Thursday, June 29, 2017

मेरे साथ 1400 वर्ष पूर्व मदीने का सफ़र कीजिये और सच्चे इस्लाम और मोमिनों को पहचानिए – 1

मेरे साथ 1400 वर्ष पूर्व मदीने का सफ़र कीजिये और सच्चे इस्लाम और मोमिनों को पहचानिए – 1

अल्लाह , रसूल और कुरान

एक लड़का या लड़की जो किसी मुस्लिम परिवार में जन्म लेता है उसे बचपन से यह बताया जाता है कि अल्लाह एक है और दुनिया में हर कौम और हर ज़माने में अल्लाह अपने नबी भेजता रहा है और अब तक एक लाख चौबीस हज़ार नबी आ चुके हैं जिनमें पहले आदम और बाद में नूह , इब्राहीम , इस्माइल , मूसा और ईसा आये और हमारे नबी मुहम्मद आखिरी नबी हैं और उनके बाद कोई नबी नहीं आने वाला है – इस्लाम एक मुकम्मल दीन है और कुरान अल्लाह की किताब है जो हमारे नबी पर उतरी जैसे कि तौरेत हज़रत मूसा पर और इंजील हज़रत ईसा पर उतरी थी I इन नबियों के नाम के पहले हज़रत और बाद में अलयहिससलाम  (उन पर सलाम) लगाना चाहिए I कुरान को फरिश्तों में अफज़ल हज़रत जिब्राइल अलयहिससलाम ले कर आये थे I  हज़रत मुहम्मद के नाम के आगे ‘सल्ले अल्लाहु अलयही व आलेही व सल्लम’  लगाना चाहिए I हज़रत मुहम्मद के लिए नबी,  पैग़म्बर या रसूल  का लक़ब इस्तेमाल किया जाता है I
यह है मुस्लिम परिवार में जन्म लेने से मिली विरासत और कल्चर I सब से बड़ी खूबी यह है कि हमें यह बताया गया कि दुनिया के सारे इंसान – सारे मर्द और औरत एक माँ बाप – जनाब हव्वा अलाय्हिस्सलाम और जनाब आदम अलाय्हिस्सलाम की औलाद हैं यानि हम सब आपस में भाई बहन हैं – न कोई ऊंचा है और न कोई नीचा I यह बात भी बहुत कम लोग महसूस कर पाते हैं कि क्योंकि हज़रत आदम अ० नबी थे इसलिए हम सब नबीजादे और नबीज़ादी हैं और हम सब एक दूसरे नबी हज़रत नूह अ० की भी संतान हैं तो हम सब कम से कम दो नबियों की संतान हैं I                                                                        और जिन्हें रेड इंडियन , ब्लैक और दलित कहा जाता है और जो सदियों से ज़ुल्म का शिकार हैं , सब हमारे अपने हैं और हर इंसान हर कौम का नाम भी अच्छा और मोहतरम होना चाहिए -यह बात बचपन से आज तक मैं खुद मानता रहा हूँ भले ही और कुछ माना हो या न माना हो I इतनी अच्छी तालीम को बजाये दुनिया में फैलाने के मुस्लिम हमलावरों, बादशाहों, मौलवियों, मुफ्तियों और काजियों ने दूसरी कौम के लोगों को काफिर और मुशरिक बताना शुरू किया और इस्लाम के अन्दर भी अपने से अलग फिरके और मसलक के लोगों को काफिर और मुशरिक कहा जिसका नतीजा आज की दहशतगर्दी है और इस्लामी हुकूमतों में कुफ्र, शिर्क, इर्तिदाद का इलज़ाम लगा कर सजाए मौत देना है और यह सब इस्लाम को बदनाम कर रहा है I यह सब बाद में बयान किया जाएगा I                
फिर जब वह लड़का या लड़की बड़ा होता है और साइंस पढ़ता है तो उसे मालूम पड़ता है कि आसमान छत नहीं है और ज़मीन फर्श नहीं है बल्कि करोड़ों अरबों गैलेक्सी जो करोड़ों अरबों तारों से बनी हैं बहुत तेज़ी से दूर दूर जा रही हैं और हमारा सूरज हमारी गैलेक्सी की एक भुजा के कोने पर एक छोटा सा तारा है और सूरज के चारों तरफ मरकरी, वीनस , मार्स , हमारी ज़मीन , जुपिटर , सैटर्न और नेपटयून चक्कर लगा रहे हैं और चाँद ज़मीन का चक्कर लगा रहा है I यही नहीं ज़मीन पर जो पेड़ पौधे जानवर और हम इंसान करोड़ों वर्ष से हो रहे विकास का नतीजा हैं I इंसान इस धरती पर एक लाख वर्षों या उससे अधिक समय से है I
सत्य की तलाश में हम 1400 वर्ष पूर्व जायेंगे और जब वापस लौटेंगे तो मानसिक रूप से परिपक्व और ज्यादा अच्छे इंसान के रूप में वापस आयेंगे I इस्लाम का मकसद या रसूल का मकसद ‘ला इलाहा इल अल्लाह’ और ‘मोह्म्म्दं रसूल अल्लाह’ मनवाना नहीं था और उन्होंने कई जगह समझौता करना चाहा भी जैसाकि कुरान में कहीं जगह मिलता भी है I रसूल का मकसद था एक नेक उम्माह या उम्मत बनाना जो कई तरह की बुराईयों से पाक हो और लोग आपस में मोहब्बत और इखलाक़ से रहें I

कोई भी आज का पढ़ा लिखा इंसान कह सकता है कि ख़ुदा का वजूद नहीं है या यह कह सकता है कि हम नहीं जान सकते कि ख़ुदा है कि नहीं और इस ज़िन्दगी के बाद ज़िन्दगी और इस दुनिया से अलग कोई दुनिया है भी कि नहीं I तो बात सत्य या Truth की नहीं है – विज्ञान और दर्शन द्वारा हमारी तलाश जारी है I बात है कि क्या इंसान को किसी आस्था, किसी धर्म और किसी नैतिकता की ज़रूरत है कि नहीं ? क्या आज के मुल्क और हुकूमतें बदी और जुर्म को रोकने में कामयाब हैं या मुजरिम खुद हुकूमत पर क़ब्ज़ा कर चुके हैं ? नशीले पदार्थों की तस्करी और औरतों बच्चों का यौन शोषण ऐसी समस्याएँ हैं जिनके सामने मुल्क और यू०एन०ओ० घुटने टेके दिखाई पड़ रहे हैं I ऐसे ही प्राकृतिक संपदाओं की लूट और वातावरण का प्रदूष्ण ऐसे अपराध और समस्याएं हैं जिनके सामने मुल्क और यू०एन० कमज़ोर हैं I ऐसे ही समस्या है नुक्लीय अस्त्रों, केमिकल और बायो अस्त्रों की और मानव अंगों की चोरी और तस्करी भी कल को भयानक रूप ले सकती है – बात यह है कि हम ख़ुदा को भले ही न मानें शैतान को तो मानना ही पड़ेगा I खैर अभी हम 1400 वर्ष पूर्व के मदीने चलते हैं I                  

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