Wednesday, July 12, 2017

मेरे साथ 1400 वर्ष पूर्व मदीने का सफ़र कीजिये और सच्चे इस्लाम और मोमिनों को पहचानिए – 13



मेरे साथ 1400 वर्ष पूर्व मदीने का सफ़र कीजिये और सच्चे इस्लाम और मोमिनों को पहचानिए 13
 (103)  22 सूरए अल हज
1 ऐ लोगों अपने रब से डरते रहो क़यामत का ज़लज़ला एक बड़ी चीज़ है
2 जिस दिन तुम उसे देख लोगे तो हर दूध पिलाने वाली अपने दूध पीते को भूल जायेगी और सारी हामला औरते अपने-अपने हमल गिरा देगी और लोग तुझे मतवाले मालूम होंगे हालाँकि वह मतवाले नहीं हैं बल्कि अल्लाह  का अज़ाब बहुत सख़्त है कि लोग बदहवास हो रहे हैं
3 और कुछ लोग ऐसे भी हैं जो बग़ैर जाने अल्लाह  के बारे में  झगड़ते हैं और हर सरकश शैतान के पीछे हो लेते हैं
4 जिन के ऊपर लिखा जा चुका है कि जिसने उससे दोस्ती की हो तो ये यक़ीनन उसे गुमराह करके छोड़ेगा और दहकती आग के अज़ाब तक पहुँचा देगा
5 लोगों अगर तुमको दोबारा जी उठने में किसी तरह का शक है तो इसमें शक नहीं कि हमने तुम्हें शुरू-शुरू मिट्टी से उसके बाद नुत्फे से उसके बाद जमे हुए ख़ून से फिर उस लोथड़े से जो पूरा हो या अधूरा हो पैदा किया ताकि तुम पर  ज़ाहिर करें  हम औरतों के पेट में जिस को चाहते हैं एक मुद्दत मुअय्यन तक ठहरा रखते हैं फिर तुमको बच्चा बनाकर निकालते हैं फिर ताकि तुम अपनी जवानी को पहुँचो और तुममें से कुछ लोग तो ऐसे हैं जो मर जाते हैं और तुम में से कुछ लोग ऐसे हैं जो नाकारा जि़न्दगी बुढ़ापे तक फेर लाए जाते हैं ताकि समझने के बाद सठिया के कुछ भी न समझ सकें और तो ज़मीन को मुर्दा  देख रहा है फिर जब हम उस पर पानी बरसा देते हैं तो लहलहाने और उभरने लगती है और हर तरह की ख़ु़शनुमा चीज़ें उगती है तो ये क़ुदरत के तमाशे इसलिए दिखाते हैं ताकि तुम जानो
6 कि बेशक अल्लाह  बरहक़ है और बेशक वही मुर्दों को जिलाता है और वह यक़ीनन हर चीज़ पर क़ादिर है
7 और क़यामत यक़ीनन आने वाली है इसमें कोई शक नहीं और बेशक जो लोग क़ब्रों में हैं उनको अल्लाह  दोबारा जि़न्दा करेगा
8 और लोगों में से कुछ ऐसे भी है जो बेजाने बूझे बे हिदायत पाए बगै़र रौशन किताब के अल्लाह  की आयतों से मुँह मोड़े  अल्लाह  के बारे में लड़ने मरने पर तैयार है                                                                           9  ताकि अल्लाह की राह से बहका दे ऐसे के लिए दुनिया में रूसवाई है और क़यामत के दिन हम उसे दहकती आग के अज़ाब चखाएँगे
10 और उस वक़्त उससे कहा जाएगा कि ये उन आमाल की सज़ा है जो तेरे हाथों ने पहले से किए हैं और बेशक अल्लाह  बन्दों पर हरगिज़ जु़ल्म नहीं करता
11 और लोगों में से कुछ ऐसे भी हैं जो एक किनारे पर  अल्लाह  की इबादत करता है तो अगर उसको कोई फायदा पहुँच गया तो उसकी वजह से मुतमईन हो गया और अगर कहीं उस कोई मुसीबत छू भी गयी तो मुँह फेर के  पलट पड़ा उसने दुनिया और आखे़रत का घाटा उठाया यही तो सरीही घाटा है
12 अल्लाह  को छोड़कर उन चीज़ों को  बुलाता है जो न उसको नुक़सान ही पहुँचा सकते हैं और न कुछ नफ़ा ही पहुँचा सकते हैं
13 यही तो पल्ले दर्जे की गुमराही है और उसको अपनी हाजत रवाई के लिए पुकारता है जिस का नुक़सान उसके नफ़े से ज़्यादा क़रीब है बेशक ऐसा मालिक भी बुरा और ऐसा रफीक़ भी बुरा
14 बेशक जिन लोगों ने ईमान कु़बूल किया और अच्छे अच्छे काम किए उनको  बाग़ (जन्नत) में ले जाकर दाखि़ल करेगा जिनके नीचे नहरें जारी होगीं बेशक अल्लाह  जो चाहता है करता है
15 जो ये बदगुमानी करता है कि दुनिया और आख़ेरत में अल्लाह  उसकी हरगि़ज मदद न करेगा तो उसे चाहिए कि आसमान तक रस्सी ताने  फिर उसे काट दे  फिर देखिए कि जो चीज़ उसे गुस्से में ला रही थी उसे उसकी तदबीर दूर दफ़ा कर देती है
16 और हमने इस कु़रआन को यूँ ही वाजे़ए व रौशन निशानियाँ नाजि़ल किया और बेशक अल्लाह  जिसकी चाहता है हिदायत करता है
17 इसमें शक नहीं कि जिन लोगों ने ईमान कु़बूल किया और यहूदी और साबिइन   और नुसैरा और मजूसी और मुशरेकीन यक़ीनन अल्लाह  उन लोगों के दरमियान क़यामत के दिन फ़ैसला कर देगा इसमें शक नहीं कि अल्लाह  हर चीज़ को देख रहा है
18 क्या तुमने इसको भी नहीं देखा कि जो लोग आसमानों में हैं और जो लोग ज़मीन में हैं और आफताब और माहताब और सितारे और पहाड़ और दरख़्त और चारपाए  और आदमियों में से बहुत से लोग सब अल्लाह  ही को सजदा करते हैं और बहुत से ऐसे भी हैं जिन पर नाफ़रमानी की वजह से अज़ाब लाजि़म हो चुका है और जिसको अल्लाह  ज़लील करे फिर उसका कोई इज़्ज़त देने वाला नहीं कुछ शक नहीं कि अल्लाह  जो चाहता है करता है
19 ये दोनों दो फरीक़ हैं आपस में अपने रब के बारे में लड़ते हैं ग़रज़ जो लोग काफि़र हो बैठे उनके लिए तो आग के कपड़े क़तअ किए गए हैं  उनके सरों पर खौलता हुआ पानी उँडेला जाएगा
20 जिस से जो कुछ उनके पेट में है और खालें सब गल जाएँगी
21 और उनके  लिए लोहे के गुर्ज़ होंगे
22 कि जब गम  के मारे चाहेंगे कि से निकल भागें तो फिर उसके अन्दर ढकेल दिए जाएँगे और जलाने वाले अज़ाब के मज़े चखो
23 जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे अच्छे काम भी किए उनको अल्लाह  जन्नत (बाग़)  में दाखि़ल फरमाएगा जिनके नीचे नहरे जारी होगी उन्हें वहाँ सोने के कंगन और मोती से सँवारा जाएगा और उनका लिबास वहाँ रेशमी होगा
24 और उन्हें अच्छी बात की हिदायत की गई और उन्हें सज़ावार हम्द  का रास्ता दिखाया गया
25 बेशक जो लोग काफिर हो बैठे और अल्लाह  की राह से और मस्जिदें मोहतरम से जिसे हमने सब लोगों के लिए बनाया है इसमें शहरी और बैरूनी सबका हक़ बराबर है रोकते हैं और जो इसमें शरारत से गुमराही करे उसको हम दर्दनाक अज़ाब का मज़ा चखा देंगे
26 और  जब हमने इबराहीम के ज़रिये से इबराहीम के वास्ते ख़ानए काबा की जगह ज़ाहिर कर दी  मेरा किसी चीज़ को शरीक न बनाना और मेरे घर केा तवाफ़ और क़याम और रूकू सुजूद करने वालों के वास्ते साफ सुथरा रखना
27 और लोगों को हज की ख़बर कर दो कि लोग तुम्हारे पास  ज़्यादा और हर तरह की दुबली आ पहुँचेगें
28 ताकि अपने फायदो पर फायज़ हों और अल्लाह  ने जो जानवर चारपाए उन्हें अता फ़रमाए उनपर चन्द मोअययन दिनों में अल्लाह  का नाम लें तो तुम लोग कु़रबानी के गोश्त खु़द भी खाओ और भूखे मोहताज केा भी खिलाओ
29 फिर लोगों को चाहिए कि अपनी-अपनी  कशाफ्त दूर करें और अपनी नज़रें पूरी करें और क़दीम घर का तवाफ़ करें यही हुक्म है
30 और इसके अलावा जो अल्लाह  की हुरमत वाली चीज़ों की ताज़ीम करेगा तो ये उसके पवरदिगार के यहाँ उसके हक़ में बेहतर है और उन जानवरों के अलावा जो तुमसे बयान किए जाँएगे कुल चारपाए तुम्हारे वास्ते हलाल किए गए तो तुम नापाक बुतों से बचे रहो और लग़ो बातें से बचे रहो
31 निरे खुरे अल्लाह के होकर उसका किसी को शरीक न बनाओ और जिस ने  अल्लाह  का शरीक बनाया तो गोया कि वह आसमान से गिर पड़ा फिर उसको  कोई  चिडि़या उचक ले गई या उसे हवा के झोंके ने बहुत दूर जा फेंका
32 ये और जिस ने अल्लाह  की निशानियों की ताज़ीम की तो कुछ शक नहीं कि ये भी दिलों की परहेज़गारी से हासिल होती है
33 और इन चार पायों में एक मईन मुद्दत तक तुम्हार लिये बहुत से फायदें हैं फिर उनके जि़बाह होने की जगह क़दीम घर  है
34 और हमने तो हर उम्मत के वास्ते क़ुरबानी का तरीक़ा मुक़र्रर कर दिया है ताकि जो मवेशी चारपाए अल्लाह  ने उन्हें अता किए हैं उन पर  अल्लाह  का नाम ले ग़रज़ तुम लोगों का माबूद यकता अल्लाह  है तो उसी के फरमाबरदार बन जाओ
35 और गिड़गिड़ाने वाले बन्दों को खु़शख़बरी दे दो ये वो हैं कि जब  अल्लाह  का नाम लिया जाता है तो उनके दिल सहम जाते हैं और जब उनपर कोई मुसीबत आ पड़े तो सब्र करते हैं और नमाज़ पाबन्दी से अदा करते हैं और जो कुछ हमने उन्हें दे रखा है उसमें से ख़र्च करते हैं
36 और कु़रबानी  ऊँट भी हमने तुम्हारे वास्ते अल्लाह  की निशानियों में से क़रार दिया है इसमें तुम्हारी बहुत सी भलाईयाँ हैं फिर उनका तांते का तांता बाँध कर हज करो और उस वक़्त उन पर अल्लाह  का नाम लो फिर जब उनके दस्त व बाजू कटकर गिर पड़े तो उन्हीं से तुम खु़द भी खाओ और क़नाअत पेशा फ़क़ीरों और माँगने वाले मोहताजों को भी खिलाओ हमने यूँ इन जानवरों को तुम्हारा ताबेए कर दिया ताकि तुम शुक्रगुज़ार बनो
37 अल्लाह  तक न तो हरगिज़ उनके गोश्त ही पहुँचेगे और न खू़न मगर  उस तक तुम्हारी परहेज़गारी अलबत्ता पहुँचेगी अल्लाह ने जानवरों को यूँ तुम्हारे क़ाबू में कर दिया है ताकि जिस तरह अल्लाह  ने तुम्हें बनाया है उसी तरह उसकी बड़ाई करो और  नेकी करने वालों को  ख़ु़शख़बरी दे दो                                          38 इसमें शक नहीं कि अल्लाह  ईमानवालों से दूर दफा करता रहता है अल्लाह  किसी बद दयानत नाशुक्रे को हरगिज़ दोस्त नहीं रखता
39 जिन  से लड़ते थे चूँकि वह सताए गए उस वजह से उन्हें भी  की इजाज़त दे दी गई और अल्लाह  तो उन लोगों की मदद पर यक़ीनन क़ादिर  है
40 ये वह  सिर्फ इतनी बात कहने पर कि हमारा रब अल्लाह  है  अपने-अपने घरों से निकाल दिए गये और अगर अल्लाह  लोगों को एक दूसरे से दूर दफ़ा न करता रहता तो गिरजे और यहूदियों के इबादत ख़ाने और मजूस के इबादतख़ाने और मस्जिद जिनमें कसरत से अल्लाह  का नाम लिया जाता है कब के कब ढहा दिए गए होते और जो अल्लाह  की मदद करेगा अल्लाह  भी अलबत्ता उसकी मदद ज़रूर करेगा बेशक अल्लाह  ज़रूर ज़बरदस्त ग़ालिब है
41 ये वह लोग हैं कि अगर हम इन्हें रूए ज़मीन पर क़ाबू दे दे तो भी यह लोग पाबन्दी से नमाजे अदा करेंगे और ज़कात देंगे और अच्छे-अच्छे काम का हुक्म करेंगे और बुरी बातों से  रोकेंगे और सब कामों का अन्जाम अल्लाह  ही के एख़्तेयार में है
42 और अगर ये तुमको झुठलाते हैं तो कोइ ताज्जुब की बात नहीं उनसे पहले नूह की क़ौम और क़ौमे आद और समूद
43 और इबराहीम की क़ौम और लूत की क़ौम
44 और मद्यान  के रहने वाले  झुठला चुके हैं और मूसा  झुठलाए जा चुके हैं तो मैंने काफिरों को चन्द ढील दे दी फिर  उन्हें ले डाला तो तुमने देखा मेरा अज़ाब कैसा था
45 ग़रज़ कितनी बस्तियाँ हैं कि हम ने उन्हें बरबाद कर दिया और वह सरकश थीं पस वह अपनी छतों पर ढही पड़ी हैं और कितने बेकार (उजडे़ कुएँ और कितने) मज़बूत बड़े-बड़े ऊँचे महल
46 क्या ये लोग रूए ज़मीन पर चले फिरे नहीं ताकि उनके लिए ऐसे दिल होते हैं जैसे हक़ बातों को समझते या उनके ऐसे कान होते जिनके ज़रिए से  सुनते क्योंकि आँखें अंधी नहीं हुआ करती बल्कि दिल जो सीने में है वही अन्धे हो जाया करते हैं
47 और तुम से ये लोग अज़ाब के जल्द आने की तमन्ना रखते हैं और अल्लाह  तो हरगिज़ अपने वायदे के खि़लाफ नहीं करेगा और बेशक  एक दिन तुम्हारे रब के नज़दीक तुम्हारी गिनती के हिसाब से एक हज़ार बरस के बराबर है
48 और कितनी बस्तियाँ हैं कि मैंने उन्हें  मोहलत दी हालाँकि वह सरकश थी फिर  मैंने उन्हें ले डाला और मेरी तरफ लौटना है
49  तुम कह दो कि लोगों में तो सिर्फ तुमको खुल्लम-खुल्ला  डराने वाला हूँ
50 पस जिन लोगों ने ईमान कु़बूल किया और अच्छे-अच्छे काम किए  उनके लिए बक़शिश है और पाक  रोज़ी
51 और जिन लोगों ने हमारी आयतों आजिज़ करने के वास्ते कोशिश की यही लोग तो जहन्नुमी हैं
52 और हमने तो तुमसे पहले जब कभी कोई रसूल और नबी भेजा तो ये ज़रूर हुआ कि जिस वक़्त उसने  आरज़ू की तो शैतान ने उसकी आरज़ू में खलल  डाल दिया फिर जो वस वसा शैतान डालता है अल्लाह  उसे मिटा देता है फिर अपने एहकाम को मज़बूत करता है और अल्लाह  तो बड़ा वाकि़फकार दाना है
53 और शैतान जो डालता है तो इसलिए ताकि अल्लाह  उसे उन लोगों के आज़माईश  क़रार दे जिनके दिलों में  मर्ज़ है और जिनके दिल सख़्त हैं और बेशक  ज़ालिम मुशरेकीन पल्ले दरजे की मुख़ालेफ़त में पड़े हैं
54 और  ताकि जिन लोगों को  इल्म अता हुआ है वह जान लें कि ये  बेशक तुम्हारे रब की तरफ से ठीक ठीक  हुई है फिर  इस पर वह लोग ईमान लाए फिर उनके दिल अल्लाह  के सामने आजिज़ी करें और इसमें तो शक ही नहीं कि जिन लोगों ने ईमान कु़बूल किया उनको अल्लाह  सीधी राह तक पहुँचा देता है
55 और जो लोग काफ़िर हो बैठे वह तो कु़राआन की तरफ से हमेशा शक ही में पड़े रहेंगे यहाँ तक कि क़यामत यकायक उनके सर पर आ मौजूद हो या  उनपर एक सख़्त मनहूस दिन का अज़ाब नाजि़ल हुआ
56 उस दिन की हुकूमत तो ख़ास अल्लाह  ही की होगी वह लोगों  का फ़ैसला कर देगा तो जिन लोगों ने ईमान कु़बूल किया और अच्छे काम किए हैं वह नेअमतों के हुए जन्नत (बाग़ात) में रहेंगे
57 और जिन लोगों ने कुफ्र इख्तियार  किया और हमारी आयतों को झुठलाया तो यही वह  लोग हैं जिनके लिए ज़लील करने वाला अज़ाब है                                 58  जिन लोगों ने अल्लाह  की राह में अपने देस छोडे़ फिर शहीद किए गए या  मर गए अल्लाह  उन्हें  ज़रूर उम्दा रोज़ी अता फ़रमाएगा और बेशक तमाम रोज़ी देने वालों में अल्लाह  ही सबसे बेहतर है
59 वह उन्हें ज़रूर ऐसी जगह पहुँचा देगा जिससे वह निहाल हो जाएँगे और अल्लाह  तो बेशक बड़ा वाकि़फकार बुर्दवार है                                             60 यही  है और जो उतना ही सताए जितना ये उसके हाथों से सताया गया था उसके बाद फिर  उस पर ज़्यादती की जाए तो अल्लाह  उस मज़लूम की ज़रूर मदद करेगा बेशक अल्लाह  बड़ा माफ करने वाला बख़शने वाला है                            61 अल्लाह   तो रात को दिन में दाखि़ल करता है और दिन को रात में दाखि़ल करता है और इसमें भी शक नहीं कि अल्लाह  सब कुछ जानता है
62  इस वजह से  कि यक़ीनन अल्लाह  ही बरहक़ है और उसके सिवा जिनको लोग  पुकारा करते हैं  बातिल हैं और  यक़ीनी अल्लाह  ही  बुलन्द मर्तबा बुज़ुर्ग है
63 और  क्या तुम ने इतना भी नहीं देखा कि अल्लाह  ही आसमान से पानी बरसाता है तो ज़मीन सर सब्ज़ हो जाती है बेशक अल्लाह  बड़ा मेहरबान वाकि़फ़कार है  
64 जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है उसी का है और इसमें तो शक ही नहीं कि अल्लाह  बेपरवाह सज़ावार हम्द है
65 क्या तुम ने उस पर भी नज़र न डाली कि जो कुछ रूए ज़मीन में है सबको अल्लाह  ही ने तुम्हारे क़ाबू में कर दिया है और कश्ती को जो उसके हुक्म से दरिया में चलती है और वही तो आसमान को रोके हुए है कि ज़मीन पर न गिर पड़े मगर उसका हुक्म होगा इसमें शक नहीं कि अल्लाह  लोगों पर बड़ा मेहरबान व रहमवाला है
66 और वही तो क़ादिर मुत्तलिक़ है जिसने तुमको जिला उठाया फिर वही तुमको मार डालेगा फिर वही तुमको दोबारा जि़न्दगी देगा
67 इसमें शक नहीं कि इन्सान बड़ा ही नाशुक्रा है  हमने हर उम्मत के वास्ते एक तरीक़ा मुक़र्रर कर दिया कि वह इस पर चलते हैं फिर तो उन्हें इस दीन में तुम से झगड़ा न करना चाहिए और तुम अपने रब की तरफ़ बुलाए जाओ बेशक तुम सीधे रास्ते पर हो                                                                   68 और अगर लोग तुमसे झगड़ा करें तो तुम कह दो कि जो कुछ तुम कर रहे हो अल्लाह  उससे खू़ब वाकि़फ़ है
69 जिन बातों में तुम बाहम झगड़ा करते थे क़यामत के दिन अल्लाह तुम लोगों के दरम्यिान फ़ैसला कर देगा
70 क्या तुम नहीं जानते कि जो कुछ आसमान और ज़मीन में है अल्लाह  यक़ीनन जानता है उसमें तो शक नहीं कि ये सब किताब में हैं
71 बेशक ये अल्लाह  पर आसान है और ये लोग अल्लाह  को छोड़कर उन लोगों की इबादत करते हैं जिनके लिए न तो अल्लाह ही ने कोई सनद नाजि़ल की है और न उस का खु़द उन्हें इल्म है और क़यामत में तो ज़ालिमों का कोई मददगार भी नहीं होगा
72 और जब हमारी वाज़ेए व रौशन आयतें उनके सामने पढ़ कर सुनाई जाती हैं तो तुम काफ़िरों के चेहरों पर नाखु़शी के देखते हो क़रीब होता है कि जो लोग उनको हमारी आयातें पढ़कर सुनाते हैं उन पर ये लोग हमला कर बैठे तुम कह दो  तो क्या मैं तुम्हें इससे भी कहीं बदतर चीज़ बता दूँ तो सुन लो वह आग है जिसमें झोंकने का वायदा अल्लाह  ने काफि़रों से किया हैऔर वह क्या बुरा ठिकाना है                                                                      73 लोगों एक मस्ल बयान की जाती है तो उसे कान लगा के सुनो कि अल्लाह  को छोड़कर जिन लोगों को तुम पुकारते हो वह लोग अगरचे सब के सब इस काम के लिए इकट्ठे भी हो जाएँ तो भी एक मक्खी तक पैदा नहीं कर सकते और कहीं मक्खी कुछ उनसे छीन ले जाए तो उससे उसको छुड़ा नहीं सकते कि माँगने वाला और जिससे माँग लिया दोनों कमज़ोर हैं
74 अल्लाह  की जैसे क़द्र करनी चाहिए उन लोगों ने न की इसमें शक नहीं कि अल्लाह  तो बड़ा ज़बरदस्त ग़ालिब है
75 अल्लाह  फरिश्तों में से बाज़ को अपने एहकाम पहुँचाने के लिए मुन्तखि़ब कर लेता है और आदमियों में से भी बेशक अल्लाह सुनता देखता है                               76 जो कुछ उनके सामने है और जो कुछ उनके पीछे  जानता है और तमाम उमूर की रूजूअ अल्लाह  ही की तरफ होती है                                                 77 ऐ ईमानवालों रूकू करो और सजदे करो और अपने रब की इबादत करो और नेकी करो ताकि तुम कामयाब हो                                                     78 और जो हक़ जिहाद करने का है अल्लाह  की राह में जिहाद करो उसी नें तुमको बरगुज़ीदा किया और उमूरे दीन में तुम पर किसी तरह की सख़्ती नहीं की तुम्हारे बाप इबराहीम के तुम्हारा पहले ही से मुसलमान नाम रखा और कु़राआन में भी ताकि रसूल तुम्हारे मुक़ाबले में गवाह बने और तुम पाबन्दी से नामज़ पढ़ा करो और ज़कात देते रहो और अल्लाह  ही को मज़बूत पकड़ो वही तुम्हारा सरपरस्त है तेा क्या अच्छा सरपरस्त है और क्या अच्छा मददगार है                             (104)  63 सूरए अल मुनाफिक़ून
1  जब तुम्हारे पास मुनाफे़क़ीन आते हैं तो कहते हैं कि हम तो इक़रार करते हैं कि आप यक़नीन अल्लाह के रसूल हैं और अल्लाह भी जानता है तुम यक़ीनी उसके रसूल हो मगर अल्लाह ज़ाहिर किए देता है कि ये लोग अपने  ज़रूर झूठे हैं
2 इन लोगों ने अपनी क़समों को सिपर बना रखा है तो लोगों को अल्लाह की राह से रोकते हैं बेशक ये लोग जो काम करते हैं बुरे हैं
3 इस सबब से कि ईमान लाए फिर काफि़र हो गए, तो उनके दिलों पर  मोहर लगा दी गयी है तो अब ये समझते ही नहीं
4 और जब तुम उनको देखोगे तो उनका क़द व क़ामत तुम्हें बहुत अच्छा मालूम होगा और गुफ़्तगू करेंगे तो ऐसी कि तुम तवज्जो से सुनो गोया दीवारों से लगायी हुयीं बेकार लकडि़याँ हैं हर चीख़ की आवाज़ को समझते हैं कि उन्हीं पर आ पड़ी ये लोग तुम्हारे दुश्मन हैं तुम उनसे बचे रहो अल्लाह इन्हें मार डाले ये कहाँ बहके फिरते हैं
5 और जब उनसे कहा जाता है कि आओ रसूलअल्लाह तुम्हारे वास्ते मग़फेरत की दुआ करें तो वह लोग अपने सर फेर लेते हैं और तुम उनको देखोगे कि तकब्बुर करते हुए मुँह फेर लेते हैं
6 तो तुम उनकी मग़फेरत की दुआ माँगो या न माँगो उनके हक़ में बराबर है  अल्लाह तो उन्हें हरगिज़ बख्शेगा  नहीं अल्लाह तो हरगिज़ बदकारों को मंजि़ले मक़सूद तक नहीं पहुँचाया करता
7 ये वही लोग तो हैं जो कहते हैं कि जो रसूले अल्लाह के पास रहते हैं उन पर ख़र्च न करो यहाँ तक कि ये लोग ख़ुद तितर बितर हो जाएँ हालाँकि सारे आसमान और ज़मीन के ख़ज़ाने अल्लाह ही के पास हैं मगर मुनाफेक़ीन नहीं समझते
8 ये लोग तो कहते हैं कि अगर हम लौट कर मदीने पहुँचे तो इज़्ज़दार लोग  ज़लील को ज़रूर निकाल बाहर कर देंगे हालाँकि इज़्ज़त तो ख़ास अल्लाह और उसके रसूल और मोमिनीन के लिए है मगर मुनाफे़कीन नहीं जानते
9 ऐ ईमान लाने वालों  तुम्हारे माल और तुम्हारी औलाद तुमको अल्लाह की याद से ग़ाफिल न करे और जो ऐसा करेगा तो वही लोग घाटे में रहेंगे
10 और हमने जो कुछ तुम्हें दिया है उसमें से क़ब्ल इसके ख़र्च कर डालो कि तुममें से किसी की मौत आ जाए तो कहने लगे कि रब तूने मुझे थोड़ी सी मोहलत और क्यों न दी ताकि ख़ैरात करता और नेकीकारों से हो जाता
11 और जब किसी की मौत आ जाती है तो अल्लाह उसको हरगिज़ मोहलत नहीं देता और जो कुछ तुम करते हो अल्लाह उससे ख़बरदार है                                (105)  58 सूरए अल मुजादलह                                                            1 ऐ रसूल जो औरत तुमसे अपने शौहर के बारे में तुमसे झगड़ती और अल्लाह से गिले शिकवे करती है अल्लाह ने उसकी बात सुन ली और अल्लाह तुम दोनों की ग़ुफ्तगू सुन रहा है बेशक अल्लाह बड़ा सुनने वाला देखने वाला है
2 तुम में से जो लोग अपनी बीवियों के साथ ज़हार करते हैं अपनी बीवी को माँ कहते हैं वह कुछ उनकी माएँ नहीं उनकी माएँ तो बस वही हैं जो उनको जनती हैं और वह बेशक एक नामाक़ूल और झूठी बात कहते हैं और अल्लाह बेशक माफ़ करने वाला और बड़ा बख्शने  वाला है
3 और जो लोग अपनी बीवियों से ज़हार कर बैठे फिर अपनी बात वापस लें तो दोनों के हमबिस्तर होने से पहले एक ग़ुलाम का आज़ाद करना है उसकी तुमको नसीहत की जाती है और तुम जो कुछ भी करते हो अल्लाह उससे आगाह है
4 फिर जिसको ग़ुलाम न मिले तो दोनों की मुक़ारबत के क़ब्ल दो महीने के पै दर पै रोज़े रखें और जिसको इसकी भी क़ुदरत न हो साठ मोहताजों को खाना खिलाना फ़र्ज़ है ये ताकि तुम अल्लाह और उसके रसूल की तसदीक़ करो और ये अल्लाह की मुक़र्रर हदें हैं और काफि़रों के लिए दर्दनाक अज़ाब है
5 बेशक जो लोग अल्लाह की और उसके रसूल की मुख़ालेफ़त करते हैं वह  ज़लील किए जाएँगे जिस तरह उनके पहले लोग किए जा चुके हैं और हम तो अपनी साफ़ और सरीही आयतें नाजि़ल कर चुके और काफ़िरों के लिए ज़लील करने वाला अज़ाब है
6 जिस दिन अल्लाह उन सबको दोबारा उठाएगा तो उनके आमाल से उनको आगाह कर देगा ये लोग उनको भूल गये हैं मगर अल्लाह ने उनको याद रखा है और अल्लाह तो हर चीज़ का गवाह है
7 क्या तुमको मालूम नहीं कि जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है  अल्लाह जानता है जब तीन का ख़ुफिया मशवेरा होता है तो वह उनका ज़रूर चैथा है और जब पाँच का मशवेरा होता है तो वह उनका छठा है और उससे कम हो या ज़्यादा और चाहे जहाँ कहीं हो वह उनके साथ ज़रूर होता है फिर जो कुछ वह  करते रहे क़यामत के दिन उनको उससे आगाह कर देगा बेशक अल्लाह हर चीज़ से ख़ूब वाकि़फ़ है
8 क्या तुमने उन लोगों को नहीं देखा जिनको सरगोशियाँ करने से मना किया गया ग़रज़ जिस काम की उनको मुमानिअत की गयी थी उसी को फिर करते हैं और  गुनाह और ज़्यादती और रसूल की नाफरमानी की सरगोशियाँ करते हैं और जब तुम्हारे पास आते हैं तो जिन लफ़्ज़ों से अल्लाह ने भी तुम को सलाम नहीं किया उन लफ़्ज़ों से सलाम करते हैं और अपने जी में कहते हैं कि जो कुछ हम कहते हैं अल्लाह हमें उसकी सज़ा क्यों नहीं देता उनको जहन्नम ही काफ़ी है जिसमें ये दाखि़ल होंगे तो वह बुरी जगह है
9 ऐ ईमान लाने वालों  जब तुम आपस में सरगोशी करो तो गुनाह और ज़्यादती और रसूल की नाफ़रमानी की सरगोशी न करो बल्कि नेकीकारी और परहेज़गारी की सरगोशी करो और अल्लाह से डरते रहो जिसके सामने जमा किए जाओगे
10 सरगोशी तो बस एक शैतानी काम है ताकि ईमान लाने वालों  को उससे रंज पहुँचे हालाँकि अल्लाह की तरफ़ से आज़ादी दिए बग़ैर सरगोशी उनका कुछ बिगाड़ नहीं सकती और मोमिनीन को तो अल्लाह ही पर भरोसा रखना चाहिए
11 ऐ ईमान लाने वालों  जब तुमसे कहा जाए कि मजलिस में जगह क़ुशादा करो वह तो क़ुशादा कर दिया करो अल्लाह तुमको क़ुशादगी अता करेगा और जब तुमसे कहा जाए कि उठ खड़े हो तो उठ खड़े हुआ करो जो लोग तुमसे ईमानदार हैं और जिनको इल्म अता हुआ है अल्लाह उनके दर्जे बुलन्द करेगा और अल्लाह तुम्हारे सब कामों से बेख़बर है
12 ऐ ईमान लाने वालों  जब रसूल  से कोई बात कान में कहनी चाहो तो कुछ ख़ैरात अपनी सरगोशी से पहले दे दिया करो यही तुम्हारे वास्ते बेहतर और पाकीज़ा बात है पस अगर तुमको इसका मुक़दूर न हो तो बेशक अल्लाह बड़ा बख़्षने वाला मेहरबान है
13 क्या तुम इस बात से डर गए कि  कान में बात कहने से पहले ख़ैरात कर लो तो जब तुम लोग न कर सके और अल्लाह ने तुम्हें माफ़ कर दिया तो पाबन्दी से नमाज़ पढ़ो और ज़कात देते रहो और अल्लाह उसके रसूल की इताअत करो और जो कुछ तुम करते हो अल्लाह उससे बाख़बर है
14 क्या तुमने उन लोगों की हालत पर ग़ौर नहीं किया जो उन लोगों से दोस्ती करते हैं जिन पर अल्लाह ने ग़ज़ब ढाया है तो अब वह न तुम मे हैं और न उनमें ये लोग जानबूझ कर झूठी बातो पर क़समें खाते हैं और वह जानते हैं
15 अल्लाह ने उनके लिए सख़्त अज़ाब तैयार कर रखा है इसमें शक नहीं कि ये लोग जो कुछ करते हैं बहुत ही बुरा है
16 उन लोगों ने अपनी क़समों को सिपर बना लिया है और अल्लाह की राह से रोक दिया तो उनके लिए रूसवा करने वाला अज़ाब है
17 अल्लाह के सामने हरगिज़ न उनके माल ही कुछ काम आएँगे और न उनकी औलाद ही काम आएगी यही लोग आग के साथी  हैं कि हमेशा उसमें रहेंगे
18 जिस दिन अल्लाह उन सबको दोबार उठा खड़ा करेगा तो ये लोग जिस तरह तुम्हारे सामने क़समें खाते हैं उसी तरह उसके सामने भी क़समें खाएँगे और ख़्याल करते हैं कि वह राहे सवाब पर हैं आगाह रहो ये लोग यक़ीनन झूठे हैं
19 शैतान ने इन पर क़ाबू पा लिया है और अल्लाह की याद उनसे भुला दी है ये लोग शैतान के गिरोह है सुन रखो कि शैतान का गिरोह घाटा उठाने वाला है
20 जो लोग अल्लाह और उसके रसूल से मुख़ालेफ़त करते हैं वह सब ज़लील लोगों में हैं
21 अल्लाह ने लिख  दिया है कि मैं और मेरे पैग़म्बर ज़रूर ग़ालिब रहेंगे बेशक अल्लाह बड़ा ज़बरदस्त ग़ालिब है
22 जो लोग अल्लाह और रोज़े आख़ेरत पर ईमान रखते हैं तुम उनको अल्लाह और उसके रसूल के दुश्मनों से दोस्ती करते हुए न देखोगे अगरचे वह उनके बाप या बेटे या भाई या ख़ानदान ही के लोग यही वह लोग हैं जिनके दिलों में अल्लाह ने इमान को साबित कर दिया है और ख़ास अपने नूर से उनकी ताईद की है और उनको जन्नत (बाग़) में दाखिल करेगा जिनके नीचे नहरे जारी है हमेशा उसमें रहेंगे अल्लाह उनसे राज़ी और वह अल्लाह से ख़ुश यही अल्लाह का गिरोह है सुन रखो कि अल्लाह के गिरोग के लोग दिली मुरादें पाएँगे   

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