काला बैंड , धरने और जुलूस !
प्रजातंत्र में जनता को अपना रोष और असहमति व्यक्त करने के लिए यह सब तरीके
अनुमन्य हैं और कोई भी देशवासी इन तरीकों को अपना सकता है पर मुसलमान पहचान के साथ
ईद के दिन काला बैंड बाँधने का प्रोग्राम जिन लोगों ने बनाया उन्होंने इस्लाम का
वक़ार कम किया है I
जब किसी बहतर मज़हब के लोगों पर हमले किये जाते हैं तो हमला करने वाले उनकी
प्रतिक्रिया देखते हैं और अगर यह प्रतिक्रिया उच्च आदर्शों से परिपूर्ण पाते हैं
तो अपने को ठीक करते हैं और स्वयं उस धर्म को ग्रहण कर लेते हैं जैसे कि जिगर
ख्वारा हिन्दा ने किया था या गुजरात का वह कट्टर संघी अब मुसलमान हो चुका है I और
ऐसे ही अनेक लोग हैं जैसे कि गाँधी फिल्म में एक व्यक्ति को दिखाया था I
ईसाइयों पर भी हमले हुए थे और जब ग्राहम स्टींस और उसके दो बेटों को बेदर्दी
से जला कर मार डाला गया तो स्टींस की बेवा ने इंडिया छोड़ते वक़्त यह कहा कि उसने
उनके कातिलों को माफ़ किया और यही सोनिया गाँधी ने भी कहा था I
इस्लाम क्या कहता है :
1 जो किसी बेगुनाह मुसलमान को मारेगा उसका ठिकाना जहन्नम है
2 यह बड़े बड़े मकर कर रहे हैं पर अल्लाह खैरुल माकिरीन है
इंडिया और पकिस्तान का फ़ासिस्ट ग्रुप – संपन्न मध्य वर्ग निचले सामाजिक स्तर
के युवाओं को भड़का कर कमजोरों पर हमले करवा रहा है और एक दिन यही युवक इस संपन्न
वर्ग के लोगों को क़त्ल करेंगे और इनकी औरतों का बलात्कार करेंगे – और यह तकदीर
लिखने वाले इंडिया और पकिस्तान के संपन्न वर्ग के लोग खुद हैं जैसाकि मौला अली ने
कहा बदी लौट कर बदी करने वालों के ऊपर ही आ जाती है I
अब भी वक़्त है संभल जाओ – इंडिया के संघियों और पकिस्तान के जमाते इस्लामी के
लोगों !
दूसरी बात इंडिया एक अरब आबादी का देश है इसमें एक संगठन कुछ युवाओं को पैसा
और दारु पिला कर इक्का दुक्का हमले करवा रहा है जब कि पकिस्तान एक छोटा देश है
वहाँ कई गुना कई गुना गंभीर और घातक हमले शियों पर उनकी मस्जिदों इमाम् बाड़ों पर किये जा रहे हैं – बमों से और फिदायीन हमले
तो क्या इंडिया के सुन्नी इसके खिलाफ कुछ बोलने को तैयार हैं ? क्या वे
पाकिस्तानी हुकूमत और मिलिट्री से कहेंगे कि शियों को सुरक्षा दो जैसी वे यहाँ
अपने लिए इंडिया में चाहते हैं ? या वे दिल में मानते हैं कि शिया काफिर हैं और
उनके साथ जो हो रहा है ठीक है ? पाकिस्तान जिसको बनाने वाला इस्मेली शिया था जो
बाद में पूरा शिया हो गया था आज उस देश में शिया मारे जा रहे हैं !
जिसके दिल में अली की मुहब्बत नहीं है वह मुसलमान नहीं मुनाफ़िक़ है और किसी
शिया की उनके साथ देने की कोशिश बेवकूफी है – कश्मीर , पलेस्टाइन , रोहिंग्या हर
जगह वही लोग हैं जिन्हें अगर अल्लाह हुकूमत दे तो यह भी पहला काम शियों को मारने
का ही करेंगे !
No comments:
Post a Comment