मेरे साथ 1400 वर्ष पूर्व
मदीने का सफ़र कीजिये और सच्चे इस्लाम और मोमिनों को पहचानिए – 14
(106) 49 सूरए अल हुजुरात
1 ऐ ईमान लाने वालों अल्लाह और उसके रसूल के सामने किसी बात में आगे न बढ़ जाया करो और अल्लाह से डरते रहो बेशक अल्लाह बड़ा सुनने वाला वाकि़फ़कार है
2 ऐ ईमान लाने वालों अपनी आवाज़े पैग़म्बर की आवाज़ से ऊँची न किया करो और जिस तरह तुम आपस में एक दूसरे से ज़ोर से बोला करते हो उनके रूबरू ज़ोर से न बोला करो तुम्हारा किया कराया सब अकारत हो जाए और तुमको ख़बर भी न हो
3 बेशक जो लोग रसूले अल्लाह के सामने अपनी आवाज़ें धीमी कर लिया करते हैं यही लोग हैं जिनके दिलों को अल्लाह ने परहेज़गारी के लिए जाँच लिया है उनके लिए बख्शिश और बड़ा अज्र है
4 जो लोग तुमको हुजरों के बाहर से आवाज़ देते हैं उनमें के अक़्सर बे अक़्ल हैं
5 और अगर ये लोग इतना ताम्मुल करते कि तुम ख़ुद निकल कर उनके पास आ जाते तो ये उनके लिए बेहतर था और अल्लाह तो बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
6 ऐ ईमान लाने वालों अगर कोई बदकिरदार तुम्हारे पास कोई ख़बर लेकर आए तो ख़ूब तहक़ीक़ कर लिया करो कि तुम किसी क़ौम को नादानी से नुक़सान पहुँचाओ फिर अपने किए पर नादिम हो
7 और जान रखो कि तुम में अल्लाह के रसूल हैं बहुत सी बातें ऐसी हैं कि अगर रसूल उनमें तुम्हारा कहा मान लिया करें तो तुम ही मुश्किल में पड़ जाओ लेकिन अल्लाह ने तुम्हें ईमान की मोहब्बत दे दी है और उसको तुम्हारे दिलों में उमदा कर दिखाया है और कुफ़्र और बदकारी और नाफ़रमानी से तुमको बेज़ार कर दिया है यही लोग अल्लाह के फ़ज़ल व एहसान से राहे हिदायत पर हैं
8 और अल्लाह तो बड़ा वाकि़फ़कार और हिकमत वाला है
9 और अगर मोमिनीन में से दो फिरक़े आपस में लड़ पड़े तो उन दोनों में सुलह करा दो फिर अगर उनमें से एक दूसरे पर ज़्यादती करे तो जो ज़्यादती करे तुम उससे लड़ो यहाँ तक वह अल्लाह के हुक्म की तरफ रूझू करे फिर जब रूजू करे तो फरीकै़न में मसावात के साथ सुलह करा दो और इन्साफ़ से काम लो बेशक अल्लाह इन्साफ़ करने वालों को दोस्त रखता है
10 मोमिनीन तो आपस में बस भाई भाई हैं तो अपने दो भाईयों में मेल जोल करा दिया करो और अल्लाह से डरते रहो ताकि तुम पर रहम किया जाए
11 ऐ ईमान लाने वालों कोई कौम दूसरी क़ौम की हँसी न उड़ाये मुमकिन है कि वह लोग उनसे अच्छे हों और न औरते औरतों से क्या अजब है कि वह उनसे अच्छी हों और तुम आपस में एक दूसरे को मिलने न दो न एक दूसरे का बुरा नाम धरो ईमान लाने के बाद बदकारी का नाम ही बुरा है और जो लोग बाज़ न आएँ तो ऐसे ही लोग ज़ालिम हैं
12 ऐ ईमान लाने वालों बहुत से गुमान से बचे रहो क्यों कि बाज़ बदगुमानी गुनाह हैं और आपस में एक दूसरे के हाल की टोह में न रहा करो और न तुममें से एक दूसरे की ग़ीबत करे क्या तुममें से कोई इस बात को पसन्द करेगा कि अपने मरे हुए भाई का गोश्त खाए तो तुम उससे नफ़रत करोगे और अल्लाह से डरो, बेशक अल्लाह बड़ा तौबा क़ुबूल करने वाला मेहरबान है
13 लोगों हमने तो तुम सबको एक मर्द और एक औरत से पैदा किया और हम ही ने तुम्हारे कबीले और बिरादरियाँ बनायीं ताकि एक दूसरे की शिनाख़्त करे इसमें शक नहीं कि अल्लाह के नज़दीक तुम सबमें बड़ा इज़्ज़तदार वही है जो बड़ा परहेज़गार हो बेशक अल्लाह बड़ा वाकि़फ़कार ख़बरदार है
14 एअराब कहते हैं कि हम ईमान लाए तुम कह दो कि तुम ईमान नहीं लाए बल्कि कह दो कि इस्लाम लाए हालाँकि ईमान का अभी तक तुम्हारे दिल में गुज़र हुआ ही नहीं और अगर तुम अल्लाह की और उसके रसूल की फरमाबरदारी करोगे तो अल्लाह तुम्हारे आमाल में से कुछ कम नहीं करेगा - बेशक अल्लाह बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
15 मोमिन तो बस वही हैं जो अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान लाए फिर उन्होंने उसमें किसी तरह का शक शुबह न किया और अपने माल से और अपनी जानों से अल्लाह की राह में जेहाद किया यही लोग सच्चे हैं
16 पूछो तो कि क्या तुम अल्लाह को अपनी दीनदारी जताते हो और अल्लाह तो जो कुछ आसमानों मे है और जो कुछ ज़मीन में है जानता है और अल्लाह हर चीज़ से ख़बरदार है
17 तुम पर ये लोग एहसान जताते हैं तुम कह दो कि तुम अपने इसलाम का मुझ पर एहसान न जताओ अगर तुम सच्चे हो तो समझो कि, अल्लाह ने तुम पर एहसान किया कि उसने तुमको ईमान का रास्ता दिखाया
18 बेशक अल्लाह तो सारे आसमानों और ज़मीन की छिपी हुयी बातों को जानता है और जो तुम करते हो अल्लाह उसे देख रहा है (107) 66 सूरए अत तहरीम
1 ऐ रसूल जो चीज़ अल्लाह ने तुम्हारे लिए हलाल की है तुम उससे अपनी बीवियों की ख़ुशनूदी के लिए क्यों किनारा कशी करो और अल्लाह तो बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
2 अल्लाह ने तुम लोगों के लिए क़समों को तोड़ डालने का कफ़्फ़ार मुक़र्रर कर दिया है और अल्लाह ही तुम्हारा कारसाज़ है और वही वाकि़फ़कार हिकमत वाला है
3 और जब पैग़म्बर ने अपनी बाज़ बीवी से चुपके से कोई बात कही फिर जब उसने उस बात की ख़बर दे दी और अल्लाह ने इस अम्र को रसूल पर ज़ाहिर कर दिया तो रसूल ने बाज़ बात जता दी और बाज़ बात टाल दी ग़रज़ जब रसूल ने इस वाकि़ये कि उस को ख़बर दी तो हैरत से बोल उठीं आपको इस बात की किसने ख़बर दी रसूल ने कहा मुझे बड़े वाकि़फ़कार ख़बरदार ने बता दिया
4 अगर तुम दोनों तौबा करो तो ख़ैर क्योंकि तुम दोनों के दिल टेढ़े हैं और अगर तुम दोनों रसूल की मुख़ालेफ़त में एक दूसरे की अयानत करती रहोगी तो कुछ परवा नहीं अल्लाह और जिबरील और तमाम इमानदारों में नेक शख़्स उनके मददगार हैं और उनके अलावा कुल फ़रिश्ते मददगार हैं
5 अगर रसूल तुम लोगों को तलाक़ दे दे तो अनक़रीब ही उनका रब तुम्हारे बदले उनको तुमसे अच्छी बीवियाँ अता करे जो फ़रमाबरदार ईमानदार अल्लाह रसूल की मुतीय तौबा करने वालियाँ इबादत गुज़ार रोज़ा रखने वालियाँ ब्याही हुयी
6 और बिन ब्याही कुंवारियाँ हो ऐ ईमान लाने वालों अपने आपको और अपने लड़के बालों को आग से बचाओ जिसके इंधन आदमी और पत्थर होंगे उन पर वह तन्दख़ू सख़्त मिजाज़ फ़रिश्ते हैं कि अल्लाह जिस बात का हुक़्म देता है उसकी नाफरमानी नहीं करते और जो हुक़्म उन्हें मिलता है उसे बजा लाते हैं
7 काफि़रों आज बहाने न ढूँढो जो कुछ तुम करते थे तुम्हें उसकी सज़ा दी जाएगी
8 ऐ ईमान लाने वालों अल्लाह की बारगाह में साफ़ ख़ालिस दिल से तौबा करो तो उम्मीद है कि तुम्हारा रब तुमसे तुम्हारे गुनाह दूर कर दे और तुमको जन्नत (बाग़ों) में दाखिल करे जिनके नीचे नहरें जारी हैं उस दिन जब अल्लाह रसूल को और उन लोगों को जो उनके साथ ईमान लाए हैं रूसवा नहीं करेगा उनका नूर उनके आगे आगे और उनके दाहिने तरफ़ चल रहा होगा और ये लोग ये दुआ करते होंगे रब हमारे लिए हमारा नूर पूरा कर और हमं बख्श दे बेशक तू हर चीज़ पर क़ादिर है
9 ऐ रसूल काफि़रों और मुनाफि़कों से जेहाद करो और उन पर सख़्ती करो और उनका ठिकाना जहन्नुम है और वह क्या बुरा ठिकाना है
10 अल्लाह ने काफ़िरों के वास्ते नूह की बीवी और लूत की बीवी की मसल बयान की है कि ये दोनो हमारे बन्दों के तसर्रुफ़ थीं तो दोनों ने अपने शौहरों से दगा की तो उनके शौहर अल्लाह के मुक़ाबले में उनके कुछ भी काम न आए और उनको हुक़्म दिया गया कि और जाने वालों के साथ आग में तुम दोनों भी दाखिल हो जाओ
11 और अल्लाह ने मोमिनीन के लिए फ़िरऔन की बीवी की मिसाल बयान फ़रमायी है कि जब उसने दुआ की रब मेरे लिए अपने यहाँ जन्नत में एक घर बना और मुझे फ़िरऔन और उसकी कारस्तानी से नजात दे और मुझे ज़ालिम लोगो से छुटकारा अता फ़रमा
12 और इमरान की बेटी मरियम जिसने अपनी शर्मगाह को महफूज़ रखा तो हमने उसमें रूह फूंक दी और उसने अपने रब की बातों और उसकी किताबों की तस्दीक़ की और फ़रमाबरदारों में थीं
(108) 64 सूरए अत तग़ाबुन
1 जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है अल्लाह ही की तस्बीह करती है उसी की बादशाहत है और तारीफ़ उसी के लिए सज़ावार है और वही हर चीज़ पर कादिर है
2 वही तो है जिसने तुम लोगों को पैदा किया कोई तुममें काफि़र है और कोई मोमिन और जो कुछ तुम करते हो अल्लाह उसको देख रहा है
3 उसी ने सारे आसमान व ज़मीन को हिकमत व मसलेहत से पैदा किया और उसी ने तुम्हारी सूरतें बनायीं तो सबसे अच्छी सूरतें बनायीं और उसी की तरफ़ लौटकर जाना हैं
4 जो कुछ सारे आसमान व ज़मीन में है वह जानता है और जो कुछ तुम छुपा कर या खुल्लम खुल्ला करते हो उससे वाकिफ़ है और अल्लाह तो दिल के भेद तक से आगाह है
5 क्या तुम्हें उनकी ख़बर नहीं पहुँची जिन्होंने पहले कुफ्ऱ किया तो उन्होने अपने काम की सज़ा का मज़ा चखा और उनके लिए दर्दनाक अज़ाब है
6 ये इस वजह से कि उनके पास रसूल वाज़ेए व रौशन मौजिज़े लेकर आ चुके थे तो कहने लगे कि क्या आदमी हमारे हादी बनेंगें ग़रज़ ये लोग काफि़र हो बैठे और मुँह फेर बैठे और अल्लाह ने भी परवाह न की और अल्लाह तो बे परवा सज़ावारे हम्द है
7 काफि़रों का ख़्याल ये है कि ये लोग दोबारा न उठाए जाएँगे तुम कह दो वहाँ अपने रब की क़सम तुम ज़रूर उठाए जाओगे फिर जो जो काम तुम करते रहे वह तुम्हें बता देगा और ये तो अल्लाह पर आसान है
8 तो तुम अल्लाह और उसके रसूल पर उसी नूर पर ईमान लाओ जिसको हमने नाजि़ल किया है और जो कुछ तुम करते हो अल्लाह उससे ख़बरदार है
9 जब वह क़यामत के दिन तुम सबको जमा करेगा फिर यही हार जीत का दिन होगा और जो अल्लाह पर ईमान लाए और अच्छा काम करे वह उससे उसकी बुराइयाँ दूर कर देगा और उसको जन्नत (बाग़ों) में दाखि़ल करेगा जिनके नीचे नहरें जारी हैं वह उनमें अबादुल आबाद हमेशा रहेगा, यही तो बड़ी कामयाबी है
10 और जो लोग काफि़र हैं और हमारी आयतों को झुठलाते रहे यही लोग आग के साथी हैं कि हमेशा उसी में रहेंगे और वह क्या बुरा ठिकाना है
11 जब कोई मुसीबत आती है तो अल्लाह के इज़न से और जो अल्लाह पर ईमान लाता है तो अल्लाह उसके क़ल्ब की हिदायत करता है और अल्लाह हर चीज़ से ख़ूब आगाह है
12 और अल्लाह की इताअत करो और रसूल की इताअत करो फिर अगर तुमने मुँह फेरा तो हमारे रसूल पर सिर्फ़ पैग़ाम का वाज़ेए करके पहुँचा देना फ़र्ज़ है
13 अल्लाह उसके सिवा कोई माबूद नहीं और मोमिनो को अल्लाह ही पर भरोसा करना चाहिए
14 ऐ ईमान लाने वालों तुम्हारी बीवियों और तुम्हारी औलाद में से बाज़ तुम्हारे दुशमन हैं तो तुम उनसे बचे रहो और अगर तुम माफ़ कर दो दरगुज़र करो और बख़्ष दो तो अल्लाह बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
15 तुम्हारे माल और तुम्हारी औलादे बस आज़माइश है और अल्लाह के यहाँ तो बड़ा अज्र है
16 तो जहाँ तक तुम से हो सके अल्लाह से डरते रहो और सुनो और मानों और अपनी बेहतरी के वास्ते ख़र्च करो और जो अपने नफ़्स की हिरस से बचा लिया गया तो ऐसे ही लोग मुरादें पाने वाले हैं
17 अगर तुम अल्लाह को क़र्ज़े हसना दोगे तो वह उसको तुम्हारे वास्ते दूना कर देगा और तुमको बख्श देगा और अल्लाह तो बड़ा क़द्रदान व बुर्दबार है
18 पोशीदा और ज़ाहिर का जानने वाला ग़ालिब हिकमत वाला है
(109) 61 सूरए अस सफ्फ
1 जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में हैं अल्लाह की तस्बीह करते हैं और वह ग़ालिब हिकमत वाला है
2 ऐ ईमान लाने वालों तुम ऐसी बातें क्यों कहा करते हो जो किया नहीं करते
3 अल्लाह के नज़दीक ये भारी बात है कि तुम ऐसी बात को जो करो नहीं
4 अल्लाह तो उन लोगों से उलफ़त रखता है जो उसकी राह में इस तरह परा बाँध के लड़ते हैं कि गोया वह सीसा पिलाई हुयी दीवारें हैं
5 और जब मूसा ने अपनी क़ौम से कहा कि भाइयों तुम मुझे क्यों अज़ीयत देते हो हालाँकि तुम तो जानते हो कि मैं तुम्हारे पास अल्लाह का रसूल हूँ तो जब वह टेढ़े हुए तो अल्लाह ने भी उनके दिलों को टेढ़ा ही रहने दिया और अल्लाह बदकार लोगों को मंजि़ले मक़सूद तक नहीं पहुँचाया करता
6 और जब मरियम के बेटे ईसा ने कहा ऐ बनी इसराइल मैं तुम्हारे पास अल्लाह का भेजा हुआ हूँ तौरेत जो मेरे पहले से है उसकी तसदीक़ करता हूँ और एक रसूल जिनका नाम अहमद होगा मेरे बाद आएँगे उनकी ख़ुशख़बरी सुनाता हूँ जो जब वह उनके पास वाज़ेए व रौशन मौजिज़े लेकर आया तो कहने लगे ये तो खुला हुआ जादू है
7 और जो इस्लाम की तरफ बुलाया जाए वह कु़बूल के बदले उलटा अल्लाह पर झूठ जोड़े उससे बढ़ कर ज़ालिम और कौन होगा और अल्लाह ज़ालिम लोगों को मंजि़ले मक़सूद तक नहीं पहुँचाया करता
8 ये लोग अपने मुँह से अल्लाह के नूर को बुझाना चाहते हैं हालाँकि अल्लाह अपने नूर को पूरा करके रहेगा अगरचे कुफ़्फ़ार बुरा ही मानें
9 वह वही है जिसने अपने रसूल को हिदायत और सच्चे दीन के साथ भेजा ताकि उसे और तमाम दीनों पर ग़ालिब करे अगरचे मुशरेकीन बुरा ही माने
10 ऐ ईमान लाने वालों क्या मैं नहीं ऐसी तिजारत बता दूँ जो तुमको दर्दनाक अज़ाब से निजात दे
11 अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान लाओ और अपने माल व जान से अल्लाह की राह में जेहाद करो अगर तुम समझो तो यही तुम्हारे हक़ मे बेहतर है
12 तो वह भी इसके ऐवज़ में तुम्हारे गुनाह बख्श देगा और तुम्हें जन्नत (बाग़ों) में दाखि़ल करेगा जिनके नीचे नहरें जारी हैं और पाकीजा़ मकानात में जो जावेदानी जन्नत में हैं यही तो बड़ी कामयाबी है
13 और एक चीज़ जिसके तुम दिल दादा हो अल्लाह की तरफ़ से मदद मिलेगी और अनक़रीब फतेह होगी और मोमिनीन को ख़ुशख़बरी दे दो
14 ऐ ईमान लाने वालों अल्लाह के मददगार बन जाओ जिस तरह मरियम के बेटे ईसा ने हवारियों से कहा था कि अल्लाह की तरफ़ मेरे मददगार कौन लोग हैं तो हवारीन बोल उठे थे कि हम अल्लाह के अनसार हैं तो बनी इसराईल में से एक गिरोह ईमान लाया और एक गिरोह काफ़िर रहा, तो जो लोग ईमान लाए हमने उनको उनके दुशमनों के मुक़ाबले में मदद दी तो आखि़र वही ग़ालिब रहे (110) 62 सूरए जुमुअह
1 जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है अल्लाह की तस्बीह करते हैं जो बादशाह पाक ज़ात ग़ालिब हिकमत वाला है
2 वही तो जिसने उम्मियों में उन्हीं में का एक रसूल भेजा जो उनके सामने उसकी आयतें पढ़ते और उनको पाक करते और उनको किताब और अक़्ल की बातें सिखाते हैं अगरचे इसके पहले तो ये लोग सरीही गुमराही में थे
3 और उनमें से उन लोगों की तरफ़ जो अभी तक उनसे मुलहिक़ नहीं हुए और वह तो ग़ालिब हिकमत वाला है
4 अल्लाह का फज़ल है जिसको चाहता है अता फ़रमाता है और अल्लाह तो बड़े फज़ल का मालिक है
5 जिन लोगों पर तौरेत लदवायी गयी है उन्होने उस को न उठाया उनकी मिसाल गधे की सी है जिस पर बड़ी बड़ी किताबें लदी हों जिन लोगों ने अल्लाह की आयतों को झुठलाया उनकी भी क्या बुरी मिसाल है और अल्लाह ज़ालिम लोगों को मंजि़ल मकसूद तक नहीं पहुँचाया करता
6 तुम कह दो कि ऐ यहूदियों अगर तुम ये ख़्याल करते हो कि तुम ही अल्लाह के दोस्त हो और लोग नहीं तो अगर तुम सच्चे हो तो मौत की तमन्ना करो
7 और ये लोग उन आमाल के सबब जो ये पहले कर चुके हैं कभी उसकी आरज़ू न करेंगे और अल्लाह तो ज़ालिमों को जानता है
8 तुम कह दो कि मौत जिससे तुम लोग भागते हो वह तो ज़रूर तुम्हारे सामने आएगी फिर तुम पोशीदा और ज़ाहिर के जानने वाले की तरफ़ लौटा दिए जाओगे फिर जो कुछ भी तुम करते थे वह तुम्हें बता देगा
9 ऐ ईमान लाने वालों जब जुमा का दिन नमाज़ के लिए अज़ान दी जाए तो अल्लाह की याद की तरफ़ दौड़ पड़ो और ख़रीद व फरोख़्त छोड़ दो अगर तुम समझते हो तो यही तुम्हारे हक़ में बेहतर है
10 फिर जब नमाज़ हो चुके तो ज़मीन में जाओ और अल्लाह के फज़ल तलाश करो और अल्लाह को बहुत याद करते रहो ताकि तुम दिली मुरादें पाओ
11 और जब ये लोग सौदा बिकता या तमाशा होता देखें तो उसकी तरफ़ टूट पड़े और तुमको खड़ा हुआ छोड़ दें तुम कह दो कि जो चीज़ अल्लाह के यहाँ है वह तमाशे और सौदे से कहीं बेहतर है और अल्लाह सबसे बेहतर रिज़्क़ देने वाला है
111 48 सूरए अल फ़तह 1 बेशक हमने तुमको फतह दी खुल्लम खुल्ला फतह
2 ताकि अल्लाह तुम्हारी उम्मत के अगले और पिछले गुनाह माफ़ कर दे और तुम पर अपनी नेअमत पूरी करे और तुम्हें सीधी राह पर साबित क़दम रखे 3 और अल्लाह तुम्हारी मदद करे – ज़बरदस्त मदद
4 वह अल्लाह तो है जिसने मोमिनीन के दिलों में तसकीन नाजि़ल फ़रमाई ताकि अपने ईमान के साथ और ईमान को बढ़ाएँ और सारे आसमान व ज़मीन के लशकर तो अल्लाह ही के हैं और अल्लाह बड़ा वाकि़फकार हकीम है
5 ताकि मोमिन मर्द और मोमिना औरतों को के बाग़ों में जा पहुँचाए जिनके नीचे नहरें जारी हैं और ये वहाँ हमेशा रहेंगे और उनके गुनाहों को उनसे दूर कर दे और ये अल्लाह के नज़दीक बड़ी कामयाबी है
6 और मुनाफिक़ मर्द और मुनाफि़क़ औरतों और मुशरिक मर्द और मुशरिक औरतों पर और जो अल्लाह के हक़ में बुरे बुरे ख़्याल रखते हैं अज़ाब नाजि़ल करे उन पर बड़ी गर्दिश है उन पर ग़ज़बनाक है और उसने उस पर लानत की है और उनके लिए जहन्नुम को तैयार कर रखा है और वह बुरी जगह है
7 और सारे आसमान व ज़मीन के लशकर अल्लाह ही के हैं और अल्लाह तो बड़ा वाकि़फ़कार ग़ालिब है
8 हमने तुमको गवाह और ख़ुशख़बरी देने वाला और धमकी देने वाला बना कर भेजा है
9 ताकि तुम लोग अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान लाओ और उसकी मदद करो और उसको बुज़़ुर्ग समझो और सुबह और शाम उसी की तस्बीह करो
10 बेशक जो लोग तुमसे बैयत करते हैं वह अल्लाह ही से बैयत करते हैं अल्लाह का हाथ उनके हाथों पर है - जो अहद को तोड़ेगा तो अपने अपने नुक़सान के लिए अहद तोड़ता है और जिसने उस बात को जिसका उसने अल्लाह से अहद किया है पूरा किया तो उसको अनक़रीब ही अज्रे अज़ीम अता फ़रमाएगा
11 जो एअराब पीछे रह गए अब वह तुमसे कहेंगे कि हमको हमारे माल और लड़के वालों ने रोक रखा तो आप हमारे वास्ते मग़फिरत की दुआ माँगें ये लोग अपनी ज़बान से ऐसी बातें कहते हैं जो उनके दिल में नहीं तुम कह दो कि अगर अल्लाह तुम लोगों को नुक़सान पहुँचाना चाहे या तुम्हें फायदा पहुँचाने का इरादा करे तो अल्लाह के मुक़ाबले में तुम्हारे लिए किसका बस चल सकता है बल्कि जो कुछ तुम करते हो अल्लाह उससे ख़ूब वाकि़फ है
12 बात ये है कि तुम ये समझे बैठे थे कि रसूल और मोमिनीन हरगिज़ कभी अपने लड़के वालों में पलट कर आने ही के नहीं और यही बात तुम्हारे दिलों में भी खप गयी थी और इसी वजह से, तुम तरह तरह की बदगुमानियाँ करने लगे थे और तुम लोग बर्बाद कौम हो
13 और जो अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान न लाए तो हमने काफि़रों के लिए जहन्नुम की आग तैयार कर रखी है
14 और सारे आसमान व ज़मीन की बादशाहत अल्लाह ही की है जिसे चाहे बख्श दे और जिसे चाहे सज़ा दे और अल्लाह तो बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
15 अब जो तुम ग़नीमतों के लेने को जाने लगोगे तो जो लोग पीछे रह गये थे तुम से कहेंगे कि हमें भी अपने साथ चलने दो ये चाहते हैं कि अल्लाह के क़ौल को बदल दें तुम कह दो कि तुम हरगिज़ हमारे साथ नहीं चलने पाओगे अल्लाह ने पहले ही से ऐसा फ़रमा दिया है तो ये लोग कहेंगे कि तुम लोग तो हमसे हसद रखते हो बात ये है कि ये लोग बहुत ही कम समझते हैं
16 जो एअराब पीछे रह गए थे उनसे कह दो कि अनक़रीब ही तुम सख़्त जंगजू क़ौम के लिए बुलाए जाओगे कि तुम उनसे लड़ते ही रहोगे या मुसलमान ही हो जाएँगे पस अगर तुम हुक्म मानोगे तो अल्लाह तुमको अच्छा बदला देगा और अगर तुमने जिस तरह पहली दफा सरताबी की थी अब भी सरताबी करोगे तो वह तुमको दर्दनाक अज़ाब की सज़ा देगा
17 न तो अन्धे ही पर कुछ गुनाह है और न लँगड़े पर गुनाह है और न बीमार पर गुनाह है और जो शख़्स अल्लाह और उसके रसूल का हुक्म मानेगा तो वह उसको उन सदाबहार बाग़ों में दाखि़ल करेगा जिनके नीचे नहरें जारी होंगी और जो सरताबी करेगा वह उसको दर्दनाक अज़ाब की सज़ा देगा
18 जिस वक़्त मोमिनीन तुमसे दरख़्त के नीचे बैयत कर रहे थे तो अल्लाह उनसे इस ज़रूर ख़ुश हुआ ग़रज़ जो कुछ उनके दिलों में था अल्लाह ने उसे देख लिया फिर उन पर तस्सली नाजि़ल फ़रमाई और उन्हें उसके एवज़ में बहुत जल्द फ़तेह इनायत की
19 और बहुत सी ग़नीमतें जो उन्होने हासिल की और अल्लाह तो ग़ालिब हिकमत वाला है
20 अल्लाह ने तुमसे बहुत सी ग़नीमतों का वायदा फ़रमाया था कि तुम उन पर काबिज़ हो गए तो उसने तुम्हें ये जल्दी से दिलवा दीं और लोगों की दराज़ी को तुमसे रोक दिया और ग़रज़ ये थी कि मोमिनीन के लिए निशानी हो और अल्लाह तुमको सीधी राह पर ले चले
21 और दूसरी जिन पर तुम क़ुदरत नहीं रखते थे अल्लाह ही उन पर हावी था और अल्लाह तो हर चीज़ पर क़ादिर है
22 अगर कुफ़्फ़ार तुमसे लड़ते तो ज़रूर पीठ फेर कर भाग जाते फिर वह न किसी को सरपरस्त ही पाते न मददगार
23 यही अल्लाह की आदत है जो पहले ही से चली आती है और तुम अल्लाह की आदत को बदलते न देखोगे
24 और वह वही तो है जिसने तुमको उन कुफ़्फ़ार पर फ़तेह देने के बाद मक्के की सरहद पर उनके हाथ तुमसे और तुम्हारे हाथ उनसे रोक दिए और तुम लोग जो कुछ भी करते थे अल्लाह उसे देख रहा था
25 ये वही लोग तो हैं जिन्होने कुफ़्र किया और तुमको मस्जिदुल हराम से रोका और क़ुरबानी के जानवरों को भी कि वह अपनी जगह पहुँचने से रूके रहे और अगर कुछ ऐसे ईमान वाले मर्द और ईमान वाले औरतें न होती जिनसे तुम वाकि़फ न थे कि तुम उनको पामाल कर डालते पस तुमको उनकी तरफ़ से बेख़बरी में नुकसान पहँच जाता इसलिए कि अल्लाह जिसे चाहे अपनी रहमत में दाखि़ल करे और अगर वह अलग हो जाते तो उनमें से जो लोग काफि़र थे हम उन्हें दर्दनाक अज़ाब की ज़रूर सज़ा देते
26 जब काफि़रों ने अपने दिलों में जि़द ठान ली थी और जि़द भी तो जाहिलियत की सी तो अल्लाह ने अपने रसूल और मोमिनीन पर अपनी तरफ़ से तसकीन नाजि़ल फ़रमाई और उनको परहेज़गारी की बात पर क़ायम रखा और ये लोग उसी के सज़ावार और एहल भी थे और अल्लाह तो हर चीज़ से ख़बरदार है
27 बेशक अल्लाह ने अपने रसूल को सच्चा मुताबिके़ वाक़ेया ख़्वाब दिखाया था कि तुम लोग इन्शाअल्लाह मस्जिदुल हराम में अपने सर मुँडवा कर और अपने थोड़े से बाल कतरवा कर बहुत अमन व इत्मेनान से दाखि़ल होंगे किसी तरह का ख़ौफ न करोगे तो जो बात तुम नहीं जानते थे उसको मालूम थी तो उसने उस से पहले ही बहुत जल्द फतेह अता की
28 वह वही तो है जिसने अपने रसूल को हिदायत और सच्चा दीन देकर भेजा ताकि उसको तमाम दीनों पर ग़ालिब रखे और गवाही के लिए तो बस अल्लाह ही काफ़ी है
29 मोहम्मद अल्लाह के रसूल हैं और जो लोग उनके साथ हैं काफि़रों पर बड़े सख़्त और आपस में बड़े रहम दिल हैं तुम उनको देखोगे झुके सर बसजूद हैं अल्लाह के फज़ल और उसकी ख़ुशनूदी के ख़्वास्तगार हैं कसरते सुजूद के असर से उनकी पेशानियों में घट्टे पड़े हुए हैं यही औसाफ़ उनके तौरेत में भी हैं और यही हालात इंजील में हैं गोया एक खेती है जिसने अपनी सूई निकाली फिर उसी सूई को मज़बूत किया तो वह मोटी हुयी फिर अपनी जड़ पर सीधी खड़ी हो गयी और अपनी ताज़गी से किसानों को ख़ुश करने लगी और इतनी जल्दी तरक़्क़ी इसलिए दी ताकि उनके ज़रिए काफि़रों का जी जलाएँ जो लोग ईमान लाए और अच्छे काम करते रहे अल्लाह ने उनसे बख़शिश और अज्रे अज़ीम का वायदा किया
1 ऐ ईमान लाने वालों अल्लाह और उसके रसूल के सामने किसी बात में आगे न बढ़ जाया करो और अल्लाह से डरते रहो बेशक अल्लाह बड़ा सुनने वाला वाकि़फ़कार है
2 ऐ ईमान लाने वालों अपनी आवाज़े पैग़म्बर की आवाज़ से ऊँची न किया करो और जिस तरह तुम आपस में एक दूसरे से ज़ोर से बोला करते हो उनके रूबरू ज़ोर से न बोला करो तुम्हारा किया कराया सब अकारत हो जाए और तुमको ख़बर भी न हो
3 बेशक जो लोग रसूले अल्लाह के सामने अपनी आवाज़ें धीमी कर लिया करते हैं यही लोग हैं जिनके दिलों को अल्लाह ने परहेज़गारी के लिए जाँच लिया है उनके लिए बख्शिश और बड़ा अज्र है
4 जो लोग तुमको हुजरों के बाहर से आवाज़ देते हैं उनमें के अक़्सर बे अक़्ल हैं
5 और अगर ये लोग इतना ताम्मुल करते कि तुम ख़ुद निकल कर उनके पास आ जाते तो ये उनके लिए बेहतर था और अल्लाह तो बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
6 ऐ ईमान लाने वालों अगर कोई बदकिरदार तुम्हारे पास कोई ख़बर लेकर आए तो ख़ूब तहक़ीक़ कर लिया करो कि तुम किसी क़ौम को नादानी से नुक़सान पहुँचाओ फिर अपने किए पर नादिम हो
7 और जान रखो कि तुम में अल्लाह के रसूल हैं बहुत सी बातें ऐसी हैं कि अगर रसूल उनमें तुम्हारा कहा मान लिया करें तो तुम ही मुश्किल में पड़ जाओ लेकिन अल्लाह ने तुम्हें ईमान की मोहब्बत दे दी है और उसको तुम्हारे दिलों में उमदा कर दिखाया है और कुफ़्र और बदकारी और नाफ़रमानी से तुमको बेज़ार कर दिया है यही लोग अल्लाह के फ़ज़ल व एहसान से राहे हिदायत पर हैं
8 और अल्लाह तो बड़ा वाकि़फ़कार और हिकमत वाला है
9 और अगर मोमिनीन में से दो फिरक़े आपस में लड़ पड़े तो उन दोनों में सुलह करा दो फिर अगर उनमें से एक दूसरे पर ज़्यादती करे तो जो ज़्यादती करे तुम उससे लड़ो यहाँ तक वह अल्लाह के हुक्म की तरफ रूझू करे फिर जब रूजू करे तो फरीकै़न में मसावात के साथ सुलह करा दो और इन्साफ़ से काम लो बेशक अल्लाह इन्साफ़ करने वालों को दोस्त रखता है
10 मोमिनीन तो आपस में बस भाई भाई हैं तो अपने दो भाईयों में मेल जोल करा दिया करो और अल्लाह से डरते रहो ताकि तुम पर रहम किया जाए
11 ऐ ईमान लाने वालों कोई कौम दूसरी क़ौम की हँसी न उड़ाये मुमकिन है कि वह लोग उनसे अच्छे हों और न औरते औरतों से क्या अजब है कि वह उनसे अच्छी हों और तुम आपस में एक दूसरे को मिलने न दो न एक दूसरे का बुरा नाम धरो ईमान लाने के बाद बदकारी का नाम ही बुरा है और जो लोग बाज़ न आएँ तो ऐसे ही लोग ज़ालिम हैं
12 ऐ ईमान लाने वालों बहुत से गुमान से बचे रहो क्यों कि बाज़ बदगुमानी गुनाह हैं और आपस में एक दूसरे के हाल की टोह में न रहा करो और न तुममें से एक दूसरे की ग़ीबत करे क्या तुममें से कोई इस बात को पसन्द करेगा कि अपने मरे हुए भाई का गोश्त खाए तो तुम उससे नफ़रत करोगे और अल्लाह से डरो, बेशक अल्लाह बड़ा तौबा क़ुबूल करने वाला मेहरबान है
13 लोगों हमने तो तुम सबको एक मर्द और एक औरत से पैदा किया और हम ही ने तुम्हारे कबीले और बिरादरियाँ बनायीं ताकि एक दूसरे की शिनाख़्त करे इसमें शक नहीं कि अल्लाह के नज़दीक तुम सबमें बड़ा इज़्ज़तदार वही है जो बड़ा परहेज़गार हो बेशक अल्लाह बड़ा वाकि़फ़कार ख़बरदार है
14 एअराब कहते हैं कि हम ईमान लाए तुम कह दो कि तुम ईमान नहीं लाए बल्कि कह दो कि इस्लाम लाए हालाँकि ईमान का अभी तक तुम्हारे दिल में गुज़र हुआ ही नहीं और अगर तुम अल्लाह की और उसके रसूल की फरमाबरदारी करोगे तो अल्लाह तुम्हारे आमाल में से कुछ कम नहीं करेगा - बेशक अल्लाह बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
15 मोमिन तो बस वही हैं जो अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान लाए फिर उन्होंने उसमें किसी तरह का शक शुबह न किया और अपने माल से और अपनी जानों से अल्लाह की राह में जेहाद किया यही लोग सच्चे हैं
16 पूछो तो कि क्या तुम अल्लाह को अपनी दीनदारी जताते हो और अल्लाह तो जो कुछ आसमानों मे है और जो कुछ ज़मीन में है जानता है और अल्लाह हर चीज़ से ख़बरदार है
17 तुम पर ये लोग एहसान जताते हैं तुम कह दो कि तुम अपने इसलाम का मुझ पर एहसान न जताओ अगर तुम सच्चे हो तो समझो कि, अल्लाह ने तुम पर एहसान किया कि उसने तुमको ईमान का रास्ता दिखाया
18 बेशक अल्लाह तो सारे आसमानों और ज़मीन की छिपी हुयी बातों को जानता है और जो तुम करते हो अल्लाह उसे देख रहा है (107) 66 सूरए अत तहरीम
1 ऐ रसूल जो चीज़ अल्लाह ने तुम्हारे लिए हलाल की है तुम उससे अपनी बीवियों की ख़ुशनूदी के लिए क्यों किनारा कशी करो और अल्लाह तो बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
2 अल्लाह ने तुम लोगों के लिए क़समों को तोड़ डालने का कफ़्फ़ार मुक़र्रर कर दिया है और अल्लाह ही तुम्हारा कारसाज़ है और वही वाकि़फ़कार हिकमत वाला है
3 और जब पैग़म्बर ने अपनी बाज़ बीवी से चुपके से कोई बात कही फिर जब उसने उस बात की ख़बर दे दी और अल्लाह ने इस अम्र को रसूल पर ज़ाहिर कर दिया तो रसूल ने बाज़ बात जता दी और बाज़ बात टाल दी ग़रज़ जब रसूल ने इस वाकि़ये कि उस को ख़बर दी तो हैरत से बोल उठीं आपको इस बात की किसने ख़बर दी रसूल ने कहा मुझे बड़े वाकि़फ़कार ख़बरदार ने बता दिया
4 अगर तुम दोनों तौबा करो तो ख़ैर क्योंकि तुम दोनों के दिल टेढ़े हैं और अगर तुम दोनों रसूल की मुख़ालेफ़त में एक दूसरे की अयानत करती रहोगी तो कुछ परवा नहीं अल्लाह और जिबरील और तमाम इमानदारों में नेक शख़्स उनके मददगार हैं और उनके अलावा कुल फ़रिश्ते मददगार हैं
5 अगर रसूल तुम लोगों को तलाक़ दे दे तो अनक़रीब ही उनका रब तुम्हारे बदले उनको तुमसे अच्छी बीवियाँ अता करे जो फ़रमाबरदार ईमानदार अल्लाह रसूल की मुतीय तौबा करने वालियाँ इबादत गुज़ार रोज़ा रखने वालियाँ ब्याही हुयी
6 और बिन ब्याही कुंवारियाँ हो ऐ ईमान लाने वालों अपने आपको और अपने लड़के बालों को आग से बचाओ जिसके इंधन आदमी और पत्थर होंगे उन पर वह तन्दख़ू सख़्त मिजाज़ फ़रिश्ते हैं कि अल्लाह जिस बात का हुक़्म देता है उसकी नाफरमानी नहीं करते और जो हुक़्म उन्हें मिलता है उसे बजा लाते हैं
7 काफि़रों आज बहाने न ढूँढो जो कुछ तुम करते थे तुम्हें उसकी सज़ा दी जाएगी
8 ऐ ईमान लाने वालों अल्लाह की बारगाह में साफ़ ख़ालिस दिल से तौबा करो तो उम्मीद है कि तुम्हारा रब तुमसे तुम्हारे गुनाह दूर कर दे और तुमको जन्नत (बाग़ों) में दाखिल करे जिनके नीचे नहरें जारी हैं उस दिन जब अल्लाह रसूल को और उन लोगों को जो उनके साथ ईमान लाए हैं रूसवा नहीं करेगा उनका नूर उनके आगे आगे और उनके दाहिने तरफ़ चल रहा होगा और ये लोग ये दुआ करते होंगे रब हमारे लिए हमारा नूर पूरा कर और हमं बख्श दे बेशक तू हर चीज़ पर क़ादिर है
9 ऐ रसूल काफि़रों और मुनाफि़कों से जेहाद करो और उन पर सख़्ती करो और उनका ठिकाना जहन्नुम है और वह क्या बुरा ठिकाना है
10 अल्लाह ने काफ़िरों के वास्ते नूह की बीवी और लूत की बीवी की मसल बयान की है कि ये दोनो हमारे बन्दों के तसर्रुफ़ थीं तो दोनों ने अपने शौहरों से दगा की तो उनके शौहर अल्लाह के मुक़ाबले में उनके कुछ भी काम न आए और उनको हुक़्म दिया गया कि और जाने वालों के साथ आग में तुम दोनों भी दाखिल हो जाओ
11 और अल्लाह ने मोमिनीन के लिए फ़िरऔन की बीवी की मिसाल बयान फ़रमायी है कि जब उसने दुआ की रब मेरे लिए अपने यहाँ जन्नत में एक घर बना और मुझे फ़िरऔन और उसकी कारस्तानी से नजात दे और मुझे ज़ालिम लोगो से छुटकारा अता फ़रमा
12 और इमरान की बेटी मरियम जिसने अपनी शर्मगाह को महफूज़ रखा तो हमने उसमें रूह फूंक दी और उसने अपने रब की बातों और उसकी किताबों की तस्दीक़ की और फ़रमाबरदारों में थीं
(108) 64 सूरए अत तग़ाबुन
1 जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है अल्लाह ही की तस्बीह करती है उसी की बादशाहत है और तारीफ़ उसी के लिए सज़ावार है और वही हर चीज़ पर कादिर है
2 वही तो है जिसने तुम लोगों को पैदा किया कोई तुममें काफि़र है और कोई मोमिन और जो कुछ तुम करते हो अल्लाह उसको देख रहा है
3 उसी ने सारे आसमान व ज़मीन को हिकमत व मसलेहत से पैदा किया और उसी ने तुम्हारी सूरतें बनायीं तो सबसे अच्छी सूरतें बनायीं और उसी की तरफ़ लौटकर जाना हैं
4 जो कुछ सारे आसमान व ज़मीन में है वह जानता है और जो कुछ तुम छुपा कर या खुल्लम खुल्ला करते हो उससे वाकिफ़ है और अल्लाह तो दिल के भेद तक से आगाह है
5 क्या तुम्हें उनकी ख़बर नहीं पहुँची जिन्होंने पहले कुफ्ऱ किया तो उन्होने अपने काम की सज़ा का मज़ा चखा और उनके लिए दर्दनाक अज़ाब है
6 ये इस वजह से कि उनके पास रसूल वाज़ेए व रौशन मौजिज़े लेकर आ चुके थे तो कहने लगे कि क्या आदमी हमारे हादी बनेंगें ग़रज़ ये लोग काफि़र हो बैठे और मुँह फेर बैठे और अल्लाह ने भी परवाह न की और अल्लाह तो बे परवा सज़ावारे हम्द है
7 काफि़रों का ख़्याल ये है कि ये लोग दोबारा न उठाए जाएँगे तुम कह दो वहाँ अपने रब की क़सम तुम ज़रूर उठाए जाओगे फिर जो जो काम तुम करते रहे वह तुम्हें बता देगा और ये तो अल्लाह पर आसान है
8 तो तुम अल्लाह और उसके रसूल पर उसी नूर पर ईमान लाओ जिसको हमने नाजि़ल किया है और जो कुछ तुम करते हो अल्लाह उससे ख़बरदार है
9 जब वह क़यामत के दिन तुम सबको जमा करेगा फिर यही हार जीत का दिन होगा और जो अल्लाह पर ईमान लाए और अच्छा काम करे वह उससे उसकी बुराइयाँ दूर कर देगा और उसको जन्नत (बाग़ों) में दाखि़ल करेगा जिनके नीचे नहरें जारी हैं वह उनमें अबादुल आबाद हमेशा रहेगा, यही तो बड़ी कामयाबी है
10 और जो लोग काफि़र हैं और हमारी आयतों को झुठलाते रहे यही लोग आग के साथी हैं कि हमेशा उसी में रहेंगे और वह क्या बुरा ठिकाना है
11 जब कोई मुसीबत आती है तो अल्लाह के इज़न से और जो अल्लाह पर ईमान लाता है तो अल्लाह उसके क़ल्ब की हिदायत करता है और अल्लाह हर चीज़ से ख़ूब आगाह है
12 और अल्लाह की इताअत करो और रसूल की इताअत करो फिर अगर तुमने मुँह फेरा तो हमारे रसूल पर सिर्फ़ पैग़ाम का वाज़ेए करके पहुँचा देना फ़र्ज़ है
13 अल्लाह उसके सिवा कोई माबूद नहीं और मोमिनो को अल्लाह ही पर भरोसा करना चाहिए
14 ऐ ईमान लाने वालों तुम्हारी बीवियों और तुम्हारी औलाद में से बाज़ तुम्हारे दुशमन हैं तो तुम उनसे बचे रहो और अगर तुम माफ़ कर दो दरगुज़र करो और बख़्ष दो तो अल्लाह बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
15 तुम्हारे माल और तुम्हारी औलादे बस आज़माइश है और अल्लाह के यहाँ तो बड़ा अज्र है
16 तो जहाँ तक तुम से हो सके अल्लाह से डरते रहो और सुनो और मानों और अपनी बेहतरी के वास्ते ख़र्च करो और जो अपने नफ़्स की हिरस से बचा लिया गया तो ऐसे ही लोग मुरादें पाने वाले हैं
17 अगर तुम अल्लाह को क़र्ज़े हसना दोगे तो वह उसको तुम्हारे वास्ते दूना कर देगा और तुमको बख्श देगा और अल्लाह तो बड़ा क़द्रदान व बुर्दबार है
18 पोशीदा और ज़ाहिर का जानने वाला ग़ालिब हिकमत वाला है
(109) 61 सूरए अस सफ्फ
1 जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में हैं अल्लाह की तस्बीह करते हैं और वह ग़ालिब हिकमत वाला है
2 ऐ ईमान लाने वालों तुम ऐसी बातें क्यों कहा करते हो जो किया नहीं करते
3 अल्लाह के नज़दीक ये भारी बात है कि तुम ऐसी बात को जो करो नहीं
4 अल्लाह तो उन लोगों से उलफ़त रखता है जो उसकी राह में इस तरह परा बाँध के लड़ते हैं कि गोया वह सीसा पिलाई हुयी दीवारें हैं
5 और जब मूसा ने अपनी क़ौम से कहा कि भाइयों तुम मुझे क्यों अज़ीयत देते हो हालाँकि तुम तो जानते हो कि मैं तुम्हारे पास अल्लाह का रसूल हूँ तो जब वह टेढ़े हुए तो अल्लाह ने भी उनके दिलों को टेढ़ा ही रहने दिया और अल्लाह बदकार लोगों को मंजि़ले मक़सूद तक नहीं पहुँचाया करता
6 और जब मरियम के बेटे ईसा ने कहा ऐ बनी इसराइल मैं तुम्हारे पास अल्लाह का भेजा हुआ हूँ तौरेत जो मेरे पहले से है उसकी तसदीक़ करता हूँ और एक रसूल जिनका नाम अहमद होगा मेरे बाद आएँगे उनकी ख़ुशख़बरी सुनाता हूँ जो जब वह उनके पास वाज़ेए व रौशन मौजिज़े लेकर आया तो कहने लगे ये तो खुला हुआ जादू है
7 और जो इस्लाम की तरफ बुलाया जाए वह कु़बूल के बदले उलटा अल्लाह पर झूठ जोड़े उससे बढ़ कर ज़ालिम और कौन होगा और अल्लाह ज़ालिम लोगों को मंजि़ले मक़सूद तक नहीं पहुँचाया करता
8 ये लोग अपने मुँह से अल्लाह के नूर को बुझाना चाहते हैं हालाँकि अल्लाह अपने नूर को पूरा करके रहेगा अगरचे कुफ़्फ़ार बुरा ही मानें
9 वह वही है जिसने अपने रसूल को हिदायत और सच्चे दीन के साथ भेजा ताकि उसे और तमाम दीनों पर ग़ालिब करे अगरचे मुशरेकीन बुरा ही माने
10 ऐ ईमान लाने वालों क्या मैं नहीं ऐसी तिजारत बता दूँ जो तुमको दर्दनाक अज़ाब से निजात दे
11 अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान लाओ और अपने माल व जान से अल्लाह की राह में जेहाद करो अगर तुम समझो तो यही तुम्हारे हक़ मे बेहतर है
12 तो वह भी इसके ऐवज़ में तुम्हारे गुनाह बख्श देगा और तुम्हें जन्नत (बाग़ों) में दाखि़ल करेगा जिनके नीचे नहरें जारी हैं और पाकीजा़ मकानात में जो जावेदानी जन्नत में हैं यही तो बड़ी कामयाबी है
13 और एक चीज़ जिसके तुम दिल दादा हो अल्लाह की तरफ़ से मदद मिलेगी और अनक़रीब फतेह होगी और मोमिनीन को ख़ुशख़बरी दे दो
14 ऐ ईमान लाने वालों अल्लाह के मददगार बन जाओ जिस तरह मरियम के बेटे ईसा ने हवारियों से कहा था कि अल्लाह की तरफ़ मेरे मददगार कौन लोग हैं तो हवारीन बोल उठे थे कि हम अल्लाह के अनसार हैं तो बनी इसराईल में से एक गिरोह ईमान लाया और एक गिरोह काफ़िर रहा, तो जो लोग ईमान लाए हमने उनको उनके दुशमनों के मुक़ाबले में मदद दी तो आखि़र वही ग़ालिब रहे (110) 62 सूरए जुमुअह
1 जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है अल्लाह की तस्बीह करते हैं जो बादशाह पाक ज़ात ग़ालिब हिकमत वाला है
2 वही तो जिसने उम्मियों में उन्हीं में का एक रसूल भेजा जो उनके सामने उसकी आयतें पढ़ते और उनको पाक करते और उनको किताब और अक़्ल की बातें सिखाते हैं अगरचे इसके पहले तो ये लोग सरीही गुमराही में थे
3 और उनमें से उन लोगों की तरफ़ जो अभी तक उनसे मुलहिक़ नहीं हुए और वह तो ग़ालिब हिकमत वाला है
4 अल्लाह का फज़ल है जिसको चाहता है अता फ़रमाता है और अल्लाह तो बड़े फज़ल का मालिक है
5 जिन लोगों पर तौरेत लदवायी गयी है उन्होने उस को न उठाया उनकी मिसाल गधे की सी है जिस पर बड़ी बड़ी किताबें लदी हों जिन लोगों ने अल्लाह की आयतों को झुठलाया उनकी भी क्या बुरी मिसाल है और अल्लाह ज़ालिम लोगों को मंजि़ल मकसूद तक नहीं पहुँचाया करता
6 तुम कह दो कि ऐ यहूदियों अगर तुम ये ख़्याल करते हो कि तुम ही अल्लाह के दोस्त हो और लोग नहीं तो अगर तुम सच्चे हो तो मौत की तमन्ना करो
7 और ये लोग उन आमाल के सबब जो ये पहले कर चुके हैं कभी उसकी आरज़ू न करेंगे और अल्लाह तो ज़ालिमों को जानता है
8 तुम कह दो कि मौत जिससे तुम लोग भागते हो वह तो ज़रूर तुम्हारे सामने आएगी फिर तुम पोशीदा और ज़ाहिर के जानने वाले की तरफ़ लौटा दिए जाओगे फिर जो कुछ भी तुम करते थे वह तुम्हें बता देगा
9 ऐ ईमान लाने वालों जब जुमा का दिन नमाज़ के लिए अज़ान दी जाए तो अल्लाह की याद की तरफ़ दौड़ पड़ो और ख़रीद व फरोख़्त छोड़ दो अगर तुम समझते हो तो यही तुम्हारे हक़ में बेहतर है
10 फिर जब नमाज़ हो चुके तो ज़मीन में जाओ और अल्लाह के फज़ल तलाश करो और अल्लाह को बहुत याद करते रहो ताकि तुम दिली मुरादें पाओ
11 और जब ये लोग सौदा बिकता या तमाशा होता देखें तो उसकी तरफ़ टूट पड़े और तुमको खड़ा हुआ छोड़ दें तुम कह दो कि जो चीज़ अल्लाह के यहाँ है वह तमाशे और सौदे से कहीं बेहतर है और अल्लाह सबसे बेहतर रिज़्क़ देने वाला है
111 48 सूरए अल फ़तह 1 बेशक हमने तुमको फतह दी खुल्लम खुल्ला फतह
2 ताकि अल्लाह तुम्हारी उम्मत के अगले और पिछले गुनाह माफ़ कर दे और तुम पर अपनी नेअमत पूरी करे और तुम्हें सीधी राह पर साबित क़दम रखे 3 और अल्लाह तुम्हारी मदद करे – ज़बरदस्त मदद
4 वह अल्लाह तो है जिसने मोमिनीन के दिलों में तसकीन नाजि़ल फ़रमाई ताकि अपने ईमान के साथ और ईमान को बढ़ाएँ और सारे आसमान व ज़मीन के लशकर तो अल्लाह ही के हैं और अल्लाह बड़ा वाकि़फकार हकीम है
5 ताकि मोमिन मर्द और मोमिना औरतों को के बाग़ों में जा पहुँचाए जिनके नीचे नहरें जारी हैं और ये वहाँ हमेशा रहेंगे और उनके गुनाहों को उनसे दूर कर दे और ये अल्लाह के नज़दीक बड़ी कामयाबी है
6 और मुनाफिक़ मर्द और मुनाफि़क़ औरतों और मुशरिक मर्द और मुशरिक औरतों पर और जो अल्लाह के हक़ में बुरे बुरे ख़्याल रखते हैं अज़ाब नाजि़ल करे उन पर बड़ी गर्दिश है उन पर ग़ज़बनाक है और उसने उस पर लानत की है और उनके लिए जहन्नुम को तैयार कर रखा है और वह बुरी जगह है
7 और सारे आसमान व ज़मीन के लशकर अल्लाह ही के हैं और अल्लाह तो बड़ा वाकि़फ़कार ग़ालिब है
8 हमने तुमको गवाह और ख़ुशख़बरी देने वाला और धमकी देने वाला बना कर भेजा है
9 ताकि तुम लोग अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान लाओ और उसकी मदद करो और उसको बुज़़ुर्ग समझो और सुबह और शाम उसी की तस्बीह करो
10 बेशक जो लोग तुमसे बैयत करते हैं वह अल्लाह ही से बैयत करते हैं अल्लाह का हाथ उनके हाथों पर है - जो अहद को तोड़ेगा तो अपने अपने नुक़सान के लिए अहद तोड़ता है और जिसने उस बात को जिसका उसने अल्लाह से अहद किया है पूरा किया तो उसको अनक़रीब ही अज्रे अज़ीम अता फ़रमाएगा
11 जो एअराब पीछे रह गए अब वह तुमसे कहेंगे कि हमको हमारे माल और लड़के वालों ने रोक रखा तो आप हमारे वास्ते मग़फिरत की दुआ माँगें ये लोग अपनी ज़बान से ऐसी बातें कहते हैं जो उनके दिल में नहीं तुम कह दो कि अगर अल्लाह तुम लोगों को नुक़सान पहुँचाना चाहे या तुम्हें फायदा पहुँचाने का इरादा करे तो अल्लाह के मुक़ाबले में तुम्हारे लिए किसका बस चल सकता है बल्कि जो कुछ तुम करते हो अल्लाह उससे ख़ूब वाकि़फ है
12 बात ये है कि तुम ये समझे बैठे थे कि रसूल और मोमिनीन हरगिज़ कभी अपने लड़के वालों में पलट कर आने ही के नहीं और यही बात तुम्हारे दिलों में भी खप गयी थी और इसी वजह से, तुम तरह तरह की बदगुमानियाँ करने लगे थे और तुम लोग बर्बाद कौम हो
13 और जो अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान न लाए तो हमने काफि़रों के लिए जहन्नुम की आग तैयार कर रखी है
14 और सारे आसमान व ज़मीन की बादशाहत अल्लाह ही की है जिसे चाहे बख्श दे और जिसे चाहे सज़ा दे और अल्लाह तो बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
15 अब जो तुम ग़नीमतों के लेने को जाने लगोगे तो जो लोग पीछे रह गये थे तुम से कहेंगे कि हमें भी अपने साथ चलने दो ये चाहते हैं कि अल्लाह के क़ौल को बदल दें तुम कह दो कि तुम हरगिज़ हमारे साथ नहीं चलने पाओगे अल्लाह ने पहले ही से ऐसा फ़रमा दिया है तो ये लोग कहेंगे कि तुम लोग तो हमसे हसद रखते हो बात ये है कि ये लोग बहुत ही कम समझते हैं
16 जो एअराब पीछे रह गए थे उनसे कह दो कि अनक़रीब ही तुम सख़्त जंगजू क़ौम के लिए बुलाए जाओगे कि तुम उनसे लड़ते ही रहोगे या मुसलमान ही हो जाएँगे पस अगर तुम हुक्म मानोगे तो अल्लाह तुमको अच्छा बदला देगा और अगर तुमने जिस तरह पहली दफा सरताबी की थी अब भी सरताबी करोगे तो वह तुमको दर्दनाक अज़ाब की सज़ा देगा
17 न तो अन्धे ही पर कुछ गुनाह है और न लँगड़े पर गुनाह है और न बीमार पर गुनाह है और जो शख़्स अल्लाह और उसके रसूल का हुक्म मानेगा तो वह उसको उन सदाबहार बाग़ों में दाखि़ल करेगा जिनके नीचे नहरें जारी होंगी और जो सरताबी करेगा वह उसको दर्दनाक अज़ाब की सज़ा देगा
18 जिस वक़्त मोमिनीन तुमसे दरख़्त के नीचे बैयत कर रहे थे तो अल्लाह उनसे इस ज़रूर ख़ुश हुआ ग़रज़ जो कुछ उनके दिलों में था अल्लाह ने उसे देख लिया फिर उन पर तस्सली नाजि़ल फ़रमाई और उन्हें उसके एवज़ में बहुत जल्द फ़तेह इनायत की
19 और बहुत सी ग़नीमतें जो उन्होने हासिल की और अल्लाह तो ग़ालिब हिकमत वाला है
20 अल्लाह ने तुमसे बहुत सी ग़नीमतों का वायदा फ़रमाया था कि तुम उन पर काबिज़ हो गए तो उसने तुम्हें ये जल्दी से दिलवा दीं और लोगों की दराज़ी को तुमसे रोक दिया और ग़रज़ ये थी कि मोमिनीन के लिए निशानी हो और अल्लाह तुमको सीधी राह पर ले चले
21 और दूसरी जिन पर तुम क़ुदरत नहीं रखते थे अल्लाह ही उन पर हावी था और अल्लाह तो हर चीज़ पर क़ादिर है
22 अगर कुफ़्फ़ार तुमसे लड़ते तो ज़रूर पीठ फेर कर भाग जाते फिर वह न किसी को सरपरस्त ही पाते न मददगार
23 यही अल्लाह की आदत है जो पहले ही से चली आती है और तुम अल्लाह की आदत को बदलते न देखोगे
24 और वह वही तो है जिसने तुमको उन कुफ़्फ़ार पर फ़तेह देने के बाद मक्के की सरहद पर उनके हाथ तुमसे और तुम्हारे हाथ उनसे रोक दिए और तुम लोग जो कुछ भी करते थे अल्लाह उसे देख रहा था
25 ये वही लोग तो हैं जिन्होने कुफ़्र किया और तुमको मस्जिदुल हराम से रोका और क़ुरबानी के जानवरों को भी कि वह अपनी जगह पहुँचने से रूके रहे और अगर कुछ ऐसे ईमान वाले मर्द और ईमान वाले औरतें न होती जिनसे तुम वाकि़फ न थे कि तुम उनको पामाल कर डालते पस तुमको उनकी तरफ़ से बेख़बरी में नुकसान पहँच जाता इसलिए कि अल्लाह जिसे चाहे अपनी रहमत में दाखि़ल करे और अगर वह अलग हो जाते तो उनमें से जो लोग काफि़र थे हम उन्हें दर्दनाक अज़ाब की ज़रूर सज़ा देते
26 जब काफि़रों ने अपने दिलों में जि़द ठान ली थी और जि़द भी तो जाहिलियत की सी तो अल्लाह ने अपने रसूल और मोमिनीन पर अपनी तरफ़ से तसकीन नाजि़ल फ़रमाई और उनको परहेज़गारी की बात पर क़ायम रखा और ये लोग उसी के सज़ावार और एहल भी थे और अल्लाह तो हर चीज़ से ख़बरदार है
27 बेशक अल्लाह ने अपने रसूल को सच्चा मुताबिके़ वाक़ेया ख़्वाब दिखाया था कि तुम लोग इन्शाअल्लाह मस्जिदुल हराम में अपने सर मुँडवा कर और अपने थोड़े से बाल कतरवा कर बहुत अमन व इत्मेनान से दाखि़ल होंगे किसी तरह का ख़ौफ न करोगे तो जो बात तुम नहीं जानते थे उसको मालूम थी तो उसने उस से पहले ही बहुत जल्द फतेह अता की
28 वह वही तो है जिसने अपने रसूल को हिदायत और सच्चा दीन देकर भेजा ताकि उसको तमाम दीनों पर ग़ालिब रखे और गवाही के लिए तो बस अल्लाह ही काफ़ी है
29 मोहम्मद अल्लाह के रसूल हैं और जो लोग उनके साथ हैं काफि़रों पर बड़े सख़्त और आपस में बड़े रहम दिल हैं तुम उनको देखोगे झुके सर बसजूद हैं अल्लाह के फज़ल और उसकी ख़ुशनूदी के ख़्वास्तगार हैं कसरते सुजूद के असर से उनकी पेशानियों में घट्टे पड़े हुए हैं यही औसाफ़ उनके तौरेत में भी हैं और यही हालात इंजील में हैं गोया एक खेती है जिसने अपनी सूई निकाली फिर उसी सूई को मज़बूत किया तो वह मोटी हुयी फिर अपनी जड़ पर सीधी खड़ी हो गयी और अपनी ताज़गी से किसानों को ख़ुश करने लगी और इतनी जल्दी तरक़्क़ी इसलिए दी ताकि उनके ज़रिए काफि़रों का जी जलाएँ जो लोग ईमान लाए और अच्छे काम करते रहे अल्लाह ने उनसे बख़शिश और अज्रे अज़ीम का वायदा किया
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