Tuesday, August 22, 2017

हम भारतवासियों को राजनीति नहीं अध्यात्म की ज़रूरत है !



हम भारतवासियों को राजनीति नहीं अध्यात्म की ज़रूरत है !
एक तबका देशभक्ति की लाठी उठा कर कह रहा है – यह करो और यह न करो और अगर ऐसा नहीं करते तो तुम देश द्रोही हो पाकिस्तान जाओ !
दूसरा तबका यह कहता है कि हम वह न कर पायेंगे जो तुम कह रहे हो क्योंकि यह हमारे मजहब के खिलाफ है !
कोई मज़हबी धार्मिक व्यक्ति देश द्रोही या गद्दार नहीं हो सकता – मुल्क तो बहुत बड़ा है किसी भी  इंसान के साथ धोखा और गद्दारी मजहब के खिलाफ है I
न मुसलामानों ने तब गद्दारी की जब 1947 में पाकिस्तान ने कश्मीर में घुसपेठ की और न मुसलमानों ने तब गद्दारी की जब पाकिस्तान से युद्ध हुआ I
देशभक्तों को देश चलाना  चाहिए और जो भी चाहते हैं उसे पार्लियामेंट से एक्ट पास करा लें या सुप्रीम कोर्ट का आर्डर ले लें – स्पेशल पुलिस खड़ी करें , मजिसट्रेट लगाएं और जो राष्ट्र गान वन्दे मातरम न गाये उसे दण्डित करें I यही सीधा हल है अयोध्या में राम मंदिर बनाने का – पार्लियामेंट के एक्ट से या सुप्रीम कोर्ट के आर्डर से बना लें I
लेकिन राजनीती चली जा रही है – ध्रुवीकरण कराया जा रहा है – हिंसक घटनाएँ हो रही हैं जो कोई नहीं चाहता !
देश को राजनीति से बचाइये और अध्यात्म की ओर मोड़िये I
हिन्दू मुसलमान सब अध्यात्म की ओर वापस आयें जैसा कबीर और नानक के समय में था I
WhatsApp  9415084202
अगर उपरोक्त से सहमत हैं तो कृपया अपने सभी कॉन्टेक्ट्स को ई मेल  फॉरवर्ड करते रहें , WhatsApp group ‘आध्यात्मिक सत्संग’ से जुडें और देश समाज के उत्थान में सहयोग करते रहें I अपने निवास स्थान 178/152 बद्रीनाथ रोड  गोलागंज लखनऊ में हर शनिवार और रविवार को 11 बजे अध्यात्मिक सत्संग का आयोजन किया है

REALITY को कैसे समझें ?



REALITY को कैसे समझें ?
जगत के सत्य को समझने के लिए कंप्यूटर का मॉडल उपयोगी है – कंप्यूटर के उपयोग में तीन यूनिट्स होती हैं :
1 यूजर
2 हार्डवेयर
3 ऑपरेटिंग सिस्टम

बस इन्हीं की तरह हमारा अस्तित्व है :
1 यूजर की तरह हमारी चेतना
2 हार्डवेयर की तरह हमारा शरीर
हम  जो कुछ करते हैं बोलते हैं हम नहीं जानते हमारे शरीर की कौन सी नर्व के ज़रिये किन मांसपेशियों को प्रयोग में लाना है यह सब कोई चीज़ है ऑपरेटिंग सिस्टम की तरह जो हमारे इरादों को क्रियान्वित करती है उसी के माध्यम से हम ( हमारी चेतना ) देखती सुनती है याद रखती है और इसी के माध्यम से हम चलते फिरते बोलते खाते हैं – इसको ENCON कहा जा सकता है – मस्तिष्क की एनर्जी और हमारी चेतना के बीच काम करने वाली यूनिट I
अब हम अनंत जगत में इन तीन यूनिट्स को समझें :
1 सर्वव्यापी चेतना जिसे ब्रह्म कहा जाता है और जिसका अंग होते हुए भी हमारी चेतना एक स्वतंत्र इकाई है
2 सम्पूर्ण भौतिक जगत या सृष्टि जिसका अंग होते हुए भी हमारा शरीर एक स्वतंत्र इकाई है
3 सर्व व्यापी प्रकृति जिसका एक अंग होते हुए भी उपरोक्त हमारा ENCON एक स्वतंत्र इकाई है
और यह तीनों इकाईयां  सिर्फ हम में ही नहीं हर जीव में मौजूद हैं
हम आगे यह भी कह सकते हैं कि यही तीनों इकाईयां पेड़ पौधों में भी हैं
और आगे हम यह भी कह सकते हैं कि यही तीनों इकाईयां वायु जल पृथ्वी सूर्य चन्द्र आदि अब में मौजूद हैं !
भारत में सैकड़ों हज़ारों वर्षों से सैकड़ों हज़ारों वर्षों  विचारकों दार्शनिकों संतों ने अपना नाम दिए बिना सब कुछ लिपिबद्ध किया और जन साधारण को उपदेशित किया जिससे हर भारतवासी का अद्यात्मिक स्तर अग्रणी है और भारत विश्व गुरु है I
अध्यात्म में तीन चीजें हैं :
1 आत्मा
2 कर्म
3 मोक्ष
आज के युग में भले ही हम आत्मा और मोक्ष को नकार दें पर कर्म को नकारा नहीं जा सकता – आज भी ज़रुरत है खुद भी और लोगों को बताने की कि सत्कर्म करो दुष्कर्म न करो I
आज ज़रुरत है कि हम फिर अध्यात्मिक विषयों पर सोचें विचार विमर्श करें और बिना नाम के लिपिबद्ध करें !
इसी लिए मैंने WhatsApp पर ग्रुप बनाया है ‘अध्यात्मिक सत्संग’ और अपने निवास स्थान 178/152 बद्रीनाथ रोड  गोलागंज लखनऊ में हर शनिवार और रविवार को 11 बजे अध्यात्मिक सत्संग का आयोजन किया है
इस सत्संग को रजिस्टर्ड करा कर वर्ष में एक बार या अधिक बार सारे सहयोगियों द्वारा सोची गयी बातों को संकलित कर  प्रकाशित किया जाएगा और इस तरह पुराण और उपनिषद की परंपरा जारी की जायेगी – भारतवासियों को राजनीति की नहीं अध्यात्म की ज़रूरत है !          

वन्दे मातरम् !

वन्दे मातरम् !
किसी का दूसरों से यह कहना कि यह गाओ या वह गाओ और अगर नहीं गाते तो तुम देश द्रोही हो यह भी गलत है !
और यह भी गलत है कि कोई यह कहे यह न गाओ और वह न गाओ और अगर गाते हो तो काफिर हो यह भी गलत है !
क्या यह देश हमारी माँ नहीं है ? क्या यह धरती हमारी माँ नहीं है ? हमारा शरीर यहाँ की मिटटी पानी और हवा से बना है और यह भी वैज्ञानिक सत्य है हर जीव की हर कोशिका उसकी माँ की कोशिका से ही बनी है I हम अपनी माँ को प्यार करें उसके पैरों पर सर रखें उसका सिजदा करें यह सब मुहब्बत है और मुहब्बत हमेशा सही होती है I हमारा राष्ट्र गान और हमारा राष्ट्रीय गीत हमारी धरती माँ का वर्णन करता है – इसके भू भाग इसकी नदियाँ , इसका प्राकृतिक सौन्दर्य I हमें इनसे प्यार है और हम इसको सिजदा करते हैं और प्यार से कहते हैं ‘वन्दे मातरम् !’
कुछ गाओ या न गाओ का विवाद क्यों मुद्दा बन जाता है अगले ई मेल में
अगर उपरोक्त से सहमत हैं तो कृपया अपने सभी कॉन्टेक्ट्स को ई मेल  फॉरवर्ड करते रहें और देश समाज के उत्थान में सहयोग करते रहें I

Thursday, August 10, 2017

मेरे साथियों , आप की ‘संघी मानसिकता’ का उपचार !



मेरे साथियों , आप की ‘संघी मानसिकता’ का उपचार !
1 ‘संघी मानसिकता’ एक रुग्ण मानसिकता है एक विक्षिप्त मानसिकता जिसका Obsession इस्लाम और मुस्लिम है और जिसका Compulsion इंडिया के मुसलामानों को परेशान करते रहना है और यह रोग शिक्षित हिन्दुओं में बहुत ज्यादा फैल चुका है है और देश में हो रही सारी खराब बातों के लिए ज़िम्मेदार है – बेगुनाहों पर हमले हो रहे हैं कोई बोल नहीं रहा है उलटे सोशल मीडिया पर अमानवीय कमेंट करते हैं और यही नहीं अगर मुजरिम संघी है तो हिन्दू लड़की की सुरक्षा से भी उन्हें कोई मतलब नहीं रह गया – नोटबंदी जी एस टी और बैंकों द्वारा हर बात पर चार्ज और अनेकों बातों पर चुप हैं क्योंकि इनका ओबसेशन सिर्फ मुसलमान और इस्लाम है I रोग के इतना बढ़ने के लिए मुसलामानों की गलतियां भी ज़िम्मेदार हैं – मुसलामानों का अपने मौलवियों लीडरों को मान कर कट्टरवाद अलगाववाद के रास्ते चल पड़ना I वास्तव में दोनों तरफ   के पागल एक दूसरे का पागलपन बढ़ा रहे हैं I
2 आकर्षण भी : इस्लाम से और मुसलामानों से मोह भी है और इनकी बेटियों को इसी लिए प्रेम भी मुसलामानों से होता है क्योंकि मुसलमान इतने चालाक और शराबी और व्यभिचारी नहीं होते हैं जितने इनके युवक होते हैं इसलिए उनमें भोलापन भी होता है और वे प्रेम करने और पाने के योग्य हैं भी I लेकिन यह मोह खुद संघियों को भी है – उर्दू से उर्दू गजलों से नवाबी पहनावों और रहनसहन से ईद की सिवैयों से शामी कबाबों से और पाकिस्तान से दुश्मनी अलापने के बावजूद पकिस्तान पहुँच जाते हैं मुस्लिम देशों में जा कर खूब गले लगते हैं I
3 क्या है ?  एक परिवार में एक पुराने रीति रिवाज के परिवार से आई बहू हो और एक इंग्लिश मीडियम वाली बहू हो तो जो टेंशन होगा वह है I  एक साथ ज़िन्दगी गुज़ारने के बाद जब दोनों 60 वर्ष की हो जाती हैं तभी स्पष्ट होगा कौन वास्तव में अच्छी थी I इसी लिए संघियों को इस्लाम से परेशान नहीं होना चाहिए था पर वे इस्लाम जैसा हिन्दू धर्म बनाना चाहते हैं जो बड़ी गलती है I
1 एक किबला दुनिया भर के मुसलमान काबे की तरफ मुंह करके 5 बार रोज़ नमाज़ पढ़ते हैं और एक बार हज करते हैं
2 नमाज़ के लिए सूर्योदय से पूर्व ऊषा काल में बिस्तर छोड़ देते हैं मस्जिद जा कर अज़ान देते हैं और एक साथ नमाज़ पढ़ते हैं और फिर ऐसा 4 बार विशेष समय पर करते हैं
3 वजू का एक विशेष ढंग है
4 नमाज़ का एक विशेष ढंग है
इन सब बातों से संघी विचलित हो जाता है – कभी चाहता है हिन्दू भी अपना धर्म ऐसे ही मानें और कभी चाहते हैं मुसलमानों को रोक सकें !
4 क्या सब मुसलमान  हो जाएँ ?  क्या यह अधिक उपयुक्त नहीं होगा कि सभी संघी हिन्दू खुद इस्लाम स्वीकार कर लें ? पुराने परिवार की बहू खुद इंग्लिश मीडियम बन जाए ?
यही ज्ञान की कमी है संघियों में और जैसा कहा जाता है अज्ञानता ही जड़ है हर बुराई की I
5 मुसलमान कहाँ गलत हैं ? मुसलमान कहाँ गलत हैं यह न मुसलमान जानते हैं और न संघी जानता है और अगर संघी जान ले और समझ ले तो देश में अमन हो जाए और मुसलमान जान लें और समझ लें तो उनका उरूज हो जाए
यहूदी ईसाई और इस्लाम तीनों एकेश्वरवादी धर्म एक व्यक्तिवादी धर्म हैं बस एक व्यक्ति का ईश्वर से सम्बन्ध है और कोई दूसरा इंसान केवल उस व्यक्ति से प्रेम कर के उसका अनुपालन कर के ही ईश्वर की कृपा प् सकता है और अगर वह ऐसा नहीं करेगा तो बस उसके लिए नर्क है I इस सही या गलत धारणा या ईमान का फायेदा मौलवी , पादरी और रब्बानी तबके ने उठाया क्योंकि वे बताएँगे कि मुहम्मद , ईसा या मूसा ने क्या कहा था और कैसे क्या किया था I
इसी कारण इस्लाम सीधे सीधे दो टुकड़ों में बँट गया – वजू कैसे करैं ? नमाज़ कैसे पढें ? किस टाइम पढें ? अज़ान क्या हो ? रोज़ा कब खोलें ?
6 अध्यात्म
इंडिया में बुद्ध ने वह शिक्षा दी जिस पर चल कर कोई भी इंसान मोक्ष प्राप्त कर सकता है बिलकुल उन नबियों जैसा बन सकता है जिसे ईश्वर खुद प्यार करे ( बुद्ध ने स्वयं ईश्वर का नाम नहीं लिया ) इक्षा , वाणी , कर्म पर नियंत्रण और इनमें अहिंसा
हिन्दू अध्यात्म ने ईश्वर बाहर ढूँढने नहीं अपने अन्दर ढूँढ कर ईश्वर तक पहुँचने का रास्ता दिखाया I
मौलवी पादरी और रब्बानी इंसानों को मानसिक रूप से परतंत्र बनाते हैं और  ईश्वर से और इंसानियत से दूर कर रहे हैं वहीँ बुद्ध की शिक्षा और अध्यात्म हमें मानवता देती है और ईश्वर के करीब करती है
7 समन्वय  : दुनिया के सारे इंसान एक माँ बाप की औलाद हैं मान कर मेरे संघी मित्रों जातिवाद समाप्त करो और बुद्ध की शिक्षाओं को मानो और अध्यात्म द्वारा ईश्वर तक पहुंचने का प्रयास करो बस यही रास्ता है इंडिया के मुसलमानों और हिन्दुओं के लिए और इंडिया को शिखर तक फिर पहुंचाने के लिए !