Monday, July 10, 2017

मेरे साथ 1400 वर्ष पूर्व मदीने का सफ़र कीजिये और सच्चे इस्लाम और मोमिनों को पहचानिए – 11



मेरे साथ 1400 वर्ष पूर्व मदीने का सफ़र कीजिये और सच्चे इस्लाम और मोमिनों को पहचानिए 11
 (95)  47  सूरए मुहम्मद
1 जिन लोगों ने कुफ़्र एख़्तेयार किया और अल्लाह के रास्ते से रोका अल्लाह ने उनके आमाल अकारत कर दिए
2 और जिन लोगों ने ईमान क़़ुबूल किया और अच्छे काम किए और जो  मोहम्मद पर उनके रब की तरफ़ से नाजि़ल हुयी है और वह बरहक़ है उस पर ईमान लाए तो अल्लाह ने उनके गुनाह उनसे दूर कर दिए और उनकी हालत इस्लाह कर दी
3 ये इस वजह से कि काफ़िरों ने झूठी बात की पैरवी की और ईमान वालों ने अपने रब का सच्चा दीन एख़्तेयार किया यूँ अल्लाह लोगों के समझाने के लिए मिसालें बयान करता है
4 तो जब तुम काफ़िरों से भिड़ो तो गर्दनें मारो यहाँ तक कि जब तुम उन्हें ज़ख़्मों से चूर कर डालो तो उनकी मुश्कें कस लो फिर उसके बाद या तो एहसान रख या मुआवेज़ा लेकर, यहाँ तक कि लड़ाई के हथियार रख दे तो अगर अल्लाह चाहता तो  उनसे बदला लेता मगर उसने चाहा कि तुम्हारी आज़माइश एक दूसरे से  करे और जो लोग अल्लाह की राह में शहीद किये गए उनकी कारगुज़ारियों को अल्लाह हरगिज़ अकारत न करेगा
5 उन्हें अनक़रीब मंजि़ले मक़सूद तक पहुँचाएगा और उनकी हालत सवार देगा                                                       6 और उनको उस बाग़ (जन्नत)  में दाखि़ल करेगा जिसका उन्हें शानासा कर रखा है 
7 ऐ ईमान लाने वालों  अगर तुम अल्लाह की मदद करोगे तो वह भी तुम्हारी मदद करेगा और तुम्हें साबित क़दम रखेगा 
8 और जो लोग काफि़र हैं उनके लिए तो डगमगाहट है और अल्लाह  आमाल बरबाद कर देगा
9 ये इसलिए कि अल्लाह ने जो चीज़ नाजि़ल फ़रमायी उसे उन्होने  तो अल्लाह ने उनकी कारस्तानियों को अकारत कर दिया 
10 तो क्या ये लोग रूए ज़मीन पर चले फिरे नहीं तो देखते जो लोग उनसे पहले थे उनका अन्जाम क्या  हुआ कि अल्लाह ने उन पर तबाही डाल दी और इसी तरह काफ़िरों को भी
11 ये इस वजह से कि ईमान लाने वालों  का अल्लाह सरपरस्त है और काफ़िरों का हरगिज़ कोई सरपरस्त नहीं
12 अल्लाह उन लोगों को जो इमान लाए और अच्छे काम करते रहे ज़रूर बाग़ (जन्नत)  में पहुँचाएगा जिनके नीचे नहरें जारी हैं और जो काफि़र हैं वह  मज़े करते हैं और खाते हैं इस तरह हैं जैसे चारपाए खाते पीते हैं और आखि़र उनका ठिकाना आग  है 
13 और जिस बस्ती से तुम लोगों ने निकाल दिया उससे ज़ोर में कहीं बढ़ चढ़ के बहुत सी बस्तियाँ थीं जिनको हमने तबाह बर्बाद कर दिया तो उनका कोई मददगार भी न हुआ 
14 क्या जो अपने रब की तफ़फ से रौशन दलील पर हो उस के बराबर हो सकता है जिसकी बदकारियाँ उसे भली कर दिखायीं गयीं हों वह अपनी नफ़सियानी ख़्वाहिशों पर चलते हैं
15 जिस बाग़ (जन्नत)  का परहेज़गारों से वायदा किया जाता है उसकी सिफ़त ये है कि उसमें पानी की नहरें जिनमें ज़रा बू नहीं और दूध की नहरें हैं जिनका मज़ा तक नहीं बदला और शराब की नहरें हैं जो पीने वालों के लिए लज़्ज़त है और साफ़ शफ़्फ़ाफ़ शहद की नहरें हैं और वहाँ उनके लिए हर किस्म के मेवे हैं और उनके रब की तरफ़ से बख़शिश है उनके बराबर हो सकते हैं जो हमेशा आग में रहेंगे और उनको खौलता हुआ पानी पिलाया जाएगा तो वह आँतों के टुकड़े टुकड़े कर डालेगा
16 और उनमें से बाज़ ऐसे भी हैं जो तुम्हारी तरफ़ कान लगाए रहते हैं यहाँ तक कि सब सुन कर जब तुम्हारे पास से निकलते हैं तो जिन लोगों को इल्म  दिया गया है उनसे कहते हैं अभी उस ने क्या कहा था ये वही लोग हैं जिनके दिलों पर अल्लाह ने छाप दिया है और ये अपनी नफ़सियानी ख़्वाहिशों पर चल रहे हैं
17 और जो लोग हिदायत याफ़ता हैं उनको अल्लाह मज़ीद हिदायत करता है और उनको परहेज़गारी अता फ़रमाता है
18 तो क्या ये लोग बस साअत ही के मुनतजि़र हैं कि उन पर एक बारगी आ जाए तो उसकी निशानियाँ आ चुकी हैं तो जिस वक़्त उन  पर आ पहुँचेगी फिर उन्हें नसीहत कहाँ मुफीद हो सकती है
19 तो फिर समझ लो कि अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं और अपने और ईमानदार मर्दों और ईमानदार औरतों के गुनाहों की माफ़ी मांगते रहो और अल्लाह तुम्हारे चलने फिरने और ठहरने से वाकि़फ़ है 
20 और मोमिनीन कहते हैं कि कोई सूरा क्यों नहीं नाजि़ल होता लेकिन जब कोई साफ़ सरीही मायनों का सूरा नाजि़ल हुआ और उसमें जेहाद का बयान हो तो जिन लोगों के दिल में मर्ज़ है तुम उनको देखोगे कि तुम्हारी तरफ़ इस तरह देखते हैं जैसे किसी पर मौत की बेहोशी हो पर बहतर था-
21  फ़रमाबरदारी और पसन्दीदा बात है फिर जब अम्र का अज़म हो जाए तो अगर ये लोग अल्लाह से सच्चे रहें तो उनके हक़ में बहुत बेहतर है 
22 क्या तुमसे कुछ दूर है कि अगर तुम हाकि़म बनो तो रूए ज़मीन में फसाद फैलाने और अपने रिश्ते नातों को तोड़ने लगो                                            23  ये वही लोग हैं जिन पर अल्लाह ने लानत की है और उन  को बहरा और आँखों को अँधा कर दिया है
24 तो क्या लोग क़़ुरआन में ग़ौर नहीं करते या दिलों पर ताले लगे हुए हैं
25 बेशक जो लोग राहे हिदायत साफ़ साफ़ मालूम होने के बाद उलटे पाँव  फिर गये शैतान ने उन्हें बहका दिया और इमला बोला
26 यह इसलिए जो लोग अल्लाह की नाजि़ल की हुई  से कराहत है  ये उनसे कहते हैं कि बाज़ कामों में हम तुम्हारी ही बात मानेंगे और अल्लाह उनके पोशीदा मशवरों से वाकि़फ है
27 तो जब फ़रिश्ते उनकी जान निकालेंगे उस वक़्त उनका क्या हाल होगा कि उनके चेहरों पर और उनकी पुश्त पर मारते जाएँगे
28 ये इस सबब से कि जिस चीज़ों से अल्लाह नाख़ुश है उसकी तो ये लोग पैरवी करते हैं और जिसमें अल्लाह की ख़ुशी है उससे बेज़ार हैं तो अल्लाह ने भी उनकी कारस्तानियों को अकारत कर दिया
29 क्या वह लोग जिनके दिलों में मर्ज़ है ये ख़्याल करते हैं कि अल्लाह दिल के कीनों को भी न ज़ाहिर करेगा
30 तो हम चाहते तो हम तुम्हें इन लोगों को दिखा देते तो तुम उनकी पेशानी ही से उनको पहचान लेते अगर तुम उन्हें उनके अन्दाज़े गुफ़्तगू ही से ज़रूर पहचान लोगे और अल्लाह तो तुम्हारे आमाल से वाकि़फ है
31 और हम तुम लोगों को ज़रूर आज़माएँगे ताकि तुममें जो लोग जेहाद करने वाले और झेलने वाले हैं उनको देख लें और तुम्हारे हालात जाँच लें
32 बेशक जिन लोगों पर सीधी राह साफ़ ज़ाहिर हो गयी उसके बाद इन्कार कर बैठे और अल्लाह की राह से रोका और रसूल की मुख़ालेफ़त की तो अल्लाह का कुछ भी नहीं बिगाड़ सकेंगे और वह उनका सब किया कराया अक़ारत कर देगा
33 ऐ ईमान लाने वालों  अल्लाह का हुक्म मानों और रसूल की फरमाँबरदारी करो और अपने आमाल को ज़ाया न करो
34 बेशक जो लोग काफि़र हो गए और लोगों को अल्लाह की राह से रोका, फिर काफ़िर ही मर गए तो अल्लाह उनको हरगिज़ नहीं बख़शेगा                                       35 तो तुम हिम्मत न हारो और सुलह की दावत न दो तुम ग़ालिब हो ही और अल्लाह तो तुम्हारे साथ है और हरगिज़ तुम्हारे आमाल कम न करेगा
36 दुनियावी जि़न्दगी तो बस खेल तमाशा है और अगर तुम ईमान रखोगे और परहेज़गारी करोगे तो वह तुमको तुम्हारे अज्र इनायत फ़रमाएगा और तुमसे तुम्हारे माल नहीं तलब करेगा
37 और अगर वह तुमसे माल तलब करे और तुमसे इसरार से  माँगे भी तो तुम  बुख़्ल करने लगो और अल्लाह तो तुम्हारे कीने को ज़रूर ज़ाहिर करके रहेगा                 38 देखो तुम लोग वही तो हो कि अल्लाह की राह में ख़र्च के लिए बुलाए जाते हो तो बाज़ तुम में ऐसे भी हैं जो बुख़ल करते हैं और जो बुख़्ल करता है तो ख़ुद अपने ही से बुख़्ल करता है और अल्लाह तो बेनियाज़ है और तुम  मोहताज हो और अगर तुम मुँह फेरोगे तो अल्लाह दूसरों को बदल देगा और वह तुम्हारे ऐसे  न होंगे                                                                            (96)  13 सूरए अर रअद                                                                1 अलिफ़ लाम मीम रा ये किताब (क़ुरान) की आयतें है और तुम्हारे रब की तरफ से जो कुछ तुम्हारे पास नाजि़ल किया गया है बिल्कुल ठीक है मगर बहुतेरे लोग ईमान नहीं लाते
2 अल्लाह वही तो है जिसने आसमानों को जिन्हें तुम देखते हो बग़ैर सुतून  के उठाकर खड़ा कर दिया फिर अर्श पर आमादा हुआ और सूरज और चाँद को  ताबेदार बनाया कि हर एक वक़्त मुक़र्ररा तक चला करते है वहीं  हर एक काम का इन्तेज़ाम करता है और इसी ग़रज़ से कि तुम लोग अपने रब के सामने हाजि़र होने का यक़ीन करो आयतें तफसीलदार बयान करता है                                       3 और वह वही है जिसने ज़मीन को बिछाया और उसमें अटल पहाड़ और दरिया बनाए और उसने हर तरह के मेवों की दो दो किस्में पैदा की वही रात से दिन को ढाक देता है इसमें शक नहीं कि जो लोग और ग़ौर व फिक्र करते हैं उनके लिए इसमें बहुतेरी निशनियाँ हैं                                                                   4 और ज़मीन में क़तआत हैं आपस में सटे हुए और बाग हैं अंगूर खेती और खजूर के दरख़्त की एक जड़ और दो शाखें और बाज़ अकेला  हालांकि सब एक ही पानी से सीचे जाते हैं और फलों में बाज़ को बाज़ पर हम तरजीह देते हैं बेशक जो लोग अक़ल वाले हैं उनके लिए इसमें बहुतेरी निशनियाँ हैं
5 और अगर तुम्हें ताज्जुब होता है तो उन का ये क़ौल ताज्जुब की बात है कि जब हम मिट्टी हो जायंगें तो क्या हम एक नई खल्कत में आयंगे ये वही लोग हैं जिन्होंने अपने रब के साथ कुफ्र किया और यही वह लोग हैं जिनकी गर्दनों में  तौक़ पड़े होगें और यही लोग आग के साथी होंगे कि ये इसमें हमेशा रहेगें
6 और ये लोग तुम से भलाई के क़ब्ल ही बुराई की जल्दी मचा रहे हैं हालांकि उनके पहले सज़ाएँ हो चुकी हैं और इसमें शक नहीं की तुम्हारा रब बावजूद उनकी शरारत के लोगों पर बड़ा बख़शिश वाला है और इसमें भी शक नहीं कि तुम्हारा रब यक़ीनन सख़्त अज़ाब वाला है
7 और वो लोग काफिर हैं कहते हैं कि उस पर उसके रब की तरफ से कोई निशानी क्यों नहीं नाजि़ल की जाती ऐ रसूल तुम तो सिर्फ डराने वाले हो हर क़ौम के लिए एक हिदायत करने वाला है
8 और हर मादा जो कि पेट में लिए हुए है और उसको अल्लाह  ही जानता है व बच्चा दानियों का घटना बढ़ना  और हर चीज़ उसके नज़दीक़ एक अन्दाजे़ से है
9 बातिन  व ज़ाहिर का जानने वाला बड़ा और आलीशान है
10 तुम लोगों में जो कोई चुपके से बात कहे और जो ज़ोर से पुकार के बोले और जो रात की तारीक़ी में छुपा बैठा हो और जो दिन दहाड़े चला जा रहा हो बराबर हैं                                                   11  उस के लिए उसके आगे उसके पीछे उसके निगेहबान  मुक़र्रर हैं कि उसको हुक्म अल्लाह से हिफाज़त करते हैं जो किसी क़ौम को हासिल हो बेशक वह लोग खुद अपनी नफ्सानी हालत में तग्य्युर न डालें अल्लाह हरगिज़ तग़्य्युर नहीं डाला करता और जब अल्लाह किसी क़ौम पर बुराई का इरादा करता है तो फिर उसका कोई टालने वाला नहीं और न उसका उसके सिवा कोई वाली है
12 वह वही तो है जो तुम्हें डराने और लालच देने के वास्ते बिजली की चमक दिखाता है और पानी से भरे बोझल बादलों को पैदा करता है
13 और गरज और फ़रिश्ते उसके ख़ौफ से उसकी हम्दो सना की तस्बीह किया करते हैं वही बिजलियों को भेजता है फिर उसे जिस पर चाहता है गिरा भी देता है और ये लोग अल्लाह के बारे में झगड़े करते हैं हालांकि वह बड़ा सख़्त क़ूवत वाला है
14  उसी का ठीक पुकारना है और जो लोग उसे छोड़कर पुकारते हैं वह तो उनकी कुछ सुनते तक नहीं मगर जिस तरह कोई अपनी दोनों हथेलियाँ पानी की तरफ फैलाए ताकि पानी उसके मुँह में पहुँच जाए हालांकि वह किसी तरह पहुँचने वाला नहीं और काफिरों की दुआ गुमराही में
15 और आसमानों और ज़मीन में जो कोई भी है खुशी से या ज़बरदस्ती सब के आगे सर बसजूद हैं और उनके साए भी सुबह व शाम
16 तुम पूछो कि आसमान और ज़मीन का रब कौन है तुम कह दो कि अल्लाह है क्या तुमने उसके सिवा दूसरे कारसाज़ बना रखे हैं जो अपने लिए आप न तो नफे़ पर क़ाबू रखते हैं न ज़रर पर पूछो कि भला अन्धा और आँखों वाला बराबर हो सकता है अंधेरा और उजाला बराबर हो सकता है इन लोगों ने अल्लाह  के कुछ शरीक़ ठहरा रखे हैं क्या उन्हें अल्लाह ही की सी मख़लूक़ पैदा कर रखी है जिनके सबब मख़लूकात उन पर मुशतबा हो गई है  तुम कह दो कि अल्लाह ही हर चीज़ का पैदा करने वाला और वही यकता और सिपर ग़ालिब है
17 उसी ने आसमान से पानी बरसाया फिर अपने अपने अन्दाज़े से नाले बह निकले फिर पानी के रेले पर फूला हुआ झाग आ गया और उस चीज़ से भी जिसे ये लोग ज़ेवर या कोई असबाब बनाने की ग़रज़ से आग में तपाते हैं इसी तरह फेन आ जाता है यूं अल्लाह हक़ व बातिल की मसले बयान फरमाता है ग़रज़ फेन तो खुश्क होकर ग़ायब हो जाता है जिससे लोगों को नफा पहुँचता है वह ज़मीन में ठहरा रहता है यूं अल्लाह  मसले बयान फरमाता है
18 जिन लोगों ने अपने रब का कहना माना उनके लिए बहुत बेहतरी है और जिन लोगों ने उसका कहा न माना कि अगर उन्हें रुए ज़मीन के सब ख़ज़ाने बल्कि उसके साथ इतना और मिल जाए तो ये लोग अपनी नजात के बदले उसको  दे डालें यही लोग हैं जिनसे बुरी तरह हिसाब लिया जाएगा और आखि़र उन का ठिकाना जहन्नुम है और वह क्या बुरी जगह है
19  भला वह जो ये जानता है कि जो कुछ तुम्हारे रब की तरफ से तुम पर नाजि़ल हुआ है बिल्कुल ठीक है कभी उस के बराबर हो सकता है जो मुत्तलिक़  अंधा है
20 इससे तो बस कुछ समझदार लोग ही नसीहत हासिल करते हैं वह लोग है कि अल्लाह से जो एहद किया उसे पूरा करते हैं और अपने पैमान को नहीं तोड़ते
21 वह लोग हैं कि जिन  के क़ायम रखने का अल्लाह ने हुक्म दिया उन्हें क़ायम रखते हैं और अपने रब से डरते हैं और  बुरी तरह हिसाब लिए जाने से ख़ौफ खाते हैं
22 और वह लोग हैं जो अपने रब की खुशनूदी हासिल करने की ग़रज़ से  झेल गए और पाबन्दी से नमाज़ अदा की और जो कुछ हमने उन्हें रोज़ी दी थी उसमें से छिपाकर और खुल कर अल्लाह की राह में खर्च किया और ये लोग बुराई को भी भलाई स दफा करते हैं -यही लोग हैं जिनके लिए आखि़रत की खूबी मख़सूस है                                                                   23 हमेश रहने के बाग़ जिनमें वह आप जाएंगे और उनके बाप, दादाओं, बीवियों और उनकी औलाद में से जो लोग नेको कार है  और फरिश्ते हर दरवाजे़ से उनके पास आएगें
24 और सलाम अलैकुम कि तुमने सब्र किया तो आखि़रत का घर कैसा अच्छा है
25 और जो लोग अल्लाह से एहद व पैमान को पक्का करने के बाद तोड़ डालते हैं और जिन के क़ायम रखने का अल्लाह ने हुक्म दिया है उन्हें क़तआ  करते हैं और रुए ज़मीन पर फ़साद फैलाते फिरते हैं ऐसे ही लोग हैं जिनके लिए लानत है और ऐसे ही लोगों के वास्ते बुरा घर है
26 और अल्लाह ही जिसके लिए चाहता है रोज़ी को बढ़ा देता है और जिसके लिए चाहता है तंग करता है और ये लोग दुनिया की  जि़न्दगी पर बहुत निहाल हैं हालांकि दुनियावी जि़न्दगी  आखि़रत के मुक़ाबिल में बिल्कुल बेहकीक़त चीज़ है 27 और जिन लोगों ने कुफ्र अख़तियार किया वह कहते हैं कि उस पर हमारी ख़्वाहिश के मुवाफिक़ कोई मौजिज़ा उसके रब की तरफ से क्यों नहीं नाजि़ल होता तुम उनसे कह दो कि इसमें शक नहीं कि अल्लाह जिसे चाहता है गुमराही में छोड़ देता है
28 और जिसने उसकी तरफ रुज़ू की उसे अपनी तरफ पहुँचने की राह दिखाता है  वह लोग हैं जिन्होंने इमान कुबूल किया और उनके दिलों को अल्लाह की चाह से तसल्ली हुआ करती है
29 जिन लोगों ने इमान क़ुबूल किया और अच्छे अच्छे काम किए उनके वास्ते  तूबा और ख़ुशहाली और अच्छा अन्जाम है
30 उसी तरह हमने तुमको उस उम्मत में भेजा है जिससे पहले और भी बहुत सी उम्मते गुज़र चुकी हैं -ताकि तुम उनके सामने जो क़ुरान हमने वही के ज़रिए से तुम्हारे पास भेजा है उन्हें पढ़ कर सुना दो और ये लोग  अल्लाह ही के मुन्किर हैं तुम कह दो कि वही मेरा रब है उसके सिवा कोई माबूद नहीं मै उसी पर भरोसा रखता हूँ और उसी तरफ रुजू करता हूँ
31 और अगर कोई ऐसा क़ुरान जिसकी बरकत से पहाड़ चल खड़े होते या उसकी वजह से ज़मीन तय की जाती और उसकी बरकत से मुर्दे बोल उठते  बल्कि सच यूँ है कि सब काम का एख़्तेयार अल्लाह ही को है तो क्या अभी तक इमान वालों  को चैन नहीं आया कि अगर अल्लाह चाहता तो सब लोगों की हिदायत कर देता  और जिन लोगों ने कुफ्र एख़्तेयार किया उन पर उनकी करतूत की सज़ा में कोई मुसीबत पड़ती ही रहेगी या तो उनके घरों के आस पास  नाजि़ल होगी यहाँ तक कि अल्लाह का वायदा पूरा हो कर रहे और इसमें शक नहीं कि अल्लाह हरगिज़ खि़लाफ़े वायदा नहीं करता
32  और तुमसे पहले भी बहुतेरे रसूलों की हॅसी उड़ाई जा चुकी है तो मैने  काफिरों को मोहलत दी फिर हमने उन्हें ले डाला फिर  हमारा अज़ाब कैसा था
33 क्या जो हर एक के आमाल की ख़बर रखता है  और उन लोगों ने अल्लाह के  शरीक ठहराए उनके नाम तो बताओं या तुम अल्लाह को ऐसे शरीक़ो की ख़बर देते हो जिनको वह जानता तक नहीं कि वह ज़मीन में हैं या बातें बनाते हैं बल्कि  काफिरों को उनकी मक्कारियाँ भली दिखाई गई है और वह राहे रास्त से रोक दिए गए हैं और जिस को अल्लाह गुमराही में छोड़ दे तो उसका कोई हिदायत करने वाला नहीं
34  इन लोगों के वास्ते दुनियावी जि़न्दगी में अज़ाब है और आखि़रत का अज़ाब तो यक़ीनी और बहुत सख़्त खुलने वाला है  अल्लाह से उनको कोई बचाने वाला  नहीं
35 जिस बाग़ (जन्नत)   का परहेज़गारों से वायदा किया गया है उसकी सिफत ये है कि उसके नीचे नहरें जारी होगी उसके मेवे सदाबहार और ऐसे ही उसकी छांव भी ये अन्जाम है उन लोगों को जो  परहेज़गार थे और काफिरों का अन्जाम आग है
36 और जिन लोगों को हमने किताब दी है वह तो जो तुम्हारे पास नाजि़ल किए गए हैं सब ही से खुश होते हैं और बाज़ फिरके़ उसकी बातों से इन्कार करते हैं तुम कह दो कि मुझे तो ये हुक्म दिया गया है कि मै अल्लाह ही की इबादत करु और किसी को उसका शरीक न बनाऊ मै  उसी की तरफ बुलाता हूँ और हर एक हिर फिर कर उसकी तरफ जाना है
37 और यूँ हमने उस क़ुरान को अरबी का फरमान नाजि़ल फरमाया और अगर कहीं तुमने इसके बाद को तुम्हारे पास इल्म आ चुका उन की नफसियानी ख़्वाहिशों की पैरवी कर ली तो फिर अल्लाह की तरफ से न कोई तुम्हारा सरपरस्त होगा न कोई बचाने वाला
38 और हमने तुमसे पहले और बहुतेरे रसूल  भेजे और हमने उनको बीवियाँ भी दी और औलाद और किसी रसूल की ये मजाल न थी कि कोई मौजिज़ा अल्लाह की इजाज़त के बगैर ला दिखाए हर एक वक़्त  के लिए एक तहरीर है
39 फिर इसमें से अल्लाह जिसको चाहता है मिटा देता है और जिसको चाहता है बाक़ी रखता है और उसके पास असल किताब मौजूद है
40 और जो जो वायदे हम करते हैं चाहे, उनमें से बाज़ तुम्हारे सामने पूरे कर दिखाएँ या तुम्हें उससे पहले उठा लें बहर हाल तुम पर तो सिर्फ एहकाम का पहुचा देना फर्ज़ है
41 और उनसे हिसाब लेना हमारा काम है क्या उन लोगों ने ये बात न देखी कि हम ज़मीन को उसके तमाम एतराफ से घटाते चले आते हैं और अल्लाह जो चाहता है हुक्म देता है उसके हुक्म का कोई टालने वाला नहीं और बहुत जल्द हिसाब लेने वाला है
42 और जो लोग उन से पहले हो गुज़रे हैं उन लोगों ने भी रसूलों की मुख़ालफत में बड़ी बड़ी तदबीरे की तो सब तदबीरे तो अल्लाह ही के हाथ में हैं जो कुछ करता है वह उसे खूब जानता है और अनक़रीब कुफ्फार को भी मालूम हो जाएगा कि आखि़रत की खूबी किस के लिए है
43 और काफिर लोग कहते हैं कि तुम रसूल  नही हो तो तुम कह दो कि मेरे और तुम्हारे दरम्यिान गवाही के वास्ते अल्लाह और वह  जिसके पास किताब का इल्म है काफी है                                                                     (97)  55 सूरए अर रहमान
1 बड़ा मेहरबान
2 क़ुरआन की तालीम फ़रमाई
3 इन्सान को खल्क़ किया
4 ब्यान करना सिखाया                                                           5 सूरज और चाँद एक मुक़र्रर हिसाब से चल रहे हैं
6 और सितारे  दरख़्त सजदा करते हैं
7 और आसमान बुलन्द किया और तराजू क़ायम किया
8 ताकि तुम लोग तराज़ू में हद से तजाउज़ न करो
9 और ईन्साफ़ के साथ ठीक तौलो और तौल कम न करो
10 और उसी ने लोगों के नफे़ के लिए ज़मीन बनायी
11 कि उसमें मेवे और खजूर के दरख़्त हैं जिसके ख़ोशों में गि़लाफ़ होते हैं
12 और अनाज जिसके साथ भुस होता है और ख़ुशबूदार फूल
13 तो तुम दोनों अपने रब की कौन कौन सी नेअमतों को झुठलाओगे?  
14 उसी ने इन्सान को ठीकरे की तरह खन खनाती हुयी मिटटी से पैदा किया
15 और उसी ने जिन्नात को आग के शोले से पैदा किया
16 तो तुम दोनों अपने रब की कौन कौन सी नेअमतों को झुठलाओगे?
17 वही दोनों मशरिको का मालिक है और दोनों मग़रिबों का मालिक है
18 तो तुम दोनों अपने रब की कौन कौन सी नेअमतों को झुठलाओगे?
19 उसी ने दरिया बहाए जो बाहम मिल जाते हैं
20 दो के दरम्यिान एक हद्दे फ़ासिल है जिससे तजाउज़ नहीं कर सकते
21 तो तुम दोनों अपने रब की कौन कौन सी नेअमतों को झुठलाओगे?
22 इन दोनों दरियाओं से मोती और मूँगे निकलते हैं
23 तो तुम दोनों अपने रब की कौन कौन सी नेअमतों को झुठलाओगे?
24 और जहाज़ जो दरिया में पहाड़ों की तरह ऊँचे खड़े रहते हैं उसी के हैं
25 तो तुम दोनों अपने रब की कौन कौन सी नेअमतों को झुठलाओगे?
26 जो ज़मीन पर है सब फ़ना होने वाली है
27 और सिर्फ तुम्हारे रब की ज़ात जो अज़मत और करामत वाली है बाक़ी रहेगी
28 तो तुम दोनों अपने रब की कौन कौन सी नेअमतों को झुठलाओगे?
29 और जितने लोग सारे आसमान व ज़मीन में हैं उसी से माँगते हैं वह हर रोज़  मख़लूक के एक न एक काम में है
30 तो तुम दोनों अपने रब की कौन कौन सी नेअमतों को झुठलाओगे?
31 हम अनक़रीब ही तुम्हारी तरफ़ मुतावज्जे होंगे
32 तो तुम दोनों अपने रब की कौन कौन सी नेअमतों को झुठलाओगे?
33 ऐ गिरोह जिन व इन्स अगर तुममें क़ुदरत है कि आसमानों और ज़मीन के किनारों से निकल सको तो निकल जाओ तुम तो बग़ैर क़ूवत और ग़लबे के निकल ही नहीं सकते
34 तो तुम दोनों अपने रब की कौन कौन सी नेअमतों को झुठलाओगे?
35  तुम दोनो पर आग का सब्ज़ शोला और सियाह धुआँ छोड़ दिया जाएगा तो तुम दोनों रोक नहीं सकोगे
36 तो तुम दोनों अपने रब की कौन कौन सी नेअमतों को झुठलाओगे?
37 फिर जब आसमान फट कर तेल की तरह लाल हो जाऐगा                                           38 तो तुम दोनों अपने रब की कौन कौन सी नेअमतों को झुठलाओगे?
39 तो उस दिन न तो किसी इन्सान से उसके गुनाह के बारे में पूछा जाएगा न किसी जिन से
40 तो तुम दोनों अपने रब की कौन कौन सी नेअमतों को झुठलाओगे?
41 अपने चेहरों ही से पहचान लिए जाएँगे तो पेशानी के पटटे और पाँव पकड़े
42 तो तुम दोनों अपने रब की कौन कौन सी नेअमतों को झुठलाओगे?
43 यही वह जहन्नुम है जिसे गुनाहगार लोग झुठलाया करते थे
44 ये लोग जहन्नम   और हद दरजा खौलते हुए पानी के दरमियान  चक्कर लगाते फिरेंगे
45 तो तुम दोनों अपने रब की कौन कौन सी नेअमतों को झुठलाओगे?
46 और जो अपने रब के सामने खड़े होने से डरता रहा उसके लिए दो दो बाग़ हैं
47 तो तुम दोनों अपने रब की कौन कौन सी नेअमतों को झुठलाओगे?
48 दोनों बाग़ टहनियों से हरे भरे हुए
49 तो तुम दोनों अपने रब की कौन कौन सी नेअमतों को झुठलाओगे?
50 इन दोनों में दो चश्में जारी होंगे
51 तो तुम दोनों अपने रब की कौन कौन सी नेअमतों को झुठलाओगे?
52 इन दोनों बाग़ों में सब मेवे दो दो किस्म के होंगे
53 तो तुम दोनों अपने रब की कौन कौन सी नेअमतों को झुठलाओगे?
54 यह लोग उन फर्शों पर जिनके असतर अतलस के होंगे तकिये लगाकर बैठे होंगे तो दोनों बाग़ों के मेवे क़रीब होंगे
55 तो तुम दोनों अपने रब की कौन कौन सी नेअमतों को झुठलाओगे?
56 इसमें पाक दामन ग़ैर की तरफ आँख उठा कर न देखने वाली औरतें होंगी जिनको उन से पहले न किसी इन्सान ने हाथ लगाया होगा और न जिन ने
57 तो तुम दोनों अपने रब की कौन कौन सी नेअमतों को झुठलाओगे?
58 गोया वह याक़ूत व मूँगे हैं
59 तो तुम दोनों अपने रब की कौन कौन सी नेअमतों को झुठलाओगे?
60 भला नेकी का बदला नेकी के सिवा कुछ और भी है
61 तो तुम दोनों अपने रब की कौन कौन सी नेअमतों को झुठलाओगे?
62 उन दोनों बाग़ों के अलावा दो बाग़ और हैं
63 तो तुम दोनों अपने रब की कौन कौन सी नेअमतों को झुठलाओगे?
64 दोनों निहायत गहरे सब्ज़ व शादाब
65 तो तुम दोनों अपने रब की कौन कौन सी नेअमतों को झुठलाओगे?
66 उन दोनों बाग़ों में दो चश्में जोश मारते होंगे
67 तो तुम दोनों अपने रब की कौन कौन सी नेअमतों को झुठलाओगे?
68 उन दोनों में मेवें हैं खुरमें और अनार
69 तो तुम दोनों अपने रब की कौन कौन सी नेअमतों को झुठलाओगे?
70 उन बाग़ों में ख़ुश ख़ुल्क और ख़ूबसूरत औरतें होंगी
71 तो तुम दोनों अपने रब की कौन कौन सी नेअमतों को झुठलाओगे?
72 वह हूरें हैं जो ख़ेमों में छुपी बैठी हैं
73 तो तुम दोनों अपने रब की कौन कौन सी नेअमतों को झुठलाओगे?
74 उनसे पहले उनको किसी इन्सान ने उनको छुआ तक नहीं और न जिन ने
75 तो तुम दोनों अपने रब की कौन कौन सी नेअमतों को झुठलाओगे?
76 ये लोग सब्ज़ क़ालीनों और नफ़ीस व हसीन मसनदों पर तकिए लगाए होंगे
77 तो तुम दोनों अपने रब की कौन कौन सी नेअमतों को झुठलाओगे?
78 तुम्हारा रब जो साहिबे जलाल व करामत है उसी का नाम बड़ा बाबरकत है   

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