इंडिया में मुसलामानों
की रक्षा कौन करेगा ? ......... 6
(देश के सच्चे हिन्दुओं
और मुसलमानों को समर्पित)
धर्म के नाम पर हिंसा
क्यों ? दिल का चोर है जो हिंसक बनाता है !
दुनिया का कोई इंसान न
जानता है और न जान सकता है कि ईश्वर है कि नहीं और मरने के बाद दुबारा जीवन है कि
नहीं ! और आज का कोई इंसान आज के विज्ञान को ईमानदारी से झुठला भी नहीं सकता !
तो आज के सारे धार्मिक
लोग जो आस्था और ईमान की बात करते हैं वे अपने दिल में एक चोर छुपाये बैठे हैं और
जिसको छुपाये रखने में मानसिक ऊर्जा चाहिए होती है और जब कोई व्यक्ति सच्चे शक
शुबह का इज़हार करता है या हम जो मानते हैं उसके बजाये कुछ और मानता है तो हिंसा
हमारे अन्दर मौजें मारने लगती है – ऐसे मनमौजी लोगों के खिलाफ या तो हम AK 47 ले
कर निकल पड़ते हैं – ख़ास कर अगर वे लोग हमारी यौन नैतिकता के विपरीत भी हैं और या
हम बम बाँध कर खुद को और उनको तबाह बर्बाद कर देना चाहते हैं I
क्या रास्ता है सीधे सच्चे धर्म को बचाए रखने का ?
दुनिया के देशों
में जो राष्ट्रपति हैं या सेना अध्यक्ष हैं या किसी टीम का जो
इन्चार्ज है और जो भी संविधान या प्रोटोकॉल है उसे हम सब मानते हैं कोई यह नहीं
सोचता कि यह सब सच है कि नहीं I
बस यहिओ हमें अपने जीवन
में भी मानना है और वास्तव में हम अपने परिवार में भी ऐसे ही जीवन जीते हैं और जो
शक में पड़ जाते हैं वे अपना पारिवारिक जीवन बर्बाद कर देते हैं I
हमारी ज़रूरत है कि हम
किसी ईश्वर को मानें इसलिए हम मानें I
हमारी ज़रूरत है कि हम
इस जीवन के बाद जीवन है इसलिए हम मानें I
हमारी ज़रूरत है की
अच्छों को अच्छा और बुरों का बुरा होगा इसलिए हम फैसले के दिन और जन्नत जहन्नम को
मानें I
हम मानतें है कि हम हैं
और हम मानतें हैं कि यह दुनिया दुनिया है हमारा ख्वाब नहीं है अगर न मानें तो हम
पागल हो जाएँ !
इसलिए अपने और अपने
बच्चों को खुदकुशी और पागलपण से बचाने के लिए , नशाखोरी और अवैध अनैतिक यौन से
बचाने के लिए हमें अपने धर्म को मानना है और साथ ही दूसरों को उनके धर्म मानने की
पूरी आजादी देनी है और अपने धर्म मानते हुए दूसरों को कष्ट में नहीं डालना है – न किसी
का रास्ता रुके और न शोरगुल हो I
जब मुसलमान इस बात को
समझ लेंगे तो इंडिया और पूरी दुनिया में अमन से रहेंगे !
क्या यह काफी नहीं है
कि अल्लाह को याद कर के सुकून मिलता है ? क्या यह काफी नहीं है कि 5 वक़्त की नमाज़
, 30 दिन का रोज़ा और ज़िन्दगी में एक बार हज से हमें एक पूरा सिस्टम मिलता है और इस सिस्टम और कुरान के लिए हमें रसूल और उनकी
आल का शुक्रगुजार एहसानमंद नहीं होना चाहिए ?
दुनिया के सारे इंसान
एक माँ बाप की औलाद हैं – दो नबियों की औलाद हैं हज़रत आदम अ०स० और हज़रत नूह अ०स० –
सभी हिन्दुओं को अपना भाई अपने जैसा अपने बराबर समझो – कोई ऊंच नीच नहीं I शायद
यहाँ के लोग हज़रत शीश अ०स० की उम्मत हैं और शायद हज़रत ज़ुल्किफ्ल अ०स० कपिलवस्तु
गौतम बुद्ध हैं – हकीकत अल्लाह बहतर जानता है I
किसी को भी किसी तबके
को काफ़िर मुशरिक कहने का हक़ नहीं – यह फैसला अल्लाह के हाथ जिसे चाहे बख्शे जिसे
चाहे सजा दे I
आम हिन्दू की आस्था और
धार्मिकता आप से किसी भी तरह कम नहीं बल्कि हिन्दू अध्यात्म तो बहुत ऊंचा है – यह
बात अकबर बादशाह और कई बादशाहों शहजादों – खुसरो और दारा शिकोह ने समझी I
न हिन्दू मूर्तिपूजक है
– वह मूर्ति सामने रख कर निराकार सर्व व्यापि ब्रह्म की पूजा करता है और अनेक महान
सूफी संतों ने इसे ठीक रास्ता समझा I
पहले मुसलमान दिल में
सच्चा ईमान लायें – क़ुरान को उसके सही क्रम में पढ़ें – रसूल और आले रसूल से मवद्दत
करें और आखिरी इमाम / हिन्दुओं के आखिरी अवतार की नुसरत के लिए तैयार रहें I
दोस्तों इस पैगाम को
शेयर कीजिये ताकि दुनिया में अच्छाई की जीत हो !
No comments:
Post a Comment