इंडिया में मुसलामानों
की रक्षा कौन करेगा ? ......... 9
(देश के सच्चे हिन्दुओं
और मुसलमानों को समर्पित)
1400 वर्ष पूर्व जब
मुस्लिम अरब हर तरफ विजयी हो रहे थे तो उनके हिसाब से बाक़ी दुनिया में दो तबके थे
:
1 एक वे लोग जिनके पास
अल्लाह की कोई किताब नहीं थी जो अल्लाह की किताब को छोड़ बैठे थे और भुला बैठे थे I
ऐसे लोगों को काफिर कहा गया और उन के सामने दो रास्ते थे या तो ईमान ले आओ या मौत
2 दूसरे वे लोग थे
जिनके पास अल्लाह की किताब थी – ऐसे लोग को अपने धर्म पर रहने की इजाज़त थी उन्हें
जजिया देना था और उनकी रक्षा के लिए मुस्लिम हुकूमत ज़िम्मेदार थी और यह लोग जिम्मी
कहलाये I यहूदी और ईसाई इस श्रेणी में थे और इन्हें पूर्ण धार्मिक स्वतंत्रता थी I
इंडिया में हिन्दुओं को
पहले काफिर समझा गया फिर वेदों को अल्लाह की किताब मान कर हिन्दुओं को जजिया दे कर
अपने धर्म की स्वतंत्रता थी – कुछ शासक सख्त रहे और कुछ उदार रहे I
मुस्लिम शासक संभवत:
बौद्ध और सिखों के विरुद्ध रहे क्योंकि बौद्ध को नास्तिक समझा गया और सिख
धर्म मनुष्यों द्वारा निर्मित धर्म था जो
उनके सामने ही बना था I
एक समय आया जब तलवार और
जंग से इस्लाम का प्रसार थम गया और इनकी पराजय शुरू हुयी – इंडिया में ब्रिटिश
शासन कायम हुआ I
प्रथम विश्व युद्ध के
बाद ओटोमन साम्राज्य समाप्त हो गया – मुसलमान बिलकुल कमज़ोर हो गए ब्रिटेन को अरब में अपना क़ब्ज़ा
बनाए रखने में कोई लाभ नहीं दिखा I इसी बीच यहूदियों को पलेस्टाइन में बसाने का
निर्णय लिया गया और उसी समय अरब में सऊदी काफी क्षेत्र में प्रबल हो चुके थे और
उन्होंने ब्रिटेन से समझौता किया और इस तरह अरब में सऊदी हुकूमत बनी – ब्रिटेन से
एक बड़ी चूक हो गयी I ब्रिटेन ने सऊदी को बादशाह बना कर अरब छोड़ दिया I कुछ ही
वर्षों में तेल की खोज हो गयी – गरीब फटेहाल अरब फिर पैसे वाले हो गए I अगर 1920
के पूर्व ही तेल की खोज हो गयी होती तो आज दुनिया की राजनीति कुछ और होती I
सऊदी अरब ने कट्टर
इस्लाम का प्रचार प्रसार किया और आतंकवाद को जन्म दिया और अब परवान चढ़ा रहा है I
यह बात यू० एस० और यूरोप के भी मुवाफिक है इस तरह एक तरफ सऊदी से सहयोग और दूसरी
तरफ अन्य अर्ब देशों में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई के नाम से घुसपैठ कर के तेल पर
क़ब्ज़ा करने का बहाना मिल गया I
आज ताक़त से इस्लाम का
प्रसार असंभव है – दुनिया के ताक़तवर लोग यहूदी और ईसाई हैं और अधिकाँश लोग नास्तिक
हैं I
इंडिया के मुसलमानों को
यह निर्णय लेना है कि उन्हें कट्टरवाद से कुछ लेना देना नहीं है वे एक अच्छे सच्चे
मुसलमान रहते हुए हिन्दुओं के साथ अमन और भाईचारे से रहेंगे I जब अधिकाँश दुनिया
नास्तिक हो चुकी है – वास्तव में बहुत से मुसलमान भी जिनमें वहाबी भी शामिल हैं जो
भले ही अल्लाह का नाम लें – केवल इंडिया के हिन्दू ही हैं जो आस्थावान हैं I
दुनिया के सारे इंसान
एक माँ बाप की औलाद हैं – दो नबियों की औलाद हैं हज़रत आदम अ०स० और हज़रत नूह अ०स० –
सभी हिन्दुओं को अपना भाई अपने जैसा अपने बराबर समझो – कोई ऊंच नीच नहीं I शायद
यहाँ के लोग हज़रत शीश अ०स० की उम्मत हैं और शायद हज़रत ज़ुल्किफ्ल अ०स० कपिलवस्तु
गौतम बुद्ध हैं – हकीकत अल्लाह बहतर जानता है I
किसी को भी किसी तबके
को काफ़िर मुशरिक कहने का हक़ नहीं – यह फैसला अल्लाह के हाथ जिसे चाहे बख्शे जिसे
चाहे सजा दे I
आम हिन्दू की आस्था और
धार्मिकता आप से किसी भी तरह कम नहीं बल्कि हिन्दू अध्यात्म तो बहुत ऊंचा है – यह
बात अकबर बादशाह और कई बादशाहों शहजादों – खुसरो और दारा शिकोह ने समझी I
न हिन्दू मूर्तिपूजक है
– वह मूर्ति सामने रख कर निराकार सर्व व्यापि ब्रह्म की पूजा करता है और अनेक महान
सूफी संतों ने इसे ठीक रास्ता समझा I
जब कुरान कहता है कि
अल्लाह ने हर ज़माने हर कौम में अपने नबी अपनी किताबें भेजी हैं तो इंडियन मुस्लिम
स्कॉलरों पर यह ज़िम्मेदारी है कि इंडिया में आये अल्लाह के नबियों और कलाम की खोज
करें और उसे पेश करें जिससे सारे इंडियन एक अच्छी नेक ज़िन्दगी जियें और अपने हिसाब
से अपना मजहब मानें I
पहले मुसलमान दिल में
सच्चा ईमान लायें – क़ुरान को उसके सही क्रम में पढ़ें – रसूल और आले रसूल से मवद्दत
करें और आखिरी इमाम / हिन्दुओं के आखिरी अवतार की नुसरत के लिए तैयार रहें I
दोस्तों इस पैगाम को
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