मेरे
साथ 1400 वर्ष पूर्व मदीने का सफ़र कीजिये और सच्चे इस्लाम और मोमिनों को पहचानिए – 6
(89) 3 सूर: आले इमरान 1 अलिफ़ लाम मीम
अल्लाह ही वह है जिसके सिवा कोई इलाहा नहीं है
2 वही जि़न्दा क़ायम है
3 उसी ने तुम पर बरहक़ किताब नाजि़ल की जो उसके सामने मौजूद हैं उनकी तसदीक़ करती है और उसी ने उससे पहले लोगों की हिदायत के वास्ते तौरेत व इन्जील नाजि़ल की
4 और हक़ व बातिल में तमीज़ देने वाला फुर्क़ान नाज़िल किया बेशक जिन लोगों ने अल्लाह की आयतों को न माना उनके लिए सख़्त अज़ाब है और अल्लाह हर चीज़ पर ग़ालिब बदला लेने वाला है
5 बेशक अल्लाह पर कोई चीज़ पोशीदा नहीं है - ज़मीन में न आसमान में
6 वही तो वह अल्लाह है जो माँ के पेट में तुम्हारी सूरत जैसी चाहता है बनाता हे उसके सिवा कोई माबूद नहीं
7 वही ग़ालिब और दाना है वही है जिसने तुमपर किताब नाजि़ल की उसमें की बाज़ आयतें तो मोहकम हैं वही असल किताब- उम्मुल किताब है और कुछ मुतशाबेह बस जिन लोगों के दिलों में कज़ी है वह उन्हीं आयतों के पीछे पड़े रहते हैं जो मुतशाबेह हैं ताकि फ़साद बरपा करें और इस ख़्याल से कि उन्हें मतलब पर ढाले लें हालाँकि अल्लाह और उन लोगों के सिवा जो इल्म से बड़े पाए पर फ़ायज़ हैं उनका असली मतलब कोई नहीं जानता वह लोग कहते हैं कि हम उस पर ईमान लाए सब हमारे परवरदिगार की तरफ़ से है और अक़्ल वाले ही समझते हैं
8 ए हमारे मालिक तू हिदायत देने के बाद हमारे दिलों को भटकने न दे अपनी बारगाह से हमें रहमत अता फरमा इसमें तो कोई शक नहीं तू बड़ा देने वाला है
2 वही जि़न्दा क़ायम है
3 उसी ने तुम पर बरहक़ किताब नाजि़ल की जो उसके सामने मौजूद हैं उनकी तसदीक़ करती है और उसी ने उससे पहले लोगों की हिदायत के वास्ते तौरेत व इन्जील नाजि़ल की
4 और हक़ व बातिल में तमीज़ देने वाला फुर्क़ान नाज़िल किया बेशक जिन लोगों ने अल्लाह की आयतों को न माना उनके लिए सख़्त अज़ाब है और अल्लाह हर चीज़ पर ग़ालिब बदला लेने वाला है
5 बेशक अल्लाह पर कोई चीज़ पोशीदा नहीं है - ज़मीन में न आसमान में
6 वही तो वह अल्लाह है जो माँ के पेट में तुम्हारी सूरत जैसी चाहता है बनाता हे उसके सिवा कोई माबूद नहीं
7 वही ग़ालिब और दाना है वही है जिसने तुमपर किताब नाजि़ल की उसमें की बाज़ आयतें तो मोहकम हैं वही असल किताब- उम्मुल किताब है और कुछ मुतशाबेह बस जिन लोगों के दिलों में कज़ी है वह उन्हीं आयतों के पीछे पड़े रहते हैं जो मुतशाबेह हैं ताकि फ़साद बरपा करें और इस ख़्याल से कि उन्हें मतलब पर ढाले लें हालाँकि अल्लाह और उन लोगों के सिवा जो इल्म से बड़े पाए पर फ़ायज़ हैं उनका असली मतलब कोई नहीं जानता वह लोग कहते हैं कि हम उस पर ईमान लाए सब हमारे परवरदिगार की तरफ़ से है और अक़्ल वाले ही समझते हैं
8 ए हमारे मालिक तू हिदायत देने के बाद हमारे दिलों को भटकने न दे अपनी बारगाह से हमें रहमत अता फरमा इसमें तो कोई शक नहीं तू बड़ा देने वाला है
9 ऐ हमारे
परवरदिगार बेशक तू एक न एक दिन जिसके आने में शुबह नहीं लोगों को इक्ट्ठा करेगा
अल्लाह अपने वायदे के खि़लाफ़ नहीं करता 10 बेशक जिन
लोगों ने कुफ्र इख़्तेयार किया उनको अल्लाह से न उनके माल न उनकी औलाद किसी काम
आयेंगे और ऐसे लोग आग का ईंधन होंगे 11 कौमे फिरौंन और उनसे पहले जो लोग थे उनकी
यही आदत थी कि उन लोगों ने हमारी आयतों को झुठलाया तो अल्लाह ने उनके गुनाहों की
सजा में उन्हें ले डाला और अल्लाह सख्त सजा देने वाला है
12 कह दो काफिरों से कि तुम बहुत जल्द मगलूब होगे और जहन्नम में इकट्ठे
किये जाओगे और वह बुरा ठिकाना है
13 इसकी निशानी पहले ही मिल चुकी है जब दो लश्कर आपस में गुथे – एक अल्लाह
के रास्ते पर दूसरा काफिरों का – वह उसको दुगुना देख रहे थे अल्लाह जिसको चाहता है
अपनी मदद से ताईद करता है बेशक देखने वालों के लिए इसमें इबरत है
14 लोगों के लिए जीनत हैं ख्वाहिशात की पसंद की चीजें बीवियां , बेटे ,
सोना चांदी अच्छी नस्ल के घोड़े मवेशी और खेती यह दुनियावी ऐश की चीजें हैं पर
अल्लाह के पास बहतर बदल है 15
कहो तुम्हें बताऊँ बहतर क्या है ? जो मुत्तकी हैं उनके लिए उनके रब के पास बाग़
(जन्नत) है जिनके नीचे से नहरें बहती हैं
जहां हमेशा रहेंगे उनकी पाक बीवियां और अल्लाह की तरफ से रिजवान और अल्लाह अपने
बन्दों को देखता रहता है”
मुत्तकी परहेजगार कौन हैं ?
“16 जो यह कहते हैं हमारे रब हम
ईमान लाये हमारे गुनाहों को बख्श दे और आग के अज़ाब से बचा
17 जो सब्र करते हैं , सच्चे हैं
, फरमाबरदार हैं , खर्च करते हैं गुनाहों
का इस्तेग्फार करते हैं सहर के वक्तों में
18 अल्लाह गवाही देता है उसके सिवा कोई इलाहा नहीं है , फ़रिश्ते गवाही देते
हैं और जो अहले इल्म हैं वे गवाही देते हैं उसके सिवा कोई इलाहा नहीं है जो अज़ीज़-
इज्ज़त वाला व हकीम- हिकमत वाला है
19 बेशक अल्लाह के नज़दीक इस्लाम है और जिन्हे किताब दी गयी थी उन्होंने
इल्म आने के बाद इख्तिलाफ किया आपस में बगावत से और जो अल्लाह की आयतों से कुफ्र
करेगा तो अल्लाह सरी उल हिसाब है -हिसाब लेने में तेज़ है 20 अगर
वह तुम से हुज्जत करें तो कहो – मैं अल्लाह के हवाले करता हूँ (असलम) और जो मेरे ताबेअ हैं वे भी I और जिन्हें किताब
दी गयी और जो उम्मी हैं जिन्हें अब तक कोई किताब नहीं दी गयी उनसे पूछो क्या तुम
भी अपने को अल्लाह के हवाले करते हो ? अगर वे असलम होते हैं तो हिदायत पा गए अगर
वे पलट जाएँ तो तुम्हारा काम पहुंचाना था अल्लाह अपने बन्दों कलो देखने वाला है
21 बेशक जो अल्लाह की आयतों में कुफ्र करते हैं , नबियों को बगैर हक क़त्ल
करते हैं और लोगों में उनको क़त्ल करते हैं जो इन्साफ करने का हुक्म देते हैं तो
ऐसों को अज़ाब उन अलीम की खुशखबरी दे दो
22 इनके आमाल इस दुनिया में और आखिरत में बेकार गए और कोई उनका मददगार
नहीं होगा
23 क्या तुम ने उनको देखा जिन्हें
किताब का एक हिस्सा दिया गया था जब किआब की तरफ बुलाये जाते हैं कि इसके ज़रिये
उनके बीच फैसला किया जाए तो एक फरीक पलट जाता है
24 यह इसलिए कि वे कहते हैं आग उन्हें छू नहीं सकती सिवाय कुछ दिनों के इस
तरह अपने दीं में जो इफ्तिरा करते हैं उसी से धोखा खा रहे हैं 25 तब कैसा
होगा जब उस दिन जिसके आने में कोई शक नहीं है उनको इकट्ठे करेंगे और हरेक को जो
उसने कमाया है उसका अज्र देंगे और कोई
ज़ुल्म नहीं किया जाएगा ?”
अल्लाह से क्या कहें ? 26 कहो “या अल्लाह ,
मालिकुलमुल्क, तू जिसे चाहता है मुल्क (मिलकियत) देता है तू से चाहता है मुल्क (मिलकियत) छीन लेता है तू
जिसे चाहता है इज्ज़त देता है तू जिसे चाहता है ज़लील करता है I तेरे ही हाथों में
खैर है और तू हर चीज़ पर कादिर है 27
तू रात को दिन में दाखिल करता है तू दिन को रात में दाखिल करता है तू बेजान से
जिंदा को निकालता है तू जिंदा से बेजान निकालता है तू जिसे चाहता हैं बगैर हिसाब
रिज्क देता है 28
मोमिनों को मोमिन छोड़ कर काफिरों को अपना वली नहीं बनाना चाहिए और जो ऐसा करेगा
उसे अल्लाह से फिर कुछ सरोकार नहीं सिवाए जब तुम्हें खौफ हो I अल्लाह अपने से
मोहतात करता है और अल्लाह ही की तरफ लौटने की मंजिल है 29
कहो तुम्हारे सीनों में जो है उसे छुपाओ या खोलो अल्लाह सब जानता है आसमानों में
जो कुछ है अल्लाह जानता है ज़मीनों में जो कुछ है अल्लाह जानता है अल्लाह हर शै पर
क़दीर है 30
उस दिन हर नफस उसने जो खैर किया है अपने सामने हाज़िर पायेगा और जो बुराई की है और
तब आरज़ू करेगा कि इसके और उसके बीच में वक्तों का फासला होता अल्लाह तुम्हें अपने से मोहतात करता है अल्लाह अपने बन्दों पर रऊफ – बहुत मेहरबान है
31 कहो अगर तुम अल्लाह से मुहब्बत करते हो तो मेरी इत्तिबा करो अल्लाह
तुम्हें मुहब्बत करेगा और तुम्हारे गुनाह माफ़ कर देगा अल्लाह गफूर- माफ़ करने वाला रहीम- रहम करने वाला है
32
कहो अल्लाह और रसूल की इताअत करो अगर वे पलट जाएँ तो अल्लाह काफिरों को दोस्त नहीं
रखता
33 बेशक अल्लाह ने आदम और नूह और आले इन्राहीम और आले इमरान को आलमों में
चुना
34 बाज़ बाज़ की ज़ुर्रियत- संतान हैं
और अल्लाह समी – सुनने वाला और अलीम – जानने वाला है”
यहूदियों को उनके मजहब की गहरी बातें बताने के बाद अब ईसाइयों को उनकी
बातें बतायी जा रही हैं जिससे वे भी जान लें कि कुरान की आयतें अल्लाह ही भेज रहा
है:
“35 जब इमरान की बीवी ने कहा ‘ मेरे रब मेरी कोख में जो है उसे तुझे
हदया करती हूँ उसे मेरी तरफ से कुबूल फरमा बेशक तू सुनने वाला जानने वाला है 36 जब उसने
उसको जना तो उसने कहा ‘ मेरे रब , मैंने बच्ची को जना और अल्लाह बहतर जनता था कि
उसने क्या जाना , और नर मादा की तरह नही होता है ‘ मैंने उसका नाम मरियम रखा है
मैं उसे और उसकी नस्ल को शैतान रजीम से
तेरी पनाह में देती हूँ’
37 तो उसके रब ने उसे शुभ स्वीकार किया और खूब तरीके से पाला पोसा और उसे
ज़करिया की निगाह्दाश्त में दिया जब भी
ज़करिया उसके मेहराब में दाखिल होते वहाँ रिज्क मौजूद देखते वह बोले ‘ मरियम यह तुम्हारे पास कहाँ से
आता है ?’ मरियम बोली ‘ यह अल्लाह की तरफ से है और बेशक अल्लाह जिसे चाहता है
बेहिसाब रिज्क देता है’
38 तब ज़करिया ने अपने रब
से दुआ मांगी ‘ मेरे रब मुझे अपनी बारगाह से नेक ज़ुर्रियत अता फरमा तू दुआओं को
सुनने वाला है’
39 फरिश्तों ने उसको आवाज़ दी उस वक़्त वह अपने मेहराब में इबादत में खड़ा था
‘ अल्लाह तुम्हें याह्या की खुशखबरी देता है जो अल्लाह के कलमा की तसदीक़ करेगा सय्यद होगा , संयमी होगा ,
नबी होगा और सालेहीन में से होगा
40 उसने कहा ‘ मेरे रब मेरे बेटा कैसे हो सकता है जब मैं बूढ़ा हो चूका हूँ
और मेरी बीवी बाँझ है कहा ‘ अल्लाह जो
चाहता है करता है’ 41 कहा ‘ मेरे
लिए कोई आयत भेज’ कहा ‘ तेरी आयत यह है कि तुम तीन दिन तक सिवाय इशारों के बात न
कर सकोगे और अपने रब को कसरत से याद करो शाम सुबह तस्बीह करो’
42 और जब फरिश्तों ने कहा ‘ ए
मरियम बेशक अल्लाह ने तुम्हें मुन्तखिब किया है
और तुम्हें पाक किया है और आलमों की औरतों में तुम्हें मुन्तखिब किया है 43 ‘ ए मरियम अपने रब की
इताअत करो सिजदा करो झुकने वालों के साथ झुको’ 44
यह गैब की ख़बरें हैं जो तुम्हें व्हय कर रहे हैं तुम उनमें नहीं थे जब मरियम की
किफ़ालत कौन करेगा इसके लिए वे कलम डाल रहे थे और न ही जब वे झगड़ा कर रहे थे तुम
उनके साथ थे 45 जब
फरिश्तों ने कहा ‘ बेशक अल्लाह तुम्हें अपनी तरफ से से कलमे की बशारत देता है उसका
नाम मसीह, ईसा इब्ने मरियम होगा दुनिया और आखिरत दोनों में इज्ज़तदार होगा और
मुक़र्रिबीन में से होगा 46 और वह लोगों से बात करेगा जब
पालने में होगा और जब बढ़ कर जवान होगा और सालिहीन में से होगा 47 कहा (स्त्रीलिंग) मेरे रब मुझे बेटा कैसे हो
सकता है किसी बशर ने मुझे छुआ ही नहीं ? कहा ‘ ऐसा ही होगा अल्लाह जो चाहता है
खल्क करता है जब वह किसी अम्र का फैसला करता है तो कहता है हो जा और हो जाता है 48 और वह उसे
किताब और हिकमत और तौरैत और इंजील सिखाएगा 49 और बनी इस्राएल की
तरफ रसूल ‘मैं तुम्हारे रब की तरफ से निशानी ले कर आया हूँ मैं मिटटी से चिड़िया की
मूरत बना कर फूँकूगा तो वह अल्लाह के हुक्म से चिड़िया बन जायेगी और अल्लाह की इजाज़त से मैं अंधों और कोढ़ियों को
ठीक करूंगा और मुर्दों को जिंदा करूंगा और तुम जो खाते हो और जो घरों में जमा करते
हो बता दूंगा बेशक इसमें तुम्हारे लिए
आयात हैं अगर तुम मोनिन हो 50
और तौरैत से जो पहले आया है उसकी तस्दीक करता हूँ और कुछ जो तुम पर हराम था उसे
हलाल करता हूँ मैं तुम्हारे रब की तरफ से आयत ले कर आया हूँ अल्लाह से डरो – तक़वा
करो और मेरी इताअत करो 51 बेशक अल्लाह मेरा और तुम्हारा रब है उसकी इबादत
करो – यही सिराते मुस्तक़ीम है
52 जब ईसा ने उनकी तरफ से कुफ्र महसूस किया तो कहा कौन अल्लाह की तरफ मेरा
मददगार है हवारियों ने कहा हम अन्सारे
अल्लाह हैं अल्लाह पर ईमान लाते हैं आप गवाह रहिये कि हैं हम मुस्लिम हैं 53 हमारे रब
जो तू ने भेजा उस पर ईमान लाये और रसूल की इत्तिबा करते हैं हम को शाहिदों में लिख
ले
54 उन्होंने मकर किया अल्लाह ने मकर किया और अल्लाह मकर करने वालों में खैर
है
55 जब अल्लाह ने कहा ‘ ए ईसा मैं तुम्हें पूरा करूंगा ऊपर उठाऊंगा और पाक
करूंगा उन काफिरों से और जो तुम्हारी इत्तिबा करते हैं उन्हें क़यामत तक काफिरों पर
फौकियत दूंगा फिर तुम सब मेरी तरफ लौट कर आओगे और तुम जिन बातों में इख्तिलाफ करते
हो हुक्म करूंगा” आज
की दुनिया की यह हकीकत है कि ईसाइयों को
औरों पर फौकियत हासिल है – आज के मुसलमान सोचें कि क्या वे भी काफिरों में हैं
जिसकी वजह से मिडिल ईस्ट पर अमेरिका और यूरोप को बरतरी हासिल है ? “56 और जो काफिर हैं उन पर शदीद अज़ाब
से दुनिया और आखिरत में अज़ाब करूंगा और उनका कोई मददगार नहीं होगा 57
और जो ईमान लाये और नेक अमल करते हैं उनको उनका पूरा अज्र वह पूरा देगा अल्लाह
जालिमों को दोस्त नहीं रखता 58
यह वह है जो आयतों में तुम को पढ़ कर सुनाते हैं और हिकमत वाला ज़िक्र 59 अल्लाह के नज़दीक ईसा की
मिसाल आदम की मिसाल है उसने उसे मिटटी से खलक किया और उससे कहा हो जाओ और वह हो
गया 60 तुम्हारे रब की
तरफ से यह हक है तुम शक करने वालों में न
होना 61
इल्म आ जाने के बाद अगर कोई तुम से हुज्जत करे तो कहो ‘ तुम अपने बेटों को बुलाओ
हम अपने बेटों को तुम अपनी औरतों को हम अपनी औरतों को तुम अपने नफ्सों को हम अपने
नफ्सों को फिर गिड़गिड़ा कर दुआ करें कि झूठों पर अल्लाह की लानत हो
62 यह सही किस्सा है और अल्लाह के सिवा कोई इलाहा नहीं है उर बेशक अल्लाह
अज़ीज़ – ताक़त वाला और हकीम – हिकमत वाला है 63 अगर वे
पलट जाएँ तो अल्लाह फसाद करने वालों को जानता है 64 कहो ‘ ऐ अहले किताब
हम एक कलमे पर आ जाएँ सीधा हमारे और तुम्हारे बीच कि हम अल्लाह के सिवा किसी की
इबादत नहीं करेंगे किसी को उससे शरीक नहीं करेंगे न अल्लाह के सिवा दूसरों को अपने
रब बनायेंगे तब अगर वे पलट जाएँ तो कहो ‘ गवाह रहो हम मुस्लिम हैं ‘ 65
‘ ऐ अहले किताब तुम इब्राहीम के बारे में क्यों हुज्जत करते हो क्या तौरैत और इंजील उनके बाद नहीं भेजी
गयीं थीं ? तुम अक्ल क्यों नहीं लगाते ? 66 जिनके बारे में
तुम्हें इल्म था उनके बारे में हुज्जत कर चुके पर जिनके बारे में तुम्हें कोई इल्म
नहीं उस पर क्यों हुज्जत करते हो ? अल्लाह
जानता है और तुम नहीं जानते हो 67
इब्राहीम न तो यहूदी थे और न नसरानी – वे हनीफ मुस्लिम थे और मुशरिकीन में से नहीं
थे
68 बेशक इब्राहीम से अवला वे लोग
हैं जो उनकी इत्तिबा करते हैं और ये नबी और जो मोमिन हैं और अल्लाह मोमिनों का वली
है 69
अहले किताब में एक तबका है जो चाहता है कि तुम्हें भटका दें पर वे नहीं भटका रहे
हैं सिवाए अपने को और शऊर नहीं है 70 ऐ
अहले किताब तुम अल्लाह की आयतों से क्यों कुफ्र करते हो जबकि तुम गवाह हो ?
71 ऐ अहले किताब तुम हक पर बातिल का गिलाफ क्यों चढ़ाते हो और सच को क्यों
छुपाते हो जबकि तुम जानते हो ? 72 और अहले किताब का एक तबका
है जो कहता है ‘मोमिनों पर जो नाजिल होता है उस पर सुबह ईमान ले आओ और शाम को
कुफ्र कर दो इस तरह शायद यह पलट जाएँ 73
ईमान न लाओ सिवाय उसके जो तुम्हारे दीन की ताबेअ हो’ कहो ‘ बेशक हिदायत तो सिर्फ
अल्लाह की हिदायत है’ ‘ ऐसा न हो कि जैसा तुम्हें मिला है किसी और को भी मिल जाए
या वे तुम्हारे के सामने तुम से ही हुज्जत
करें’ कहो ‘ बेशक फ़ज़ल तो अल्लाह के हाथ है जिसे चाहता है देता है और अल्लाह वासिउन
अलीम – हर तरफ पहुँच वाला जानने वाला है’ 74 जिसको चाहता है अपनी रहमत के लिए चुन लेता है
और फ़ज़लुल अज़ीम - बहुत बड़े फ़ज़ल वाला है 75
और अहले किताब में कोई ऐसा है कि उसे ख़ज़ाना भी दे दो तो पहुंचा दे और कोई ऐसा है
कि एक दीनार के लिए अगर खड़े न रहो तो न दे यह इसलिए कि वे कहते हैं उम्मियों के
लिए हम पर कोई गुनाह नहीं वे अल्लाह पर झूठ बांधते हैं और जानते भी हैं 76 बल्कि जो अपने अहद को पूरा करता है और अल्लाह
से डरता है तो बेशक अल्लाह मुत्ताकियों- अल्लाह से डरने वालों को दोस्त रखता है 77 बेशक जो लोग
अल्लाह से किये गए अहद और अपनी कसमों की थोड़ी सी कीमत लेते हैं उनका आखिरत में कोई
हिस्सा न होगा और क़यामत के दिन न अल्लाह उनसे बोलेगा न उनकी तरफ नज़र करेगा न
उन्हें पाक करेगा और उन्हें अजाबुन अलीम मिलेगा
78 बेशक एक तबका ऐसा है जो किताब ज़बान मरोड़ते हैं तुम समझोगे किताब से है
पर किताब से नहीं है और वे कहते हैं यह अल्लाह की तरफ से है पर अल्लाह की तरफ से
नहीं है अल्लाह पर झूठ बोलते हैं और जानते हैं 79 किसी
इंसान के लिए यह नहीं है कि अल्लाह उसे किताब हुक्म और नबूवत दे और वह कहे अल्लाह
के बजाय मेरे बन्दे हो जाओ लेकिन रब्बानी हो जाओ क्योंकि तुम किताब को पढ़ाते हो और तदरीस करते हो- सीखते हो 80 न वह यह ह्जुक्म देगा की फरिश्तों और नबियों
को अपने रब बनाओ क्या जब तुम मुस्लिम हो कुफ्र का हुक्म देगा ? 81
और जब अल्लाह ने नबियों से मीसाक लिया : मैं जो कुछ किताब और हिकमत तुम्हें
देता हूँ जब कोई रसूल आये जो उसकी तसदीक़ करे जो तुम्हारे पास है तो तुम उस पर ईमान
लाना और उसकी मदद करना उसने कहा ‘क्या तुम इक़रार करते हो और मेरा अहद लेते हो
उन्होंने कहा ‘हम इकरार करते हैं’ उसने कहा ‘गवाह रहना मैं भी तुम्हारे साथ गवाह
हूँ’ 82
जो इसके बाद पलट जाए वह फासिकों में है 83 क्या
वे अल्लाह के दीन के इलावा कुछ तलाश रहे
हैं ? जबकि जो कुछ आसमानों या ज़मीनों में ख़ुशी या नाखुशी अल्लाह को झुकता है और
पलटेगा 84 कहो हम अल्लाह
पर ईमान लाये और जो कुछ उसने भेजा इब्राहीम और इस्माइल और इसहाक और याकूब और पोतों
पर और जो कुछ मूसा और ईसा और नबियों को उनके रब की तरफ से दिया गया और हम उनके बीच
फ़रक नहीं करते और हम उसको मुस्लिम हैं
85 और जो कोई इस्लाम के इलावा दीन का ताबेअ होगा तो यह कबूल नहीं होगा और आखिरत
में वह घाटे में होगा 86
अल्लाह कैसे उस कौम को हिदायत दे सकता है जो ईमान लाने के बाद रसूल हक से हैं
गवाही देने के बाद और निशानियाँ आने के बाद काफिर हो गए ? अल्लाह जालिमों को
हिदायत नहीं देता 87
उन लोगों की जज़ा अल्लाह की लानत और फरिश्तों की और सारे इंसानों की” यहाँ पर शायद जहन्नम के ज़िक्र वाली
आयात छूट गयीं हैं ? “88 हमेशा
उसमें रहेंगे न कोई अज़ाब में कमी की जायेगी और न नज़र की जायेगी 89 सिवाय उनके जो बाद में
तौबा करें और इस्लाह करें बेशक अल्लाह गफूर – माफ़ करने वाला और रहीम – रहम करने
वाला है 90 बेशक
जिन्होंने ईमान लाने के बाद कुफ्र किया और कुफ्र में बढ़ते गए उनकी तौबा कुबूल नहीं
की जायेगी और वे दूर भटक गए 91
जो काफिर हैं और काफिर ही मर गए अगर वह ज़मीन के बराबर सोना बदले में देना चाहें तो
कुबूल नहीं किया जाएगा ऐसे लोगों को अजाबुन अलीम मिलेगा और कोई मददगार नहीं होगा 92 तुम नेकी तक
हरगिज़ न पहुंचोगे जब तक जो चीज़ महबूब है उसे खर्च न कर दो और जो कुछ तुम खर्च करते
हो अल्लाह उसे जानता है 93
तौरैत आने के पहले सब खाना बनी इस्राएल पर हलाल था सिवाय उसके जो इस्राएल ने अपने ऊपर हराम कर रखा था कहो ‘ तौरैत लाओ और
पढ़ो अगर तुम सच्चे हो’
94 इसके बाद जो अल्लाह पर झूठ इफ्तिरा करता है वह जालिमों में से है 95 कहो ‘अल्लाह सच्चा है
इत्तिबा करो मिल्लते इब्राहीम की – हनीफ थे मुशरिकीन में से नहीं थे 96
बेशक जो पहला घर लोगों के लिए वज़अ किया गया वह बक्का में मुबारक और आलमीन के लिए
हिदायत है 97 उसमें साफ़ आयात
हैं मकामे इब्राहीम और जो दाखिल हुआ अमन पा गया और अल्लाह के लिए इंसानों पर घर का
हज जिसके पास इसके रास्ते की इस्तितअ है और जो कोई कुफ्र करे तो बेशक अल्लाह आलमीन
से गनी है 98 कहो ‘ ऐ अहले किताब क्यों अल्लाह की
आयात से कुफ्र करते हो जबकि तुम जो कुछ करते हो अल्लाह उस पर गवाह है’
99 कहो ‘अहले किताब जो ईमान ले आये हैं उन्हें अल्लाह के रास्ते से क्यों
रोकते हो और क्यों इसे टेढ़ा करना चाहते हो जबकि तुम गवाह हो ? और जो कुछ तुम करते
हो अल्लाह उससे गाफिल नहीं है 100
ऐ ईमान वालों अगर तुम अहले किताब के एक तबके की इताअत करोगे तो तुम्हें ईमान के
बाद फेर कर काफिर कर देंगे
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