Monday, July 3, 2017

पहले पंजतन की मुहब्बत दिल में हो तब नमाज़ के लिए खड़े होईये !

पहले पंजतन की मुहब्बत दिल में हो तब नमाज़ के लिए खड़े होईये !
जो दिल मुहब्बत से खाली हैं और जिनमें तकब्बुर और नफरत है उन्हें नमाज़ शैतान बना देती है – इबलीस एक इबादतगुज़ार सब से बड़ा नमाज़ी था पर जब अल्लाह ने हुक्म दिया आदम को सिजदा करो तो उसने नहीं किया – सारे वहाबी सजदे को बहुत बड़ी चीज़ समझते हैं अल्लाह पर एहसान समझते हैं I इन्हें मालूम ही नहीं सजदा क्या लोग तो मुहब्बत में अपना सर काट कर पेश कर देते हैं ! सजदे का क्या एहसान ?
अगर मैं मालिक हूँ – तुम मेरे अपनों से दुश्मनी करो और रोज़ मेरे घर के सामने पांच बार उठक बैठक करो और मेरी लिखी किताब से रोज़ बिना मतलब समझे 10 पन्ने पढ़ो तो क्या मैं तुम्हें माफ़ कर दूंगा ? जंग के एहकाम को अमन में करो और यह भूल गए कि दुनिया के सारे इंसानों का रब भी एक है और अब्ब भी एक है ? तुम्हें किसने हक दिया कि अल्लाह के फौजदार बन जाओ ? पहले इंसान तो बनो अरब के वहशियों ! तुम तो इस लायक थे ही नहीं कि तुम्हें अल्लाह की किताब सुनाई जाती !
कर्बला ने 61 हिजरी में ही आने वाले वक्तों के लिए साबित कर दिया कि बिना पंजतन से मुहब्बत के नमाज़ रोज़ा हज कुरान किसी को अच्छा इंसान नहीं बना सकते I
दाय्श , तालिबान और बोको हराम जैसे लोगों के बारे में आलिम नकवी साहब ने आग अखबार के इतवार 2 जुलाई 2017 के शुमारे में ख्वारिज के बारे में कुछ हदीसे दी हैं :
1 वे कमसिन लड़के होंगे 2 ज़हनी तौर पर ना पुख्ता होंगे 3 घनी दाढ़ी रखेंगे 4 बहुत ऊंचा तहबंद बाँधने वाले होंगे 5 यह हरमैन शरीफ के पूर्वी किनारे से निकलेंगे 6 यह हमेशा निकलते रहेंगे यहाँ तक कि आखिरी गिरोह दज्जाल के साथ निकलेगा 7 ईमान इनके हलक से नीचे नहीं उतरेगा 8 वे इबादत और दीन  में बहुत शिद्दत और इन्तहा पसंद होंगे 9 तुम में से हर एक उनकी नमाज़ों के आगे अपनी नमाज़ों को और उनके रोजों के मुकाबले अपने रोजों को तुच्छ समझेगा 10 वे कुरान की ऐसे तिलावत करेंगे कि उसके सामने तुम अपनी तिलावत को तुच्छ समझोगे 11 उनकी कुरान की तिलावत उनके हलक से नीचे नहीं उतरेगी 12 वे कुरान के एहकाम को अपने मुताबिक समझेंगे लेकिन वह उनके खिलाफ होगा 13 वे लोगों को अल्लाह की किताब की तरफ बुलायेंगे लेकिन उनका कुरान से कोई ताल्लुक न होगा 14 उनके नारे और ज़ाहिरी बातें बड़ी अच्छी होंगी 15 मगर वे किरदार से बड़े ही ज़ालिम और घिनावने लोग होंगे 16 वे मुसलामानों को क़त्ल करेंगे
और ऐसी बहुत सी बातें हैं जिनसे साबित होता है कि नमाज़ कुरान को लेकर शैतान की पैरवी करेंगे – उनका वजूद शैतान की जीत है
सिर्फ पंजतन – मुहम्मद अली फातिमा हसन और हुसैन से मुहब्बत ही हमें ज़ुल्म के रास्ते से बचा सकती है जो कोई इनका साथ लेगा वही नजात पायेगा
अफ़सोस है कि बहुत से शिया उलेमा नमाज़ को इतना ज्यादा अहमियत दे रहे हैं कि शिया युवक भी वहाबियों जैसे होते जा रहे हैं और अहलेबैत अ०स० की मुहब्बत से दूर होते जा रहे हैं ऐसे ही एक युवक के दादा के सवाब के लिए मस्जिद में नमाज़ के बाद इमाम हुसैन की मजलिस की गयी थी मजलिस हो रही थी वह युवक आया उसने जानमाज़ उठाई बाहर जा कर नमाज़ पढ़ी वापस ला कर जानमाज़ रखी और चला गया – न दादा के सवाब से मतलब , न इमाम हुसैन की मजलिस से मतलब और न जो लोग बैठे थे उनसे मतलब
शिया कौम में भी ऐसे ही व्यक्तित्व का विघटन हो रहा है और इसके ज़िम्मेदार वे उलेमा हैं जो नमाज़ को ऐसा बताते हैं जैसे कि बैंक का अकाउंट है और बाद में कैश करा कर जन्नत का टिकट पक्का है  I
फिर याद दिला दूं :
अगर मैं मालिक हूँ – तुम मेरे अपनों से दुश्मनी करो और रोज़ मेरे घर के सामने पांच बार उठक बैठक करो और मेरी लिखी किताब से रोज़ बिना मतलब समझे 10 पन्ने पढ़ो तो क्या मैं तुम्हें माफ़ कर दूंगा ?     

मेरे साथ 1400 वर्ष पूर्व मदीने का सफ़र कीजिये और सच्चे इस्लाम और मोमिनों को पहचानिए 

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