ़ाई तो एक की क़ुबूल हुयी और दूसरे की न क़ुबूल हुयी तो उसने कहा मैं तो तुझे मार डालूंगा उसने कहा अल्लाह तो सिर्फ परहेज़गारों की नज़र कु़बूल करता है
28 अगर तुम मुझे क़त्ल करने के लिए मेरी तरफ़ अपना हाथ बढ़ाओगे मैं तुम्हारे क़त्ल करने के लिए अपना हाथ नहीं बढ़ाऊंगा मैं उस अल्लाह से जो सारे जहाँन का पालने वाला है डरता हॅू
29 मैं ये चाहता हॅू कि मेरे गुनाह और तेरे गुनाह दोनों तेरे सर हो जाए तो तू जहन्नुमी बन जाए और ज़ालिमों की तो यही सज़ा है
30 उसके नफ़्स ने अपने भाई के क़त्ल पर उसे इजाज़त दी उसने उसे क़त्ल किया इस तरह घाटा उठाने वालों में से हो गया
31 अल्लाह ने एक कौवे को भेजा कि वह ज़मीन को कुरेदने लगा ताकि उसे दिखा दे कि उसे अपने भाई की शर्म कैसे छुपाये वह कहने लगा हाए अफ़सोस क्या मैं उस से भी आजिज़ हॅू कि उस कौवे की बराबरी कर सकॅू कि अपने भाई की शर्म छुपा देता वह बहुत पछताया
32 इसी सबब से तो हमने बनी इसराईल पर वाजिब कर दिया था कि जो किसी को क़त्ल करे ,न जान के बदले में और न मुल्क में फ़साद फैलाने की सज़ा में, तो गोया उसने सब लोगों को एक साथ क़त्ल कर डाला और जिसने एक को बचा लिया तो गोया उसने सब लोगों को बचा लिया और उन के पास हमारे रसूल रौशन निशानियाँ लेकर आ चुके हैं फिर उसके बाद भी उसमें से बहुतेरे ज़मीन पर ज़्यादतिया करते रहे
33 जो लोग अल्लाह और उसके रसूल से लड़ते हैं और फ़साद फैलाने की ग़रज़ से मुल्को दौड़ते फिरते हैं उनकी सज़ा बस यही है कि या तो मार डाले जाए या उन्हें सूली दे दी जाए या उनके हाथ पॉव हेर फेर कर एक तरफ़ का हाथ दूसरी तरफ़ का पॉव काट डाले जाए या उन्हें सरज़मीन से शहर बदर कर दिया जाए यह रूसवाई तो उनकी दुनिया में हुयी और फिर आख़ेरत में तो उनके लिए बहुत बड़ा अज़ाब ही है
34 सिवाय उन लोगों के जिन्हों इससे पहले कि तुम इनपर क़ाबू पाओ तौबा कर ली अल्लाह बेशक बड़ा बख़्शने वाला मेहरबान है
35 ऐ ईमान लाने वालों अल्लाह से डरते रहो और उसके तक़र्रब के ज़रिये की जुस्तजू में रहो और उसकी राह में जेहाद करो ताकि तुम कामयाब हो जाओ
36 इसमें शक नहीं कि जिन लोगों ने कुफ़्र इख़्तेयार किया अगर उनके पास ज़मीन में जो कुछ है सब और उतना और भी उसके साथ हो कि रोज़े क़यामत के अज़ाब का मुआवेज़ा दे दे तब भी कु़बूल न किया जाएगा और उनके लिए दर्दनाक अज़ाब है
37 वह लोग तो चाहेंगे कि किसी तरह जहन्नुम की आग से निकल भागे मगर वहाँ से तो वह निकल ही नहीं सकते और उनके लिए तो दाएमी अज़ाब है
38 चोर मर्द और चोर औरत उनका हाथ काट डालो ये अल्लाह की तरफ़ से यह मिसाली सजा है और अल्लाह बड़ा ज़बरदस्त हिकमत वाला है
39 जो अपने गुनाह के बाद तौबा कर ले और अपने चाल चलन दुरूस्त कर लें तो बेशक अल्लाह भी तौबा कु़बूल कर लेता है क्योंकि अल्लाह तो बड़ा बख़्शने वाला मेहरबान है
40 क्या तुम नहीं जानते कि सारे आसमान व ज़मीन में अल्लाह की हुकूमत है जिसे चाहे अज़ाब करे और जिसे चाहे माफ़ कर दे और अल्लाह तो हर चीज़ पर क़ादिर है ?
41 ऐ रसूल तुम उनका ग़म न खाओ जो लोग कुफ़्र की तरफ़ लपक के चले जाते हैं- कुछ अपने मुँह से कहते हैं कि हम ईमान लाए लेकिन उनके दिल में ईमान नहीं है और यहूदी जो झूठ पर कान लगाते हैं और दूसरों की सुनते हैं जो तुम तक नहीं आये ये लोग अल्फ़ाज़ को उनके मक़ाम से बदल कर कहते हैं कि अगर यह कहें तो मानो यह न कहें तो होशियार रहो - जिसको अल्लाह ख़राब करना चाहता है तो उसके वास्ते अल्लाह से तुम्हारा कुछ ज़ोर नहीं चल सकता यह लोग तो वही हैं जिनके दिलों को अल्लाह ने पाक करने का इरादा ही नहीं किया उनके लिए तो दुनिया में भी रूसवाई है और आख़ेरत में भी बड़ा अज़ाब होगा
42 झूठी बातों को बड़े शौक़ से सुनने वाले हैं और हराम खाते हैं अगर ये लोग तुम्हारे पास आए तो ख़्वाह उनके दरम्यिान फै़सला कर दो या उनसे किनाराकशी करो और अगर तुम किनाराकश रहोगे तो ये लोग तुम्हारा हरगिज़ कुछ बिगाड़ नहीं सकते और अगर उनमें फै़सला करो तो इन्साफ़ से फै़सला करो क्योंकि अल्लाह इन्साफ़ करने वालों को दोस्त रखता है
43 और जब ख़ुद उनके पास तौरेत है और उसमें अल्लाह का हुक्म है तो फिर तुम्हारे पास फैसला कराने को क्यों आते हैं और इसके बाद फिर फिर जाते हैं ओर सच तो यह है कि यह लोग ईमान वाले नहीं हैं 44 बेशक हम ने तौरेत नाजि़ल की जिसमें हिदायत और नूर है उसी के मुताबिक़ अंबिया जो फ़रमाबरदार थे यहूदियों को हुक्म देते रहे और रब्बानी और अह्बार जो किताबे अल्लाह के मुहाफि़ज़ थे और वह उसके गवाह भी थे तुम लोगों से न डरो मुझ ही से डरो और मेरी आयतों के बदले में थोड़ी कीमत न लो और जो अल्लाह ने भेजा है के मुताबिक़ हुक्म न दे तो ऐसे ही लोग काफि़र हैं
45 और हम ने उनके लिए यह हुक्म फर्ज़ कर दिया था कि जान के बदले जान और आँख के बदले आँख और नाक के बदले नाक और कान के बदले कान और दाँत के बदले दाँत और जख़्म के बदले बराबर का बदला है फिर जो ख़ता माफ़ कर दे तो ये उसके गुनाहों का कफ़्फ़ारा हो जाएगा और जो अल्लाह ने भेजा है के मुवाफि़क़ हुक्म न दे तो ऐसे ही लोग ज़ालिम हैं
46 और हम ने इसी के क़दम ब क़दम मरियम के बेटे ईसा को भेजा और वह इस किताब तौरैत की भी तस्दीक़ करते थे जो उनके सामने मौजूद थी और हमने उनको इन्जील अता की जिसमें हिदायत थी और नूर और वह इस किताब तौरेत की जो वक़्ते नुज़ूले इन्जील मौजूद थी तसदीक़ करने वाली और मुत्तक़ीन के लिए हिदायत व नसीहत थी 47 इन्जील मानने वालों को जो कुछ अल्लाह ने नाजि़ल किया है उसके मुताबिक़ हुक्म करना चाहिए और जो अल्लाह ने भेजा है से हुक्म न दे तो ऐसे ही लोग फासिक हैं
48 और हमने तुम पर भी हक़ के साथ किताब नाजि़ल की जो उसके पहले जो किताब से था उसकी तसदीक़ करती है और उसकी निगेहबान है जो कुछ तुम पर अल्लाह ने नाजि़ल किया है उसी के मुताबिक़ तुम भी हुक्म दो और उन लोगों की ख़्वाहिशे की पैरवी न करो I हमने तुम में हर एक के वास्ते एक एक शरीयत और ख़ास तरीक़े पर मुक़र्रर कर दिया और अगर अल्लाह चाहता तो तुम सब के सब को एक ही उम्मत बना देता मगर अल्लाह का मतलब यह था कि जो कुछ तुम्हें दिया है उसमें तुम्हारा इम्तेहान करे बस तुम नेकी में लपक कर आगे बढ़ जाओ और तुम सब को अल्लाह ही की तरफ़ लौट कर जाना है तब जिन बातों में तुम इख़्तेलाफ़ करते वह तुम्हें बता देगा
49 जो एहकाम अल्लाह नाजि़ल किए हैं तुम उसके मुताबिक़ फै़सला करो और उनकी ख़्वाहिशों की पैरवी न करो तुम उनसे बचे रहो कि किसी हुक्म से जो अल्लाह ने तुम पर नाजि़ल किया है तुमको ये लोग भटका दें फिर अगर ये लोग तुम्हारे हुक्म से मुँह मोड़ें तो समझ लो कि अल्लाह ही की मरज़ी है कि उनके बाज़ गुनाहों की वजह से उन्हें मुसीबत में फॅसा दे और इसमें तो शक ही नहीं कि बहुतेरे लोग फासिक हैं
50 क्या ये लोग जाहिलीयत के हुक्म चाह रहे हैं हालाँकि यक़ीन करने वाले लोगों के वास्ते हुक्मे अल्लाह से बेहतर कौन होगा
51 ऐ ईमान लाने वालों यहूदियों और नसरानियों को अपना दोस्त न बनाओ ये लोग बाहम एक दूसरे के दोस्त हैं और तुममें से जिसने उनको अपना दोस्त बनाया बस फिर वह भी उन्हीं लोगों में से हो गया बेशक अल्लाह ज़ालिम लोगों को राहे रास्त पर नहीं लाता
52 जिन लोगों के दिलों में बीमारी है तुम उन्हें देखोगे कि उनमें दौड़ दौड़ के मिले जाते हैं और तुमसे उसकी वजह यह बयान करते हैं कि हम तो इससे डरते हैं कि कहीं ऐसा न हो ज़माने की गर्दिश में मुब्तिला हो जाए तो अनक़रीब ही अल्लाह फ़तेह या कोई और बात अपनी तरफ़ से ज़ाहिर कर देगा तब यह लोग इस बदगुमानी पर जो अपने जी में छुपाते थे शर्माएंगे
53 और मोमिनीन कहेंगे क्या ये वही लोग हैं जो सख़्त से सख़्त क़समें खाकर कहते थे कि हम ज़रूर तुम्हारे साथ हैं उनका सारा किया धरा खुल जाएगा और सख़्त घाटे में होंगे 54 ऐ ईमान लाने वालों तुममें से जो कोई अपने दीन से फिर जाएगा तो अनक़रीब ही अल्लाह ऐसे लोगों को ज़ाहिर कर देगा जिन्हें अल्लाह दोस्त रखता होगा और वह उसको दोस्त रखते होंगे ईमान लाने वालों के साथ दबे दबे और मुन्किर काफि़रों के साथ सख़्त अल्लाह की राह में जेहाद करेंगे और किसी मलामत करने वाले की मलामत की कुछ परवाह न करेंगे ये अल्लाह का फ़ज़ल है वह जिसे चाहता हे देता है और अल्लाह तो बड़ी गुन्जाइश वाला वाकि़फ़कार है
55 तुम्हारे वली बस यही हैं अल्लाह और उसका रसूल और वह मोमिनीन जो पाबन्दी से नमाज़ अदा करते हैं और झुकते हैं
56 और जो अल्लाह और रसूल और ईमान लाने वालों को अपना वली बनाए तो इसमें तो शक नहीं कि अल्लाह ही का लशकर ग़ालिब रहता है
57 ऐ ईमान लाने वालों जिन लोगों को तुम से पहले किताबे दी जा चुकी है उनमें से जिन लोगों ने तुम्हारे दीन को हॅसी खेल बना रखा है उनको और कुफ़्फ़ार को अपना वली न बनाओ और अगर तुम सच्चे ईमानदार हो तो अल्लाह ही से डरते रहो
58 और जब तुम नमाज़ के वास्ते बुलाते हो ये लोग नमाज़ को हॅसी खेल बनाते हैं ये इस वजह से कि कुछ नहीं समझते हक़ीक़त
59 कहो ‘ऐ एहले किताब , क्या तुम हम से इसलिए इन्तेकाम ले रहे हो कि हम अल्लाह पर और जो हमारे पास भेजी गयी है और जो हमसे पहले भेजी गयी ईमान लाए हैं और ये कि तुममें के अक्सर फ़ासिक़ हैं ?
60 कह दो कि मैं तुम्हें अल्लाह के नज़दीक सज़ा में इससे कहीं बदतर ऐब बता दॅू जिसपर अल्लाह ने लानत की हो और उस पर ग़ज़ब ढाया हो और उनमें से किसी को बन्दर और सूअर बना दिया हो और तागूत की परस्तिश की हो बस ये लोग दरजे में कहीं बदतर और राहे रास्त से भटक के सबसे ज़्यादा दूर जा पहँचे हैं
61 जब ये लोग तुम्हारे पास आ जाते हैं तो कहते हैं कि हम तो ईमान लाए हैं हालाँकि वह कुफ़्र ही को साथ लेकर आए और फिर निकले भी तो साथ लिए हुए और जो वह छुपाए हुए थे अल्लाह उसे ख़ूब जानता है
62 तुम उनमें से बहुतेरों को देखोगे कि गुनाह और दुश्मनी और हराम खाने की तरफ़ दौड़ पड़ते हैं जो काम ये लोग करते थे वह यक़ीनन बहुत बुरा है
63 उनको रब्बानी और अह्बार गुनाह बोलने और हराम खाने से क्यों नहीं रोकते जो ये लोग करते हैं यक़ीनन बहुत ही बुरा है
64 यहूदी कहते हैं कि अल्लाह का हाथ बॅधा हुआ है उन्हीं के हाथ बंधे हैं और फिटकार है उसके दोनों हाथ कुशादा हैं जिस तरह चाहता है ख़र्च करता है और जो तुम्हारे पास जो भेजा गया है उस से बहुतेरों को कुफ़्र व सरकशी को और बढ़ गयी है हम ने उन में आपस में रोज़े क़यामत तक अदावत और कीने की बुनियाद डाल दी जब ये लोग लड़ाई की आग भड़काते हैं तो अल्लाह उसको बुझा देता है और रूए ज़मीन में फ़साद फैलाने के लिए दौड़ते फिरते हैं और अल्लाह फ़सादियों को दोस्त नहीं रखता
65 और अगर एहले किताब ईमान लाते और डरते तो हम ज़रूर उनके गुनाहों से दरगुज़र करते और उनको नेअमत व आराम के बाग़ों में दाखिल कर देते
66 और अगर यह लोग तौरैत और इन्जील और जो उनके पास उनके रब की तरफ़ से नाजि़ल किये गए थे पर अमल करते तो ज़रूर ऊपर से भी और पॉवों के नीचे से भी रिज्क आता और खाते उनमें से कुछ लोग तो एतदाल पर हैं उनमें से बहुतेरे जो कुछ करते हैं बुरा ही करते हैं
67 ऐ रसूल जो हुक्म तुम्हारे रब की तरफ़ से तुम पर नाजि़ल किया गया है पहँचा दो और अगर तुमने ऐसा न किया तो तुमने उसका कोई पैग़ाम ही नहीं पहँचाया और अल्लाह तुमको लोगों के शर से महफ़ूज़ रखेगा अल्लाह हरगिज़ काफि़रों की क़ौम को मंजि़ले मक़सूद तक नहीं पहँचाता
68 कह दो कि ऐ एहले किताब जब तक तुम तौरेत और इन्जील और जो तुम्हारे रब की तरफ़ से तुम पर नाजि़ल हुए हैं कायम न करोगे उस वक़्त तक तुम किसी पर नहीं हो और जो तुम्हारे पास तुम्हारे रब की तरफ़ से भेजी गयी है उनमें से बहुतेरों की सरकशी व कुफ़्र को और बढ़ गयी है तुम काफि़रों के गिरोह पर अफ़सोस न करना
69 ईमान वाले और यहूदी और सबाई और नसरानी जो अल्लाह और रोज़े क़यामत पर ईमान लाएगा और अच्छे काम करेगा उन पर अलबत्ता न तो कोई ख़ौफ़ होगा न वह लोग आज़ुर्दा ख़ातिर होंगे
70 हमने बनी इसराईल से एहद व पैमान ले लिया था और उनके पास बहुत रसूल भी भेजे थे जब उनके पास कोई रसूल उनकी मर्ज़ी के खि़लाफ़ हुक्म लेकर आया तो इन लोगों ने एक फरीक को झुठला दिया और एक फरीक को क़त्ल कर डाला
71 और समझ लिया कि कोई ख़राबी न होगी वह लोग अंधे और बहरे बन गए अल्लाह ने उनकी तौबा क़ुबूल कर ली फिर उनमें से बहुतेरे अंधे और बहरे बन गए और जो कुछ ये लोग कर रहे हैं अल्लाह देख रहा है
72 काफि़र हैं जो लोग कहते हैं कि मरियम के बेटे ईसा मसीह अल्लाह हैं लाँकि मसीह ने ख़ुद यॅू कह दिया था कि ऐ बनी इसराईल सिर्फ उसी अल्लाह की इबादत करो जो हमारा और तुम्हारा पालने वाला है क्योंकि जिसने अल्लाह का शरीक बनाया उस पर अल्लाह ने बेहिश्त को हराम कर दिया है और उसका ठिकाना जहन्नुम है और ज़ालिमों का कोई मददगार नहीं
73 काफि़र हैं जो लोग कहते हैं कि अल्लाह तीन में का है - अल्लाहए यक्ता के सिवा कोई माबूद नहीं और ये लोग जो कुछ बका करते हैं अगर उससे बाज़ न आए तो जो लोग उसमें से काफि़र हैं उन पर ज़रूर दर्दनाक अज़ाब नाजि़ल होगा
74 ये लोग अल्लाह की बारगाह में तौबा क्यों नहीं करते और माफ़ी क्यों नहीं मागते हालाँकि अल्लाह तो बड़ा बख़्शने वाला मेहरबान है
75 क्या थे मरियम के बेटे मसीह सिवाय एक रसूल के और उनके क़ब्ल बहुतेरे रसूल गुज़र चुके हैं और उनकी माँ भी सिद्दीका थीं ये दोनों खाना खाते –देखो हम अपने एहकाम इनसे कैसा साफ़ साफ़ बयान करते हैं फिर देखो तो कि ये लोग कहाँ भटके जा रहे हैं
76 क्या तुम अल्लाह को छोड़कर किसी की इबादत करते हो जिसको न तो नुक़सान ही इख़्तेयार है और न नफ़े का और अल्लाह तो सुनता जानता है
77 कह दो कि ऐ एहले किताब तुम अपने दीन के मामले में बिना हक के ज़्यादती न करो और न उन लोगों की नफ़सियानी ख़्वाहिशों पर चलो जो पहले ख़ुद ही गुमराह हो चुके और बहुतेरों को गुमराह कर छोड़ा और राहे रास्त से भटक गए
78 बनी इसराईल में से जो लोग काफि़र थे उन पर दाऊद और मरियम के बेटे ईसा की ज़बानी लानत की गयी ये इस वजह से कि उन लोगों ने नाफ़रमानी की और हद से बढ़ जाते थे
79 और किसी बुरे काम से जिसको उन लोगों ने किया एक दूसरे को मना नहीं करते थे जो काम ये लोग करते थे क्या ही बुरा था
80 तुम उन में से बहुतेरों को देखोगे कि कुफ़्फ़ार से दोस्ती रखते हैं जो सामान पहले से उन लोगों ने ख़ुद अपने वास्ते भेजा है किस क़दर बुरा है) कि अल्लाह उन पर गज़बनाक हुआ और हमेशा अज़ाब ही में रहेंगे 81 और अगर ये लोग अल्लाह और रसूल पर और जो कुछ उस पर नाजि़ल किया गया है इमान रखते हैं तो हरगिज़ दोस्त न बनाते मगर उनमें के बहुतेरे तो फासिक हैं
82 ईमान लाने वालों का दुशमन सबसे बढ़के यहूदियों और मुशरिकों को पाओगे और ईमान लाने वालों का दोस्ती में सबसे बढ़के क़रीब उन लोगों को पाओगे जो अपने को नसारा कहते हैं क्योंकि इन में से बहुत से आबिद और जाहिद हैं और इस सबब से कि ये लोग तकब्बुर नहीं करते 83 जब यह लोग सुनते हैं जो हमारे रसूल पर नाजि़ल किया गया है तुम देखते हो कि तो उनकी आँखों से आँसू जारी हो जातें है क्योंकि उन्होंने हक़ को पहचान लिया है अर्ज़ करते हैं कि ऐ मेरे पालने वाले हम तो ईमान ला चुके तो गवाहों में हमें भी लिख ले
84 और क्यों न हम अल्लाह और जो हक़ बात हमारे पास आ चुकी है उस पर तो ईमान लाएँ और अल्लाह से उम्मीद रखें कि वह अपने नेक बन्दों के साथ हमें भी दाखिल कर दे 85 तो अल्लाह ने उन्होंने जो कहा उन्हें वह बाग़ात अता फरमाए जिनके नीचे नहरें जारी हैं वह उसमें हमेशा रहेंगे और नेकी करने वालों का यही ऐवज़ है
86 और जिन लोगों ने कुफ्र एख़्तेयार किया और हमारी आयतों को झुठलाया यही लोग जहन्नुमी हैं
87 ऐ ईमान वालों जो पाक चीज़े अल्लाह ने तुम्हारे वास्ते हलाल कर दी हैं उनको अपने ऊपर हराम न करो और हद से न बढ़ो क्यों कि अल्लाह हद से बढ़ जाने वालों को हरगिज़ दोस्त नहीं रखता
88 और जो हलाल साफ सुथरी चीज़ें अल्लाह ने तुम्हें दी हैं उनको खाओ और जिस अल्लाह पर तुम ईमान लाए हो उससे डरते रहो
89 अल्लाह तुम्हारे बेकार क़समों पर गिरफ्तार न करेगा मगर बाक़सद पक्की क़सम खाने और उसके खि़लाफ करने पर तो ज़रुर तुम्हें पकड़ेगा उसका कफ्फारा जैसा तुम ख़ुद अपने एहलोअयाल को खिलाते हो उसी कि़स्म का औसत दर्जे का दस मोहताजों को खाना खिलाना या उनको कपड़े पहनाना या एक गु़लाम आज़ाद करना है फिर जिससे यह सब न हो सके तो मैं तीन दिन के रोज़े ये तुम्हारी क़समों का कफ्फारा है जब तुम क़सम खाओ I और अपनी क़समों का ख़्याल रखो अल्लाह अपने एहकाम को तुम्हारे वास्ते यूँ साफ़ साफ़ बयान करता है ताकि तुम शुक्र करो
90 ऐ ईमान लाने वालों शराब, जुआ और बुत और पाँसे तो बस नापाक शैतानी काम हैं तो तुम लोग इससे बचे रहो ताकि तुम फलाह पाओ
91 शैतान की तो बस यही तमन्ना है कि शराब और जुए की बदौलत तुममें बाहम अदावत व दुश्मनी डलवा दे और अल्लाह की याद और नमाज़ से बाज़ रखे तो क्या तुम उससे बाज़ आने वाले हो
92 और अल्लाह का हुक्म मानों और रसूल का हुक्म मानों और खबरदार रहो अगर तुमने मुँह फेरा तो समझ रखो कि हमारे रसूल पर बस साफ़ साफ़ पैग़ाम पहुँचा देना फर्ज़ है
93 जिन लोगों ने ईमान कुबूल किया और अच्छे काम किए हैं उन पर जो कुछ खा चुके उसमें कुछ गुनाह नहीं जब उन्होंने परहेज़गारी की और ईमान ले आए और अच्छे काम किए फिर परहेज़गारी की और नेकियाँ कीं और अल्लाह नेकी करने वालों को दोस्त रखता है
94 ऐ ईमान लाने वालों कुछ शिकार से जिन तक तुम्हारे हाथ और नैज़ें पहुँच सकते हैं अल्लाह ज़रुर इम्तेहान करेगा ताकि अल्लाह देख ले कि उससे बे देखे भाले कौन डरता है फिर उसके बाद भी जो ज़्यादती करेगा तो उसके लिए दर्दनाक अज़ाब है
95 ऐ ईमान लाने वालों जब तुम हालते एहराम में हो तो शिकार न मारो और तुममें से जो कोई जान बूझ कर शिकार मारेगा तो जिस को मारा है चैपायों में से उसका मसल तुममें से जो दो मुन्सिफ आदमी तजवीज़ कर दें उसका बदला होगा काबा तक पहुँचा कर कुर्बानी की जाए या कफ्फारा मोहताजों को खाना खिलाना या उसके बराबर रोज़े रखना ताकि अपने किए की सज़ा का मज़ा चखो जो हो चुका उससे तो अल्लाह ने दरग़ुज़र की और जो फिर ऐसी हरकत करेगा तो अल्लाह उसकी सज़ा देगा और अल्लाह ज़बरदस्त बदला लेने वाला है
96 तुम्हारे और सय्याहों के वास्ते दरियाई शिकार और उसका खाना जायज़ कर दिया है मगर खुश्की का शिकार जब तक तुम हालते एहराम में रहो तुम पर हराम है और उस अल्लाह से डरते रहो जिसकी तरफ इकट्ठे किये जाओगे
97 अल्लाह ने काबा जो मोहतरम घर है और हुरमत दार महीनों को और कुरबानी को और उस जानवर को जिसके गले में पट्टे डाल दिए गए हों लोगों के अमन क़ायम रखने का सबब क़रार दिया यह इसलिए कि तुम जान लो कि अल्लाह जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है जानता है और ये भी अल्लाह हर चीज़ से वाकि़फ है
98 जान लो कि यक़ीनन अल्लाह बड़ा अज़ाब वाला है और ये कि बड़ा बख़्षने वाला मेहरबान है
99 रसूल पर पैग़ाम पहुँचा देने के सिवा कुछ नहीं और जो कुछ तुम ज़ाहिर बा ज़ाहिर करते हो और जो कुछ तुम छुपा कर करते हो अल्लाह सब जानता है
100 कह दो कि नापाक और पाक बराबर नहीं हो सकता अगरचे नापाक की कसरत तुम्हें भला क्यों न मालूम हो तो समझ वालों अल्लाह से डरते रहो ताकि तुम कामयाब रहो
101 ऐ ईमान वालों ऐसी चीज़ों के बारे में न पूछा करो कि अगर तुमको मालूम हो जाए तो तुम्हें बुरी मालूम हो और अगर उनके बारे में कु़रान नाजि़ल होने के वक़्त पूछ बैठोगे तो तुम पर ज़ाहिर कर दी जाएगी अल्लाह ने उनसे दरगुज़र की और अल्लाह बड़ा बख़्शने वाला बुर्दबार है
102 तुमसे पहले भी लोगों ने इस किस्म की बातें पूछी थीं फिर उसके मुन्किर हो गए
103 अल्लाह ने न तो कोई बहीरा (कान फटी ऊँटनी) मुक़र्रर किया है न सायवा (साँढ़) न वसीला (जुडवा बच्चे) न हाम (बुढ़ा साँढ़़) मुक़र्रर किया है मगर कुफ़्फ़ार अल्लाह पर ख़्वाह मा ख़्वाह झूठ बोहतान बाँधते हैं और उनमें के अक्सर नहीं समझते
104 और जब उनसे कहा जाता है कि जो अल्लाह ने नाजि़ल फरमाया है उसकी तरफ और रसूल की आओ कहते हैं कि हमने जिस में अपने बाप दादा को पाया वही हमारे लिए काफी है क्या अगरचे उनके बाप दादा न कुछ जानते ही हों न हिदायत ही पायी हो
105 ऐ ईमान वालों तुम अपनी ख़बर लो जब तुम राहे रास्त पर हो तो कोई गुमराह हुआ करे तुम्हें नुक़सान नहीं पहुँचा सकता तुम सबके सबको अल्लाह ही की तरफ लौट कर जाना है तब जो कुछ करते थे तुम्हें बता देगा
106 ऐ ईमान वालों जब तुममें से किसी पर मौत खड़ी हो तो वसीयत के वक़्त तुम में से दो आदिलों की गवाही होनी ज़रुरी है और जब तुम इत्तेफाक़न कहीं का सफर करो और तुमको मौत की मुसीबत का सामना हो तो दो गवाह ग़ैर सही अगर तुम्हें शक हो तो उन दोनों को नमाज़ के बाद रोक लो फिर वह दोनों अल्लाह की क़सम खाएँ कि हम इस के ऐवज़ कुछ दाम नहीं लेंगे अगरचे हम जिसकी गवाही देते हैं हमारा अज़ीज़ ही क्यों न हो और हम अल्लाह लगती गवाही न छुपाएँगे अगर ऐसा करें तो हम बेशक गुनाहगार हैं
107 अगर इस पर मालूम हो जाए कि वह दोनों गुनाह के मुस्तहक़ हो गए तो दूसरे दो आदमी उन लोगों में से जिनका हक़ दबाया गया है और ज़्यादा क़राबतदार हैं उनकी जगह खड़े हो जाएँ फिर दो नए गवाह अल्लाह की क़सम खाएँ कि पहले दो गवाहों की निस्बत हमारी गवाही ज़्यादा सच्ची है और हमने नहीं छुपाया और अगर ऐसा किया हो तो उस वक़्त बेशक हम ज़ालिम हैं 108 ये ज़्यादा क़रीन क़यास है कि इस तरह ठीक ठीक गवाही दें या अन्देशा हो कि कहीं हमारी क़समें दूसरे फरीक़ की क़समों के बाद रद न कर दी जाएँ अल्लाह से डरो और सुन लो और अल्लाह बदचलन लोगों को मंजि़ले मक़सूद तक नहीं पहुँचाता
109 जिस दिन अल्लाह अपने रसूलों को जमा करके पूछेगा कि क्या जवाब दिया गया तो अर्ज़ करेगें कि हम तो कुछ नहीं जानते तू तो खुद बड़ा ग़ैब वा है
110 जब अल्लाह फरमाएगा कि ये मरियम के बेटे ईसा हमने जो एहसानात तुम पर और तुम्हारी माँ पर किये उन्हे याद करो जब हमने रूहुलक़ुदूस से तुम्हारी ताईद की कि तुम झूले में और अधेड़ होकर करने लगे और जब हमने तुम्हें लिखना और अक़ल व दानाई की बातें और तौराह व इंजील सिखायी और जब तुम मेरे हुक्म से मिट्टी से चिडि़या की मूरत बनाते फिर उस पर कुछ दम कर देते तो वह मेरे हुक्म से चिडि़या बन जाती थी और मेरे हुक्म से पैदायशी अॅधे और कोढ़ी को अच्छा कर देते थे और जब तुम मेरे हुक्म से मुर्दों को जि़न्दा खड़ा करते थे और जिस वक़्त तुम बनी इसराईल के पास मौजिज़े लेकर आए और उस वक़्त मैने उनको तुम से रोका तो उनमें से बाज़ कुफ़्फ़ार कहने लगे ये तो बस खुला हुआ जादू है
111 और जब मैने हवारियों से इलहाम किया कि मुझ पर और मेरे रसूल पर ईमान लाओ तो अर्ज़ करने लगे हम ईमान लाए और तू गवाह रहना कि हम मुस्लिम हैं
112 जब हवारियों ने ईसा से अर्ज़ की कि ऐ मरियम के बेटे ईसा क्या आप का अल्लाह उस पर क़ादिर है कि हम पर आसमान से एक ख़्वान नाजि़ल फरमाए ईसा ने कहा अगर तुम सच्चे ईमानदार हो तो अल्लाह से डरो
113 वह अर्ज़ करने लगे हम तो फक़त ये चाहते है कि इसमें से कुछ खाएँ और हमारे दिल को इत्मेनान हो जाए और यक़ीन कर लें कि आपने हमसे सच फरमाया था और हम लोग इस पर गवाह रहें
114 मरियम के बेटे ईसा ने अर्ज़ की अल्लाह वन्दा ऐ हमारे पालने वाले हम पर आसमान से एक ख्वान नाजि़ल फरमा कि वह दिन हम लोगों के लिए हमारे अगलों के लिए और हमारे पिछलों के लिए ईद का करार पाए तेरी तरफ से एक बड़ी निशानी हो और तू हमें रोज़ी दे और तू सब रोज़ी देने वालो से बेहतर है
115 अल्लाह ने फरमाया मै ख्वान तो तुम पर ज़रुर नाजि़ल करुगाँ फिर तुममें से जो भी उसके बाद काफि़र हुआ तो मै उसको यक़ीन ऐसे सख़्त अज़ाब की सज़ा दूँगा कि सारे आलम में किसी एक पर भी वैसा अज़ाब न करुगाँ
116 जब ईसा से अल्लाह फरमाएग कि ऐ मरियम के बेटे ईसा क्या तुमने लोगों से ये कह दिया था कि अल्लाह को छोड़कर मुझ को और मेरी माँ को अल्लाह बना लो ईसा अर्ज़ करेगें पाक है तू मेरी तो ये मजाल न थी कि मै ऐसी बात मुँह से निकालूँ जिसका मुझे कोई हक़ न हो अगर मैने कहा होगा तो तुझको ज़रुर मालूम ही होगा क्योंकि तू मेरे दिल की जानता है हाँ अलबत्ता मै तेरे जी की बात नहीं जानता इसमें तो शक ही नहीं कि तू ही ग़ैब की बातें ख़ूब जानता है
117 तूने मुझे जो कुछ हुक्म दिया उसके सिवा तो मैने उनसे कुछ भी नहीं कहा यही कि अल्लाह ही की इबादत करो जो मेरा और तुम्हारा सबका पालने वाला है और जब तक मैं उनमें रहा उन की देखभाल करता रहा फिर जब तूने मुझे उठा लिया तो तू ही उनका निगेहबान था और तू तो ख़ुद हर चीज़ का गवाह है
118 तू अगर उन पर अज़ाब करेगा तो ये तेरे बन्दे हैं और अगर उन्हें बख़्श देगा बेशक तू ज़बरदस्त हिकमत वाला है 119 अल्लाह फरमाएगा कि ये वह दिन है कि सच्चे बन्दों को उनकी सच्चाई काम आएगी उनके लिए वह बाग़ात है जिनके नीचे नहरे जारी हैं वह उसमें अबादुल आबाद तक रहेंगे अल्लाह उनसे राज़ी और वह अल्लाह से खुश यही बहुत बड़ी कामयाबी है
120 सारे आसमान व ज़मीन और जो कुछ उनमें है सब अल्लाह ही की सल्तनत है और वह हर चीज़ पर क़ादिर है
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