मेरे साथ 1400 वर्ष पूर्व मदीने का सफ़र कीजिये
और सच्चे इस्लाम और मोमिनों को पहचानिए – 7
सूरह आले इमरान .......
101 और तुम कैसे कुफ्र कर
सकते हो जब कि तुम को अल्लाह की आयतें पढ़ कर सुनाई जाती हैं और तुम्हारे बीच उसका
रसूल है जिसने अल्लाह को मजबूती से पकड़ लिया उसने सिराते मुस्तकीम की हिदायत पा ली 102 ऐ ईमान
वालों अल्लाह से डरो जैसा उससे डरने का हक है और न मरना सिवाय जब तुम मुस्लिम हो 103 और अल्लाह की रस्सी को मिल जुल कर मजबूती से
पकड़े रहो और फिरकों में न बंट जाओ अल्लाह की नेमत याद करो कि जब तुम दुश्मन थे
उसने तुम्हारे दिलों को मिला दिया कि तुम उसकी नेमत से भाई हो गए तुम आग के गढ़े की
कगार पर थे और उसने तुम्हें बचा लिया इस तरह अल्लाह अपनी आयतें बयान करता है ताकि
तुम हिदायत पाओ 104
और तुम्हारे अन्दर एक उम्मत हो जो लोगों को खैर की तरफ बुलाये और मुनकर से
मना करे और ऐसे फलाह पाने वाले हैं 105 और उनकी
तरह न हो जाना जो खुली निशानियों आ जाने के बाद फिरकों में बंट गए और इख्तिलाफ
करने लगे ऐसे लोगों को अजाबुन अज़ीम होगा 106 उस दिन कुछ के चेहरे सफ़ेद
होंगे और कुछ के चेहरे काले होंगे जिनके
चेहरे काले होंगे ‘क्या तुम ईमान लाने के बाद काफिर हो गए थे तो जो कुफ्र करते थे
अज़ाब चखो 107
और जिन के चेहरे सफ़ेद होंगे उन पर अल्लाह की रहमत होगी और वे उसमें हमेशा रहेंगे
108 यह अल्लाह की आयतें हैं जो हम हक के साथ तिलावत करते हैं अल्लाह आलमीन
पर ज़ुल्म का इरादा नहीं करता
109 जो कुछ
आसमानों और ज़मीनों में है वह अल्लाह का है और अल्लाह ही की तरफ सारे उमूर पलटने
हैं”
अहले किताब भी इमान ले आते “110
तुम इंसानों के लिए खड़ी की गयी एक अच्छी उम्मत हो जो खैर का हुक्म देते हो
और मुनकर को मन करते हो अल्लाह पर ईमान लाते हो अगर अहले किताब भी ईमान ले आते तो
उनके लिए अच्छा था उनमें से कुछ मोमिन हैं अक्सर फासिक हैं 111 वे
तुम्हारा कोई भी नुकसान नहीं कर सकते सिवाय तकलीफ पहुंचाने के और अगर वे तुम से
लड़ें तो तुम्हारी तरफ पीठ फेरेंगे 112
जहाँ कहीं वे होंगे उन पर ज़िल्लत की मार पड़ेगी सिवाय अल्लाह से रस्सी और लोगों से
रस्सी के उन्होंने अल्लाह का गज़ब हासिल
किया उन पर दरिद्रता की मार पड़ी यह इसलिए कि अल्लाह की आयतों का कुफ्र करते थे और
नबियों को बे हक क़त्ल करते थे सरकशी करते
थे और हद से बढ़े हुए थे 113 सब एक जैसे नहीं
हैं अहले किताब में एक उम्मत सही खड़े लोगों की भी है जो अल्लाह की आयतों की तिलावत
करते हैं और रातों में सजदा करते हैं 114 वे अल्लाह पर और यौमे
आखिर पर ईमान लाये हैं नेक अमल का हुक्म देते हैं मुनकर से मन करते हैं और खैरात
के लिए लपकते हैं र वे सालिहीन में से हैं 115 जो कुछ वे खैर करते हैं वह नकारा
नहीं जाएगा और अल्लाह मुत्ताकियों को जानता है 116
बेशक जो कुफ्र करते हैं उन्हें अल्लाह से न उनकी दौलत न उनकी औलाद किसी काम आएगी
वे आग के साथी हैं और उसमें हमेशा रहेंगे 117 जो वे खर्च
करते हैं उसकी मिसाल हवा की तरह है इस दुनियावी ज़िन्दगी में जैसे कि जिन लोगों ने
अपने नफस पर ज़ुल्म किया है उनकी खेती पर ठंडी पाला मार हवा चले और हलाक कर दे
अल्लाह ने उन पर ज़ुल्म नहीं किया खुद उन्होंने अपने ऊपर ज़ुल्म किया
118 ऐ ईमान वालों जो तुम में नहीं हैं उनको अपना हमराज़ न बनाओ वे तुम्हारा
बुरा करने से नहीं चूकेंगे वे चाहते हैं तुम्हें गम हो उनके मुंह से तो बुगज़ ज़ाहिर
हो चूका है पर जो सीनों में छुपा है वह और भी गहरा है हमने आयतें बयान कर दीं ताकि
तुम समझो
119 हाँ तुम उनसे मुहब्बत करते हो पर वे तुम से मुहब्बत नहीं करते तुम
किताब पर मुकम्मल ईमान रखते हो जब तुम से मिलते हैं तो कहते हैं हम ईमान लाये पर
तन्हाई में तुम पर गैज़ में उँगलियों के पोर काटे डालते हैं बेशक जो कुछ उनके सीनों
में है अल्लाह जानने वाला है 120
अगर तुम्हें कोई भलाई पहुँचती है तो उन्हें रंज होता है और जब कोई तकलीफ पहुँचती
है तो वे खुश होते हैं अगर तुम सब्र करो और तक्वा करो उनका कोई दांव तुम्हें
नुकसान नहीं पहुंचा सकता बेशक तुम जो कुछ करते हो अल्लाह सब पर अहाता किये हुए है 121
और याद करो जब तुम अपने घर वालों से अलग
होकर सुबह सवेरे निकले और ईमान वालों को जंग के लिए तैनात कर रहे थे और अल्लाह
वासिउन अलीम – सब तरफ जानने वाला है 122
जब तुम में से दो ग्रुप ने बुजदिली का ख़याल किया पर अल्लाह उनका वली है और ईमान
वालों को उस पर त्वक्कल करना चाहिए 123 और
अल्लाह न्र तुम्हें बदर में फ़तेह दी जब तुम
कमज़ोर ज़लील थे अल्लाह से डरो और शुक्र करो 124 जब तुमने ईमान वालों से कहा क्या तुम्हारे
लिए यह काफी नहीं है कि तुम्हारे रब ने तुम्हारी मदद के लिए तीन हज़ार फ़रिश्ते
नाजिल किये हैं ? 125 बल्कि अगर
तुम सब्र करो और तक्वा करो और वे तुम पर फ़ौरन आ जाएँ तो तुम्हारा रब पांच हज़ार
निशानी लगे फरिश्तों से मदद करेगा 126 अल्लाह ने इसको
नहीं बनाया सिवाय एक खुशखबरी के जिससे तुम्हारे दिलों को इत्मीनान पहुंचे और कोई
मदद नहीं है बिना अल्लाह अजीज़ुन हकीम –
ताक़त वाला हिकम वाला के 127
जिससे काफिरों को एक तरफ से काट डाले और ढकेल दे ज़िल्लत के साथ कि वे पीछे पलट
जाएँ 128
यह तुम्हारे अम्र की चीज़ नहीं है वह उन्हें माफ़ करे या अज़ाब दे बेशक वे ज़ालिम हैं 129
जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीनों में है अल्लाह का है जिसे चाहे माफ़ करे
जिसे चाहे अज़ाब दे और अल्लाह गफूर – माफ़ करने वाला और रहीम – रहम करने वाला है 130
ईमान वालों दुगुना चौगुना सूद न खाओ अल्लाह से डरो ताकि फलाह पाओ 131 उस आग से डरो
जो काफिरों के लिए तैयार की गयी है 132
अल्लाह और रसूल की इताअत करो ताकि तुम पर रहम किया जाए मुत्तकी परहेजगार कौन
हैं ?
133 अपने रब की मगफिरत की तरफ लपको और बाग़ (जन्नत) जिसका अर्ज़ ज़मीन आसमानों के अर्ज़ के बराबर है
मुत्ताकियों के लिए तैयार की गयी है 134 जो खुशहाली और बदहाली
दोनों में खर्च करते हैं अपने गुस्से को रोकते हैं और लोगों को माफ़ करते हैं
अल्लाह मोह्सिनीन को दोस्त रखता है 135 और जो अगर फहश
काम करते हैं अपने नफ्सों पर ज़ुल्म करते हैं तो अल्लाह को याद करते हैं और अपने
गुनाहों का इस्तिग्फार करते हैं और सिवाय अल्लाह के कौन गुनाहों को माफ़ कर सकता है
और जो किया उस पर अड़े नहीं रहते और जानते हैं 136
ऐसे लोगों की जज़ा उनके रब की तरफ से मगफिरत है और बाग़ (जन्नत) जिसके नीचे से नहरें जारी हैं और हमेशा रहेंगे
अमल करने वालों के लिए बहतरीन अज्र 137
तुम से पहले गुज़र चुकी हैं सुन्नतें ज़मीन पर सैर करो और देखो कुफ्र करने वालों का
अंजाम 138
यह लोगों के लिए बयान हैं और मुताक्कियों के लिए हिदायत और वअज़ 139 न छोटा महसूस
करो न दुःख तुम ही ऊंचे होगे अगर मोमिन हो
140 अगर तुम्हे ज़ख्म लगा है तो औरों को भी ज़ख्म लगे हैं ये
तो दिन हैं जो लोगों के बीच अलटा पलटा
करते हैं ताकि अल्लाह मोमिनों को जान ले
और तुम में से शहीद खड़ा करे अल्लाह काफिरों को दोस्त नहीं रखता 141 और अल्लाह
मोमिनों को और निखारे और काफिरों को अलग करे 142 क्या तुम सोचते हो
कि बाग़ (जन्नत) में ऐसे ही दाखिल हो जाओगे
जबकि अल्लाह ने जाना ही नहीं कौन जिहाद करता है और साबिरीन में से है 143 तुम तो मौत से
मुलाक़ात से पहले इसकी तमन्ना कर रहे थे अब तुमने देखा भी और नज़ारा भी किया 144 मुहम्मद रसूल
के सिवा कुछ नहीं और इनके पहले बहुत से रसूल गुज़र चुके हैं तो अगर यह मर जाएँ या
क़त्ल किये जाएँ तो तुम क्या उलटे पैरों पलट जाओगे ? और जो उलटे पैरों पलटेगा तो
अल्लाह का कुछ न बिगड़ेगा अल्लाह शुक्र
करने वालों को जज़ा देगा 145
और किसी नफस को मौत नहीं है अल्लाह की इजाज़त के बिना वक्ते अजल लिखा हुआ और जो दुनिया में सवाब चाहे तो उसे देंगे और
जो आखिरत में सवाब चाहे तो देंगे और हम शुक्र करने वालों को जज़ा देंगे 146 और कितने ही
रसूल कसीर तादाद रब्बियों के साथ लड़े
अल्लाह की राह में जो तकलीफें मिलीं तो उससे घबराए नहीं न कमज़ोर पड़े न टूटे
अल्लाह साबिरीन को दोस्त रखता है 147
और उन्होंने कुछ न कहा सिवाय इसके कि हमारे रब हमारे गुनाहों और ज्यादतियों को माफ़
कर देना और हमारे क़दम मज़बूत रखना और कौमे काफिरीन के मुकाबले हमारी मदद करना 148
तो अल्लाह ने उन्हें दुनिया में सवाब दिया और हुसना सवाबे आखिरा और अल्लाह
मोह्सिनीन को दोस्त रखता है 149
ईमान वालों अगर तुम काफिरों की इताअत करोगे तो वे तुम्हें उलटे पैर पलता देंगे और
तुम घाटा उठाने वालों में पलटोगे 150
लेकिन अल्लाह तुम्हारा मौला है और वह खैरुन नासिरीन -बहतर मदद करने वाला है 151
जल्द ही काफिरों के दिलों में तुम्हारा रौब डाल देंगे अल्लाह से शिर्क करते हैं
जिसके लिए कोई हुक्म नाजिल नहीं हुआ और उनका ठिकाना आग है जालिमों के लिए बुरा
ठिकाना 152 अल्लाह ने अपना वायदा पूरा किया जब तुम उसकी
इजाज़त से उनको काट रहे थे यहाँ तक कि तुम
ने हौसला खो दिया हुक्म में तनाज़अ किया हुक्म अदूली की जब उसने तुम्हें जो पसंद है दिखा दिया तुम में
वे हैं जो दुनिया चाहते हैं तुम में वे हैं जो आखिरत चाहते हैं इसके बाद उसने तुम्हें वहाँ से हटा दिया ताकि
तुम्हारा इम्तेहान ले और उसने तुम्हें माफ़ किया अल्लाह मोमिनों पर फजल वाला है 153
जब तुम पहाड़ी पर भागे जा रहे थे और कुछ नहीं देख सुन रहे थे जबकि रसूल तुम्हें
पीछे से आवाज़ दे रहे थे तब अल्लाह ने तुम्हें गम के ऊपर गम दिया ताकि जो हाथ से निकल
गया या जो तुम पर पड़ा उसका दुःख न करो जो कुछ तुम करते हो अल्लाह उसको जानता है 154
तब उसने गम के बाद अमन और नींद नाजिल की एक जमाअत पर और दूसरी जमाअत अल्लाह के
बारे में वह ख़याल किया जो हक न था जाहिलियत का ख़याल था उन्होंने कहा क्या इस अम्र
में हमारा कोई दख़ल था कहो बेशक सब अम्र अल्लाह के हैं वे अपने सीनों में जो छुपाते
हैं तुम से बयान नहीं करते वे कहते हैं अगर हमारा दखल होता तो हम यहाँ यूँ क़त्ल न
किये जाते कहो अगर अपने घरों में भी होते
जिनका लिखा होता वे अपनी क़त्ल की जगह आ मौजूद होते और अल्लाह बाहर निकाल सके उनके
दिलों में क्या है और निखार सके तुम्हारे दिलों में जो है अल्लाह सीनों की बातों
को जानता है 155 बेशक
जिस दिन दो लश्कर मिले उस दिन जो पलटे उनकी अपनी कमाई की वजह से शैतान ने उन्हें
हिला दिया लेकिन अल्लाह ने उन्हें माफ़ कर दिया बेशक अल्लाह गफूर – माफ़ करने वाला
हलीम – बर्दाश्त करने वाला है 156 ईमान वालों
काफिरों की तरह न हो जाना जो अपने भाईयों से कहते हैं – जब वे मुल्क मुल्क जाते
हैं या गज़व में जाते हैं कि अगर हमारे साथ रहते तो न मरते न मारे जाते अल्लाह उनके
दिलों में हसरत बना दे अल्लाह ही हयात देता है अल्लाह ही मौत देता है जो तुम करते
हो अल्लाह उसे देखता है 157 और अल्लाह
की राह में तुम क़त्ल हो जाओ या मर जाओ तो अल्लाह की मगफिरत और रहमत खैर है उस सब
से जो वे जमा करते हैं 158 तुम मरते हो
ह्या क़त्ल किये जाते हो तो अल्लाह की तरफ इकट्ठे किये जाते हो 159
अल्लाह की रहमत से तुम उनकी तरफ मुलायम हो और अगर कहीं तुम खुर्रे और दिल के सख्त
होते वे भाग खड़े होते तो उन्हें माफ़ करो उनके लिया मगफिरत मांगो और उमूर में उनसे
मशवरा किया करो और जब तुम अज़म करो तो अल्लाह पर तवक्कल करो अल्लाह तवक्कल करने
वालों को दोस्त रखता है 160 अगर अल्लाह तुम्हारी मदद करता है तो कोई तुम पर ग़ालिब
नहीं आ सकता और अगर अल्लाह छोड़ दे तो कौन है जो मदद करे ईमान वालों को अल्लाह पर
त्वक्क्ल करना चाहिए”
ऐसा लगता है रसूल पर उन मुसलामानों ने खयानत का इलज़ाम लगाया था : “161
किसी नबी पर यह नहीं है कि वह ग़ल- ख़यानत करे और जो कोई जो कुछ ग़ल करेगा उसे क़यामत
के दिन पेश करना होगा उस दिन हर नफस को उसकी कमाई का पूरा पूरा दिया वफ़ा कर दिया
जाएगा और ज़ुल्म नहीं किया जाएगा 162 जो अल्लाह के रिजवान का ताबेअ है क्या वह जो
अल्लाह के गेज़ का निशाना है बराबर हो सकता है – जिसका ठिकाना जहन्नम बुरा ठिकाना 163 अल्लाह के यहाँ
दर्जे हैं और जो वे करते हैं अल्लाह देखता है 164 अल्लाह का
मोमिनों पर यह देन है कि उनमें से रसूल उठाया जो उन्हें आयतों की तिलावत करता है
पाक करता है किताब और हिकमत पढ़ाता है और इसके पहले वे सरीह भटके हुए थे 165
जब तुम पर कोई चोट पड़ी तो उसकी दुगुना तुम उन को दे चुके हो तुम कहते हो यह कैसे तो यह चोट तुम्हारे नफस
की ही तरफ से है बेशक अल्लाह हर चीज़ पर क़दीर है 166
जिस दिन दो लश्कर गुथे उस दिन पर जो पड़ा
वह अल्लाह की इजाज़त से था ताकि मोमिनों को जान ले 167
और वह जान ले उनको जो अलग हट गए थे – जब उनसे कहा गया आओ अल्लाह के रास्ते में लड़ो
या दिफअ करो तो वे बोले अगर हमें मालूम होता लड़ाई होगी तो हम भी पीछे आते उस दिन
वे ईमान के मुकाबले कुफ्र के ज्यादा करीब थे अपने मुंह से वह कह रहे थे जो उनके
दिलों में नहीं था अल्लाह आलम (सर्वज्ञानी) है जो वे छुपाते हैं 168
जिन्होंने अपने भाईयों के बारे में कहा और बैठे रहे कि अगर उन्होंने हमारी बात
मानी होती तो क़त्ल न होते कहो तो फिर अपने ऊपर से मौत को टाल देना अगर सच्चे हो
169 और जो अल्लाह की राह में क़त्ल हुए उन्हें मुर्दा मत समझना लेकिन वे
जिंदा हैं और रब के यहाँ से रिज्क पाते हैं 170 अल्लाह ने अपने
फ़ज़ल से दिया उससे खुश हैं और खुशियाँ मन रहे हैं जो उनसे अभी नहीं मिले हैं और
पीछे हैं कि न जुन्हें कोई खौफ़ होगा कोई दुःख 171 वे खुशियाँ मन रहे हैं
अल्लाह की नेमतों और फ़ज़ल पर अल्लाह मोमिनों का अज्र ज़ाया नहीं करता 172
चोट लग जाने के बाद भी जिन्होंने अल्लाह और रसूल की सुनी जिन्होंने अहसन -बहुत
अच्छा किया और तक्वा किया उनके लिए बड़ा
अज्र है 173 उनसे जब
कहा गया कि तुम्हारे खिलाफ लोग इकट्ठे हो गए हैं तो डरो तो उनका ईमान और बढ़ गया
उन्होंने कहा अल्लाह हमारे किये काफी है और कितना अच्छा कारसाज़ है 174
तो वे अल्लाह से नेमत और फ़ज़ल पा कर पलते और कोई बुराई उन्हें छू तक न गयी उन्होंने
अल्लाह के रिजवान के ताबेअ रहे और अल्लाह के पास अज़ीम फ़ज़ल है 175
यह शैतान है जो अपने वलियों का खौफ दिलाता है तो उनसे मत डरो मुझ से डरो अगर मोमिन
हो 176 जो
लोग कुफ्र की तरफ झपटते हैं तुम उनसे दुखी न हो वे अल्लाह को कोई ज़रर नहीं पहुंचा
सकते अल्लाह का इरादा है उन्हें आखिरत का कोई हिस्सा न दे और अज़ाबुन अज़ीम दे 177
जो ईमान के बसले कुफ्र खरीदते हैं वे अल्लाह को कुछ ज़रर नहीं पहुंचाते उन्हें
अज़ाबुन अलीम मिलेगा 178
जो कुफ्र करते हैं वे यह न सोचें कि जो मोहलत उन्हें हम देते हैं वह उन के लिए खैर
है जो मोहलत हम देते हैं उनका गुनाह बढ़े और
ज़लील करने वाला अजाब दे 179 अल्लाह मोमिनों को नहीं छोड़ेगा जब तक ख़बीस को
तय्यब से अलग न कर ले न ही अल्लाह गैब की इत्तिलअ देगा अल्लाह अपने रसूलों में
जिसे चाहता है चुन लेता है अल्लाह और उसके रसूलों पर ईमान लाओ अगर तुम ईमान लाओगे
और तकवा करोगे तो अज़ीम अज्र देगा 180 जिनको अल्लाह अपने फ़ज़ल से देता है और वे बुख्ल
करते हैं वे इसको खैर न समझें क़यामत के दिन जो बुख्ल करते हैं वह उनकी गर्दन में
लटका दिया जाएगा आसमानों और ज़मीन की मीरास अल्लाह की है और तुम जो कुछ करते हो
अल्लाह ख़बर रखता है 181 अल्लाह ने उनकी सुन
ली जो कहते हैं अल्लाह फ़कीर है हम ग़नी हैं हम लिख लेंगे और जो उन्होंने कहा है और
नबियों को बिना हक क़त्ल किया है कहेंगे अज़ाबुल हरीक़ चखो 182
यह इसलिए जो तुम ने अपने हाथों से भेजा है अल्लाह अपने बन्दों पर ज़ल्लाम नहीं है 183
जो यह कहते हैं कि अल्लाह ने उनसे अहद लिया है जब तक कोई रसूल कुर्बानी न लाये
जिसे आग खा ले तुम ईमान न लाना कहो तुम्हारे पास पहले बहुत से रसूल आये साफ़
निशानियाँ ले कर और जिन्होंने वह भी किया जो तुम कहते हो तो तुम ने उन्हें क्यों
क़त्ल किया अगर सच्चे हो 184 अगर वह तुम्हें झुठलायें तो तुम से पहले भी
बहुत से रसूल झुठलाये जा चुके हैं जो साफ निशानियाँ भी लाये और ज़ुबुर और किताबे
मुनीर 185 हर नफस
मौत का जायका लेगा और जो करते हो क़यास्मत के दिन उसका पूरा अज्र दिया जाएगा उस दिन
जो आग से हटा दिया गया और बाग़ (जन्नत) में
दाखील किया गया वह कामयाब हुआ और यह दुनियावी ज़िन्दगी धोखे का सामान है –मताउन
ग़रूर 186
तुम ज़रूर मुब्तिला किये जाओगे अपने नफस और अपने माल से जिन्हें किताब दी गयी या जो
शिर्क करते हैं उनसे तुम बहुत सी अज़ीयत की बातें सुनोगे अगर तुम सब्र करोगे और
तक्वा करोगे तो उमूर में अज़म होगा 187 जिन्हें किताब
दी गयी थी उनसे अल्लाह ने अहद लिया था कि तुम लोगों को बयान करोगे और छुपाओगे नहीं
उन्होंने इसे पसे पुश्त डाल दिया और थोड़ी कीमत में खरीद लिया बुरा है जो उन्होंने खरीदा 188 जो लोग अपने
किये पर खुशियाँ मना रहे हैं और जो नहीं किया उस पर उनकी हम्द की जाए उनके बारे
में यह ख़याल न करो कि वे अज़ाब से भाग सकेंगे उन्हें अज़ाबुन अलीम होगा 189
आसमानों और ज़मीन की मिलकियत अल्लह की है वह हर चीज़ पर क़दीर है
190 ज़मीन और आसमान की खल्कत में और रात दिन के बदलते रहने में समझदारों के
लिए निशानियाँ हैं 191 जो खड़े बैठे करवट लेटे
अल्लाह को याद करते हैं ज़मीन आज्मानों की खल्कत पर गौर करते हैं हमारे रब तू ने
इन्हें बातिल नहीं खल्क किया तू पाक है हमें आग के अज़ाब से बचा 192
हमारे रब तू ने जिसे आग में डाला उसे ज़लील किया जालिमों का कोई मददगार नहीं”
समझदारों के ईमान की बुनियाद “193
हमारे रब हमने सुना एक मुनादी ईमान लाने के लिए निदा दे रहा था तो हम ईमान ले आये
हमारे रब हमारे गुनाहों को माफ़ करना हमारी बुराइयों को मिटा देना हमको अबरार में
वफात देना 194
हमारे रब हमको देना जिसका वादा तू ने रसूलों से किया हम को क़यामत के दिन रुसवा न
करना बेशक तू वादे के खिलाफ नहीं करता है 195 उनके रब ने
उनकी सुनी मैं तुम में से किसी का मर्द या औरत- बाज़ बाज़ से है का अज्र ज़ायअ
नहीं करता जिन्होंने हिजरत की घरों
से निकाले गए परेशान किये गए मेरे रास्ते में लड़े और मारे गए मैं उनकी
बुराईयों को मिटा दूंगा बाग़ (जन्नत) में दाखिल करूंगा जिसके नीचे नहरें जारी हैं
अल्लाह की तरफ से सवाब हुस्नुससवाब
196 तुम्हें काफिरों का शहर में घूमना फिरना धोखे में न डाले 197 थोड़ा
माल फायेदा फिर उनका ठिकाना जहन्नम – बुरा ठिकाना 198 लेकिन जो अपने रब
से डरते हैं उनके लिए बाग़ (जन्नत) जिसके
नीचे नहरें जारी और वहाँ हमेशा रहेंगे अल्लाह के यहाँ से नाजिल अबरार के लिए खैर 199 और अहले किताब में ऐसे हैं जो अल्लाह पर ईमान लाये और जो तुम पर उतरा है
और जो उन पर उतरा है अल्लाह के आगे ख़ुशुअ करते हैं अल्लाह की आयतों की थोड़ी कीमत नहीं लेते हैं वे अपने रब के पास अपना अज्र पायेंगे अल्लाह सरीउल हिसाब है 200
ऐ जो ईमान लाये सब्र करो बर्दाश्त करो आपस में जुड़ो रब्त बनाओ अल्लाह से डरो ताकि
तुम फलाह पाओ”
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